विटामिन-डी :- Vitamin – D deficiency diseases which occur?

विटामिन-डी (Vitamin D) की कमी

विटामिन-डी :- कई बार शरीर में किसी एक पोषक तत्व की कमी भी कई बीमारियों का कारण बन जाती है। इस मामले में विटामिन-डी इसलिए अहम है क्योंकि हमारी जीवनशैली इसके सबसे बड़े स्रोत यानी सूरज के प्रकाश से हमें दूर करती जा रही है। इसका सेहत पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है।

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क्या है विटामिन-डी (Vitamin-D)
Vitamin-D वसा में घुलनशील प्रो-हार्मोन्स का एक समूह होता है। यह एक स्टेरॉइड (खास रासायनिक) विटामिन है, जो आंतों से कैल्शियम को सोखकर हड्डियों में पहुंचाता है।

शरीर में इसका निर्माण हाइड्रॉक्सी कोलेस्ट्रॉल (Hydroxy cholesterol)और अल्ट्रावॉयलेट किरणों (Ultraviolet rays) की मदद से होता है। इसके अलावा शरीर में रसायन कोलिकल कैसिरॉल (Kolikl Kasirol) पाया जाता है, जो खाने के साथ मिलकर Vitamin-D  बनाता है।

Vitamins पांच प्रकार के होते है -विटामिन-डी1, विटामिन-डी2, विटामिन-डी3, विटामिन-डी4 और विटामिन-डी5। मानव शरीर के लिए विटामिन-डी2 और डी-3 बेहद जरूरी हैं।

दुनिया भर में फैलता खतरा

यदि आप प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट का समय सूरज के प्रकाश में नहीं रहते हैं तो यह Vitamin-D  की कमी पैदा कर सकता है। दुनिया भर में लगभग एक बिलियन लोग Vitamin-D  की कमी से ग्रस्त हैं। पिछले कुछ सालों के दौरान किए गए शोध बताते हैं कि Vitamin-D  कई बीमारियों को दूर करने में अहम भूमिका निभाता है।

इसी वजह से Vitamin-D की कमी कई गंभीर बीमारियों को दावत दे देती है, जैसे ऑस्टियोपोरोसिस, हृदय रोग, कैंसर, मल्टीपल स्केलरोसिस(Osteoporosis , heart disease , cancer , multiple Skelrosis)और इंफेक्शन से जुड़ी बीमारियां जैसे ट्यूबरोकुलोसिस (tyubarokulosisa) या फिर मौसमी बुखार।

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विटामिन-डी टेस्ट (Vitamin D Test)

यह टेस्ट मुख्यतः 25 हाइड्रॉक्सी Vitamin-D  के रूप में किया जाता है, जो कि Vitamin-D  मापने का सबसे अच्छा तरीका माना जाता है।
इसके लिए रक्त का नमूना नस से लिया जाता है और एलिसा या कैलिल्टूमिसेंसनस तकनीक (ELISA technique or Kaliltumisensns)से टेस्ट लगाया जाता है। Vitamin-D अन्य विटामिनों से भिन्न है।

यह हारमोन सूर्य की किरणों के प्रभाव से त्वचा द्वारा उत्पादित होता है। Vitamin-D  के उत्पादन के लिए गोरी त्वचा को 20 मिनट धूप की जरूरत होती है और गहरे रंग की त्वचा के लिए इससे कुछ अधिक समय की जरूरत होती है।

विटामिन-डी की कमी के विभिन्न स्तर (Various levels of vitamin D deficiency)
अपर्याप्त 20-40 एमजी/एमएल
न्यून 10-20 एमजी/एमएल
न्यूनतम 5 मिलीग्राम/प्रति मिलीलीटर से भी कम

लक्षण

  • थकान महसूस होना।
  • बच्चों की हड्डियों का टेढ़ा हो जाना।
  • हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द रहना।
  • कमर में अक्सर दर्द की शिकायत रहना।

Vitamin E स्किन को मुलायम और गोरा बनाता है।

इनका करें सेवन

  • फोर्टीफाइड डेयरी प्रोडक्ट
  • सोया प्रोडक्ट
  • मशरूम
  • अंडा
  • कॉडलीवर ऑयल
  • मछली

विटामिन-डी क्यों जरूरी है (Why is vitamin D important) :- 

– इम्यून सिस्टम को नियमित रखता है।

– यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो डेनवर स्कूल ऑफ मेडिसिन, मैसाच्युसेट्स जनरल हॉस्पिटल और बोस्टन चिल्ड्रन हॉस्पिटल के वैज्ञानिकों के मुताबिक सर्दी, जुकाम के लक्षणों को दूर करने में भी यह कारगर है।

– अमेरिका की ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी के न्यूरोइम्यूनोलॉजी सेंटर में चेयरमैन डेनिस बोरडे के अनुसार यह मल्टीपल स्केलरोसिस के खतरे को भी कम करता है।

– एक शोध के मुताबिक Vitamin-D  मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को सुचारु रखने में भी अहम भूमिका निभाता है।

– जॉर्जिया के मेडिकल कॉलेज में किए गए एक शोध की मानें तो शरीर के वजन को संतुलित रखने में भी इसकी अहम भूमिका है।

– अस्थमा के लक्षणों को कम करने में भी Vitamin-D  लाभदायक है।

– 2012 में सामने आई प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल अकेडमी ऑफ साइंसेज की रिपोर्ट के मुताबिक Vitamin-D  की पर्याप्त मात्रा ट्यूबरोकुलोसिस के मरीजों को जल्द राहत देने में कारगर है।

विटामिन डी प्राप्त करने के प्राकृतिक खाद्द स्रोत

मछली: मछली विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत होती है। जो मांसाहारी होते हैं वे मछली के द्वारा विटामिन डी की कमी को पूरा कर सकते हैं। मछली में उच्च मात्रा में फैटी एसिड्स होते हैं, जैसे- सामन, ट्यूना, हिलसा, सार्डिन, कड, मैकरल आदि।

फार्टफाइड फूड्स: फूड के प्रोसेसिंग के दौरान जो विटामिन और मिनरल खो जाते हैं, उस कमी को फार्टफाइड फूड्स पूरा करने में मदद करते हैं और खाद्द के पौष्टिकता को भी बढ़ाते हैं। विटामिन डी युक्त फार्टफाइड फूड्स में ब्रेड, सेरल, दूध,पनीर, चीज़, सोया मिल्क और संतरा का जूस आदि आते हैं।

मशरूम: कुछ मशरूमों में विटामिन डी, प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं,जैसे- वाइट बटन, वाइल्ड एडिबल, और चैन्ट्रल।

दूध और दूध से बनी चीजें: दूध पीना बहुत ज़रूरी होता है मगर कुछ लोगों को दूध पीना बिल्कुल अच्छा नहीं लगता है। उन लोगों को दूध से बनी चीजों को खाना चाहिए, क्योंकि दूध में कैल्सियम और विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में होता है, जैसे- चीज़ या दही। दही सिर्फ आपके शरीर को पौष्टिकता ही प्रदान नहीं करता है बल्कि कैल्सियम को सोखने में भी मदद करता है।

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Article Source :- http://www.amarujala.com

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