तुलसी में है गजब की शक्ति, जानें किन-किन रोगों में लाभदायक है ?

हिंदू धर्म में तुलसी को केवल एक सामान्य पौधा नहीं माना गया है, बल्कि देवी का रूप माना गया है। यही कारण है कि आंगन में तुलसी का पौधा लगाना और उसकी पूजा करना सदियों से भारतीय परंपरा रही है। दरअसल, यह परंपरा यूं ही नहीं बनाई गई, जिस तरह से हमारी हर परंपरा के पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक कारण है। ठीक उसी तरह घर में तुलसी लगाने और उसकी पूजा करने के पीछे भी कुछ वैज्ञानिक कारण हैं।

Advertisement

जब तुलसी के निरंतर प्रयोग से हमारे ऋषि-मुनियों ने यह अनुभव किया कि इस पौधे में कई बीमारियों को ठीक करने की अद्भुत क्षमता है। साथ ही, इसे लगाने से आसपास का माहौल भी साफ-सुथरा व स्वास्थ्यप्रद रहता है। इसीलिए, उन्होंने हर घर में कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी अच्छे से देखभाल करने को धार्मिक कर्तव्य कह कर प्रचारित किया।

धीरे-धीरे तुलसी के स्वास्थ्य प्रदान करने वाले गुणों के कारण इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि तुलसी का पूजन किया जाने लगा। दरअसल, यह मान्यता है कि जिस वस्तु का प्रयोग पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाता है। उसका सकारात्मक प्रभाव बहुत जल्दी दिखाई पड़ता है। तुलसी सिर्फ बीमारियों पर ही नहीं, बल्कि मनुष्य के आंतरिक भावों और विचारों पर भी अच्छा प्रभाव डालती है।

तुलसी में गजब की रोगनाशक शक्ति है। विशेषकर सर्दी, खांसी व बुखार में यह अचूक दवा का काम करती है। इसीलिए भारतीय आयुर्वेद के सबसे प्रमुख ग्रंथ चरक संहिता में कहा गया है।

हिक्काज विश्वास पाश्र्वमूल विनाशिन:।
पितकृतत्कफवातघ्नसुरसा: पूर्ति: गन्धहा।।

– सुरसा यानी तुलसी हिचकी, खांसी,जहर का प्रभाव व पसली का दर्द मिटाने वाली है। इससे पित्त की वृद्धि और दूषित वायु खत्म होती है। यह दूर्गंध भी दूर करती है।

तुलसी कटु कातिक्ता हद्योषणा दाहिपित्तकृत।
दीपना कृष्टकृच्छ् स्त्रपाश्र्व रूककफवातजित।।

– तुलसी कड़वे व तीखे स्वाद वाली दिल के लिए लाभकारी, त्वचा रोगों में फायदेमंद, पाचन शक्ति बढ़ाने वाली और मूत्र से संबंधित बीमारियों को मिटाने वाली है। यह कफ और वात से संबंधित बीमारियों को भी ठीक करती है।

तुलसी तुरवातिक्ता तीक्ष्णोष्णा कटुपाकिनी।
रुक्षा हृद्या लघु: कटुचौहिषिताग्रि वद्र्धिनी।।

जयेद वात कफ श्वासा कारुहिध्मा बमिकृमनीन।
दौरगन्ध्य पार्वरूक कुष्ट विषकृच्छन स्त्रादृग्गद:।।

– तुलसी कड़वे व तीखे स्वाद वाली कफ, खांसी, हिचकी, उल्टी, कृमि, दुर्गंध, हर तरह के दर्द, कोढ़ और आंखों की बीमारी में लाभकारी है। तुलसी को भगवान के प्रसाद में रखकर ग्रहण करने की भी परंपरा है, ताकि यह अपने प्राकृतिक स्वरूप में ही शरीर के अंदर पहुंचे और शरीर में किसी तरह की आंतरिक समस्या पैदा हो रही हो तो उसे खत्म कर दे। शरीर में किसी भी तरह के दूषित तत्व के एकत्र हो जाने पर तुलसी सबसे बेहतरीन दवा के रूप में काम करती है। सबसे बड़ा फायदा ये कि इसे खाने से कोई रिएक्शन नहीं होता है।

Read More :- नस पर नस चढ़ना (Neuro Muscular Diseases) के कारण , लक्षण व् उपचार

Tulsi कितनी तरह की होती है ?

तुलसी की मुख्यत: दो प्रजातियां अधिकांश घरों में लगाई जाती हैं। इन्हें रामा और श्यामा कहा जाता है।

  1. रामा तुलसी के पत्तों का रंग हल्का होता है। इसलिए इसे गौरी कहा जाता है।
  2. श्यामा तुलसी के पत्तों का रंग काला होता है। इसमें कफनाशक गुण होते हैं। यही कारण है कि इसे दवा के रूप में अधिक उपयोग में लाया जाता है।
  3. – तुलसी की एक जाति वन तुलसी भी होती है। इसमें जबरदस्त जहरनाशक प्रभाव पाया जाता है, लेकिन इसे घरों में बहुत कम लगाया जाता है। आंखों के रोग, कोढ़ और प्रसव में परेशानी जैसी समस्याओं में यह रामबाण दवा है।
  4. – एक अन्य जाति मरूवक है, जो कम ही पाई जाती है। राजमार्तण्ड ग्रंथ के अनुसार किसी भी तरह का घाव हो जाने पर इसका रस बेहतरीन दवा की तरह काम करता है।
  5. – तुलसी की एक और जाति जो बहुत उपयोगी है वह है, बर्बरी तुलसी। इसके बीजों का प्रयोग वीर्य को गाढ़ा करने वाली दवा के रूप में किया जाता है।

तुलसी में है गजब की रोगनाशक शक्ति

मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारी – मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारी, जैसे मलेरिया में तुलसी एक कारगर औषधि है। तुलसी और काली मिर्च का काढ़ा बनाकर पीने से मलेरिया जल्दी ठीक हो जाता है। जुकाम के कारण आने वाले बुखार में भी तुलसी के पत्तों के रस का सेवन करना चाहिए। इससे बुखार में आराम मिलता है। शरीर टूट रहा हो या जब लग रहा हो कि बुखार आने वाला है तो पुदीने का रस और तुलसी का रस बराबर मात्रा में मिलाकर थोड़ा गुड़ डालकर सेवन करें, आराम मिलेगा।

  1. साधारण खांसी में तुलसी के पत्तों और अडूसा के पत्तों को बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से बहुत जल्दी लाभ होता है।
  2. Tulsi  व अदरक का रस बराबर मात्रा में मिलाकर लेने से खांसी में बहुत जल्दी आराम मिलता है।
  3. Tulsi  के रस में मुलहटी व थोड़ा-सा शहद मिलाकर लेने से खांसी की परेशानी दूर हो जाती है।
  4. चार-पांच लौंग भूनकर Tulsi  के पत्तों के रस में मिलाकर लेने से खांसी में तुरंत लाभ होता है।
  5. शिवलिंगी के बीजों को Tulsi  और गुड़ के साथ पीसकर नि:संतान महिला को खिलाया जाए तो जल्द ही संतान सुख की प्राप्ति होती है।
  6. किडनी की पथरी मेंTulsi  की पत्तियों को उबालकर बनाया गया काढ़ा शहद के साथ नियमित 6 माह सेवन करने से पथरी मूत्र मार्ग से बाहर निकल जाती है।
  7. फ्लू रोग में Tulsi के पत्तों का काढ़ा, सेंधा नमक मिलाकर पीने से लाभ होता है।
  8. Tulsi थकान मिटाने वाली एक औषधि है। बहुत थकान होने पर तुलसी की पत्तियों और मंजरी के सेवन से थकान दूर हो जाती है।
  9. प्रतिदिन 4- 5 बार तुलसी की 6-8 पत्तियों को चबाने से कुछ ही दिनों में माइग्रेन की समस्या में आराम मिलने लगता है।
  10. तुलसी के रस में थाइमोल तत्व पाया जाता है। इससे त्वचा के रोगों में लाभ होता है।
  11. तुलसी के पत्तों को त्वचा पर रगड़ दिया जाए तो त्वचा पर किसी भी तरह के संक्रमण में आराम मिलता है।
  12. तुलसी के पत्तों को तांबे के पानी से भरे बर्तन में डालें। कम से कम एक-सवा घंटे पत्तों को पानी में रखा रहने दें। यह पानी पीने से कई बीमारियां पास नहीं आतीं।
  13. दिल की बीमारी में यह अमृत है। यह खून में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करती है। दिल की बीमारी से ग्रस्त लोगों को तुलसी के रस का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए।

आधुनिक समय में हम में से कई लोग Basil seeds के uses, nutritional facts और medicinal values के बारे में नहीं जानते। जब भी आप को समय मिलता है तो विशेष रूप से गर्मी के मौसम में, अपनी दादी की घर जाएं और उनसे Sabja बीजों के महत्व के बारे में पूंछे। मैंने भी जून की चिलचिलाती गर्मी में मेरे प्यारे दोस्त के घर का दौरा किया जहाँ मुझे स्वादिष्ट Sabja बीज व्यंजनों का सामना हुआ। यह कोई दूसरी चीज़ नहीं थी बल्कि basil seeds Lemonade drink था। इसका स्वाद  बिल्कुल अलग था। यह ताज़ा, रसीला और पेट भरने की प्रवृत्ति का था। मैं इस स्वादिष्ट भोजन को ग्रहण करने के बाद इसका नुस्खा अपनी दोस्त की माता से पूछा। उन्होंने बताया इसका सिंपल नुस्खा। यह ठंडा पानी, नींबू का रस, चीनी और Sabja बीज का उपयोग करके 10-15 मिनट के भीतर  बनाया जा सकता है।

तुलसी के बीज के 10 अनोखे लाभ

जहां तक स्वास्थ्य लाभ का संबंध है यह बीज फाइबर से भरा है और कई आश्चर्यचकित लाभ के लिए जाना जाता है। इसे falooda, शर्बत, मिल्क शेक और अन्य लोकप्रिय स्वास्थ्य पेय बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। Asian sweet drink के रूप में यह दुनिया भर में जाना जाता है। हालांकि, Chia seeds की तरह है यह अपेक्षाकृत कम स्वादिष्ट है।

  1. वजन घटाने के लिए तुलसी के बीज : Sabja के seeds को weight loss के management के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। यह फाइबर से भरा है और आपके पेट को भरेपन का एह्सास कराता है। पानी में भींगने के बाद इसका आकार 30 गुना अधिक विस्तार (expand) कर सकता है।
  2. Hair care के लिए Sabja seeds : इसमें विटामिन, प्रोटीन और iron की पर्याप्त मात्रा में पाया जाता हैं। यह पोषक तत्व बालों को स्वस्थ और चमकदार बनाने के लिए सहायक होते हैं। इस तरह इसके इस्तेमाल से बालों के झड़ने और गंजापन को रोक जा सकता है।
  3. Healthy skin के लिए basil seeds : Sabja seeds और नारियल तेल के मिश्रण skin से संबंधित विभिन्न प्रकार के रोगों से बचाता है। Method : सबसे पहले नारियल तेल (100 ml) crushed basil seeds (1 tsp ) ले। अब इस मिश्रण को 5 मिनट तक गर्म करें। अब इसको छान ले और अपने skin पर लगाएँ । यह  psoriasis और eczema जैसी बिमारिओं के इलाज के लिए लाभदायक है।
  4. Basil seeds acidity के लिए : आज कल acidity एक common समस्या बन गया है। इसका mainकारण हमारी दोषपूर्ण जीवन शैली और गलत आहार पैटर्न हैं। Sabja seeds पेट को ठंडक पहुँचाने में बहुत लाभदायक है। विधि : सबसे पहले दूध (1 कप) और तुलसी के बीज (1tsp) लें। अब इसको अच्छी तरह हिलाएं और पियें। यह पेट के जलन को कम करने के लिए प्रभावी है।
  5. मधुमेह के इलाज के लिए Sabja बीज : तुलसी का बीज रक्त में sugar को कम करके diabetes टाइप 2के इलाज में फायेदमंद है। विधि : soaked basil seeds (1tsp),  स्वाद के लिए टोंड दूध (1 ग्लास) और वेनिला दिन में एक बार लें। यह आप  को energy भी देता है बिना sugar के।
  6. Constipation से छुटकारा दिलाता है : जब soaked Sabja बीज खाने में इस्तेमाल किया जाता है तो यह पेट को अच्छी तरह साफ़ करने में मदद करता है। यह आसान मल त्याग सुनिश्चित करता है और पेट से विष बाहर निकलवाने में मदद करता है। कब्ज की बीमारी में और अधिक लाभ पाने के लिए इसको मिल्क के साथ लिया जा सकता है।
  7. Coolant के रूप में : इन बीजों को शरीर की गर्मी को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है और विभिन्न प्रकार के cold drinks जैसे falooda, rooh afza, नींबू पानी और शर्बत के रूप में उपयोग किया जाता है।
  8. Basil seeds के nutritional values : इसमें विभिन्न प्रकार के phyto-chemicals औरpolyphenolic flavonoids होते हैं जैसे Orientin, vicenin और other antioxidants। इनके पत्तियों में essential oil होते जैसे eugenol, citronellol, लाइमीन, citral और terpineol। इसमें दूसरे bio-chemicals की भी बहुलता होती है जैसे पोटेशियम, मैंगनीज, तांबा, कैल्शियम, folates, मैग्नीशियम, बीटा कैरोटीन, lutein, zeaxanthin और विटामिन ए।
  9. Sabja seeds recipes: Rooh afza, खीर, भारतीय नींबू पानी, पान gulkand खीर, स्ट्रॉबेरी falooda, आम falooda, आम का शर्बत, आदि । नींबू Panni, Shikanji, nannari शरबत, बेल शरबत, गुलाब भी महत्वपूर्ण स्वस्थ व्यंजनों में से कुछ हैं
  10. Medicinal properties: Medicinally, यह पाचन समस्याओं के इलाज जैसे कब्ज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है त्वचा संक्रमण, सांस की बीमारी, गले की परेशानी और तनाव से राहत दिलाता है

Article Source :- http://gyanunlimited.in/https://sites.google.com/

%d bloggers like this: