भारत का राष्ट्रीय वृक्ष बरगद (banyan tree) है और यह बहुत सी बिमारियों में काम आता है

भारत का राष्ट्रीय वृक्ष बरगद (banyan tree) है। बरगद को अक्षय वट भी कहा जाता है, क्योंकि यह पेड कभी नष्ट नहीं होता है। बरगद का वृक्ष घना एवं फैला हुआ होता है। इसकी शाखाओं से जड़े निकलकर हवा में लटकती हैं तथा बढ़ते हुए जमीन के अंदर घुस जाती हैं एंव स्तंभ बन जाती हैं। ग्रामीण इसे बड़ का पेड़, वट वृक्ष भी कहते हैं

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बरगद का वानस्पतिक नाम फाइकस बेंघालेंसिस (ficus benghalensis) है। बरगद के वृक्ष की शाखाएं और जड़ें एक बड़े हिस्से में एक नए पेड़ के समान लगने लगती हैं। इस विशेषता और लंबे जीवन के कारण इस पेड़ को अनश्वंर माना जाता है। उत्तर भारत मैं इसकी काफी पूजा की जाती है

बरगद (banyan tree) किन बिमारियों में काम आता है ?

बरगद का पेड़ बहुत सी बिमारियों को ठीक करने के काम आता है इस पेड़ के फल में भरपूर मात्रा में कैलोरी, कार्बोहाइड्रेट, शुगर, फाइबर, प्रोटीन, विटामिन बी1, विटामिन बी3 होता है।

इसके अलावा इसकी पत्तियों में प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम और फास्फोरस पाया जाता है। बरगद में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कंट्रोल करने में फायदेमंद होता है।

  1. बरगद (banyan tree) की जड़ों में एंटीऑक्सीडेंट सबसे ज्यादा पाए जाते हैं। इसके इसी गुण के कारण वृद्धावस्था की ओर ले जाने वाले कारकों को दूर भगाया जा सकता है। ताजी जड़ों के सिरों को काटकर पानी में कुचला जाए और रस को चेहरे पर लेपित किया जाए तो चेहरे से झुर्रियां दूर हो जाती हैं।
  2. लगभग 10 ग्राम बरगद की छाल, कत्था और 2 ग्राम काली मिर्च को बारीक पीसकर पाउडर बनाया जाए और मंजन किया जाए तो दांतों का हिलना, सड़न, बदबू आदि दूर होकर दांत साफ और सफ़ेद होते हैं। प्रति दिन कम से कम दो बार इस चूर्ण से मंजन करना चाहिए।
  3. यदि किसी को पेचिश या डायरिया जैसी कोई बीमारी हो तो बरगद के पत्तों की कलियां बहुत फायदेमंद होती हैं। आयुर्वेद में इसका उपयोग पुराने दस्त और पेचिश के इलाज के लिए किया जाता है।
  4. पेशाब में जलन होने पर बरगद की जड़ों (10 ग्राम) का बारीक चूर्ण, जीरा और इलायची (2-2ग्राम) का बारीक चूर्ण एक साथ गाय के ताजे दूध के साथ मिलाकर लिया जाए तो अति शीघ्र लाभ होता है। यही फार्मूला पेशाब से संबंधित अन्य विकारों में भी लाभकारी होता है।
  5. पैरों की फटी पड़ी एड़ियों पर बरगद का दूध लगाया जाए तो कुछ ही दिनों फटी एड़ियां सामान्य हो जाती हैं और तालु नरम पड़ जाते हैं।
  6. बरगद (banyan tree) की ताजा कोमल पत्तियों को सुखा लिया जाए और पीसकर चूर्ण बनाया जाए। इस चूर्ण की लगभग 2 ग्राम मात्रा प्रति दिन एक बार शहद के साथ लेने से याददाश्त बेहतर होती है।
  7. बरगद (banyan tree) के ताजे पत्तों को गर्म करके घावों पर लेप किया जाए तो घाव जल्द सूख जाते हैं। कई इलाकों में आदिवासी ज्यादा गहरा घाव होने पर ताजी पत्तियों को गर्म करके थोडा ठंडा होने पर इन पत्तियों को घाव में भर देते  है
  8. बवासीर , वीर्य का पतलापन , शीघ्रपतन , प्रमेह स्वप्नदोष आदि रोगों में बड़ का दूध अत्यंत लाभकारी है | प्रातः सूर्योदय के पूर्व वायुसेवन के लिए जाते समय २-३ बताशे साथ में ले जाये | बड़ की कलि को तोड़कर एक-एक बताशे में बड़ के दूध की ४-५ बूंद टपकाकर खा जायें | धीरे-धीरे बड़ के दूध की मात्रा बढातें जायें | ८ – १० दिन के बाद मात्रा कम करते-करते चालीस दिन यह प्रयोग करें |
  9. बड़ का दूध दिल , दिमाग व जिगर को शक्ति प्रदान करता है एवं मूत्र रुकावट ( मूत्रकृच्छ ) में भी आराम होता है | इसके सेवन से रक्तप्रदर व खुनी बवासीर का रक्तस्राव बंद होता है | चोट , मोच और गठिया रोग में इसकी सुजन पर इस दूध का लेप करने से बहुत आराम होता है |
  10. वीर्य विकार व कमजोरी के शिकार रोगियों को धैर्य के साथ लगातार ऊपर बताई विधि के अनुसार इसका सेवन करना चाहिए |
  11. इसकी जड़ को यदि दूध के साथ घीसकर महिला को पिलाई जाए तो नि:संतानता की समस्या दूर होती है। स्त्रियों में रक्त संबंधी अनियमितताएं वट वृक्ष की जड़ पहनने से दूर हो जाती है।
  12. बरगद (banyan tree) की छाल का काढा बनाकर प्रतिदिन एक कप मात्रा में पीने से मधुमेह ( डायबिटीज ) में फ़ायदा होता है व शरीर में बल बढ़ता है |
  13. उसके कोमल पत्तों को छाया में सुखाकर कूट कर पीस लें | आधा लीटर पानी में एक चम्मच चूर्ण डालकर काढा करें | जब चौथाई पानी शेष बचे तब उतारकर छान लें और पीसी मिश्री मिलाकर कुनकुना करके पियें | यह प्रयोग दिमागी शक्ति बढाता है व नजला-जुकाम ठीक करता है 

बरगद (banyan tree) का पेड़ अपने आप मैं बहुत से राज समेटे है बरगद के वृक्ष को ज्योतिष और तांत्रिक ग्रंथों में भी प्रमुख स्थान प्राप्त है बरगद की जड़ का प्रयोग बहुत से स्थानों पर किया जाता है

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  • प्रॉपर्टी का व्यवसाय, खेती से जुड़े कार्य करने वालों को इसकी जड़ का लॉकेट अवश्य धारण करना चाहिए।
  • वट वृक्ष की जड़ कर्जमुक्ति करवाने का प्रमुख मार्ग है। इसे पहनने से कर्ज मुक्ति जल्द हो जाती है।
  • देवताओं में ब्रह्मा का वास वट वृक्ष में माना गया है इसलिए ब्रह्मा की कृपा भी प्राप्त होती है।
  • इसकी जड़ धारण करने से ना केवल मानसिक शांति और विचारों की शुद्धता प्राप्त होती है बल्कि दिमाग फोकस्ड भी होता है।
  • अनेक बीमारियों में भी इसकी जड़ लाभकारी होती है।
कैसे पहनें वट वृक्ष की जड़ ?

पहनने से पहले जड़ को गंगाजल और गाय के कच्चे दूध से अच्छी तरह धो लें। इसका सामान्य पूजन करने के बाद इसे सफेद कपड़े में बांधकर कमर या बाजू में बांध लें। इसे चांदी के लॉकेट में भरकर भी पहना जा सकता है। वट वृक्ष की जड़ को धारण करने के बाद ब्रह्माजी के नाम का दीया और धूप जरूर लगाएं तथा उस समय ऊं क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम: मंत्र का एक माला जाप करें। इसकी जड़ को बुधवार, मंगलवार या मृगशिरा, चित्रा या धनिष्ठा नक्षत्र में पहनना चाहिए।

Article Source :- https://satfoundationindia.blogspot.com

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