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Vitamin B-12 is equally important for the body as other vitamins

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Vitamin B-12 के बारे में हम कुछ नहीं जानते

Vitamin B-12 को Cobalamin भी कहा जाता हैं। यह एकलौता ऐसा विटामिन है जिसमे Cobalt धातु पाया जाता हैं। यह शरीर के स्वास्थ्य और संतुलित कार्य प्रणाली के लिए बेहद आवश्यक विटामिन हैं।

शरीर में विटामिन बी-12 की पर्याप्त मात्रा हमारे तंत्रिका तंत्र और रक्त कणिकाओं को सही तरीके से काम करने में मदद करती है। शरीर में डीएनए स्ट्रेंड्स के निर्माण के लिए भी इस विटामिन की जरूरत होती है। यदि शरीर में विटामिन बी-12 की मात्र का ध्यान न रखा जाए तो इससे तंत्रिका तंत्र को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।
प्रसिद्ध मनोचिकित्सक संजय चुघ के अनुसार, ‘भारत में पुरुष व महिला दोनों में सामान्य रूप से विटामिन-12 की कमी देखने को मिलती है। मेरे पास आने वाले मरीजों को सबसे पहले मैं विटामिन बी-12 की जांच कराने की सलाह देता हूं। कई बार विटामिन बी-12 की कमी पाए जाने पर सामान्य बी-12 सप्लीमेंट्स लेने से ही मूड के उतार-चढ़ाव व रोने की समस्या का हल हो जाता है।
पोषण सम्बन्धी अधिकांश आधुनिक अध्ययन पश्चिमी देशों में हुए हैं जहाँ मांस और दुग्धाहार सामान्य है इसलिये किसी वैकल्पिक स्रोत की जाँच की आवश्यकता नहीं पड़ती। परंतु यह कहना बिल्कुल ग़लत है कि वनस्पति स्रोतों में बी12 का पूर्णाभाव है। हाल के वर्षों में पश्चिम में शाकाहार के बढते प्रचलन के कारण विटामिन बी12 के स्रोतों पर शोधों में भी वृद्धि हुई है।
हमारे देश में गोबर आदि जैविक खादों से पोषित भूमि में उगाई गयी फसलों में Vitamin B-12 की जांच योग्य मात्रा पाये जाने के प्रमाण हैं। पशुओं के दूध और दुग्ध-उत्पादों यथा दही, पनीर, खोया, मट्ठा आदि से भी Vitamin B-12 की पर्याप्त मात्रा प्राप्त होती है। अन्य प्राणियों की तरह ही मानव शरीर भी Vitamin B-12को लम्बे समय तक सुरक्षित रखता है और इसके सार को नष्ट किये बिना बारम्बार इसका उपयोग करता है।
नई आपूर्ति के बिना भी हमारा शरीर विटामिन “बी12” को 30 वर्षों तक सुरक्षित रख सकता है, ऐसे चिकित्सकीय प्रमाण हैं। इसका कारण यह है कि अन्य विटामिनों के विपरीत, विटामिन बी12 अन्य प्राणियों की तरह हमारी मांसपेशियों और शरीर के अन्य अंगों विशेषकर यकृत में भंडारित रहता है। लेकिन यह वहाँ उत्पन्न नहीं होता है।
घास, चारा, पत्तियाँ और अनाज खाने वाले मवेशियों के मांस और दूध में पाया जाने वाला विटामिन बी12 उनके जठरांत्र संबंधी मार्ग में जहाँ-तहाँ रहते सूक्ष्मजीवों द्वारा संश्लेषित होता है। सच तो यह है कि शाकाहारी प्राणियों में विटामिन बी12 का संश्लेषण मांसाहारी पशुओं के मुकाबले इतना अधिक है कि उनके दूध और मांस ही अधिकांश मानवों के लिये बी12 का स्रोत हैं।
वास्तव में यह सारा Vitamin B-12 उन्हीं सूक्ष्म जीवों बैक्टीरिया द्वारा आया है जो हमारे पाचन-तंत्र में ही निवास करते हैं। संतुलित शाकाहारी भोजन से हम उन सूक्ष्म-जीवों की वृद्धि के लिये अनुकूल वातावरण उत्पन्न करते हैं और इस प्रकार Vitamin B-12 पर बाह्य निर्भरता को कम कर सकते हैं। Vitamin B-12 के उत्पादक सूक्ष्म जीवों के लिये ऐसा अनुकूलन करने के लिये दूध, दही, पनीर, खमीर उचित आहार है।

जानकारी के कुछ स्रोतों के अनुसार सोयाबीन, मूंगफली, दालें और अंकुरित बीज भी अच्छे हैं। समुद्री शैवाल स्पाइरुलिना भी अन्य विटामिनों के साथ बी12 का भी अच्छा स्रोत है। यीस्ट के एक विशिष्ट प्रकार टी 6635+ (Red Star T-6635+) में ऐक्टिव बी12 पाया गया है।

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कोबाल्ट का यौगिक विटामिन बी12 मांस या शाक से नहीं बल्कि सूक्ष्मजीव बैक्टीरिया से उत्पन्न होता है।

शरीर में विटामिन बी-12 की काफी कमी होने पर इंजेक्शन लगाए जाते हैं। हमारे यहां विटामिन बी-12 की कमी के मामले अधिक हैं, जिसका कारण बड़ी संख्या में लोगों का शाकाहारी होना है।’

Vitamin B-12 का शरीर में क्या महत्त्व हैं ?

Vitamin B-12 शरीर में निम्नलिखित कार्यो के लिए जरुरी होता हैं :
  • Vitamin B-12 शरीर में लाल रक्त कोशिकाओ (Red Blood cells) के निर्माण हेतु जरुरी होता हैं।
  • Vitamin B-12 की कमी के कारण शरीर में रक्त की कमी (Anaemia) हो सकती हैं।
  • Vitamin B-12 शरीर में तंत्रिका प्रणाली (Nervous System) को स्वस्थ बनाये रखता हैं। इसकी कमी के कारण मस्तिष्क आघात (Brain Damage) भी हो सकता हैं।
  • Vitamin B-12 की कमी के कारण शरीर में Folic acid का अवशोषण नहीं हो पाता हैं।
  • Vitamin B-12 की वजह से ह्रदय रोग का खतरा कम रहता हैं।
  • Vitamin B-12 की वजह से कर्करोग और Alzheimer’s जैसे रोगों का खतरा कम रहता हैं।
  • Vitamin B-12 शरीर में उर्जा का संचार करता है और बुढापे को दूर रखता हैं।
  • Vitamin B-12 शरीर की रोग प्रतिकार शक्ति बढाता है और साथ ही तनाव से निपटने में मदद भी करता हैं। Vitamin B-12 को इसीलिए ” Anti-Stress Vitamin “ भी कहा जाता हैं।

विटामिन बी12 की सुझाई हुई मात्रा और विभिन्न पदार्थों में पायी जाने वाली मात्रायें माइक्रोग्राम (μg) में निम्न सारणी में अनुसूचित हैं। सामिष भोजन से तुलना के लिये मुर्गी के अंडे की मात्रा भी सूची में है।

वयस्क के लिये 2.4
गर्भवती के लिये 2.6
=== ===
स्विस पनीर 100 ग्राम 3.34
स्किम्ड मॉज़रेला पनीर 100 ग्राम 0.7
पूरक गोली 1 2.4 से 12 तक
T-6635+ एक चम्मच 4
आइसक्रीम 1 कप 0.6
स्किम्ड दूध 1 पाव 1.15
दही 1 पाव 1.33
मट्ठा 100 ग्राम 2.5
चीज़ पिज़्ज़ा 1 स्लाइस 0.53
=== ===
अंडा एक 0.5
एक अंडे की सफ़ेदी 0.1

Vitamin B-12 की कमी किस वजह से होती हैं ?

 शरीर में Vitamin B-12 की कमी के निम्नलिखित कारण हैं :
  • Pernicious Anaemia : हजारो में किसी एक को यह रोग होता हैं। Intrinsic Factor यह एक प्रोटीन का प्रकार है जो की Vitamin B-12 के अवशोषण के लिए जरुरी होता हैं। कुछ लोगो में इसकी कमी के कारण आहार से Vitamin B-12 शरीर में अवशोषण नहीं होता हैं और परिणामतः Vitamin B-12 की कमी हो जाती हैं।
  • जिन लोगो में किसी वजह से operation कर आमाशय या छोटी आंत का कुछ हिस्सा निकाल देते हैं उनमे Vitamin B-12 की कमी पाई जाती हैं।
  • जो व्यक्ति केवल शाकाहार लेते हैं और कम प्रमाण में दुग्धजन्य पदार्थ लेते हैं।
  • जो व्यक्ति अम्लपित्त / Acidity से पीड़ित है और उसके लिए PPI दवा हमेशा लेते हैं जैसे की Pantoprazole, Omeprazole इत्यादि।
  • जिन लोगो की पाचन शक्ति कमजोर है या पेट के रोग से पीड़ित हैं।
  • जिन व्यक्तिओ को पेट में व्रण / ulcer हैं।

 Vitamin B-12 की कमी के क्या लक्षण हैं ?

 Vitamin B-12 की कमी के निम्नलिखित लक्षण हैं : Vitamin B-12 के लक्षण मुख्यत: त्वचा का पीलापन, सांस लेने में बाधा, नसों में दर्द, कमजोरी, वजन की समस्या, दृष्टिदोष आदि के साथ डिप्रेशन, हिंसक व्यवहार, व्यक्तित्व में बदलाव और हेल्यूसिनेशन जैसी मानसिक समस्याओं के रूप में दिखता है। हाथ और पैर में लगातार सनसनाहट रहती है।
  1. कमजोरी, जल्दी थक जाना
  2. आलस
  3. रक्त की कमी
  4. कमजोर पाचन शक्ति
  5. सरदर्द
  6. भूंक कम लगना
  7. हाथ-पैर में झुनझुनी होना या बधिरता
  8. कान में आवाज आना / घंटी बजना
  9. त्वचा में पीलापन
  10. धड़कन तेज होना
  11. मुंह में छाले आना
  12. याददाश कम होना
  13. आँखों में कमजोरी
  14. अवसाद, चिडचिडापन, भ्रम
  15. अनियमित मासिक
  16. कमजोर रोग प्रतिकार शक्ति

Vitamin B-12 की कमी को कैसे जांच की जाती हैं ?

 Vitamin B-12 की कमी का निदान करने के लिए निम्नलिखित परिक्षण / जांच किये जाते हैं :
  1. Serum Vitamin B-12 Test : यह एक प्रकार की रक्त जांच है जिसमे रक्त में लाल रक्त कण और Vitamin B-12 की मात्रा का पता चलता हैं।
  2. Bone marrow biopsy : इस परिक्षण में अस्थि मज्जा का परिक्षण किया जाता हैं और Vitamin B-12 की मात्रा का पता चलता हैं।
  3. Antibody Test : इस परिक्षण में intrinsic factor के antibodies की जांच की जाती है जिससे की Pernicious Anaemia का निदान किया जाता हैं।
  4. Schilling Test : इस जांच में शरीर में radio-active Vitamin B-12 देकर intrinsic factor की जांच की जाती हैं।

Vitamin B-12 की कमी का उपचार :-

विटामिन बी12 के लिये मांसाहार अनिवार्य नहीं है। सभी शाकाहारी प्राणी अपने शरीर में Vitamin B-12 की पर्याप्त मात्रा उत्पन्न करते हैं।

विटामिन B – 12 के शाकाहारी स्त्रोत

मछली, अंडा, और चिकन इत्यादि में ये प्रचूर मात्रा में पाया जाता है परन्तु अधिक कोलेस्ट्रोल होने के कारण ये लाभ की अपेक्षा नुकसान अधिक हो सकता है इसलिए कोशिश करे की शाकाहार से ही विटामिन बी 12 को प्रचूर मात्रा में ग्रहण करे , ऐसा करने से आपको केवल लाभ ही लाभ होगा घी , दूध, दही, मक्खन, आलू, गाजर, मुली शलगम, अरबी, शकर गंदी,  मट्ठा इत्यादि में Vitamin B -12 प्रचूर मात्रा में पाया जाता है

आपको जानकर हैरानी होगी की बरसात में नहाने से भी विटामिन B – 12 की कमी पूरी होती है (नोट : बारिश में नहाने से पहले आप ये सुनश्चित कर लें आपको कोई बीमारी ना हो।)

Vitamin B-12 के साइड इफेक्ट्स :-

जहां Vitamin B-12 के फायदे ही फायदे हैं, और यह जीवन के निर्माण से लेकर उसे सुचारु रूप से चलाने तक करीबन हर गतिविधि में शामिल है, लेकिन हालिया शोध ने इसका एक नकारात्मक पक्ष भी सामने रखा कि यह मुंहासों से चेहरा भरने के लिए जिम्मेदार स्किन बैक्टीरिया को उत्तेजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और यह समस्या Vitamin B-12 की गोलियां लेने वालों के साथ भी आ सकती है। वैज्ञानिक इस आधार पर अब मुंहासों का प्रभावी इलाज खोजने की ओर अग्रसर हैं।

शोधकर्ताओं का कहना है कि प्रकृति ने शरीर को संपूर्णता प्रदान करने में इसे ना सिर्फ विटामिनों की खुराक दी, बल्कि पूरी की पूरी एंजाइम यूनिट का बैकअप भी दिया। इस तरह हमारे सूर्योदय के समय जागने और सूर्यास्त के बाद सोने को आदत में बदलने में Vitamin B-12 की यह भूमिका आने वाले समय में नई खोजों के द्वार खोल देगी।

खास बात यह भी सामने आई है कि अंधेरे में माइक्रोब्स के फोटो रिसेप्टर डीएनए से चिपके पड़े रहते हैं और थर्मस थर्मोफिलस की जीन्स की गतिविधियों को थामे रखते हैं, लेकिन जैसे ही रोशनी पड़ती है, फोटो रिसेप्टर खटाक से छिटककर दूर हो जाते हैं और बैक्टीरिया ऐसे एंजाइम बनाना आरंभ कर देता है जिससे कोशिका तंत्र को सूर्य की रोशनी के कारण डीएनए की टूटफूट होने जैसे प्रभावों से बचाया जा सके। इस खोज से डीएनए ट्रांसक्रिप्शन को रोशनी से नियंत्रित करने वाली जेनेटिक इंजीनियरिंग तो अमल में लाई ही जा सकती है, प्रोटीन‍्स के बीच संबंधों को नियंत्रित करने का रास्ता भी खुल सकता है जिसके लिए बी12 को जितना धन्यवाद दो, उतना कम। तो, बी12 कितना खास है, और बताने की जरूरत है क्या?

तो देर मत कीजिये। अपने नाश्ते में दूध का गिलास और अंकुरित दालों को शामिल कीजिये, और भोजन में गाहे-बगाहे खमीरी रोटी और स्पाइरुलिना भी ले लिया कीजिये, विशेषकर यदि आप चालीस के निकट हैं या उससे आगे पहुँच चुके हैं। संतुलित भोजन कीजिये और शाकाहारी रहिये, यह आपके लिये तो अच्छा है ही, हमारे पर्यावरण के लिये भी उपयोगी है।

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