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विपरीतकरणी मुद्रा से आरोग्य एवं आध्यात्मिक लाभ

विपरीतकरणी मुद्रा से आरोग्य एवं आध्यात्मिक लाभ
विपरीतकरणी मुद्रा (VIPRITKARANI MUDRA) विपरीतकरणी मुद्रा में पैर उपर एवं सिर नीचे अर्थात शरीर की विपरीत स्थिति होने से इसे विपरीतकरणी मुद्रा कहते हैं |इस मुद्रा को सर्वांगासन की पूर्व स्थिति भी कहा जाता है | अथ विपरीतकरणीमुद्राकथनम्। नाभिमूलेवसेत्सूर्यस्तालुमूले च चन्द्रमाः। अमृतं ग्रसते मृत्युस्ततो मृत्युवशो नरः ॥३३॥ ऊर्ध्वं च जायते सूर्यश्चन्द्रं च अध आनयेत्। विपरीतकरीमुद्रा सर्वतन्त्रेषुगोपिता ॥३४॥ भूमौ शिरश्च संस्थाप्य... Read More