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Fasting (उपवास) is the best medicine for your health

उपवास (Fasting) का अर्थ

उपवास (Fasting) का नाम सुनकर आज हर इन्सान को ये लगता है की हम यहाँ पर किसी व्रत का जिक्र करेंगे लेकिन ऐसा कुछ नहीं है आज अधिकांश लोग अत्यधिक वजन से परेशान है। असंतुलित खान-पान और अनियमित दिनचर्या के परिणामस्वरूप शरीर में फेट (वसा) बढऩे लगता है, जिससे मोटापा की बीमारी हो जाती है। इसका हमारे स्वास्थ्य पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है। इसी तरह की कई बीमारियों से बचने के लिए व्रत-उपवास (Fasting)काफी कारगर उपाय है

उपवास (Fasting)शब्द का अर्थ होता है- समीप आकर रहना| ‘उप’ माने समीप, ‘वास’ माने रहना| उपवास का भोजन करने और न करने से कोई लेना-देना नहीं है| ‘उपवास’ करीब-करीब वैसा ही शब्द है, जैसा ‘उपनिषद’| पास आना, पास आना, किसके पास आना? अपने पास आना| जब ‘उपनिषद’ कहा जाता है, तो उसका अर्थ होता है कि गुरु के पास शिष्य बैठा है| ‘उपवास’ का भी वही अर्थ है| ‘उपवास’ का अर्थ है- आत्मा के पास मन बैठा है| एक ही बात है क्योंकि गुरु आत्मा ही होता है, और मन शिष्य ही होता है| सभी प्रकार के भोजन का त्याग करना l उपवास के दौरान भूखा रहना बहुत आवश्यक है l उपवास का सही लाभ हमें तभी मिलता है जब दूध, अन्न, फल और कोई भी तरल पदार्थ न लें l कुछ तय समय तक किसी भी प्रकार का भोजन न करना, भोजन का त्याग करने से शरीर के अंग और उनकी प्रतिक्रियाओं को आराम देना और शरीर के अंगों की शुध्दी करना उपवास है.

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उपवास (Fasting) कैसे करे ?

हर व्यक्ति को अपने क्षमता और शारीरिक स्तिथि के हिसाब से उपवास करना चाहिए। उपवास करने का सबसे सुरक्षित तरीका है की एक समय के उपवास से शुरुआत करना। आप किसी दिन शाम के समय भोजन का त्याग कर उपवास शुरू कर सकते हैं। भोजन की जगह इन पदार्थो पर रहते हुए दिन निकाल सकते हैं :

  • ताज़ी सब्जियों का रस
  • फल
  • पानी
  • ताजे फलो का रस
  • बिना पकी कच्ची साफ़ सब्जिया

शुरुआत में एक समय और फिर एक दिन का उपवास, इस तरह बढ़ाकर धीरे-धीरे आप अपनी क्षमता अनुसार उपवास का समय बढ़ा सकते हैं। उपवास करने से पहले अगर आपको कोई रोग है तो डॉक्टर की सलाह लेना चाहिए। उपवास करने पर उलटी या दस्त हो कर शरीर के विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं। उपवास से ज्यादा तकलीफ होने पर उपवास रोक देना चाहिए। उपवास करने के बाद अगले दिन निम्बू पानी, जूस, फल या हलके भोजन से ही शुरुआत करना चाहिए।

उपवास का मतलब भूखे मरना नहीं हैं। उपवास का मतलब हमारे पाचन तंत्र को आराम देना और उसे मजबूत करना होता हैं। उपवास करते समय यह भी ध्यान रखना चाहिए की अति सर्वत्र वर्जयते के हिसाब से क्षमता से अधिक और अवैज्ञानिक तरीके से उपवास करने से शरीर को हानी पहुच सकती हैं।

उपवास (Fasting) में क्या नहीं खाना चाहिए ?

आजकल के मॉडर्न उपवास में लोग हर दिन की तुलना से डबल खाना खा लेते है और खाते भी ऐसा है जिसे पचाने के लिए पाचन तंत्र को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती हैं। ऐसा उपवास करने से, लाभ मिलने की जगह हानी अधिक होती हैं।

उपवास (Fasting)में नीचे दी गयी चीजे नहीं खाना चाहिए :

  • पकी हुई सब्जिया
  • ब्रेड
  • बिस्किट
  • पास्ता
  • रोटी
  • चाय
  • फ़ास्ट फ़ूड
  • आलू के चिप्स
  • साबूदाने की खिचड़ी
  • मूंगफली के दाने
  • फरियाली मिक्सचर
  • तैयार भोजन

उपवास (Fasting)के लाभ –

  1. उपवास करने से हमारे शरीर की रोगों से लड़ने की शक्ति बढती है, अर्थात उपवास करने से रोग खत्म हो जाते हैं.
  2. उपवास करने से हमारे पाचन तन्त्र को आराम मिलता है और पाचन तंत्र ठीक ढंग से काम करता है.
  3. उपवास करने से यक्र्त की काम करने की शक्ति बढती है.
  4. उपवास दवारा हमारे शरीर को प्राकृतिक रूप से रोगों से लड़ने की शक्ति मिलती है,
  5. उपवास से हमारे अंदरूनी अंगो की सफाई हो जाती है.
  6. उपवास करने से हमारी दिमागी शक्ति बढती है. आध्यात्मिक शक्ति का ठीक ढंग से विकास होता है.
  7. उपवास करने से हमारे पूरे शरीर की थकावट दूर हो जाती है.
  8. उपवास द्वारा खून का दबाव कम होता है. हम हार्ट अटैक से बचे रहते हैं.
  9. शरीर में शक्ति स्फूर्ति और ताजगी का एहसास होता है.
  10. उपवास हमें कई रोगों से मुक्ति दिलाता है जैसे बुखार. जोड़ों में दर्द होना, ठंड लगना, पाचन तन्त्र को ठीक ढंग से चलाता है. कब्ज, दस्त, पेट दर्द , मलेरिया आदि रोगों को दूर करता है.

उपवास (Fasting)के नियम-

  1. उपवास के दौरान हमें खुश रहना चाहिये.
  2. उपवास के दौरान हमेशा सकारात्मक विचार करें.
  3. उपवास में खाने की तरफ ध्यान नहीं देना चाहिय.
  4. जो व्यक्ति उपवास की जानकारी न रखता हो उनसे दूर रहना चाहिये.
  5. उपवास में पूर्ण विश्वास रखें.

उपवास (Fasting) में निम्नलिखित सावधानिया बरतनी चाहिए :

    1. अगर आप किसी असाध्य या लंबी बिमारी से पीड़ित हैं तो उपवास करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह अवश्य लेना चाहिए।
    2. मधुमेह के रोगी, गर्भवती महिलाए और स्तनपान करा रही माताओ को उपवास नहीं करना चाहिए।
    3. अपने शारीरिक क्षमता से अधिक उपवास नहीं करना चाहिए।
    4. उपवास करते समय ज्यादा तकलीफ होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
    5. हमेशा धीरे-धीरे छोटे अंतराल के लिए उपवास से शुरुआत करना चाहिए। जैसे शरीर को उपवास का अभ्यास हो जाये वैसे उपवास का समय बढ़ाना चाहिए।
  1. उपवास के दिन अधिक परिश्रम का कार्य नहीं करना चाहिए।
  2. उपवास ख़त्म करने के बाद अचानक भारी आहार नहीं लेना चाहिए।

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Article Source :- http://www.nirogikaya.com/

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