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Dentist की मसूड़ों की बीमारी के बारे में क्या राय है ?

Dentist Says about Bleeding Gums

Dentist Dr. Parveen Chopra बताते है की मसूड़ों से खून निकलना (Bleeding Gums) एक बहुत ही आम समस्या है, लेकिन अधिकांश लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। हां, अकसर लोग इतना ज़रूर कर लेते हैं कि अगर ब्रुश करने समय मसूड़ों से खून निकलता है तो ब्रुश का इस्तेमाल करना छोड़ देते हैं और अंगुली से दांत साफ करना शुरू कर देते हैं। यह बिल्कुल गलत है – ऐसा करने से पायरिया रोग बढ़ जाता है। कुछ लोग किसी मित्र-सहयोगी की सलाह को मानते हुये कोई भी खुरदरा मंजन दांतों पर घिसने लगते हैं , कुछ तो तंबाकू वाली पेस्ट को ही दांतों-मसूड़ों पर घिसना शुरू कर देते हैं। यह सब करने से हम मुंह के गंभीर रोगों को बढ़ावा देते हैं। जब भी किसी को मसूड़ों से रक्त आने की समस्या हो तो उसे प्रशिक्षित Dentist (दंत-चिकित्सक) से मिलना चाहिये। वहीं आप की समस्या के कारणों का पता चल सकता है। बहुत से लोग तो तरह तरह की अटकलों एवं भ्रांतियों की वजह से अपना समय बर्बाद कर देते हैं…इसलिये अगर किसी को भी यह मसूड़ों से खून निकलने की समस्या है तो उसे तुरंत ही अपने Dentist (दंत-चिकित्सक) को दिखाये ।

Dentist says, “The most common cause of bleeding gums”

मसूड़ों से खून निकलने का सबसे आम कारण दांतों की सफाई ठीक तरह से ना होना है जिसकी वजह से दांत पर पत्थर( टारटर) जम जाता है। इस की वजह से मसूड़ों में सूजन (Swelling in gums) आ जाती है और वें बिल्कुल लाल रंग अख्तियार कर लेते हैं। इन सूजे हुये मसूड़ों को ब्रुश करने से अथवा हाथ से छूने मात्र से ही खून आने लगता है। जितनी जल्दी इस अवस्था का उपचार करवाया जाये, मसूड़ों का पूर्ण स्वास्थ्य वापिस लौटने की उतनी ही ज़्यादा संभावना रहती है।इस का मतलब यह भी कदापि नहीं है कि अगर आप को यह समस्या कुछ सालों से परेशान कर रही है तो आप यही सोचने लगें कि अब इलाज करवाने से क्या लाभ, अब तो मसूड़ों का पूरा विनाश हो ही चुका होगा। लेकिन ठीक उस मशहूर कहावत….जब जागें, तभी सवेरा….के मुताबिक आप भी शीघ्र ही अपने Dentist (दंत-चिकित्सक) को से दिखवा के यह पता लगवा सकते हैं कि आप के मसूड़े किस अवस्था में हैं और इन को बद से बदतर होने से आखिर कैसे बचाया जा सकता है।

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कुछ लोग तो इस अवस्था के लिये अपने आप ही दवाईयों से युक्त कईं प्रकार की पेस्टें लगाना शुरू कर देते हैं अथवा महंगे-महंगे माउथ-वॉशों का इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं। लेकिन इस तरह के उपायों से आप को स्थायी लाभ तो कभी भी नहीं मिल सकता …..शायद कुछ समय के लिये ये सब आप के लक्षणों को मात्र छिपा दें।

Dentist

Dentist says, “Super – hit infallible formula to avoid gum disease”

मसूड़ों की बीमारियों से बचने का सुपर-हिट अचूक फार्मूला तो बस यही है कि आप सुबह और रात दोनों समय पेस्ट एवं ब्रुश से दांतों की सफाई करें, जुबान साफ करने वाली पत्ती ( टंग-क्लीनर) से रोज़ाना जुबान साफ करें और हर खाने के बाद कुल्ला अवश्य कीजिये। इस के साथ साथ तंबाकू के सभी रूपों, गुटखों एवं पान-मसालों से कोसों दूर रहें।

अकसर लोग अपनी छाती ठोक कर यह कहते भी दिख जाते हैं हम तो भई केवल दातुन से ही दांत कूचते हैं…यही राज़ है कि ज़िंदगी के अस्सी वसंत देखने के बाद भी बत्तीसी कायम है। यहां पर मैं भी उतनी ही बेबाकी से यह स्पष्ट कर देना चाहूंगा कि बात केवल मुंह में बत्तीसी कायम रखने तक ही तो सीमित नहीं है, बल्कि उस बत्तीसी का स्वस्थ रहना भी ज़रूरी है।

Dentist :- अकसर मैंने अपनी क्लीनिकल प्रैक्टिस में नोटिस किया है कि जो लोग केवल दातुन का ही इस्तेमाल करते हैं, उन में से भी काफी प्रतिशत ऐसे भी होते हैं जिन के मसूड़ों में सूजन (Swelling in gums) होती है। लेकिन इस का दोष हम दातुन पर कदापि नहीं थोप सकते !….यह क्या ?…आप किस गहरी सोच में पढ़ गये हैं !…सीधी सी बात है कि अगर आप कईं सालों से दातुन का ही इस्तेमाल कर रहे हैं और आप को दांतों से कोई परेशानी नहीं है तो भी आप अपने Dentist (दंत-चिकित्सक) से नियमित चैक-अप करवाइये। अगर वह आप के मुंह का चैक-अप करने के पश्चात् यह कहता है कि आप के दांत एवं मसूड़े बिल्कुल स्वस्थ हैं तो ठीक है ….आप केवल दातुन का ही प्रयोग जारी रखिये। लेकिन अगर उसे कुछ दंत-रोग दिखते हैं तो आप को दातुन के साथ-साथ ब्रुश-पेस्ट का इस्तेमाल करना ही होगा।

 मसूड़ों की बीमारी—कहीं आप भी इसकी चपेट में तो नहीं? (Gum disease , not somewhere you in its grip ?)

 दुनिया-भर में, मुँह में होनेवाली यह एक आम बीमारी है। शुरू-शुरू में शायद इस बीमारी के लक्षण पता न चलें। मगर ध्यान रखिए मसूड़ों की बीमारी की खासियत है कि यह दबे पाँव वार करती है।इंटरनेशनल डैन्टल पत्रिका मुँह की बीमारियों की सूची में मसूड़ों की बीमारी का भी ज़िक्र करती है और कहती है ‘इसका हमारी सेहत पर बुरा असर हो सकता है।’ साथ ही, मुँह में होनेवाली बीमारी से ‘न सिर्फ एक इंसान को, बल्कि समाज को काफी दर्द और तकलीफ से गुज़रना पड़ता है और लोग खाने का और ज़िंदगी का पूरा मज़ा नहीं ले पाते।’ दुनिया-भर में फैली इस समस्या पर चर्चा करने से मसूड़ों की बीमारी से बचने में आपको मदद मिल सकती है।

क्या है मसूड़ों की बीमारी? What is gum disease ?

इस बीमारी के कई चरण होते हैं। शुरूआती चरण को जिंजिवाइटिस (Gingivitis) कहते हैं। इस दौरान मसूड़ों में सूजन आ जाती है और उनसे खून बहने लगता है। खून ब्रश या फ्लॉस करते समय या फिर यूँ ही निकल सकता है। Dentist से मसूड़ों की जाँच कराते वक्‍त अगर खून बहता है तो यह भी जिंजिवाइटिस ((Gingivitis) का लक्षण हो सकता है।

इस बीमारी का अगला चरण है परिदंतिका (पेरिओडोन्टाइटिस/Periodontaitis)। इसमें दाँतों को मज़बूती देने वाली चीज़ें जैसे, मसूड़ों के ऊतक (टिशु) और हड्डियाँ खराब होने लगते हैं। शुरू-शुरू में इसका पता नहीं चलता। जब यह पूरी तरह फैल जाती है, तभी मालूम होती है। इसकी कुछ निशानियाँ हैं, मसूड़ों में जगह (गम-पॉकेट) बनना, दाँतों का हिलना, दाँतों के बीच जगह बनना, मुँह से बदबू आना, मसूड़ों का दाँतों से अलग होना जिससे दाँतों का लंबा दिखायी देना और मसूड़ों से खून बहना वगैरह।

मसूड़ों की बीमारी—कारण और इसका असर (Cause gum disease and its impact)

Dentist के अनुसार मसूड़ों की बीमारी कई कारणों से हो सकती है। दाँतों पर मैल (प्लाक) इसका सबसे बड़ा कारण होता है। यह असल में बैक्टीरिया (जीवाणुओं) की पतली परत होती है, जो दाँतों पर लगातार जमती रहती है। अगर इसे साफ न किया जाए, तो जीवाणु मसूड़ों में सूजन पैदा कर सकते हैं। आगे चलकर इससे मसूड़े दाँतों से अलग होने लगते हैं। नतीजा, मसूड़ों के नीचे प्लाक बढ़ने लगता है और उसमें जीवाणु अपना अड्डा बनाने लगते हैं। एक बार जब  जीवाणु यहाँ बस जाते हैं, तो धीरे-धीरे मसूड़ों की सूजन हड्डी और मसूड़ों के ऊतक (टिशु) को गलाने लगती है। प्लाक चाहे मसूड़ों से ऊपर हो या नीचे, जब यह सख्त हो जाता है, तो यह पत्थर जैसा बन जाता है, जिसे कैलकुलस (या आम तौर पर टारटर) कहते हैं। कैलकुलस को भी जीवाणु पूरी तरह ढक लेते हैं। सख्त होने और दाँतों से मज़बूती से चिपके होने की वजह से इसे प्लाक की तरह आसानी से नहीं हटाया जा सकता। इसलिए जीवाणु मसूड़ों को और ज़्यादा सड़ाते रहते हैं।

Dentist के अनुसार मसूड़ों की बीमारी के दूसरे कारण भी हो सकते हैं। जैसे, मुँह, दाँत और मसूड़ों की अच्छी तरह सफाई न करना, लगातार दवाइयाँ लेते रहना जिससे शरीर में बीमारियों से लड़ने की ताकत कम हो जाती है, वायरल इन्फेक्शन, तनाव, डायबिटीज़ या शुगर का ज़्यादा बढ़ना, ज़्यादा शराब पीना, तंबाकू का सेवन करना और गर्भावस्था के दौरान हार्मोन में गड़बड़ी होना।

मसूड़ों की बीमारी का आप पर और भी बुरा असर हो सकता है। इससे मुँह में दर्द हो सकता है या दाँत टूट सकते हैं जिससे न तो आप खाना ठीक से चबा पाएँगे, न ही उसका मज़ा ले पाएँगे। आपकी बातचीत और शक्ल-सूरत पर भी असर पड़ सकता है। खोजबीन यह भी दिखाती है कि अगर दाँत और मसूड़े तंदुरुस्त न हों, तो पूरा शरीर तंदुरुस्त नहीं रहेगा।

मसूड़ों की बीमारी से पीछा कैसे छुड़ाएँ ? How to get rid of gum disease ?

कैसे पता लगेगा कि आपको मसूड़ों की बीमारी है? क्या आपको इस लेख में बताए कुछ लक्षण नज़र आते हैं? अगर हाँ, तो बेहतर होगा कि आप दाँतों के अच्छे Dentist के पास जाएँ और अपने मसूड़ों की जाँच कराएँ।

क्या इस बीमारी का इलाज है? जब यह शुरूआती चरण में होती है, तब इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। लेकिन अगर यह बढ़कर परिदंतिका (पेरिओडोन्टाइटिस/Periodontaitis) के चरण में पहुँच गयी है, तो इसे बढ़ने से रोका जाता है, ताकि दाँतों की हड्डी और आस-पास के ऊतक (टिशु) नष्ट न हों। Dentist कुछ खास औज़ारों से मसूड़ों से ऊपर और नीचे जमा प्लाक और कैलकुलस साफ कर सकते हैं।

अगर आपके इलाके में दाँतों के अच्छे Dentist आसानी से नहीं मिलते, या बिलकुल नहीं हैं, तो दबे पाँव आनेवाली इस घातक बीमारी से बचने का तरीका है इसे फैलने से रोकना। दाँतों और मसूड़ों की सही तरह से और नियमित तौर पर खुद साफ-सफाई करना, इसे रोकने का सबसे बढ़िया तरीका है।

मुँह, दाँत और मसूड़ोंको साफ़ रखें “Mouth, teeth and gums clean place”

दिन में कम-से-कम दो बार ब्रश कीजिए। कुछ लोगों को बार-बार यानी हर बार खाने के बाद ब्रश करना पड़ सकता है, ताकि मसूड़ों की बीमारी को रोका जा सके

मुलायम ब्रश का इस्तेमाल करें जिसके बाल (ब्रिसल्स) छोटे-छोटे हों

हर दिन सावधानी से दाँतों और मसूड़ों के बीच सफाई कीजिए। चाहे तो डेंटल फ्लॉस या ज़रूरी हो तो कोई दूसरी चीज़ इस्तेमाल कीजिए, जैसे खास तौर पर दाँतों के बीच सफाई करने के लिए तैयार किया गया ब्रश या टूथपिक

Dentist के अनुसार अकसर लोग दातुन का सही इस्तेमाल करते भी नहीं—वे दातुन को चबाने के पश्चात् दांतों एवं मसूड़ों पर कुछ इस तरह से रगड़ते हैं कि मानो बूट पालिश किये जा रहे हों…ऐसा करने से दांतों की संरचना को नुकसान पहुंचता है। आप चाहे दातुन ही करते हैं, लेकिन इस को भी Dentist (दंत-चिकित्सक) की सलाह अनुसार ब्रुश की तरह ही इस्तेमाल कीजिये।

Source Article :- http://drchopraparveen.blogspot.in/

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