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CBC (Complete Blood Count )

CBC (Complete Blood Count )

CBC खून के पदार्थ। खून के चार खास घटक हैं, लाल कोशिकाएँ, शवेत कोशिकाएँ, प्लेटलेट्स और प्लाज़मा। इन चार घटकों में से पदार्थ या अंश निकाले जाते हैं। जैसे, लाल कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन नाम का प्रोटीन होता है। इंसानों या जानवरों के हीमोग्लोबिन से तैयार की गयी चीज़ें, ऐसे मरीज़ों के इलाज में इस्तेमाल की जाती हैं जिनके शरीर में खून की भारी कमी है या जिनका किसी वजह से बहुत ज़्यादा खून बह गया है।

प्लाज़मा में 90 प्रतिशत पानी होता है। इसमें बहुत सारे हॉरमोन, खनिज लवण, एन्ज़ाइम और खनिज और शर्करा जैसे पोषक तत्त्व होते हैं। प्लाज़मा में ऐसे तत्त्व भी होते हैं जो चोट से रिसनेवाले खून को जमा देते हैं, ताकि ज़्यादा खून न बहे और ये शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं। प्लाज़मा में एलब्यूमिन जैसे कई प्रोटीन भी होते हैं। अगर एक मरीज़ के शरीर में किसी बीमारी से लड़ने की ताकत नहीं है, तो डॉक्टर शायद उसे गामा ग्लोब्यूलिन के इंजेक्शन लेने के लिए कह सकता है। गामा ग्लोब्यूलिन ऐसे लोगों के प्लाज़मा से तैयार किया जाता है, जिनमें बीमारी से लड़ने की शक्‍ति पहले से मौजूद है। शवेत रक्‍त कोशिकाओं से इन्टरफेरॉन और इन्टरल्यूकिन निकाले जाते हैं, जो कुछ किस्म के वाइरल इन्फेक्शन और कैंसर के इलाज में इस्तेमाल किए जाते हैं।

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1.  संपूर्ण रक्त गणना (सि बी सि)

CBC :- संपूर्ण रक्त गणना (सि बी सि) (Complete Blood Count, CBC, CBC with Diff, CBC with Differential, Full Blood Count, FBC), खून में सबसे आम जांच है।

खून में तीन प्रमुख्य प्रकार के कोशिका या सेल (cell) होते हैं –

  • लाल रक्त कोशिका या रेड ब्लड सेल या Red Blood Cell or RBC
  • सफेद रक्त कोशिका या व्हाईट ब्लड सेल या White Blood Cell or WBC
  • प्लेटलेट्स या Platelets

इनके अनेक रूप और अनेक कार्य हैं, जैसे कि –

  • “लाल रक्त कोशिका” शरीर को आकसिजन (oxygen) और खाना (sugar) पहुँचाता है।
  • कटने पर बहते खून को जमने के लिये “प्लेटलेट्स रक्त कोशिका” काम आता है।
  • “सफेद रक्त कोशिका” बीमारीयों से बचाता है।

सभी सेल, हड्डी के बीच में स्थित “अस्थि मज्जा या बोन मेरौ (Bone Marrow), में बनता है। ये सेल हमेशा बनते और टूटते रहते हैं, और इनकी संख्या सामान्य सीमा में रहता है। बीमारी या दवा या अन्य कारण से इस नियंत्रण में रुकावट आ जाती है, जिससे कि सेलों के विभिन्न रूप के गिनती घट या बढ जाते हैं।

सि बि सि (CBC), इन सेलों के गिनती का जांच करता है। रिपोर्ट में बताया जाता है कि कितने कोशिका या सेल प्रति मिलीलिटर हैं या खून में उस सेल का कया प्रतिशत है? हर जांच केन्द्र के रिपोर्ट में बताया जाता है कि सभी रक्त कोशिका के संख्या, सामान्य सीमा के अंदर है कि नहीं यानि सामान्य सीमा से अधिक है कि कम है।

2.  लाल रक्त कोशिका (रेड ब्लड सेल) के जांच –

खून में, “लाल रक्त कोशिका, रेड बल्ड सेल (RBC)” शरीर को हवा या आकसिजन और खाना पहुँचाता है। हर कोशिका में एक प्रोटिन होता है, जिसे हिमोग्लोबिन कहते हैं, जो खून में आकसिजन (oxygen) ले जाता है। रेड बल्ड सेल के अनेक जांच हैं –

  • रेड बल्ड सेल की गिनती या रेड ब्लड सेल काउंट (RBC Count)
  • रेड बल्ड सेल में कितना हिमोग्लोबिन (Hemoglobin) प्रोटिन है।
  • हिमाटोक्रिट (Hematocrit) बताता है कि खून के घनफल (blood volume) में कितना प्रतिशत (%), रेड बल्ड सेल है?
  • एम सी वी (MCV or Mean Corpuscular volume), रेड बल्ड सेल का औसत घनफल (average volume) बताता है|
  • आर डी डब्ल्यू (RDW or Red cell distribution width) बताता है कि रेड बल्ड सेल का घनफल माप (RBC Volume) की विस्तार सीमा (range) कया है।
  • एम सी एच (MCH or Mean Cell Hemoglobin) बताता है कि औसत रेड बल्ड सेल (Average RBC) में कितना हिमोग्लोबिन (Hemoglobin) है।
  • एम सी एच सी (MCHC or Mean Cell Hemoglobin Concentration) बताता है कि औसत रेड बल्ड सेल (Average RBC) में हिमोग्लोबिन (Hemoglobin) का कितना गाढापन (concentration) है।

उचांई पर रहनेवाले लोगों में, हवा में आकसिजन के कमी से, उनका रेड बल्ड सेल की गिनती (RBC Count) बढ जाता है।

जब रेड बल्ड सेल की गिनती (RBC Count), रेड बल्ड सेल में हिमोग्लोबिन (Hemoglobin) प्रोटिन और हिमाटोक्रिट (Hematocrit) कम हो जाता है, तो उसे अनिमिया (anemia) कहते हैं। इससे शरीर के विभिन्न अंगों में हवा (आकसिजन) और खाना ठीक तरह से नहीं पहुँचता है। इससे कमजोरी, थकान और अरुचि महसूस होता है। मरीज पीला (pale) लगते हैं।

कम एम सी वी (Low MCV) या छोटे रेड बल्ड सेल, शरीर में लोहा (iron) पदार्थ के कमी से या लम्बे समय तक बीमार रहने के कारण होता है।

अधिक एम सी वी (High MCV) या बडे रेड बल्ड सेल, एच आइ वी के दवा से हो सकता है। यह कोई खराबी नहीं करता है। अधिक एम सी वी, एक विटामिन फौलिक असिड (vitamin folic acid) के कमी के कारण भी हो सकता है, जिसे मेगालोबलासटिक अनिमिया (Megaloblastic anemia) कहते हैं। उसका इलाज जरूरी है।

आर डी डब्ल्यू (RDW) से भी कुछ अन्य अनिमिया (anemia) और विटामिन के कमी का पता चल सकता है।

3.  प्लेटलेट्स के जांच –

प्लेटलेट्स कि गिनती (platelet count) – प्लेटलेट्स के कमी से रक्त जमता नहीं है। फिर चोट लगने पर, खून बहना नहीं रुकता है। कभी कभार अंदूरनी खून बह सकता है, और यह अतयंत गमभीर स्थिती होता है। इसमें मरीज को प्लेटलेट्स देना पड सकता है।

एच आइ वी (HIV) से प्लेटलेट्स के गिनती में कमी या थ्रोम्बोसाईटोपिनीया (thrombocytopenia) हो सकता है। दवा लेने पर यह ठीक हो जायेगा।

4.  सफेद रक्त कोशिका (व्हाईट ब्लड सेल) के जांच –

  • सफेद रक्त कोशिका गिनती या व्हाईट ब्लड सेल काउंट (WBC Count)
  • विभिन्न सफेद रक्त कोशिकाओं के प्रतिशत(%)

जब व्हाईट ब्लड सेल काउंट या सफेद रक्त कोशिका की गिनती बहुत कम हो जाता है, तो उसे ल्युकोपिनीया (leucopenia) कहते हैं। इसमें बीमारीयों से बचाव का शक्ति, आपके शरीर में कम हो जाता है।

डिफ्फर्नसियल काउंट या विभिन्न सफेद रक्त कोशिकाओं की गिनती, अन्य बातों के लिय होता है। सफेद रक्त कोशिकाओं, पांच प्रकार के होते हैं। वो हैं – न्युट्रोफिल (neutrophil), लिम्फोसाईट (lymphocyte), मोनोसाईट (monocyte), इओसीनोफिल (eosinophil) और बेसोफिल (basophil)। इनका गिनती प्रतिशत (%) में होता है। जैसे कि संपूर्ण सफेद रक्त कोशिका का गिनती 10,000 है, और न्युट्रोफिल 30% हैं, तो न्युट्रोफिल का गिनती हुआ 10,000 क 30 प्रतिशत या 3,000 न्युट्रोफिल।

न्युट्रोफिल के कमी को न्युट्रोपिनीया (neutropenia) कहते हैं। यह अनेक बीमारी, जैसे कि बेक्टेरियल संक्रमण या (bacterial infection), एच आइ वी (HIV), कुछ दवाओं के कारण हो सकता है। इस स्थिती में आपको और अधिक संक्रमित बीमारी हो सकता है।

लिम्फोसाईट दो तरह के होते हैं – टी सेल (T cell) और बी सेल (B cell)। एच आइ वी (HIV) में टी सेल (T cell) नष्ट हो जाते हैं, जो कि जानलेवा होता है। बी सेल भी आपके शरीर के रक्षा के लिये प्रोटिन बनाता है, जिसे ऎंटीबोडीज़ (antibodies) कहते हैं।

मोनोसाईट भी शरीर कि रक्षा के लिये, शरीर में प्रवेश किय हुए किटाणुओं को खा जाते हैं। बेक्टेरियल संक्रमण या (bacterial infection), में इनका गिनती बढा होता है।

पेट में कीडों से, एलर्ज़ी में, एच आइ वी में, इओसीनोफिल का गिनती बढा होता है।

Article Source :- http://nirog.info

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