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Due Appendix Symptoms and Treatment

Appendix / अपेंडिक्स / अपेंडिक्साईटिस/Appendicitis क्या है  ?

Appendix / अपेंडिक्स / अपेंडिक्साईटिस/Appendicitis आम भाषा में बोले जाने वाले उस बीमारी के नाम है जो अक्सर 10 साल से 30 साल की उम्र में हर तीसरे व्यक्ति को होने की संभावना होती है अपेंडिक्स के संक्रमण को अपेंडिक्साईटिस कहा जाता है, जहाँ पर अपेंडिक्स से सेकम की ओपनिंग होती है उसमे जब कोई बाधा या अवरुद्ध हो  जाता है तब अपेंडिक्साईटिस की शुरुआत होती है! यह म्यूकस के जमाव के कारण उत्पन्न हुए व्यवधान की वजह से हो सकता है या फिर मल के सेकम के जरिये अपेंडिक्स में पहुच जाने के कारण हो सकता  है मल के इकट्ठा  होने से ओपनिंग ब्लाक हो जाती है जिससे कारण अपेंडिक्स में बेक्टीरिया जो पहले से ही अपेंडिक्स में होते है वो अपेंडिक्स के दिवार को संक्रमित कर देते है और अपेंडिक्स में सुजन आने लगती है तथा इस संक्रमण को ही अपेंडिक्साईटिस कहा  जाता है!

 Causes of Appendix – अपेंडिक्स के क्या कारण है?

अपेंडिक्साईटिस लिम्फोइड फोलिकल के आकर में बढ़ोतरी होने या किसी प्रकार की चोट लगने के कारण भी  हो सकता है! इसमे किसी रुकावट के आने पर बेक्टेरिया तेज गति से बढ़ने लगते है और इससे अपेंडिक्स में पस बनने लगता है और अधिक दबाव बढ़ने पर उस स्थान की रक्त की नलिकाएं भी दब सकती है!

इसके मुख्य कारण होता है लम्बे समय तक कब्ज़ का रहना , पेट में पलने वाला परजीवी व आँतों के रोग इत्यादि से अपेंडिक्स की नाली में रुकावट आ जाता है |

भोजन में रेशे का न होना या कमी भी इस समस्या के लिए जिम्मेदार होता है |यदि भोजन का कोई अंश आंत के शुरू के हिस्से में अटक कर सतह में पहुंच जाता है, तो वह अपेंडिक्स के वाल्व को बंद कर देता है। इसका परिणाम यह होता है कि सामान्यतः अपेंडिक्स से जो एक विशेष प्रकार का स्राव होता है, उसके निकलने का मार्ग अवरुद्ध होने से वह बाहर नहीं निकल पाता और अंदर ही सड़ने लगता है, जिसके कारण अपेंडिक्स में सूजन आ जाती है। इस तरह जब अपेंडिक्स संक्रमण ग्रस्त हो जाता है,तो अपेंडिसाइटिस रोग कहलाता है।
अपेंडिसाइटिस का यह रोग शाकाहारियों की अपेक्षा मांसाहारियों को अधिक होता है और उन पर उसका असर भी अधिक तीव्र और भयंकर होता है। अमरूद, नींबू, संतरा आदि फलों के बीज, या किसी अन्य बाहरी वस्तु का अपेंडिक्स में फंस या रुक जाना, संक्रमण पैदा करने वाले जीवाणुओं का उस जगह पर पहुंच जाना, अपेंडिक्स में कठोरता पैदा हो जाना, क्षय रोग में जीवाणुओं द्वारा अपेंडिक्स का संक्रमित हो कर उसमें ट्यूबर सृदश आकृतियां बन जाना, अपेंडिक्स में कैंसर या अन्य प्रकार की रसौली उत्पन्न हो जाना, अपेंडिक्स के स्थान पर चोट आदि लग जाना, पुराना कब्ज संकोचक, गरिष्ठ और दोषयुक्त आहार का सेवन करना, अपेंडिक्स सिकुड़ जाना, उसमें रुकावट उत्पन्न हो जाना अपेंडिसाइटस के कारण होते हैं।
पेट के दायें भाग में नाभि से हटकर लगभग 6 सेमी की दूरी तक दर्द होता है। यह दर्द कभी कम तो कभी तेज होने लगता है यहां तक कि हिलने डुलने से दर्द और तेज हो जाता है।
 Appendix

How To know the Symptoms of Appendix-अपेंडिक्स के क्या लक्षण है ?

अपेंडिक्साईटिस होने पर निम्न प्रकार के लक्षण नजर आते है!

  • पेट में नीचे दायीं ओर दर्द होना! Having pain in lower right side of stomach
  • भूख में कमी या भूख नहीं लगना!- Loss of appetite
  • उब्काई आना या जी मचलना- Feeling dizziness
  • उलटी होना-Vomiting
  • कब्ज होते रहना- Having constipation trouble
  • डायरिया की समस्या होना- Problem of diarrhea
  • हल्का बुखार रहना- Mild fever

What causes the appendix to burst ? अपेंडिक्‍स फटने का क्या कारण है ?

रोगी को अगर अपेंडिक्‍स है तो, उसके पेट के दाएं भाग में नीचे की तरफ दर्द, भूख में कमी आएगी, उल्‍टी, मतली, डायरिया, कब्‍ज, गैस न निकाल पाना, पेट में सूजन और हल्‍का बुखार रह सकता है। पेट में हल्क्की मरोड़ होने से इसकी शुरुआत होती है, जब यह अवरोध कुछ दिनों तक लगातार बना रहता है तो अंततः संक्रमण होकर अपेंडिक्स के फटने की स्थिति आ जाती है। ऐसे बहुत ही कम मामले देखने में आयें है की इसके लक्षण दिखाई देने शुरू होने के 24 घंट के भीतर अपेंडिक्स फैट गया हो  80 प्रतिशत मामलो में 48 घंटों में दिखाई दिए गए अपेंडिक्स के मामलो में लगभग 80% लोगों में अपेंडिक्स फट जाता है! ऐसा होने पर ये खतरनाक हो सकता है
अपेन्डिक्स का फटना एक आपात स्थिति है। अपेंडिक्‍स का सही समय पर इलाज बहुत जरुरी है।

Appendicitis का निदान / diagnosis कैसे किया जाता हैं ?

ऐसे तो अनुभवी डॉक्टर रोगी के लक्षण और शारीरक जांच कर ही Appendicitis का निदान कर लेते है पर अपने निदान को पुख्ता करने के लिए निचे दिए हुए कुछ परिक्षण भी कर सकते हैं।

  1. Complete Blood Count : इस जांच में सफ़ेद रक्त कण (White Blood Cells) की मात्रा सामान्य से अधिक होने पर शरीर में संक्रमण होने की जानकारी मिलती हैं।
  2. Urine Test : पेट दर्द कही पेशाब में संक्रमण या पथरी के कारण तो नहीं यह पता लगाने के लिए पेशाब जांच की जाती हैं।
  3. Sonography : पेट की सोनोग्राफी कर अपेंडिक्स में सुजन है की नहीं यह देखा जाता हैं। अधिकतर Appendicitis के प्रकार में यह सोनोग्राफी में पता चल जाता हैं।
  4. CT Scan : जरुरत पड़ने पर डॉक्टर आपको पेट का सिटी स्कैन करने की सलाह भी दे सकते हैं।
  5. X-Ray : जरुरत पड़ने पर डॉक्टर पेट का x-ray निकालने की सलाह देते हैं।
  6. अन्य : इसके अलावा रोगी की ऑपरेशन के लिए फिटनेस देखने के लिए अन्य जांच भी की जाती हैं।

आंत्रपुच्छ यानी अपेंडिक्स के आयुर्वेदिक और औषधीय उपचार (Appendix herbal and medicinal treatments)

 भोजन तथा परहेज :
पथ्य : पूरा आराम करना, फलों का रस, पर्लवाली, साबूदाना और दूसरे तरल पदार्थ खायें। रोटी न खायें, दस्त की दवा लेना, खटाई, ज्यादा तेल से बने चटपटे मसालेदार चीजें न खायें।
बनतुलसी :बनतुलसी को पीसकर लुगदी बना लें किसी लोहे की करछुल पर गर्म करें (भूनना नहीं है) उस पर थोड़ा-सा नमक छिड़क दें और दर्द वाले स्थान पर इस लुगदी की टिकिया बनाकर 48 घंटे में 3 बार बदल कर बांधें। रोगी को इस अवधि में बिस्तर पर आराम करना चाहिए। इस चिकित्सा से 48 घंटे में रोग दूर हो जाता है। इसके पत्ते दर्द कम करते हैं। सूजन कम करते हैं। सूजन व दर्द वाले स्थान पर इसका लेप करने से फायदा होता है।
गाजर :आंत्रपुच्छ प्रदाह में गाजर का रस पीना फायदेमंद है। काली गाजर सबसे ज्यादा फायदेमंद है।
दूध :दूध को एक बार उबालकर ठंडा कर पीने से लाभ होता है।
टमाटर :लाल टमाटर में सेंधानमक और अदरक डालकर भोजन के पहले खाने से फायदा होता है।
इमली :इमली के बीजों का अन्दरूनी सफेद गर्भ (गिरी) को निकालकर पीस लें। बने लेप को मलने और लगाने से सूजन में और पेट फूलने में आराम आता है।
गुग्गुल :गुग्गुल लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से 1 ग्राम की मात्रा में सुबह शाम गुड़ के साथ खाने से फायदा होता है।
राई :पेट के निचले भाग में दायीं ओर राई पीसकर लेप करने से दर्द दूर होता है। मगर ध्यान रहे कि एक घंटे से ज्यादा देर तक लेप लगा नहीं रहना चाहिए। वरना छाले भी पड़ सकते हैं.
अदरक :- अदरक दर्द और सूजन को दूर करने में सहायक है। रोजाना अदरक की चाय 2 से 3 बार पियें। अदरक की चाय बनाने के लिये 1 कप उबलते हुए पानी में 1 छोटा चम्‍मच घिसा अदरक डाल कर 10 मिनट उबालें। दूसरा तरीका है कि अपने पेडु को अदरक के तेल से दिन में कई बार मसाज करें।
मेथी दाना :– 1 कप पानी में 2 छोटे चम्‍मच मेथी डाल कर पानी को उबालें। इसके बाद इस पानी को दिन में एक बार पियें। खाने में भी मेथी दाने का प्रयोग करें। इससे दर्द और सूजन दूर होती है।
नींबू :- नींबू दर्द, अपच और कब्‍ज से राहत दिलाता है। यह विटामिन सी से भरपूर है इसलिये यह इम्‍मयूनिटी भी बढाता है। इसका सेवन करने के लिये एक नींबू निचोड़ कर उसमें कच्‍ची शहद मिलाइये। इस मिश्रण को दिन में कई बार लीजिये। ऐसा कुछ हफ्तों तक लगातार करें।
पुदीना :- यह अंदर की गैस, मतली और चक्‍कर जैसे लक्षणों को दूर करता है। यह अपेंडिक्‍स के दर्द को भी ठीक करता है। इसका सेवन करने के लिये पुदीने की चाय तैयार करें। 1 चम्‍मच ताजी पुदीने की पत्‍तियों को 1 कप खौलते पानी में 10 मिनट तक उबालें। इसे छान कर इसमें कच्‍ची शहद मिलाएं। फिर इसे हफ्तेभर दो या तीन पर रोजाना पियें।
फाइबर युक्‍त आहार :- आहार में लो फाइबर अपेंडिक्‍स को दावत दे सकता है। इसलिये आपको हाई फाइबर वाले आहार जैसे, बींस, खीरा, टमाटर, चुकंदर, गाजर, ब्रॉक्‍ली, मटर, ब्राउन राइस, मुनक्‍का, वीट जर्म, कद्दू के बीज, सूरजमुखी के बीज और अन्‍य ताजे फल तथा सब्‍जियां।
तरल पदार्थ :– खूब सारा तरल पदार्थ पीने से कब्‍ज की समस्‍या दूर होती है, जिससे अपेंडिक्‍स भी जल्‍द ठीक हो जाता है। इससे शरीर की गंदगी भी दूर होती है। आप पानी के अलावा फ्रूट जूस वो भी बिना शक्‍कर के पी सकते हैं। हो सके तो ठोस आहार कम कर दें और ढेर सारा तरल पदार्थ ही पियें। इसके अलावा शराब और कैफीन का सेवन ना करें, नहीं तो आप डीहाइड्रेशन का शिकार हो सकते हैं।
लहसुन :- रोजाना खाली पेट 2 से 3 कच्‍ची लहसुन का सेवन करें। आप खाना पकाते वक्‍त भी लहसुन का प्रयोग कर सकते हैं। दूसरा ऑपशन है कि आप डॉक्‍टर की सलाह से गार्लिक कैप्‍सूल का सेवन भी कर सकते हैं।
सिनुआर :सिनुआर के पत्तों का रस 10 से 20 ग्राम सुबह-शाम खाने से आंतों का दर्द दूर होता है। साथ ही सिनुआर, करंज, नीम और धतूरे के पत्तों को एक साथ पीसकर हल्का गर्म-गर्म जहां दर्द हो वहां बांधने से लाभ होता है।
नागदन्ती :नागदन्ती की जड़ की छाल 3 से 6 ग्राम सुबह-शाम निर्गुण्डी (सिनुआर) और करंज के साथ लेने से आंतों के दर्द में लाभ होता है। यह आंत में तेज दर्द हो या बाहर से दर्द हो हर जगह प्रयोग किया जा सकता है। यह न्यूमोनिया, फेफड़े का दर्द, अंडकोष की सूजन, यकृत की सूजन तथा फोड़ा आदि में फायदेमंद है।
रानीकूल (मुनियारा) :रानीकूल की जड़ का चूर्ण 3 से 6 ग्राम सुबह-शाम लेने से लाभ होता है। इससे आंत से सम्बन्धी दूसरे रोगों में भी फायदा होता है। इसका पंचांग (जड़, तना, फल, फूल, पत्ती का चूर्ण) फेफड़े की जलन में भी फायदेमंद होता है।
हुरहुर :पेट में जिस स्थान पर दर्द महसूस हो उस स्थान पर पीले फूलों वाली हुरहुर के सिर्फ पत्तों को पीसकर लेप करने से दर्द मिट जाता है।
पालक का साग :आंत से सम्बन्धित रोगों में पालक का साग खाना फायदेमंद है।
चौलाई :चौलाई का साग लेकर पीस लें और उसका लेप करें। इससे शांति मिलेगी और पीड़ा दूर होगी।
बड़ी लोणा :बड़ी लोणा का साग पीसकर आंत की सूजन वाले स्थान पर लेप लगायें या उसे बांधें। इससे दर्द कम होता है और सूजन दूर होती है।
चांगेरी :चांगेरी के साग को पीसकर लेप बना लें और उसे पेट के दर्द वाले हिस्से में बांधें। इससे लाभ होगा।
चूका साग :चूका साग सिर्फ खाने और दर्द वाले स्थान पर ऊपर से लेप करने व बांधने से ही बहुत लाभ होता है।

अपेंडिक्स के घरेलू उपचार (Appendix home remedies)

  1. रोजाना नमक मिला कर छाछ पियें।
  2. कब्‍ज से दूरी बनाएं क्‍योंकि इससे कंडीशन और भी खराब हो सकती है।
  3. एक अच्‍छी डाइट लें, जिसमें ताजे फल और हरी पत्‍तेदार सब्‍जियां शामिल हों।
  4. डेयरी प्रोडक्‍ट्स, मीट और रिफाइंड शुगर ना खाएं।
  5. विटामिन बी, सी और ई को अपने भोजन में शामिल करे।
  6. अपने पेडु को छींकते, खांसते और हंसते वक्‍त अपने हाथों से सर्पोट दे कर पकड़ें, जिससे दर्द ना हो।
  7. थकान होने पर हमेशा आराम करें और अच्‍छी नींद लें।

 Appendix Treatment by Surgery

(सर्जरी के द्वारा अपेंडिक्स का  उपचार)

सर्जरी के जरिये ही अपेंडिक्स के संक्रमण का इलाज और समाधान किया जा सकता है! Surgery is only the treatment and protection of appendix.

  • पारंपरिक इलाज के अनुसार इसमे एक बडा और लम्बा कट लगाया जाता है
  • लेप्रोस्कोपी (इस तरीके मे 3-5मिलीमीटर तक के छेद किये जाते है और शरीर के भीतर एक दूरबीन के जरिये देखा जाता है! इस प्रक्रिया में लगभग 1 दिन लग जाता है!

चूँकि हमारे पेट में कई अंग होते हैं, इन अंगों की अनेक बीमारियों में पेटदर्द, बुखार, उल्टी आदि लक्षण समान ही होते हैं। साथ ही पेट के अनेक अंगों व दूसरे रोगों के भौतिक परीक्षण और पूर्व इतिहास भी मिलते-जुलते होते हैं इसलिए अपेंडिक्स को सुनिश्चित करने तथा इसके अंतिम निदान की समस्या प्रायः बनी ही रहती है। फिर भी पूरी तरह परीक्षण किए बगैर मामूली से या अन्य किसी कारण से होने वाले पेटदर्द के निदान के लिए इस अवशेषी अंग को निकाल फेंकना गलत है।

आंत के इस अवशिष्ट टुकड़े का एक सिरा खुला होता है और दूसरा सिरा पूरी तरह बंद। भोजन का कोई कण इसमें प्रवेश कर जाता है तो दूसरा सिरा बंद होने के कारण दूसरी ओर से यह निकल नहीं पाता। इसका परिणाम यह होता है कि अपेंडिक्स संक्रमित हो जाता है।

After Appendix Surgery

  • Appendicitis में ऑपरेशन हो जाने के बाद अगर निचे दिए लक्षणों में से कोई भी लक्षण नजर आते है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना / बुलाना चाहिए :
  1. बुखार
  2. पेट में ऑपरेशन किये हुए स्थान से pus आना
  3. बार-बार उलटी होना
  4. अधिक पेट दर्द
  5. चक्कर आना
  6. उलटी या पेशाब में रक्त / blood आना
  7. कब्ज

    Appendix का ऑपरेशन होने के बाद डॉक्टर की सलाह्नुसार

    (After surgery the doctor Appendix)

अपेंडिक्स का ऑपरेशन होने का बाद कुछ सवाधानी रखनी जरुरी है जो अक्सर डॉक्टर भी बोलते हैं

  1. दिए हुए समय तक आराम करना चाहिए
  2. कोई भरी काम नहीं करना चाहिए
  3. आराम से पाचन हो ऐसा आहार लेना चाहिए
  4. अगर खांसी आती हो तो पेट को आधार देना चाहिए
  5. डॉक्टर की सलाह्नुसार ही अपना काम या स्कूल join करे
  • ऐसे तो Appendicitis से बचने का कोई खास उपाय नहीं है पर अगर खाने में फाइबर की मात्रा अधिक हो और नियमित व्यायाम किया जाये तो इसे काफी हद तक टाला जा सकता हैं।

Appendix/Appendicitis में क्या सावधानी बरतनी चाहिए ?

जब तक आपको मेडिकली ट्रीटमेंट नहीं मिलता तो आपको निम्न बत्तों का ध्यान रखना चाहिये  :

    • पेटदर्द होने पर कुछ खाना-पीना नहीं चाहिए, कोई दर्दनाशक या पेट साफ़ करने की दवा नहीं लेनी चाहिए और रोगी के पेट पर मालिश बिलकुल नहीं करनी चाहिए। इससे पेट में सुजन बढ़ने का खतरा रहता हैं।
    • अधिक पेट दर्द और उलटी होने पर तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
    • जिन्हें पहले Appendicitis हुआ है और पहले ऑपरेशन नहीं किया है ऐसे रोगीओं ने पेट दर्द होते ही डॉक्टर से जांच करा कर आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर की सलाह्नुसार ऑपरेशन करा लेना चाहिए।
    • अपने मन से दर्दनाशक दवा लेकर दर्द दर्द को दबाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। दर्दनाशक दवाओ के कारण अपेंडिक्स फटने का खतरा अधिक रहता हैं।
    • बार-बार हल्का पेट दर्द और पतले या चिकना पैखाना (Stools) होने पर डॉक्टर से जांच कराना चाहिए। यह आगे जाकर होनेवाले Appendicitis के लक्षण होते हैं।
    • Appendicitis में ऑपरेशन हो जाने के बाद अगर निचे दिए लक्षणों में से कोई भी लक्षण नजर आते है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना / बुलाना चाहिए .

Appendix का खतरा अक्सर बरसात के मौसम में बढ़ जाता है क्योकि इस मौसम में हवा में नमी की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है और ये मौसम बक्टेरिया के और वायरस के संक्रमण के लिए काफी उपयुक्त मन जाता है और यही कारण है की Appendix के मामले बरसात के मौसम में अधिक देखने में आते है! अतः अधिक साफ़ सफाई का उचित ध्यान रखें और कोशिश करें की कोई भी ज्यादा तला भुना और ज्यादा मिर्च मसाले का प्रयोग ना करें .

Source Article :- http://swadeshichikitsha.blogspot.in/

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One thought on “Due Appendix Symptoms and Treatment

  1. Sir please aap apna Nomber de please.. Mujhe yahi problem lagti h PR ultrasound kal hi karaya kuch nahi nikla ..please …Nomber do sir Ji

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