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Alzehimer Disease :- स्मृति भ्रंश की रामबाण औषधी है मालकांगनी

Alzehimer Disease क्या है ?

Alzehimer Disease (अल्जाइमर रोग)  यह वह स्थिति है जब आप भूलने लगते हैं और आपके मस्तिष्क में याददाश्त , सोचने समझने की  क्षमता और भावात्मक वयव्हार को कण्ट्रोल करने वाली नसें या कोशिकाएं नष्ट होने लगती है  मस्तिष्क में एक विशिष्ट प्रोटीन (बीटा-एमिलायड प्रोटीन) के उत्पादन में वृद्धि या उसके एकत्र होने का परिणाम है जिससे तंत्रिका कोशिकाएं नष्ट होती हैं।

Alzehimer Disease

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Alzehimer Disease Symptoms (अल्जाइमर रोग के लक्षण) :

शुरुआत में इन लक्षणों को पहचान पाना कठिन होता है। किन्तु एक अवधि के बाद रोगी में निम्नानुसार लक्षण प्रकट हो सकते हैं।

  • हाल ही की घटनाओं को भूलना।
  • सही शब्द को खोजने और बातचीत को समझने में कठिनाई महसूस करना।
  • अच्छी तरह से जाने पहचाने स्थानों के रास्ते खोजने में असमर्थ हो जाना।
  • मनः स्थिति में अचानक बदलाव, कम सामाजिक कुशलता समस्याओं को हल करने की क्षमता और तार्किक विचारशीलता में कमी आना।

विश्व में सबसे ज्यादा Alzehimer Disease (अल्जाइमर रोग)  के मरीज चीन और अमेरिका में है। साल 2010 की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में 44 लाख, चीन में 54 लाख, भारत में 37 लाख, जर्मनी में 15 लाख, रूस में 12 लाख और जापान में 25 लाख मरीज हैं। विकासशील देशों में यह मर्ज तेजी से पांव पसार रहा है

बढ़ती उम्र के साथ यदि Alzehimer Disease (अल्जाइमर रोग) भूलना की बीमारी से बचना है तो डाइट में कॉपर की मात्रा कंट्रोल करनी होगी। शरीर में तय मात्रा से ज्यादा कॉपर होने से Alzehimer Disease (अल्जाइमर रोग)  होने की पूरी आशंका रहती है।

एनिमल और क्लीनिकल रिसर्च के बाद पीजीआई के बायोकेमेस्ट्री विभाग और इटली के वैज्ञानिकों ने माना कि शरीर के लिए कॉपर बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा नुकसानदायक साबित हो रही है।

कॉपर दिमाग में जाकर बीटा-एमिलॉयड नामक प्रोटीन को प्रभावित करता है और उससे Alzehimer Disease (अल्जाइमर रोग)   की आशंका बढ़ती है। अब तक अल्जाइमर होने की वजह का कोई पता न चल पाने से इसका कोई भी इलाज नहीं हैं। लेकिन पीजीआई के नए शोध से वैज्ञानिकों को उम्मीद जगी है।

पीजीआई बायोकेमेस्ट्री विभाग के शोधकर्ता डा. अमित पाल बताते हैं कि डब्ल्यूएचओ के मुताबिक हर उम्र के लिए कॉपर की डाइट निर्धारित है। यदि उससे ज्यादा मात्रा में कॉपर होगा तो उसे पचा पाने में लीवर अक्षम होता है।

इससे कॉपर की अतिरिक्त मात्रा ब्लड में और वहां से दिमाग में चली जाती है। दिमाग में बीटा-एमिलॉयड नाम का एक कॉपर बाइडिंग प्रोटीन होता है। जब कॉपर की मात्रा अधिक होने लगती है तो दिमाग में बीटा-एमिलॉयड जमने लगता है।

इससे Alzehimer Disease (अल्जाइमर रोग)  के लक्षण दिखने लगते हैं और धीरे-धीरे इनसान चीजों को भूलने लगता है। डा. अमित के अलावा इस रिसर्च में बायोकेमेस्ट्री के एचओडी राजेंद्र प्रसाद, इटली के वैज्ञानिक मारियाक्रिस्टिना सिटो व रोसना शामिल हैं। यह रिसर्च जल्द ही जनरल आफ एल्जाइमर डिजीज में पब्लिश होने जा रही है।

इनमें सबसे ज्यादा है कॉपर

फूड सर्विंग साइजकॉपर मात्रा
तिल1004.1 एमजी
कोको1003.8 एमजी
काजू1002.2 एमजी
समुद्री खाद्य1002.1 एमजी
सूरजमुखी का बीज1001.8 एमजी
धूप में सूखे टमाटर1001.4 एमजी
कद्दू1001.4 एमजी
तुलसी1001.4 एमजी

Alzehimer Disease की रामबाण औषधी है मालकंगनी

ज्योतिष्मति का नाम शायद आपने सुना हो . इसे हिन्दी में मालकांगनी कहते हैं . पंसारी की दुकान पर इसके बीज आसानी से प्राप्त हो जाते हैं . इसकी लता काफी ऊपर तक चढ़ जाती है . दो तीन साल बाद लाल छोटे – छोटे फल आते हैं . इन्ही फलों से निकले हुए बीजों से सात्विक बुद्धि बढ़ती है , एकाग्रता बढ़ती है और memory बढ़ती है .

इसका सबसे बड़ा उपयोग है आयुर्वेद मे जो बुद्धि बढ़ाने वाली दवाइयाँ हैं उनमे यह मालकंगनी भी है। विद्यार्थियो के लिए सर्दी मे यह अमृत है। च्यवन प्राश, कोड लीवर आयल आदि इसके सामने कोई गुण नहीं रखते। प्राचीन वैद्यो ने इसके स्मृति ,याददाश्त, मेमोरी बढ़ाने वाले गुण की बहुत प्रशंसा की है। इसका प्रभाव बढ़ाने के लिए इसके साथ साथ शंखपुष्पी चूर्ण का प्रयोग किया जा सकता है. 5 साल से लेकर 100 साल तक का कोई ही व्यक्ति इसका प्रयोग कर सकता है। मानसिक कार्य करने वालो के लिए गुणकारी है। वृद्धावस्था मे जब स्मृति भ्रंश (Alzimar’s Disease) हो जाता है तब भी यह काम करती है। जो व्यक्ति अपनी इच्छा से नशा छोडना चाहते हैं उन्हे भी इसका उपयोग करना चाहिए। इससे मानसिक शक्ति बढ़ती है और नशा छोडने से होने वाले दुष्प्रभावो मे कमी आती है।

माइग्रेन , या सिरदर्द हो या भयंकर दौरे पड़ते हों ; तो इसके 2-3 बीज तक ले सकते हैं . सवेरे सवेरे खाली पेट बीज कहकर दूध या पानी पी लें . मिर्गी में इसके बीज लेने के साथ साथ इसके बीजों के तेल की सिर में और माथे पर मालिश करें . स्मृति बढानी है तो , इसके तेल की 2-4 बूँद दूध में डालकर पीयें . नींद कम हो , तनाव रहता हो तो , इसके तेल की सिर में मालिश करें . केश तेल में इसका भी तेल मिला लें .छोटे बच्चों के सिर और माथे पर इसके तेल की मालिश करनी चाहिए।

डिप्रेशन जैसे मानसिक रोगो मे इसका बहुत अच्छा प्रभाव है। डिप्रेशन जैसे अनेक मानसिक रोगो मे मालकंगनी से तत्काल लाभ होता है। मनोरोग की एलोपैथी दवाइया प्रायः नींद को बढ़ाती है, परंतु यह नींद को सामन्य ही रखती है। सभी साइकोएक्टिव दवाइया (मानसिक रोगो की अङ्ग्रेज़ी दवाइया) सुस्ती लाती है, आँख, कान की शक्ति को कम करती है कमजोरी लाती है और खून की कमी कर देती है परंतु इसमे एसी कोई समस्या नहीं है। इसका प्रभाव बढ़ाने के लिए इसके साथ साथ शंखपुष्पी चूर्ण का प्रयोग किया जा सकता है.

मालकंगनी  के अन्य फायदे :-

Arthritis ,सूजन या मांसपेशियों में दर्द हो तो इसका 4-4 बूँद तेल सवेरे लें ;या फिर बीज ले लें .

शरीर में शक्ति और स्फूर्ति लानी है तो इसके 2 -3 बीज चबाकर सवेरे दूध या पानी के साथ कुछ दिन ले लें . यह कुछ गर्म होती है अत: एक साथ बहुत अधिक सेवन नहीं करना चाहिए.

60-70 वर्ष की अवस्था के पश्चात याददाश्त कुछ कम होनी प्रारम्भ हो जाती है । तब तो इसके एक या दो बीजों का सेवन अवश्य ही शुरू क्र देना चाहिए ।

ब्राह्मी , शंखपुष्पी आदि के साथ इसे भी मेधावटी में डाला जाता है .

वैसे तो यह पहाड़ी क्षेत्र की लता है ; परन्तु इसे बीज डालकर कहीं भी उगा सकते हैं .

आज बाजार मे मिलने वाले जीतने भी टॉनिक है (च्यवन प्राश, होर्लिक्स, बोर्नविटा, बूस्ट, बॉडी बिल्डिंग के सप्लीमेंट्स आदि ) यदि उन सब को भी बराबर मे रख दिया जाए तो हजारो रुपए के ये टॉनिक मालकंगनी के सामने कुछ नहीं है सर्दी मे इसके समान टॉनिक दूसरा कोई नहीं है गरीब के लिए सोना चांदी च्यवनप्राश से हजार गुना बेहतर है तो पढे लिखे मूर्ख के लिए होर्लिक्स से हजार गुणा गुणकारी है  स्वामी दयानन्द सरस्वती भी इसका एक बीज प्रतिदिन लेते थे .

Alzehimer Disease आज के समय में बढता ही जा रहा है उसका कारण है बहुत सी नशीले दवाइयां, झूठे विज्ञापन , हमारे फलों में बढती पेस्टिसाइड और इलेक्ट्रिक डिवाइस जिनके सिग्नल के दायरे या यो कहें की इनकी टावर के साथ कनेक्टिविटी के समय जो रेंज होती है वो मस्तिष्क के लिए नुक्सान दायक है यही वजह है की दिनों दिन Alzehimer Disease के रोगी बड़ते जा रहे हैं और हम अनजान है यदि अभी इसकी तरफ ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में हमे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे . सारा दिन टीवी, मोबाइल, केबल , इन्वर्टर जो नेगेटिव तरंगे छोड़ते हैं वो दिमाग के हिस्से को सुन्न करती हैं जय कारण Alzehimer Disease रोग और भी तेज़ी से फ़ैल रहा है दुनियाभर में 21 सितंबर को Alzehimer  दिवस मनाया जाता है

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