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स्वर्ण भस्म से शरीर को ताकतवर बनाने के चमत्कार

स्वर्ण भस्म (Swarna Bhasma) आयुर्वेद में हजारों साल से प्रयोग कर रहे हैं

स्वर्ण भस्म, स्वाद में यह मधुर, तिक्त, कषाय, गुण में लघु और स्निग्ध है। बहुत से लोग समझते हैं की स्वर्ण भस्म स्वभाव से गर्म / उष्ण है। लेकिन यह सत्य नहीं है।

स्वभाव से स्वर्ण भस्म शीतल है और मधुर विपाक है।

विपाक का अर्थ है जठराग्नि के संयोग से पाचन के समय उत्पन्न रस। इस प्रकार पदार्थ के पाचन के बाद जो रस बना वह पदार्थ का विपाक है। शरीर के पाचक रस जब पदार्थ से मिलते हैं तो उसमें कई परिवर्तन आते है और पूरी पची अवस्था में जब द्रव्य का सार और मल अलग हो जाते है, और जो रस बनता है, वही रस उसका विपाक है

मधुर विपाक, भारी, मल-मूत्र को साफ़ करने वाला होता है। यह कफ या चिकनाई का पोषक है। शरीर में शुक्र धातु, जिसमें पुरुष का वीर्य और स्त्री का आर्तव आता को बढ़ाता है। इसके सेवन से शरीर में निर्माण होते हैं।

  • रस (taste on tongue): मधुर, तिक्त, कषाय
  • गुण (Pharmacological Action): लघु, स्निग्ध
  • वीर्य (Potency): शीत
  • विपाक (transformed state after digestion): मधुर
  • कर्म:

  • वाजीकारक aphrodisiac
  • वीर्यवर्धक improves semen
  • हृदय cardiac stimulant
  • रसायन immunomodulator
  • कान्तिकारक complexion improving
  • आयुषकर longevity
  • मेद्य intellect promoting
  • विष नाशना antidote

स्वर्ण भस्म के लाभ/फ़ायदे Benefits of Swarna Bhasma

  1. स्वर्ण की भस्म, स्निग्ध, मेद्य, विषविकारहर, और उत्तम वृष्य है। यह तपेदिक, उन्माद शिजोफ्रेनिया, मस्तिष्क की कमजोरी, व शारीरिक बल की कमी में विशेष लाभप्रद है। आयुर्वेद में इसे शरीर के सभी रोगों को नष्ट करने वाली औषधि बताया गया है।
  2. स्वर्ण भस्म बुद्धि, मेधा, स्मरण शक्ति को पुष्ट करती है। यह शीतल, सुखदायक, तथा त्रिदोष के कारण उत्पन्न रोगों को नष्ट करती है। यह रुचिकारक, अग्निदीपक, वात पीड़ा शामक और विषहर है।
  3. यह खून की कमी को दूर करती है और शरीर में खून की कमी से होने वाले प्रभावों को नष्ट करती है।
  4. यह शरीर में हार्मोनल संतुलन करती है ।
  5. यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की कोशिकाओं के दोषों को दूर करती है।
  6. यह शरीर की सहज शरीर प्रतिक्रियाओं में सुधार लाती है।
  7. यह शरीर से दूषित पदार्थों को दूर करती है।
  8. यह प्रक्रियाओं को उत्तेजित करती है।
  9. यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को ठीक करती है।
  10. यह एनीमिया, और जीर्ण ज्वर के इलाज में उत्कृष्ट है।
  11. यह त्वचा की रंगत में सुधार लाती है।
  12. पुराने रोगों में इसका सेवन विशेष लाभप्रद है।
  13. यह क्षय रोग के इलाज के लिए उत्कृष्ट है।
  14. यह यौन शक्ति को बढ़ाती है।
  15. यह एंटीएजिंग है और बुढ़ापा दूर रखती है।
  16. यह झुर्रियों, त्वचा के ढीलेपन, सुस्ती, दुर्बलता, थकान, आदि में फायेमंद है।
  17. यह जोश, ऊर्जा और शक्ति को बनाए रखने में अत्यधिक प्रभावी है।

स्वर्ण भस्म के चिकित्सीय उपयोग Uses of Swarna Bhasma

  1. अवसाद
  2. अस्थमा, श्वास, कास
  3. अस्थिक्षय, अस्थि शोथ, अस्थि विकृति
  4. असाध्य रोग
  5. अरुचि
  6. कृमि रोग
  7. बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम करने के लिए
  8. विष का प्रभाव
  9. तंत्रिका तंत्र के रोग
  10. मनोवैज्ञानिक विकार, उन्माद, शिजोफ्रेनिया
  11. मिर्गी
  12. शरीर में कमजोरी कम करने के लिए
  13. रुमेटी गठिया
  14. यौन दुर्बलता, वीर्य की कमी, इरेक्टाइल डिसफंक्शन
  15. यक्ष्मा / तपेदिक

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Swarna Bhasma

  1. स्वर्ण भस्म को बहुत ही कम मात्रा में चिकित्सक की देख-रेख में लिया जाना चाहिए।
  2. सेवन की मात्रा 15-30 मिली ग्राम, दिन में दो बार है।
  3. इसे दूध, शहद, घी, आंवले के चूर्ण, वच के चूर्ण या रोग के अनुसार बताये अनुपान के साथ लेना चाहिए।

Article Source :- http://www.bimbim.in

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