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स्त्रियों के श्रृंगार का धार्मिक और विज्ञानिक विश्लेषण

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स्त्रियों के सोलह श्रृंगार

स्त्रियों को विवाह के बाद घर-परिवार की मान-प्रतिष्ठा का केंद्र माना जाता है। इसी वजह से शास्त्रों के अनुसार घर की स्त्रियों को विवाह के पश्चात्पू पूर्ण साज-सज्जा के साथ रहना चाहिए ऐसा नियम बताया गया है। ताकि घर की मान-प्रतिष्ठा बनी रहे। स्त्रियों को अनिवार्य रूप से प्रतिदिन 16 शृंगार करना चाहिए। माथे के बिंदी और सिन्दूर से लेकर पैरों की पायजब और बिछुआ कुछ ना कुछ कहते हैं आज हम स्त्रियों के श्रृंगार का धार्मिक और विज्ञानिक विश्लेषण करेंगे शादीशुदा स्त्रियों को यह जरुर पढना चाहिये हो सकता है आप को ये जानकारी ना हो की कौन से श्रृंगार का क्या महत्व है

शादी के बाद सुहागन स्त्रियां मांग में सिंदूर सजाती हैं क्योंकि यह सुहाग का चिन्ह माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे पति की उम्र लंबी होती है। जबकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण यह है कि सिंदूर माथे पर उस स्थान पर लगाया जाता है जहां भावनाओं को नियंत्रित करने वाली ग्रंथी मौजूद होती है। इससे मन और भावनाओं पर नियंत्रण बढ़ता है। साथ ही सिंदूर में मौजूद तत्व रक्त संचार के साथ ही यौन क्षमताओं को भी बढ़ाने का भी काम करते हैं जो वैवाहिक जीवन के लिए जरुरी माना जाता है।

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स्त्रियों अपने पैरों का श्रृंगार करने के लिए पाजेब और पायल पहनती हैं। इसका कारण यह है कि पायल न सिर्फ उनके पैरों की खूबसूरती को बढ़ाने का काम करता है बल्कि यह पैरों में एक रिंग का काम भी करता है। इस रिंग की वजह से शरीर से निकले वाली विद्घुत उर्जा वापस शरीर में लौट जाती है और पैरों में होने वाली कई परेशानियों से भी बचाती है। यह भी माना जाता है कि पायल पेट और शरीर के पिछले भाग में चर्बी को बढ़ने से रोकता है जिससे उनका शरीरिक गठन आकर्षक बना रहता है।

कानों में बाली और झुमके इसलिए नहीं पहनती हैं लड़कियां कि उनकी सुंदरता की तारीफ हो। असल में इसका वैज्ञानिक कारण है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार कान में ईयर रिंग धारण करने से चेहरे की त्वचा में कसापन आता है जिससे त्वचा पर ग्लो आता है। कर्ण छेदन करवाने से बौद्घिक क्षमता और सोचने समझने की क्षमता बढ़ जाती है।

सुहागन स्त्रियां हाथों में अंगूठी पहने या नहीं पहने पैरों में अंगूठी जैसे दिखने वाला गहना जिसे बिछुआ कहा जाता है जरुर पहनती हैं। इसका धार्मिक कारण सुहाग की लंबी उम्र से है जबकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण यह कहता है कि पैरों में अंगूठे के बाद जो दूसरी उंगली होती है उसकी ग्रंथी गर्भाशय और हृदय से होकर गुजरती है। बिछुआ पहनने से गर्भाशय को बल मिलता है और यौन क्षमता बढ़ती है साथ ही मासिक धर्म के समय होने वाली परेशानियों में कमी आती है।

शादी हो या तीज त्योहार महिलाएं अपने हाथों और पैरों में मेंहदी जरुर लगाती हैं। इसका कारण सिर्फ सौंदर्य बढ़ाना नहीं है बल्कि इसका संबंध स्वास्थ्य से है। मेंहदी का इस्तेमाल आयुर्वेद में कई रोगों की औषधी के रुप में किया जाता है। यह तनाव को दूर करने में कारगर होता है। यौन इच्छाओं को भी नियंत्रित करता है जो इन अवसरों पर आवश्यक माना जाता है।

स्त्रियों अपनी कलाई को सजाने के लिए चूड़िया पहनती हैं। लेकिन महिलाओं के अन्य श्रृंगार साधन की तरह चूड़ियां धारण करने का भी वैज्ञानिक कारण है। विज्ञान के अनुसार चूड़ियों के कारण कलाई में एक घर्षण उत्पन्न होता है जिससे कलाइयों में सुचारु रुप से रक्त संचार होता है। जिससे कलाईयों में होने वाली स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से बचाव होता है। साथ ही चूड़ियां शरीर से निकलने वाली उर्जा को वापस शरीर के अंदर पहुंचाने का भी काम करती है।

स्त्रियों  के सोलह श्रृंगार में नथिया और नोज पिन भी शामिल है। इन्हें महिलाएं अपने नाक के आगे के हिस्से में लगाती हैं। इससे उनकी खूबसूरती में चार चांद तो लगता ही है। यह उनके स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। विज्ञान की दृष्टि से नोज पिन सांस लेने की क्रिया में धूल मिट्टी के साथ आने वाले कीटाणुओं से बचाव करता होता है। यह नाक और श्वसन तंत्र को स्वस्थ्य रखने में भी सहायक होता है। नाक हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है क्यूंकि यहीं से हम वायु अपने शरीर के अंदर लेकर जीवन शक्ति उत्पन्न करते है, हमारे शरीर की तीन नाड़ियों का स्वर यही आकर मिलता है, सूर्य ,चन्द्र और सुषुम्ना , नथ पहनने से हमारी ज्ञान की शक्ति बड़ती है , और हमारे दिमाग में शक्ति का संचालन सही ढंग से होने लगता है |

मंगलसूत्र सुहाग की निशानी मानी जाती है इसलिए महिलाएं इसे अपने गले में धारण किए रहती हैं। मान्यता है कि इससे कपड़ों से ढककर रखना चाहिए। इससे पीछे कारण यह है कि आमतौर पर भारतीय महिलाएं पुरुषों से अधिक परिश्रम करती हैं। मंगलसूत्र रक्तसंचार को सुचारु बनाकर उनके तनाव और थकान को दूर करने में सहायक होता है। मंगलसूत्र सोने का बना होता है स्वर्ण का शरीर से स्पर्श शुभ और स्वास्थ्यवर्द्घक होता है। ज्योतिष की दृष्टि से यह धन और सुख बढ़ाने वाला होता है। इसलिए महिलाएं मंगलसूत्र धारण करती हैं।

हर कोई जानता है कि हम शादी की अंगूठी को अपने उलटे हाथ की चौथी यानी अनामिका उंगली पर ही पहनते हैं। यहां तक की विभिन्न संस्कृतियों और देशों में भी शादी की अंगूठी को अनामिका उंगली पर ही पहना जाता है। इसे एक सार्वभौमिक प्रतीक के तौर पर स्वीकार किया जाता है शादी की अंगूठी को अनामिका उंगुली में पहने के पीछे के अपने कारणों को खोजा। तो पता चला की उलटे हाथ की चौथी उंगली में एक ऐसी नस होती है जिसका जुड़ाव सीधे दिल से होता है। इस नस को वेना अमोरिस कहा जाता है। यह एक लैटिक शब्द है जिसका अर्थ- प्यार की नस होता है। इसकी वजह से शादी की अंगूठी को अनामिका उंगली में ही पहनते हैं।

पुराने जमाने में बाजूबंद का चलन हुआ करता था ,पर आजकल ज्यादा नहीं रह गया है | बाजूबंद हमारी कोहनी और कंधे के बिल्कुल बीचों बीच पहना जाता है , अगर हम इस हिस्से को बांधकर रखते है , यानि की हम बाजूबंद पहन कर रखते है तो यहां कुछ ऐसे Acupressure points होते है जो हमारी भूख और पेट से संबंधित बीमारियों को नियंत्रण में रखते हैं , अगर आप बाजूबंद पहनते हैं तो जिनको गैस और धूप के कारण Migraine या सर दर्द जैसी शिकायतें है वो इन बीमारियों से निजात पा सकते है , तनाव से होने वाले सर दर्द में भी यह बाजूबंद पहनना चाहिए , और अगर आप सोना , चांदी और तांबे से बना हुआ त्रिधातु का बाजूबंद पहनते है तो यह आपका लिवर और भूख को ठीक रखता है |

नाभि हमारे पूरे शरीर का ऊर्जा का केंद्र है, Kidney, urine, liver, carbohydrate management, uterus यह सब यही से नियंत्रित होता है, नाभि हमारी मानसिक शक्ति को भी नियंत्रित रखती है, अगर इन में से आपको कहीं पर भी दिक्कत आ रही है तो कमरबंद पहना चाहिए नाभि से तीन उंगल ऊपर या नीचे |

गजरा :- गूँथे हुये बालों में गजरा लगाया जाता है. गजरा सुगंधित पुष्पों से माला के आकार में बनाई जाती है. मुख्य रूप से गजरे बेला (एक प्रकार का फूल) से बने होते हैं

केशों को तीन तरह के आकार दिये जाते हैं. इसके पीछे मान्यता यह है कि

चोटियों के ये तीन आकार भारत की तीन पवित्र नदियों गंगा, यमुना, सरस्वती की प्रतीक मानी जाती है

चोटियों के ये तीन आकार ईश्वर के त्रिरूप ब्रह्मा, विष्णु, महेश के प्रतीक के रूप में देखी जाती है

एक मान्यता यह भी है कि दुल्हन के खुले केश वर को अपने वशीभूत कर सकते हैं. इसलिये दुल्हन के केशों को बाँध दिया जाता है

पहले दीपक या मिट्टी की कालिख से काजल बनाई जाती थी. यह पलकों पर लगाई जाती है इससे दुल्हन बुरी नज़रों से बच जाती है. इस प्रकार यह दुल्हन को सुरक्षित रखती है और क्योंकि वो काजल मिट्टी के दिए पर किसी दिए को जलाकर उसपर बादाम से धुआं को इकठा कर के बनाया जाता है जो आँखों के लिए किसी औषधी से कम नहीं

शादी के दिन अक्सर दुल्हन लाल के जोड़े में नजर आती है। यह लंबे समय से चलता आ रहा है और भारत में तो लाल रंग के बिना किसी शादी की कल्पना भी नहीं की जा सकती। तो आखिर दुल्हन शादी के दिन लाल रंग का ही जोड़ा क्यों पहनती है। वैज्ञानिकों की मानें तो लाल रंग में महिलाएं सबसे ज्यादा सुंदर दिखती हैं और पुरूष उनकी तरफ ज्यादा आकर्षित होते हैं।

 

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