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सोमवती अमावस्या और कुटुम्बेश्वर महादेव

सोमवती अमावस्या और कुटुम्बेश्वर महादेव

सोमवती अमावस्या और कुटुम्बेश्वर महादेव :- साक्षात भगवान शिवजी ने संसार के हित के लिए कहा था कि सोमवती अमावस्या के दिन कुटुम्बेश्वर के दर्शन से कुटुंब की वृद्धि होगी। इस दिव्य लिंग के दर्शन करने से सब पाप दूर होते हैं। रविवार, सोमवार,अष्टमी, चर्तुदशी व सोमवती अमावस्या को क्षिप्रा में स्नान कर जो कुटुम्बेश्वर का दर्शन करता है उसे एक हजार राजसूर्य तथा सौ वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है।

स्कंद पुराणान्तर्गत अवंतिका महात्म्य में चौरासी महादेव के अंतर्गत 14वें नंबर पर आने वाले कुटुम्बेश्वर महादेव का महत्व बताया गया है। उनकी कथा का इस प्रकार है –

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एक समय देवता और दानवों ने क्षीर-समुद्र का मंथन किया उससे विष उत्पन्न हुआ। विष की ज्वाला से देव दानव घबरा गए। वे शिवजी के पास गए। उनसे विष से रक्षा के लिए प्रार्थना की तब शिवजी ने मोर का रूप धारण कर उस विष को अपने गले मे धारण कर लिया। परंतु विष से वे भी घबरा गए। तब शिवजी ने क्षिप्रा से कहा कि तुम इस विष को ले जाकर महाकाल वन में कामेश्वर के सामने स्थित लिंग में स्थापित कर दो।
मां क्षिप्रा नदी ने वह विष लिया और उस दिव्य लिंग में डाल दिया। विष के प्रभाव से जो भी प्राणी उनका दर्शन करता मृत्यु को प्राप्त हो जाता था। वहां कुछ ब्राह्मण तीर्थयात्रा करने आए। उन्होने उस लिंग के दर्शन किए और देह त्याग दी। तब हाहाकार मच गया। शिवजी ने उन ब्राह्मणों को पुनर्जीवित किया।

तब उन ब्राह्मणों ने निवेदन किया कि भगवन! इस दिव्य लिंग के विष प्रभाव को दूर करो। तब शिवजी ने संसार के हित के लिए कहा – जब राजा लकुलीश यहां आएंगे तब इसके विष का प्रभाव दूर हो जाएगा। फिर इसके दर्शन से कुटुंब की वृद्धि होगी। इसे कुटुम्बेश्वर कहेंगे।

इस तरह लिंग के विष का प्रभाव दूर हुआ। इस लिंग दर्शन करने से सब पाप दूर होते है। रविवार, सोमवार,अष्टमी, चर्तुदशी व सोमवती अमावस्या को क्षिप्रा में स्नान कर जो कुटुम्बेश्वर का दर्शन करता है उसे एक हजार राजसूर्य तथा सौ वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है।
विशेष फल
जिन जातक या जातिका की कुंडली में यदि षष्ठ भाव, अष्टम भाव द्वादश भाव में शनि व चंद्र की युति हो व चंद्रमा यदि शनि की राशि में षष्ठ भाव, अष्टम भाव व द्वादश भाव में युति कर रहा हो तो यह युति भी एक तरह से विष का काम करती है। जिससे मनुष्य को अनेक कठिनाईयों का सामना करना पडता है।

अतः जो व्यक्ति उज्जैन में सिंहपुरी मोहल्ले में ‍स्थित कुटुंबेश्वर महादेव में सोमवती अमावस के दिन यदि शहद के साथ रूद्र अभिषेक करें तो इस युति का दोष दूर होकर उसे विशेष फल प्राप्त होता है। यह लिंग उज्जैन में सिंहपुरी मोहल्ला में स्थित है।

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