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सूर्य की लाल रश्मियों का सेवन करने वाले को कभी हृदय रोग नहीं होता

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सूर्य की लाल रश्मियों का सेवन क्यों जरुरी है ?

सूर्य पृथ्वी पर स्थित रोगाणुओं कृमियों (Microbes worms) को नष्ट करके प्रतिदिन रश्मियों का सेवन करने वाले व्यक्ति को दीर्घायु भी प्रदान करता है| सूर्य की रोग नाशक शक्ति (Disease-defeating power) के बारे में अथर्ववेद के एक मंत्र में स्पष्ट कहा गया है कि सूर्य औषधि बनाता है, विश्व में प्राण रूप है तथा अपनी रश्मियों द्वारा जीवों का स्वास्थ्य ठीक रखता है, किन्तु ज्यादातर लोग अज्ञानवश अन्धेरे स्थानों में रहते है और सूर्य की शक्ति से लाभ नहीं उठाते | अथर्ववेद में कहा गया है कि सूर्योदय के समय सूर्य की लाल किरणों के प्रकाश में खुले शरीर बैठने से हृदय रोगों (Cardiovascular diseases) तथा पीलिया (jaundice) के रोग में लाभ होता है|

वेदों में सूर्य पूजा का महत्व

वेदों में सूर्य पूजा का महत्व है| प्राचीन ऋषि-मुनियों ने सूर्य शक्ति (Sun Power) प्राप्त करके प्राकृतिक जीवन व्यतीत करने का सन्देश मानव जाति को दिया था| सूर्य चिकित्सा पूर्ण रूप से एक प्राकृतिक उपचार है अब यह वैज्ञानिक पद्धति भी है और एक धार्मिक अनुष्ठान भी है। पुराने समय से जब सूर्य उपासना होती थी उसमे लोगो की श्रद्धा और विश्वास का समन्वय था, वो अब भी चला आ रहा है …
पहले सूर्य पूजा को सिर्फ़ एक धार्मिक अनुष्ठान माना जाता था। पर अब इसे वैज्ञानिक पुष्टि मिलती जा रही है , और अब यह चिकित्सा पद्धति के रूप मे अग्रसर हो रहा है। एक गलत अवधारणा के अनुसार ऐसा माना जाता है कि इससे हानि होने की सम्भावना है जैसे कि कई तरह के कई चर्म रोग हो जाते हैं पर सही तरीके से इसका सेवन करें तो बस फायदे ही फायदे हैं.. और यह तो हम सब जानते हैं कि “अति सर्वत्र वर्जयेत ” ।
जहां सूर्य की किरणें पहुंचती हैं, वहां रोग के कीटाणु स्वत: मर जाते हैं और रोगों का जन्म ही नहीं हो पाता| सूर्य अपनी किरणों द्वारा अनेक प्रकार के आवश्यक तत्वों की वर्षा करता है और उन तत्वों को शरीर में ग्रहण करने से असाध्य रोग भी दूर हो जाते हैं|
प्राकृतिक चिकित्सा में आन्तरिक रोगों को ठीक करने के लिए भी नंगे बदन सूर्य स्नान कराया जाता है | आजकल जो बच्चे पैदा होते ही पीलिया रोग के शिकार हो जाते हैं उन्हें सूर्योदय के समय सूर्य किरणों में लिटाया जाता है जिससे अल्ट्रा-वायलेट किरणों (Ultra-violet rays) के सम्पर्क में आने से उनके शरीर के पिगमेन्ट सेल्स (Pigments Cells)पर रासायनिक प्रतिक्रिया (chemical reaction) प्रारम्भ हो जाती है और बीमारी में लाभ होता है| डाक्टर भी नर्सरी में कृत्रिम अल्ट्रावायलेट किरणों (Artificial ultraviolet rays) की व्यवस्था लैम्प आदि जला कर भी करते हैं|
ध्यान रहे की सुर्य चिकित्सा दिखता तो आसान है पर विशेषज्ञ से सलाह लिये बिना ना ही शुरू करें। जैसा की हम जानते हैं कि सूर्य की रोशनी में सात रंग शामिल हैं .. और इन सब रंगो के अपने अपने गुण और लाभ है …
1. लाल रंग  :  यह ज्वार, दमा, खाँसी, मलेरिया, सर्दी, ज़ुकाम, सिर दर्द और पेट के विकार आदि में लाभ कारक है
Red: The tide, asthma, cough, malaria, cold, cold, headache and stomach disorders etc. gain factor
2. हरा रंग  :  यह स्नायुरोग, नाडी संस्थान के रोग, लिवर के रोग, श्वास रोग आदि को दूर करने में सहायक है
Green: The Neuropathy, nerve institution disease, liver disease, respiratory disease, and is helpful in removing
3. पीला रंग  :   चोट ,घाव रक्तस्राव, उच्च रक्तचाप, दिल के रोग, अतिसार आदि में फ़ायदा करता है
Yello: injury, wound bleeding, high blood pressure, heart disease, diarrhea is the advantage
4. नीला रंग  :  दाह, अपच, मधुमेह आदि में लाभकारी है
4. Blue: inflammation, indigestion, etc. is beneficial in diabetes
5. बैंगनी रंग  :   श्वास रोग, सर्दी, खाँसी, मिर् गी ..दाँतो के रोग में सहायक है
Purple: respiratory disease, cold, cough, the disease is helpful
6. नारंगी रंग  :  वात रोग . अम्लपित्त, अनिद्रा, कान के रोग दूर करता है
Orange: gout. Acidity, insomnia, ear is healing
7. आसमानी रंग  :  स्नायु रोग, यौनरोग, सरदर्द, सर्दी- जुकाम आदि में सहायक है |
sky blue: neurology, Yunrog, headache, chill Srdi- assistant |
सूरज का प्रकाश रोगी के कपड़ो और कमरे के रंग के साथ मिलकर रोगी को प्रभावित करता है। अतः दैनिक जीवन मे हम अपने जरूरत के अनुसार अपने परिवेश एव कपड़ो के रंग इत्यादि मे फेरबदल करके बहुत सारे फायदे उठा सकते हैं। हमे जिस रंग की ज़रूरत हो हम उसका इस्तेमाल करके अपने रोग दूर कर सकते हैं । सुर्य चिकित्सा मे पानी, क्रिस्टल, सुर्य स्नान, सुर्य प्राणायाम, इत्यादि तरीके अपनाये जाते हैं
जो रोगी की बीमारी एवं दशा  देखकर निर्धारित किया जाता है। सूर्य नमस्कार योग तो अपने आपमे संपन्न योग है, इससे मिलने वाले लाभ से कोई भी अनभिज्ञ नही है। अब तो सूर्य मंत्रो को और सुबह जल- अर्घ्य को भी महत्वता मिलती जा रही है। जलार्पण के लिये भी निर्दिष्ट नियम हैं, और इसका पालन करके हम कई तरह के समस्याओ से निजात भी पा सकते हैं।
इस तरह हम कह सकते हैं कि आज के दौर मे सुर्य चिकित्सा हमारे जीवन के हरेक पहलू मे कारगर है, शायद इसी कारण से हमारे पुर्वजो ने सूर्य उपासना पर बल दिया था, ताकि हम रोज ही खुद को सुख समृद्धि के दिशा मे अग्रसित हो।
सूर्य से निकलने वाली रोशनी में विटामिन डी (Vitamin D) होता है जिसकी कमी से शरीर में मेटाबोलिक हड्डियों की बीमारी हो जाती है जो युवाओं में होने वाली गंभीर बीमारी है। यह हमारे शरीर में विटामिन डी (Vitamin D)की कमी को पूरा करता है। सूर्य के प्रकाश के लाभ सिर्फ विटामिन डी (Vitamin D)तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसके कई अन्‍य लाभ भी होते हैं और कई दूसरी बीमारियों से भी बचाव होता है।

सूर्य उपासना के लाभ/फायदे

अच्‍छी नींद आती है :- धूप सेंककर आप रात में अच्‍छी नींद ले सकते हैं। दरअसल सूर्य की रोशनी में बैठने से शरीर में मेलाटो‍निन (Melatonin) नाम का हार्मोन विकसित होता है जिससे रात में अच्‍छी नींद आती है। इस तरह अनिद्रा (Insomnia) की बीमारी भी इससे दूर जाती है। यानी रात में बेहतर नींद के लिए सूर्य से प्‍यार कीजिए।
वजन घटायें :- वजन घटाने (Reduce Weight) के लिए आप कई तरीके आजमाते और बहुत मेहनत भी करते हैं। लेकिन आप यह जानकर हैरान न हों कि वजन कम करने में सूर्य आपकी सहायता कर सकते हैं। दिन में धूप में बैठने से आपको वजन घटाने में सहायता मिल सकती है। एक शोध के मुताबिक यह बात सामने आई है कि सूर्य के प्रकाश और बीएमआई के बीच एक अच्‍छा सम्‍बंध होता है।
ठंड दूर भगाये :- अगर आप सर्दी से के मौसम में ठंड से कांप रहे हैं तो सूर्य की रोशनी में जाइये जनाब, यह एक प्राकृतिक अलाव है जो ठंड दूर करेगा और आपको बीमारियों से भी बचायेगा।
हड्डियां मजबूत बनायें :- हड्डियों को सही तरीके से पोषण न मिलने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों से संबंधित बीमारियां जैसे – गठिया, गाउट (Arthritis, gout) आदि होने की संभावना बढ़ जाती है। जबकि सूर्य की रोशनी में बैठने से हड्डियां मजबूत होती हैं क्‍योंकि इसमें विटामिन डी होता है।
इम्‍यून सिस्‍टम को मजबूत बनाये :- इम्‍यून सिस्‍टम (Immune System) अगर कमजोर हो जाये तो पेट संबंधित कई तरह के रोग हो जाते हैं, इसलिए इसे मजबूत बनाये रखना जरूरी है। धूप से शरीर का इम्‍यून सिस्‍टम (Immune System) मजबूत हो जाता है। सूर्य से निकलने वाली अल्‍ट्रावॉयलेट किरणें इम्‍यून सिस्‍टम की हाईपरएक्टिविटी (Ultraviolet rays hyperactivity of the immune system) को नकारती हैं और सोराईसिस (Psoriasis) जैसी बीमारियों से बचाव करती हैं।
उम्र बढ़ती है :- अगर आपकी चाहत लंबी उम्र पाने की है तो नियमित रूप से धूप से स्‍नान कीजिए। क्‍योंकि यह खून जमने(Blood clotting) , डायबिटीज एवं ट्यूमर (Diabetes and tumors) को ठीक करता है, प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाता है एवं पैरों में खून जमने का खतरा बिल्कुल नहीं रहता। ठंडे क्षेत्र में शीतकाल में यह खतरा ज्यादा रहता है। यह डायबिटीज जैसी बीमारी से भी बचाव करता है और अन्‍य बीमारियों से बचाता है। अगर ये सारी समस्‍यायें न हों तो उम्र बढ़ेगी ही।
बांझपन दूर करे :- यदि पुरुष बांझपन (Infertility) के शिकार हैं तो उनके लिए सूर्य धूप रामबाण दवा की तरह है। धूप सेंकने से शुक्राणुओं  (Sperm) की गुणवत्ता में सुधार आता है। खून में सूर्य धूप से मिले विटामिन डी के बढ़ने के कारण ऐसा होता है। इसके अलावा यह वियाग्रा दवा की भांति भी काम करता है। यह टेस्टोस्टोरेन हार्मोन (Testosterone hormone) के स्राव को भी बढ़ाता है।
दिमाग को स्‍वस्‍थ रखे :- सूर्य से निकलने वाले प्रकाश में मौजूद विटामिन डी से दिमाग स्वस्थ रहता है। विटामिन डी भविष्‍य में होने वाली बीमारी सीजोफ्रेनिया (पागलपन की बीमारी) Schizophrenia (madness disease) के खतरे को कम करता है। यह दिमाग को स्वस्थ रखता है और इसके संतुलित विकास में सहायता प्रदान करता है। गर्भवती महिला के धूप सेंकने से यह लाभ बच्‍चे को भी मिलता है।
दिल के रोगों से बचाये :- सूर्य से मिलने वाले विटामिन डी से हड्डियां और मांसपेशियां (Muscles) मजबूत होती है और कैंसर (Cancer) का खतरा कम होता है। यह मेटाबॉलिज्‍म (Metabolism) को सुधारता है जिससे मधुमेह एवं हृदय रोग काबू में रहते हैं। धूप दिल की बीमारियों को रोकने में मददगार होता है।
सूर्य की किरणें मनुष्य के रक्तचाप (blood pressure) को कम करने में सहायता प्रदान करती हैं जिससे दिल के दौरे (Heart Attack) का ख़तरा बहुत सीमा तक कम हो जाता है।
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