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सिर दर्द के कारण लक्षण और परहेज

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सिर दर्द में कपाल (ललाट) के दोनों ओर की कनपटियों में तेज दर्द होता है जिसे सिर दर्द कहते हैं। सिर दर्द 11 तरह के होते हैं- वातज, शंखक, अर्द्धविभेदक, सन्निपातज, रक्तज, क्षयज, पित्तज, कफज, कृमिज, सूर्यावर्त और अनन्तवात। सिर दर्द अपने आप में कोई रोग नहीं है और यदि सिर दर्द बिना किसी कारण के उत्पन्न होता है तो यह 2 या 3 दिन में अपने आप ठीक हो जाता है।

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कारण :

  • सिर की नसों से अधिक खून बहने के कारण सिर दर्द हो सकता है।
  • रक्तचाप (ब्लडप्रैशर) बढ़ जाने या कम होने पर भी सिर दर्द होता है।
  • बुखार में मस्तिकावरणगत धमनियों में फैल जाने के कारण सिर दर्द होता है।
  • अधिक गुस्सा करने से दिमाग पर जोर पड़ता है जिससे सिर दर्द होता है।
  • अधिक चिन्ता करने से दिमाग की मांसपेशियों में तनाव बढ़ जाने के कारण सिर दर्द होता है।
  • नींद कम आने और नींद न आने से सिर दर्द होता है।
  • खून में जहरीले द्रव्य बनना, मूत्र रोग, कब्ज और अपच आदि पैदा होने के कारण सिर दर्द होता है।
  • सिर में फोड़ा, सूजन और पानी भरने से सिर दर्द होता है।
  • आंखों की कमजोरी एवं आंख, कान, नाक, गले और दांतों के रोग होने पर भी सिर दर्द होता है।
  • बुखार, सर्दी-जुकाम, गर्मी की अधिकता, खून की कमी, दिमाग की कमजोरी, खून में खराबी, शरीर के किसी अंग का रोगग्रस्त होना, मधुमेह आदि रोगों के कारण भी सिर दर्द होता है।
  • अधिक काम करने, एक ही काम को लगातार करने तथा एक ही वातावरण में लम्बे समय तक रहने के कारण भी सिर दर्द होता है।
  • अधिक देर तक किताब पढ़ने, बिस्तर पर लेट कर टेलीविजन देखने और धूप में अधिक देर तक घूमने से सिर दर्द होता है।

लक्षण :

सिर दर्द से पीड़ित रोगी में अनेक प्रकार के लक्षण उत्पन्न होते हैं जिनकी वजह से सिर दर्द के रोगी को पहचाना जा सकता है। सिर दर्द के रोगी में विभिन्न प्रकार के लक्षण उत्पन्न होते हैं-

  • नकसीर बहना (नाक से खून आना), धड़कन तेज होना, नज़र का धुंधलापन, बेचैनी, सिर फटने जैसा महसूस होना एवं कभी-कभी उल्टी आना आदि।
  • सिर के दूसरी तरफ दर्द होना और आंखों में भारीपन महसूस होना।
  • कफ के कारण उत्पन्न सिर दर्द में जब दिमाग कफ से जकड़ जाता है तो रोगी को सिर भारी व छूने से ठंड़ा महसूस होता है।
  • वात सिर दर्द में अचानक दर्द उठता है जो रात को और अधिक बढ़ जाता है।
  • पित्तज सिर दर्द में रोगी का सिर दिन में आग की तरह गर्म और रात में बहुत ठंड़ा हो जाता है।
  • सन्निपातज सिर दर्द में वातज, पित्तज और कफज के लक्षण ही पाए जाते हैं।
  • क्षयज सिर दर्द में सुईं के चुभने की तरह दर्द होता है। इसमें बेहोशी उत्पन्न होना और आंखों की पुतलियां का फिरना आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं।
  • कीड़ों के कारण उत्पन्न (कृमिज) सिर दर्द में नाक से पानी गिरता है, कफ के साथ खून आता है और सिर के अन्दर जकड़न महसूस होती है।
  • सूर्यावर्त सिर दर्द में सूरज निकलने के साथ सिर दर्द शुरू होता है और दोपहर तक बढ़कर सूरज डूबने के साथ धीरे-धीरे शाम तक दर्द समाप्त हो जाता है।
  • अनन्तवात के सिर रोग में आंखों, गर्दन और सिर की नसों में दर्द होता है।
  • शंखक सिर दर्द में कनपटी में तेज दर्द होता है और सिर में जलन के अलावा लाल रंग की सूजन आ जाती है।
  • अर्धविभेदक सिर दर्द में एक ओर की कनपटी, आंख, भौंह, कान और माथे में बहुत तेज दर्द होता है।
  • रक्तज सिर दर्द में पित्तज सिर दर्द के समान लक्षण उत्पन्न होते हैं।

भोजन और परहेज :

सिर दर्द से पीड़ित रोगियों के लिए दाल, पुराना घी, करेला, आंवला, बथुआ, अनार, बिजौरा नींबू, आम, नारियल, तेल, मट्ठा, कांजी, शालि चावल, सांठी के चावल करना लाभकारी होता है।

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मल-मूत्र को रोकना, दिन में सोना और विरुद्ध अन्न का सेवन करना आदि सिर दर्द के रोगियों के लिए हानिकारक होता है। धूप में घूमना, रात को देर से सोना  से बचना चाहिए।

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