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साबुन(Soap) कहीं आप की सेहत से खिलवाड़ तो नहीं कर रहा

साबुन(Soap)

साबुन(Soap) हमारे देश में कई स्वदेशी और विदेशी कंपनियां बना रही है। साबुन(Soap) प्रत्येक परिवार की मूलभूतआवश्यकता है। एक 2012 में स्वदेशी परिवार के सर्वे के अनुसार हमारे देश में 3735 प्रकार के स्वदेशी भारतीय तकनीक से साबुन(Soap) बनाये जाते थे और हमारे कई स्वदेशी प्रेमी 2012 के बाद इस काम में लगे जिसमे से 100 से ज्यादा साथियो ने पंचगव्य के ऊपर कार्य किया और अपने अपने क्षेत्र में सैकडो ब्रांड निकाल चुके है उसमे एक हमारे साथी है विजय भाई । विजय भाई ने रिकार्ड सबका तोड़ दिया 20000 साबुन(Soap) हैंडमेड कुछ ही दिनों में बनाये एक गोशाला में ।आज विजय भाई साबुन(Soap) बनाने में माहिर है और अपने आसपास के अनेक परिवारो में पंचगव्य का साबुन(Soap) उपलब्ध करवाते है

लोगो के मन में अनेक सन्देह और प्रश्न उठते है कि गोमूत्र से क्या नहाया जा सकता है लेकिन मैं आपको अपने व्यक्तिगत अनुभव बता रहा हु की पिछले कुछ बर्षो से मै स्वयं पंचगव्य के उत्पादों का अपने जीवन में प्रयोग कर रहा हु । काफी समय से ऐसे ही अनेक साथी लगे हुए है जो गोमाता के महत्व को सम्पूर्ण भारत में बता रहे है ऐसे ही भाई मनीष सोनी जी है जो अनेक गोशालाओं को स्वावलंबी कर रहे है । जोधपुर में गोसंवर्धन आश्रम है काफी समय से उसमे कोई भी उत्पाद नही बन पा रहे थे भाई राकेश जी ने बहुत कोशिश भी की लेकिन आज इस आश्रम में मनीष भाई और उनकी टीम ने मिलकर बहुत बड़ा कार्य किया ऐसा राकेश भाई का कहना है राकेश भाई इसी आश्रम में काफी लंबे समय से गोमाता की सेवा कर रहे है ।

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आज मनीष भाई की प्रेरणा से इस आश्रम में साबुन(Soap) ,शेम्पु ,दन्तमंजन ,गोमूत्र अर्क ,फेस पैक हैडवाश, डिशवाश और गोनाइल जैसे अनेक पंचगव्य से निर्मित उत्पाद तैयार हो रहे है भाई मनीष जी का प्रयास बहुत ही सराहनीय है । लोग गोबर गोमूत्र के नाम से नाक उठाते थे और जो भी मनीष भाई पंचगव्य का सामान बनाते है हाथो हाथ बिक जाता है साबुन(Soap) तो पता ही नही चलता।
किसी भी गोशाला में पंचगव्य के उत्पाद बनाने के लिये आप 9785502200 पर संपर्क करे।
वाट्सअप के लिए नम्बर 09672429054 पर सन्देश भेजे
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पंचगव्य स्वदेशी उत्पाद सर्च करे ।

साबुन(Soap) के बनाने की प्रक्रिया

साबून(Soap) हमारे दैनिक उपयोग में आने वाला एक महत्वपूर्ण उत्पाद है I साबुन(Soap) रासायनिक और आयुर्वेदिक/हर्बल दो प्रकार के होते हैंI सामन्यता हम टेलीविजन पर आने वाले विज्ञापनों को देख कर दैनिक उपयोग में आने वाले साबुन(Soap) का चुनाव करते हैंI
आइये एक दृष्टि डाले साबुन(Soap) के बनाने की प्रक्रिया और साबुन(Soap) के महत्त्वपूर्ण घटकों पर I साबुन(Soap) बनाने की प्रक्रिया में ३ महत्त्वपूर्ण घटक वसीय अम्ल ,कास्टिक सोडा और पानी होते हैंI

वसीय अम्ल या (FATTY ACID ) : वसीय अम्ल का मुख्य स्रोत नारियल जैतून या ताड़ के पेड़ होते हैं, इसे जानवरों की चर्बी से भी निकाला जाता है,जिसे टालो(TALLOW ) कहते हैं जो की बूचड़खाने से मिलता हैIटालो से निकले जाना वसीय अम्ल अपेक्षाकृत सस्ता होता हैIइस वसीय अम्ल(FATTY ACID ) से सोडियम लौरेल सल्फेट(SLS ) का निर्माण होता है जो झाग बनाने में प्रयुक्त होता हैI

यदि आप शाकाहारी हैं तो अपने साबून(Soap) के रैपर पर ध्यान से देखें की कही छोटे अक्षरों में (TALLOW ) तो नहीं लिखा हैIसाबुन(Soap) के वर्गीकरण से पहले हमे

इस आधार पर हम सामान्यतया रासायनिक साबून(Soap) को ३ भागो में वर्गीकृत कर सकते हैं:कार्बोलिक साबून(Soap), ट्वायलेट साबून,और नहाने का साबून या बाथिंग बारI

१ कार्बोलिक साबून (CARBOLIC SOAP ) :GRADE 3 SOAP : यह साबून सबसे घटिया दर्जे का साबुन होता हैIइसमें फिनायल की कुछ मात्रा होती है जो सामन्यतया फर्श या जानवरों के शरीर में लगे कीड़े मारने के लिए प्रयुक्त किया जाता हैIयूरोपीय देशों में इसे एनिमल सोप या जानवरों के नहाने का साबुन(Soap) भी कहते हैंIभारत में इस श्रेणी का साबुन(Soap) लाइफबॉय हैI

२ ट्वायलेट साबुन(Soap) :GRADE 2 SOAP : यह गुणवत्ता के आधार पर दूसरे दर्जे का साबुन(Soap) होता हैIट्वायलेट सोप का उपयोग सामन्यतया शौच इत्यादि के बाद हाथ धोने के लिए होता हैI इससे इस्तेमाल से त्वचा पर होने वाली हानि कार्बोलिक साबुन(Soap) की अपेक्षा कम होती हैIभारत में इस श्रेणी का साबुन(Soap) बहुत बिक रहा है

३ नहाने का साबुन(Soap) या बाथिंग बार.: GRADE 1 SOAP :गुणवत्ता के आधार पर सर्वोत्तम साबुन है तथा इसका उपयोग स्नान के लिए किया जाता हैI

इस साबुन के रसायनों से त्वचा पर होने वाली हानि न्यूनतम होती है.

साबुन में झाग के लिए इस्तेमाल होने वाले रसायन सोडियम लारेल सल्फेट से त्वचा की कोशिकाएं शुष्क हो जाती हैं और कोशिकाओं के मृत होने की संभावना रहती है.यह आँखों के लए अत्यंत हानिकारक है नहाते समय साबुन यदि आँखों में चला जाये तो इसी रसायन के असर से हमे तीव्र जलन का अनुभव होता है,त्वचा पर खुजली और दाद की संभावना होती है.

ये सारे प्रकार हुए रासायनिक साबून(Soap) के अतः कोई भी रासायनिक साबून(Soap) त्वचा के लिए लाभदायक नहीं है कम हानि के लिए साबुन(Soap) के रैपर पर TFM की मात्रा ७६% से अधिक देखकर लेIये साबून(Soap) नहाने का साबून(Soap) या बाथिंग बार की श्रेणी में आते हैं बाकी के सभी साबुन(Soap) या तो जानवरों के नहालने के लिए प्रयोग होने वाले हैं या शौचालय से आने के बाद हाथ धोने के लिएI

हर्बल और आयुर्वेदिक साबुन(Soap): ये एक अन्य प्रकार का साबुन(Soap) है जो लगभग पूर्ण रूप से रसायनों से रहित(CHEMICAL FREE ) होता हैIइसको बनाने में मुख्य रूप से भारत में पैदा होने वाले तथा घरों में इस्तेमाल होने वाले सौन्दर्य प्रसाधन होते हैं जो की निम्नलिखित हैI

१ हल्दी : बैक्टीरिया से बचाव ,दाद पैदा करने वाले फफूंद (FUNGAL) से बचाव,त्वचा के दानो से बचाव I

२ नीम : बैक्टीरिया से बचाव ,दाद पैदा करने वाले फफूंद (FUNGAL ) से बचाव ,त्वचा के दानो से बचाव I

३ तुलसी : त्वचा एवं चेहरे में प्राकृतिक चमक लेन के लिए उपयोगीI

३ घृतकुमारी :इसे त्वचा पर लगाने पर त्वचा स्वस्थ रहती है व झुर्रियां नहीं पड़ती I

४ आंवला : अनेको औषधीय गुण.त्वचा को तैलीय बनाये रखता है I

५ गिलोय :त्वचा के विकारो को ख़त्म करता है।

६ चन्दन : moisturizer त्वचा की शुष्कता को ख़तम करता है और त्वचा नम रहती हैI

७ नारियल का तेल- moisturizer त्वचा की शुष्कता को ख़तम करता है और त्वचा नम रहती है I

८ बादाम: त्वचा को प्रोटीन देता है I

इन सब के अलावा कुछ एक और औषधियां उत्पादक की गुणवत्ता नीति के अनुसार मिलायी जाती है कई आयुर्वेदिक साबून(Soap) बाज़ार में उपलब्ध हैंI
हिन्दुस्थान में इन पदार्थों का उपयोग हजारो वर्षों से त्वचा और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए किया जा रहा हैIयूरोप और पश्चिमी देशों में जलवायु के कारण हल्दी,नीम,तुलसी,चन्दन,बादाम,नारियल की उपलब्धता नहीं के बराबर है इसलिए उन जगहों पर रासायनिक साबुन(Soap)(CHEMICAL SOAP) का इस्तेमाल शुरू हुआIधीरे धीरे रासायनिक साबून(Soap) में भी अतिहनिकारक grade -२ और grade -३ के साबून(Soap) हमारे दैनिक जीवन में आ गए और हम हमेशा की तरह गुलाम मानसिकता को दिखाते हुए उनके यहाँ कुत्तों के नहलाने वाले साबून(Soap) से नहा कर गीत गाते हैं की “लाइफब्वाय है जहाँ तंदुरुस्ती है वहां”Iआज हम आजाद हैं ,मगर हमने खुद को शिक्षित कहने वाले लोगों ने खुद को आजादी के बाद भी यूरोपियन कुत्तों के इस्तेमाल के लिए बने उत्पादों का खुद पर प्रयोग करके खुद को उन्नत मानतेहैंIउपरोक्त वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर हर्बल और आयुर्वेदिक पंचगव्य साबून(Soap) इस्तेमाल करना शरीर और त्वचा के लिए हर प्रकार से लाभदायक और बिना किसी पार्श्व प्रभाव(SIDE EFFECT ) के हैIयदि इन वैज्ञानिक तथ्यों को जानने के बाद भी कोई रासायनिक साबून(Soap) का इस्तेमाल सिर्फ इसलिए करना चाहता है की वो किसी सुन्दर अभिनेत्री के अर्धनग्न शरीर को टेलीविजन पर प्रसारित कर बेचा जा रहा है तो रैपर के पीछे देखकर ये निश्चित कर ले की कही विज्ञापनों को देख कर आप कही ट्वायलेट में इस्तेमाल होने वाले साबून(Soap) से स्नान तो नहीं कर रहे??या आपका साबुन(Soap) आप के नहाने के लिए है या कुत्तों के नहाने के लिए ???

सब कुछ आप तय करे । हम केवल रेपर को देखकर साबुन(Soap) खरीदते है अंदर क्या है ये नही जानते मेरा सभी साथियो से आग्रह है की आप साबून(Soap) को देखकर साबून(Soap) ख़रीदे फिर नहाये जिससे आप और आपका परिवार बिमारियों से बचे । अगर किसी भी साथी को साबून(Soap) चाहिए तो तुरंत अपना आर्डर बुक करवाये ।
वाट्सअप के लिए नम्बर 09672429054 पर सन्देश भेजे ।
अपनी कोई भी राय मुझे साबुन(Soap) के बारे में जरूर दे 09914251215

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संजीव भाई
स्वदेशी परिवार भारत

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