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सर्दियों में स्वस्थ रहने के उपाय

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सर्दियों में सेहत की देखभाल

सर्दियों के मौसम में हर उम्र के लोगों को देखभाल की आवश्यकता होती है, लेकिन बच्चों और बुजुर्गों को ऐसे मौसम में खास देखभाल की आवश्यकता होती है क्योंकि उनकी प्रतिरोधी क्षमता कमज़ोर होती है।

सर्दियों में बच्चों का ख्याल रखें क्योंकि छोटे बच्चे बता भी नहीं सकते कि उन्हें ठंड लग रही है, आइये जाने बच्चों की देखभाल के टिप्स:

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  • अपने शिशु का टीकाकरण समय पर करायें, जिससे वो कर्इ संक्रामक बीमारियों के खतरे से दूर रहे।
  • शिशु के सर व पैर हमेशा ढक कर रखे।
  • बच्चों को स्कूल में साफ सफार्इ रखने को प्रेरित करे।
  • बच्चों में ज्यादा दिन तक रहने वाला सर्दी जुकाम नीमोनिया भी हो सकता है।
  • नवजात शिशु की रोग प्रतिरोधी क्षमता बनाये रखने के लिए उसे स्तनपान कराये।
  • स्कूल जाने वाले बच्चों को पोषक आहार दें और उन्हें मुंह पर रूमाल रखकर छींकने व खांसने की आदत डाले।
  • बाहर ज्यादा ठंड होने पर बच्चों को इनडोर गेम्स खेलने को प्रेरित करे।

बच्चों के अलावा बुज़ुर्गों को भी इस मौसम में ज्यादा देखभाल की आवश्यकता होती है। ऐसे में सबसे ज्यादा डर उच्च रक्तचाप या ब्लड प्रेशर के मरीज़ों को रहता है। आइये जानें अधिक उम्र में कैसे रखें अपना ख्याल :

  • समय-समय पर ब्लड प्रेशर नापते रहें और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखे।
  • सर्दियों में ब्लड प्रेशर बढ़ने का एक कारण होता है रक्त वाहिकाओं का संकुचित हो जाना, जिससे हृदय पर दबाव पड़ता है।
  • अपने चिकित्सक से समय-समय पर मिलते रहे।
  • रोज़ व्यायाम करे।
  • खाने में तेल, घी कम से कम खाये।
  • सरदर्द, घबराहट, आंखों में भारीपन महसूस होने पर चिकित्सक से मिले।
  • चाय, काफी, धूम्रपान व शराब का सेवन ना करे।
  • पोषक आहार लें

सर्दियां धीरे-धीरे जोर पकड़ने लगी हैं और इसके साथ ही दिल और फेफड़ों के रोगों से पीड़ित होने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ने लगी है. आलस की वजह से लोग अपने शरीर खासतौर से अपने दिल को तंदुरुस्त रखने पर ध्यान नहीं देते, जबकि सर्दियों में सबसे ज्यादा खतरा दिल को रहता है.

दिल्ली के हार्ट एंड लंग इंस्टीट्यूट में कार्डियोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. के.के. सेठी कहते हैं, “ठंडे मौसम की वजह से दिल की धमनियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे दिल में रक्त और ऑक्सीजन का संचार कम होने लगता है. इससे हाइपरटेंशन और दिल के रोगों वाले मरीजों में ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है. ठंडे मौसम में ब्लड प्लेट्लेट्स ज्यादा सक्रिय और चिपचिपे होते हैं, इसलिए रक्त के थक्के जमने की आशंका भी बढ़ जाती है.”

डॉ. सेठी के मुताबिक, सर्दियों में सीने का दर्द और दिल के दौरे का जोखिम 50 फीसदी तक बढ़ जाता है. सर्दियों में धूप हल्की और कम निकलने के कारण मानव शरीर में विटामिन ‘डी’ की कमी भी हो जाती है. ऐसे में इस्केमिक हार्ट डिसीज, कंजस्टिव हार्ट फेल्योर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है इसलिए विटामिन ‘डी’ की कमी ज्यादा होती है. सर्दियों में उचित मात्रा में धूप सेंकना बेहद जरूरी है.”

सर्दियों में मूंगफली सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होती है। मूंगफली में पोषक तत्वों की खान है। यह प्रोटीन, कैलोरीज, विटामिन बी, ई तथा के, आयरन, फोलेट, कैल्शियम, नियासिन और जिंक का अच्छा स्‍त्रोत है। मुट्ठी भर मूंगफली दूध, घी और सूखे मेवों की आपूर्ति करती है। यह शरीर में गर्मी का संचार करती है, इसलिए इसका सेवन मूलत: सर्दियों में किया जाता है। 100 ग्राम कच्ची मूंगफली में 1 लीटर दूध के बराबर प्रोटीन होता है। इसमें प्रोटीन की मात्रा 25 प्रतिशत से भी अधिक होती है, जबकि मांस, मछली और अंडों में यह 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होती। मूंगफली के तैयार 250 ग्राम मक्खन से 300 ग्राम पनीर, 2 लीटर दूध या फिर 15 अंडों के बराबर ऊर्जा आसानी से मिल सकती है। यही नहीं, 250 ग्राम भुनी मूंगफली में जितने खनिज और विटामिन मिलते हैं, उतने 250 ग्राम मांस से भी प्राप्त नहीं होते। सर्दियों में त्वचा में सूखापन आने पर मूंगफली के थोड़े से तेल में दूध और गुलाब जल मिला कर मालिश करके स्नान करने से आराम मिलता है। मूंगफली में प्राकृतिक तेल होने से यह हमारे शरीर में वायु संबंधी बीमारियों को कम करती है।

मुट्ठीभर मूंगफली के ढेर सारे फायदे
मूंगफली खाने से रक्त में कोलेस्टॉल का लेवल कम होता है। इसमें मोनोसैचुरेटेड वसा होती है, जिसकी वजह से एक दिन में औसतन 67 ग्राम मूंगफली खाने से कुल कोलेस्टॉल लेवल में 51 फीसदी की कमी आती है। यही नहीं, इससे कम घनत्व वाले बैड कोलेस्टॉल यानी लिपोप्रोटीन कोलेस्टॉल का लेवल 7.4 फीसदी कम होता है। मूंगफली हमारी धमनियों के लिए भी अच्छी होती है।

मूंगफली में फोलेट की अच्छी मात्रा होती है, जो हमारे हार्मोन्स और फर्टिलिटी को बढ़ाता है। गर्भावस्था के दौरान नियमित रूप से मूंगफली खाने वाली महिलाओं के बच्चों में जन्म दोष (न्यूरल ट्य़ूब में विकार) नहीं होता। गर्भावस्था में साठ ग्राम मूंगफली रोज खाने से गर्भस्थ शिशु की प्रगति में लाभ होता है। नियमित रूप से कच्ची मूंगफली खाने से दूध पिलाने वाली माताओं का दूध बढ़ता है।

मूंगफली में मैंगनीज नामक खनिज तत्व पाया जाता है, जो हमारे शरीर में वसा और कार्बोहाइड्रेट के पाचन, कैल्शियम की सही तरीके से खपत और ब्लड शुगर पर नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मूंगफली में मौजूद विटामिन ई कैंसर और दिल की बीमारियों से बचाता है। इससे मिलने वाले एंजाइम हृदय की उस समय रक्षा करते हैं, जब हम कम ऑक्सीजन वाली ऊंची जगह पर होते हैं।

यह गोलब्लेडर में पथरी होने से रोकने में मदद करती है। हफ्ते में मुट्ठीभर मूंगफली खाने से पथरी की आशंका कम हो जाती है।

सर्दियों का मौसम सभी के लिए सेहत बनाने का होता है. इस समय पाचन क्षमता पूरी तरह से काम करती है, साथ ही काफी सारी हरी सब्जियां विविध प्रकार के फल और सूखे मेवे उपलब्ध रहते हैं इसलिए इस दौरान स्वास्थ्यवर्धक भारी भोजन लिया जा सकता है. उन्होंने बताया कि मौसम के बदलते ही शरीर को चुस्त दुरुस्त बनाए रखने के लिए भोजन में कुछ फेरबदल करने होते हैं. सर्द मौसम में व्यायाम कर अपने शरीर को ऊर्जावान बनाए रखना जरुरी है. साथ ही ऐसा आहार लेना होगा जिनकी कम मात्रा लेने पर भी उनके शरीर को भरपूर कैलोरी मिले.

चिकित्सक अग्रवाल ने बताया कि सर्दियों में सुबह का नाश्ता हमें काफी ऊर्जा देता है. नाश्ते में अंडे के साथ ब्राउन ब्रेड, उपमा, सैंडविच, डोसा आदि के साथ एक ग्लास गर्म दूध, एक प्लेट फ्रूट या सालाद ले सकते हैं.

उन्होंने बताया दोपहर के भोजन में हरी सब्जी, चपाती, ताजा दही या छाछ, दाल, चावल, गर्म सूप, हरी चटनी तथा रात के भोजन में दोपहर से हल्का भोजन जल्दी लें.

इसके साथ स्वास्थ्य की दृष्टि से रात को सोने के पहले हल्दी या अदरख मिला एक गिलास गर्म दूध का अवश्य सेवन करें. इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढेगी और पाचन तन भी ठीक रहेगा.

सर्दियों के मौसम के खुशनुमा टिप्स

जिन लोगों को साइनस, एलर्जी, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा जैसे रोग होते हैं, उन्हें सावधानीपूर्वक खाने-पीने में परहेज बरतना चाहिए। उन्हें कफवर्धक चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। नीचे लिखी सावधानियों पर अमल कर आप सर्दियों की तकलीफों से खुद को बचा सकते हैं।

अगर आप सुबह सैर के लिए निकलते हैं तो आधा-एक घंटा देर से जाना शुरू करें, ताकि सवेरे की ठंड से बचाव हो सके। हल्की-हल्की गुनगुनी धूप में जाएँ तो भी कोई हर्ज नहीं है। विटामिन-डी का सेवन भी हो जाएगा।

घास पर सीधे या फर्श पर नंगे पैर न घूमें।

अगर आपके बाल गीले हैं तो उन्हें सुखाने के बाद ही टू-व्हीलर पर निकलें।

अलसुबह गर्म पानी जरूर पीएं।

नहाने के लिए ठंडा पानी न लें। गर्म पानी से स्नान करें।

ठंडी हवा सीधे कान में न जाने पाएं, मफलर स्कार्फ आदि से खुद को बचाएं। सिर और छाती भी ढंकी होना चाहिए।

गर्म तासीर वाली चीजों का इस्तेमाल बढ़ा दें। जैसे गर्म मसाले, अजवाइन, लौंग, जीरा, मैथीदाना, बड़ी इलायची आदि का काढ़ा बनाकर भी पिया जा सकता है।

सुबह-शाम अदरक वाली चाय भी फायदेमंद होती है।

ठंडी और फ्रिज से निकली चीजों को न खाएं तो ज्यादा अच्छा होगा।

खट्टी चीजें जैसे दही और नींबू के साथ ही चावल, पोहे, दूध और देशी घी जैसी चीजों से कफ भी हो सकता है।

इस मौसम में इस्तेमाल करने के लिए नारियल तेल की जगह सरसों का तेल ज्यादा उपयुक्त है। सारे गर्म मसाले सर्दियों में किसी वरदान से कम नहीं होते हैं।

एक तो इनके इस्तेमाल से शरीर को पर्याप्त गर्मी मिलती है और यदि किसी वजह से सर्दी हो जाए तो ये शरीर पर जादुई असर पैदा करते हैं। ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

Article Source :- http://www.samaylive.com/

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