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शुगर-मधुमेह-DIABETES के कारण लक्षण व उपचार

शुगर क्या है ?

शुगर आज की व्यस्त जीवन चर्या का परिणाम है। इससे भी अधिक चिंताजनक है इसका नवयुवको एवं नवयुवतियों को अपनी गिरफ्त में लेना। यह चलन विशेषत: विकासशील देशों में अधिक देखा गया है जहॉँ अचानक आर्थिक शक्ति की वृद्धि के कारण सामान्य दिन चर्या मे नौजवानो को विमुख कर और शारीरिक श्रम के प्रति उदासीन कर दिया है। इसके अतिरिक्त शुगर के रोगियो की वृद्धि के बहुत कारण है । यह स्थिति और भी विकराल होती है क्योंकि इस बीमारी को समझने के लिये जन साधारण प्रयास नही करते।

सर्व प्रथम रोगी को अपनी जीवन शैली में परिवर्तन करना होगा। क्यों की बिना जीवन शैली में बदलाव किये कोई भी इलाज स्थायी नहीं हैं।

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कितना आहार लेना कब आहार लेना, क्या आहार लेना, किस प्रकार का व्यायाम करना जिससे रोग में अधिकतम लाभ हो, आदि विषय की जानकारी उन्हें प्रामाणिक ढ़ग से नही मिल पाती जिससे वे व्यक्ति और परेशान हो जाते हैं।

हर उम्र और वर्ग में अलग-अलग कारणों से अलग-अलग रूप में शुगर होती है। आइये समझे शुगर को। (Let’s understand diabetes)

शुगर एक ऐसी अवस्था है जिसमे शरीर में इन्सुलिन की कमी हो जाती है या शरीर में इन्सुलिन तो होता है मगर वो सही तरीके से शुगर नहीं बना पाता। अग्नाशय इन्सुलिन बनाता है, इन्सुलिन एक हॉर्मोन है। (हार्मोन एक रसायन होता है। जो एक सेल या एक ग्रंथि या शरीर के एक भाग में एक अंग द्वारा जारी किया जाता है। यह उस जीव के अन्य भागों में कोशिकाओं को प्रभावित करता है।) अगर व्यक्ति का शरीर इन्सुलिन उत्पादन कम कर दे तो फिर शरीर में शुगर की मात्रा काफी बढ़ जाती है। जो काफी चिंताजनक विषय है।

इससे रक्त में ग्लूकोज़ की मात्रा इन्सुलिन की कमी के कारण बढ़ जाती है अगर रक्त में इस ग्लूकोज़ की मात्रा को नियंत्रित नहीं किया जाए तो यह कई अन्य शारीरिक समस्याऎं उत्पन्न कर सकती हैं।

अगर एक बार दवा-इलाज, विशेषकर इन्सुलिन लेने के चक्कर में फँस गए तो वे जीवन पर्यन्त इस चक्र से निकल न सकेंगे। इस चक्कर में पड़कर घनचक्कर बनने से बचने के लिए सन्तुलित आहार लेना बहुत आवश्यक है।

क्या है इन्सुलिन ?

1.हमारे शरीर के लिए इन्सुलिन का वही महत्व है जो वृक्ष के लिए पानी का।

2. मधुमेह का अर्थ है इन्सुलिन की कमी, ये शरीर को वैसे ही प्रभावित करती है जैसे वृक्ष को पानी की कमी।

3. मधुमेह में दवाएं शरीर में इन्सुलिन के बहाव को बढाती है, यह एक पंप द्वारा भूमिगत पानी एक वृक्ष को उपलब्ध कराने जैसा है।

4. शरीर में इन्सुलिन का उत्पादन एक स्तर से गिर जाने पर दवाओ की अधिकतम डोज़ भी कारगर नहीं होती, जैसे भू जल स्तर गिर जाने पर अधिकतम क्षमता वाला पंप भी पानी नहीं देता।

5. जिस प्रकार भू जल स्तर गिर जाने पर बाहर से पानी लाना एक मात्र समाधान है, उसी प्रकार शरीर को बाहरी स्रोत से इन्सुलिन देना एक मात्र समाधान है।

6. इन्सुलिन कोई दवा नहीं बल्कि एक प्राकर्तिक हॉर्मोन है, जो जन्म से मृत्यु तक हमारे शरीर में बनता है। इन्सुलिन की कमी का अर्थ है मधुमेह(SUGAR)। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए इन्सुलिन की प्रयाप्त मात्रा ज़रूरी होती है, दवाइयों और आवश्यकता पड़ने पर इन्सुलिन इंजेक्शन स्वस्थ बने रहने के लिए ज़रूरी है।

क्या मधुमेह रक्त में अतिरिक्त शुगर की समस्या है.

बिल्कुल नहीं। मगर ये समस्या तब बनती है जब शरीर के सेल इस शुगर को अपने अन्दर पचा नहीं पाते। रक्त में ज़्यादा शुगर होने की बजाये वो स्तिथि बहुत बुरी या खतरनाक है जब हमारा शरीर शुगर प्राप्त नहीं कर पाता। जहाँ तक शरीर का सम्बन्ध है तो शुगर इसके लिए एनर्जी का काम करती है जो शरीर के लिए बहुत उपयोगी है। याद रखिये शरीर को बेहतरीन तरीके से काम करने के लिए लगातार उर्जा चाहिए। शरीर और दिमाग के cells के लिए बहुत प्रकार के पोषक तत्वों की ज़रूरत होती है जिनमे से एक है SUGAR. शरीर के cells में उर्जा, रक्त में शुगर के माध्यम से पहुंचाई जाती है। संचार प्रणाली शुगर को हमारे शरीर के cells में पहुंचाती है वो भी इन्सुलिन की सहायता से। शुगर हमारे cells में तभी जा सकती है जब हमारे cells शुगर लेने के लिए खुले हो। इन्सुलिन एक चाबी की तरह काम करता है जो हमारे cells को खोलता है तांकि रक्त से शुगर cells में पहुंचाई जा सके।

शुगर होने के कारण

1. डायबिटीज का कारण है इंसुलिन हार्मोंन का कम निर्माण होना। जब इंसुलिन कम बनता है तो कोशिकाओं तक और रक्त में शुगर ठीक से नहीं पहुंच पाती जिससे सेल्स की एनर्जी कम होने लगती है और इसी कारण से शरीर को नुकसान पहुंचने लगता है। जैसे- बेहोशी आना, दिल की धड़कन तेज होना इत्यादि समस्याएं होने लगती हैं।

2. डायबिटीज के कारण इंसुलिन के कम निर्माण से रक्त में शुगर अधिक हो जाती है क्योंकि शारीरिक ऊर्जा कम होने से रक्त में शुगर जमा होती चली जाती है जिससे कि इसका निष्कासन मूत्र के जरिए होता है। इसी कारण डायबिटीज रोगी को बार-बार पेशाब आता है।

3. डायबिटीज होने के और भी कारण है। यह अनुवांशिक भी होती है। यदि आपके परिवार के किसी सदस्य मां-बाप, भाई-बहन में से किसी को है तो भविष्य में आपको भी डायबिटीज होने की आशंका बढ़ जाती है।

4. आपका समय पर ना खाना, बहुत अधिक जंकफूड खाना या आपका मोटापा भी डायबिटीज का मुख्य कारक है।

5. आपका वजन बहुत बढ़ा हुआ है, आपका बीपी बहुत हाई है और कॉलेस्ट्रॉल भी संतुलित नहीं है तो आपको डायबिटीज हो सकता है।

6. बहुत अधिक मीठा खाने, नियमित रूप से बाहर का खाना खाने, कम पानी पीने, एक्सरसाइज ना करने, खाने के बाद तुरंत सो जाने या ज्यादा समय तक लगातार बैठा रहना इत्यादि कारण भी डायबिटीज को जन्म दे सकते हैं।

7. वर्तमान में बच्चों में होने वाली डायबिटीज का मुख्य कारण उनका रहन-सहन और खानपान है। इसके साथ ही शारीरिक रूप से निष्क्रियता भी बच्चों को डायबिटीज की और अग्रसर कर सही है। इसलिए उनको नियमित सैर या OUTDOOR GAMES के लिए प्रेरित करे।

8. यदि आप चाहते हैं कि आप और आपका परिवार शुगर से बचें तो उसके लिए हेल्दी लाइफ स्टाइल अपनाना जरूरी है। जिसमें एक्सरसाइज और हेल्दी फूड को खास प्राथामिकता दें।

लक्षण

1. बार बार पेशाब जाने की ज़रूरत महसूस करना।
2. पेशाब से तेज़ बदबू का आना।
3. बार बार प्यास लगना।
4. गरम और रुखी त्वचा।
5. तेज़ और असरल श्वांस प्रक्रिया।
6. धड़कन का कमज़ोर होना।
7. पेट सम्बन्धी दर्द।
8. पैरो में दर्द।
9. व्यक्ति चिडचिडा हो जाता है।
10. हर पल थकान और कमजोरी महसूस करना।
11. भूखा और कुछ मीठा खाने की ज़िद करना।
12. भ्रम की स्थिति में रहना, इत्यादि।
13. आंखें कमज़ोर होना-
14. घाव का जल्दी न भरना
15. आनुवंशिक

जांच

सुबह खाली पेट रक्त की जाँच में शर्करा की मात्रा 80 से 120 एमजी (प्रति 100 सीसी रक्त) के बीच में होना सामान्य स्वस्थ अवस्था होती है। यदि यह अवस्था हो तो मनुष्य स्वस्थ है। यदि शर्करा की मात्रा 120 एमजी से ज्यादा, लेकिन 140 एमजी से कम हो तो यह मधुमेह की प्रारंभिक अवस्था होगी। यदि 140 एमजी से ज्यादा हो तो मधुमेह रोग ने जड़ जमा ली है ऐसा माना जाएगा। भोजन करने के दो घण्टे बाद की गई जाँच में भी रक्त शर्करा 120 एमजी से कम पाई जाए तो मनुष्य स्वस्थ है, किन्तु यदि 140 एमजी तक या इससे कम पाई जाए तो मधुमेह होने की प्रारंभिक अवस्था मानी जाएगी, लेकिन अगर 140 एमजी से ज्यादा पाई जाए तो मधुमेह रोग से ग्रस्त होना मान लिया जाएगा। मधुमेह धीरे-धीरे पनपता है और जब तक उग्र अवस्था में न पहुँच जाए तब तक इसका साफ पता नहीं चल सकता, इसलिए मोटे शरीर वाले और 40 वर्ष से अधिक आयु वाले स्त्री-पुरुषों को 2-3 माह में एक बार स्वमूत्र और रक्त की जाँच कराते रहना चाहिए। यदि पेशाब में शर्करा पाई जाए या रक्तगत शुगर सामान्य मात्रा से ज्यादा पाई जाए तो अपने आहार में तुरन्त उचित सुधार कर सन्तुलित आहार लेना शुरू कर देना चाहिए और आवश्यक परहेज का सख्ती से पालन करना चाहिए।

समाधान।

एलोपैथी, भारत में अब तक बुरी तरह विफल रही है। जो दवा हम डायबिटीज के लिए लेते है उसमे इन्सुलिन नहीं होता। वैसे भी अगर हम इन्सुलिन मौखिक रूप से ले तो ये ज्यादा फायदेमंद नहीं होता। टेबलेट्स शुगर को हमारे cells में अवशोषित करने की मदद करती है। टेबलेट्स और इन्सुलिन रासायनिक होती है जिनके अपने साइड इफेक्ट्स होते है। इनके द्वारा भी कोई पुख्ता समाधान संभव नहीं है। आप केवल कुछ दिनों या कुछ घंटो तक अपनी समस्या को स्थगित कर सकते हैं। डायबिटीज को शुरुआती अवस्था में आप प्रयाप्त और संतुलित आहार या योगा से नियंत्रित कर सकते है। लेकिन, ज़ाहिर है, आपको एक संतुलित आहार के बारे में और सही योगासन के बारे में स्पष्ट रूप से जानकारी होनी चाहिए। ये कहने की जरूरत नहीं कि मोटापे से ग्रस्त लोगों को पहले अपना वज़न कम करना होगा।

क्या खाये क्या ना खाये

इस बीमारी को घरेलू इलाज से काफी हद तक कम किया जा सकता है। आइए जानते है मधुमेह को घरेलू इलाज से कैसे कंट्रोल कर सकते हैं।

शुगर को ठीक करने के लिए घरेलू इलाज

करेला :- डायबिटीज में करेला काफी फायदेमंद होता है, करेले में कैरेटिन नामक रसायन होता है, इसलिए यह प्राकृतिक स्टेरॉयड के रुप में इस्तेमाल होता है, जिससे खून में शुगर लेवल नहीं बढ़ पाता। करेले के 100 मिली. रस में इतना ही पानी मिलाकर दिन में तीन बार लेने से लाभ होता है।

आंवला  :- एक चम्मच आमले का रस करेले के रस में मिला कर रोज पीएं , यह मधुमेह की सबसे अच्छी दवा है।

आम की पत्ती :- 15 ग्राम ताजे आम के पत्तों को 250 एम एल पानी में रात भर भिगो कर रख दें। इसके बाद सुबह इस पानी को छान कर पी लें। इसके अलावा सूखे आम के पत्तों को पीस कर पाउडर के रूप में खाने से भी मधुमेह में लाभ होता है।

शहद कार्बोहाइर्ड्रेट, कैलोरी और कई तरह के माइक्रो न्यू ट्रिएंट से भरपूर शहद मधुमेह के लिए लाभकारी है। शहद मधुमेह को कम करने में सहायता करता है।
नीबू :- नीबू से प्यास बुझाइए मधुमेह के मरीज को प्यास अधिक लगती है। अतः बार-बार प्यास लगने की अवस्था में नीबू निचोड़कर पीने से प्यास की अधिकता शांत होती है।

खीरा खाकर भूख मिटाइए मधुमेह के मरीजों को भूख से थोड़ा कम तथा हल्का भोजन लेने की सलाह दी जाती है। ऐसे में बार-बार भूख महसूस होती है। इस स्थिति में खीरा खाकर भूख मिटाना चाहिए।

गाजर-पालक रस :- गाजर-पालक को औषधि बनाइए इन रोगियों को गाजर-पालक का रस मिलाकर पीना चाहिए। इससे आँखों की कमजोरी दूर होती है।

शलगम रामबाण औषधि है :- शलगम मधुमेह के रोगी को तरोई, लौकी, परवल, पालक, पपीता आदि का प्रयोग ज्यादा करना चाहिए। शलगम के प्रयोग से भी रक्त में स्थित शुगर की मात्रा कम होने लगती है। अतः शलगम की सब्जी, पराठे, सलाद आदि चीजें स्वाद बदल-बदलकर ले सकते हैं।

जामुन :- जामुन खूब खाइए मधुमेह के उपचार में जामुन एक पारंपरिक औषधि है। जामुन को मधुमेह के रोगी का ही फल कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी, क्योंकि इसकी गुठली, छाल, रस और गूदा सभी मधुमेह में बेहद फायदेमंद हैं। मौसम के अनुरूप जामुन का सेवन औषधि के रूप में खूब करना चाहिए। जामुन की गुठली संभालकर एकत्रित कर लें। इसके बीजों जाम्बोलिन नामक तत्व पाया जाता है, जो स्टार्च को शुगर में बदलने से रोकता है। गुठली का बारीक चूर्ण बनाकर रख लेना चाहिए। दिन में दो-तीन बार, तीन ग्राम की मात्रा में पानी के साथ सेवन करने से मूत्र में शुगर की मात्रा कम होती है।

मेथी :- मेथी का प्रयोग कीजिए मधुमेह के उपचार के लिए मेथीदाने के प्रयोग का भी बहुत चर्चा है। दवा कंपनियाँ मेथी के पावडर को बाजार तक ले आई हैं। इससे पुराना मधुमेह भी ठीक हो जाता है। मेथीदानों का चूर्ण बनाकर रख लीजिए। नित्य प्रातः खाली पेट दो टी-स्पून चूर्ण पानी के साथ निगल लीजिए। कुछ दिनों में आप इसकी अद्भुत क्षमता देखकर चकित रह जाएँगे।

गेहूँ के ज्वारे  :– चमत्कार दिखाते हैं गेहूँ के जवारे गेहूँ के पौधों में रोगनाशक गुण विद्यमान हैं। गेहूँ के छोटे-छोटे पौधों का रस असाध्य बीमारियों को भी जड़ से मिटा डालता है। इसका रस मनुष्य के रक्त से चालीस फीसदी मेल खाता है। इसे ग्रीन ब्लड के नाम से पुकारा जाता है। ज्वारे  का ताजा रस निकालकर आधा कप रोगी को तत्काल पिला दीजिए। रोज सुबह-शाम इसका सेवन आधा कप की मात्रा में करें।

अदरक :- अदरक भोजन का जायका ही नहीं बढ़ाता बल्कि हमारी सेहत के लिए भी यह फायदेमंद है। दादी, नानी के नुस्खों में इसे स्वाद एवं सेहत बादशाह का नाम दिया गया है और अब वैज्ञानिकों ने भी तरह-तरह के प्रयोगों से इसे गुणों की खान माना है। वैज्ञानिकों की नई शोध में अदरक मधुमेह की बीमारी में बेहद कारगर साबित हुई है। यूनीविर्सटी आफ सिडनी के फारमास्यूटिकल कमेस्ट्री के प्रोफेसर बासिल रौफोगालिस की प्लांटा मेडिका में रिपोर्ट प्रकाशित हुई है।

प्रो.बासिल के अनुसार अदरक का रस खून में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है। प्रो. रौफोगालिस के अनुसार मरीज में मधुमेह का रोग पुराना होने पर बहुत सी परेशानियों को जन्म देता है। हमारे शरीर के प्रमुख अंग इससे प्रभावित होते हैं। ऐसे में अदरक का रस ऐसे रोगियों के लिए बेहद ही फायदेमंद है। उन्होंने कहा कि अदरक का मुख्य जिंजररोल्स खून मे शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है।

त्रिफला :- त्रिफला चूर्ण मधुमेह की बहुत बढ़िया औषिधि हैं, हर रात सोने से पहले 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लीजिये। और इसको अपनी दिन चर्या में शामिल करे।

एलो वेरा :- एलो वेरा शरीर के अन्दर जाते ही शरीर को ज़हर मुक्त बनाने का काम शुरू करता है, हमारा शरीर इसको बेहद आसानी से पचा लेता है. याद रहे एलो वेरा एक प्राकृतिक ज़हर नाशक एजेंट है। ये गुर्दे को उत्तेजित करता है, जो के अपने आप में एक ऐसा अंग है जो शारीर को निरंतर ज़हर मुक्त करता है। एलो वेरा खून परिसंचरण को बढ़ा देता है और हमारे रोग प्रतिरोधक सिस्टम को मज़बूत करता है अपने अन्दर समाये हुए ढेरो विटामिन्स, एमिनो एसिड्स, एंजाइमों, फाइबर और वो सारे पोषक तत्वों से जिनकी हमारे शरीर में बहुत कमी हो गयी थी। और सबसे महत्वपूर्ण ये हमारे पैंक्रियास(अग्नाशय) को उत्तेजित करता है जो हमारे शरीर में इन्सुलिन बनाने का काम करता है। इन्सुलिन को सही ढंग से काम करने के लिए chromium picolinate की बेहद ज़रूरत रहती है. ये एक बेहद महत्वपूर्ण मिनरल (खनिज) है, इन्सुलिन क्रोमियम की मदद से इन्सुलिन कार्बोहायड्रेट, वसा, और प्रोटीन को शुगर के रूप में बदलती है जो कि बाद में हमारे शरीर के लिए उर्जा का काम करती है. और एलो वेरा में ये मिनरल (खनिज) मौजूद रहता है. जिसकी वजह से इन्सुलिन बेहतरीन काम करता है. Carboxypeptidases एलो वेरा में पाए जाने वाला एक अहम् एंजाइम है जो भोजन को पचाने में मदद करता है और हमारे शारीर के बायोलॉजिकल प्रोसेस को सही ढंग से चलने में मदद करता है और इसके साथ ये घावों को जल्दी भरने में मदद करता है.एलो वेरा चुनाव करते समय आप इसकी गुणवत्ता को ज़रूर जांच ले, आज कल लोग एलो वेरा के नाम पर बहुत लूट मचा रहे हैं।

अलसी :- गर्मियों में 1 चम्मच अलसी दही या छाछ के साथ और सर्दियों में ३ चम्मच तक अलसी खाए क्यूंकि इसमें ओमेगा 3 होता हैं। ओमेगा 3 फैटी एसिड आपकी धमनियों को साफ एवं स्वस्थ रखने में अहम् भूमिका निभाता है। मधुमेह के रोगियों को अक्सर उच्च ट्राइग्लिसराइड्स और एचडीएल के कम स्तर की शिकायत रहती है। एचडीएल ‘अच्छा कोलेस्ट्रॉल होता है जो ख़राब कोलेस्ट्रॉल के कुप्रभाव को कम करता है। ओमेगा -3 फैटी एसिड शुगर लेवल कम करने में विभिन्न तरीकों से मददगार सिद्ध होता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड्स दिल एवं दिमाग के लिए भी टोनिक का काम करता है।

दालचीनी: दालचीनी घर घर में पाया जाने वाला एक मसाले के रूप में जाना जाता है। लेकिन यह न सिर्फ आपके खाने का जायका बढाता है बल्कि यह आपके शरीर में रक्त शर्करा को भी नियंत्रण में रखता है। जिन लोगों को मधुमेह नहीं है वे इसका सेवन करके मधुमेह से बच सकते हैं। और जो मधुमेह के मरीज हो चुके हैं वे इसके सेवन से ब्लड शुगर को कम कर सकते है। दालचीनी को पीसकर चाय में चुटकी भर मिलाकर दिन में दो तीन बार पीया करें। इसका ज्यादा सेवन करना उचित नहीं होता इसलिए रोजाना थोड़ा थोड़ा हीं सेवन करें।

लहसुन: लहसुन भी ब्लड शुगर को कम करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अतः अगर आप मधुमेह के मरीज हैं तो रोज सुबह लहसुन की दो तीन कलियों को चबाया करें या कुतरकर निगला करें। इससे आपको हाई ब्लड प्रेशर एवं दिल की बीमारियों में भी बहुत लाभ मिलेगा। मधुमेह से कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है लेकिन लहसुन कैंसर को रोकने में बहुत हीं प्रभावशाली माना जाता है।

ओटमील यानि जई का आटा: जई का आटा मधुमेह के लिए मरीजों के लिए बहुत हीं उपयुक्त आहार माना जाता है। आप इसका सेवन सुबह शाम नाश्ते के रूप में किया करें तो आपको बहुत लाभ पहुंचेगा।

इनका बहुत कम, या ना के बराबर इस्तेमाल करना चाहिये.

नमक, चीनी, घी, तेल, दूध व दूध से निर्मित वस्‍तुऍं परांठे, मेवे, आइसक्रीम, मिठाई, मांस, अण्‍डा, चॉकलेट, सूखा नारियल

इनका इस्तेमाल नहीं करना चाहिये.
तला-भुना भोजन, उड़द की दाल, अचार

खाद्य प्रदार्थ जो अधिक खाना चाहिए।

हरी सब्जियॉं, खीरा, ककडी, टमाटर, करेला, प्‍याज, लहसुन, नींबू और भोजन का समय जहॉं तक संभव हो निश्चित होना चाहिए और लम्‍बे समय तक ‍भूखा नही रहना चाहिये।

दिल व शुगर  में कारगर योग

शुगर

निरोग रहने के लिए योग का महत्त्व तो सभी को पता है लेकिन अब योग का प्रयोग गैर संक्रामक बीमारीयों को नियन्त्रित करने के लिए किया जाता है। यदिदिल व मधुमेह के रोगी नियमित योग करें तो चयापचयी सिंड्रोम (metabolic syndrome) को कम रख सकते हैं। जो मोटापा बढ़ाने और डायबिटीज टाइप-2(diabetes type-2) के लिए कारक है। एक अध्ययन के अनुसार योग करने वाले 81 प्रतिशत मरीजों का चयापचयी सिंड्रोम नियन्त्रित था, इसके साथ ही योग केकारण बी.एम.आर्इ. (body mass index) एल.डी.एल. (low density lipid)प्रोफार्इल और रक्तचाप नियन्त्रित पाया गया, जबकि जिन लोगों को केवल दवार्इदी गर्इ उनके चपापचयी सिंड्रोम में अधिक अन्तर नही देखा गया। रक्त मेंकॉलेस्ट्राल बढ़ाने में चपापचयी सिंड्रोम का खास रोल होता है। जो सी.एस.डी.(Coronary heart disease) व डायबिटीज टाइप-2 लिए जिम्मेवार है। इसलिएनए अध्ययनों के अनुसार यदि योग नियमित किया जाए तो आप चयापचयीसिंड्रोम को कंट्रोल कर डायबिटीज टाइप-2 व सी.एस.डी. जैसे जानलेवा बीमारीयों से बचे रह सकते हैं।

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