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शिलाजीत के सेवन से आ सकती है दाम्पत्य जीवन में बहार

शिलाजीत किसे कहते हैं ?

ज्येष्ठ और आषाढ़ के महीने में सूर्य की किरणों से पवर्त की शिलाओं से लाख की तरह जो द्रव्य पिघल कर बाहर निकल आता है उसे शिलाजीत कहते हैं जिसे बाद में इकट्ठा कर लिया जाता है। यह पत्थर की शिलाओं में ही पैदा होता है इसलिए इसे शिलाजीत कहा जाता है। 

शिलाजीत कितने प्रकार की होती है ?

यह चार प्रकार का होता है।
  1. रजत :- रजत शिलाजीत का स्वाद चरपरा होता है।
  2. स्वर्ण :- यह पित्त तथा कफ के विकारों को दूर करता है। स्वर्ण शिलाजीत मधुर, कसैला और कड़वा होता है जो वात और पित्तजनित व्याधियों का शमन करता है।
  3. लौह :- लौह शिलाजीत कड़वा तथा सौम्य होता है।
  4. ताम्र शिलाजीत :- ताम्र शिलाजीत का स्वाद तीखा होता है। कफ जन्य रोगों के इलाज के लिए यह आदर्श है क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है।

समग्र रूप में शिलाजीत कफ, चर्बी, मधुमेह, श्वास, मिर्गी, बवासीर उन्माद, सूजन, कोढ़, पथरी, पेट के कीड़े तथा कई अन्य रोगों को नष्ट करने में सहायक होता है।  प्रत्येक प्रकार की शिलाजीत के गुण अथवा लाभ अलग.अलग हैं।

शिलाजीत के गुण/लाभ/फायदे

यह जरूरी नहीं है कि शिलाजीत का सेवन तभी किया जाए जब कोई बीमारी हो स्वस्थ मनुष्य भी इसका सेवन कर सकता है। इससे शरीर पुष्ट होता है और बल मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार सेवन के लिए मात्रा बारह रत्ती से दो रत्ती के बीच निर्धारित की जानी चाहिए। मात्रा का निर्धारण रोगी की शारीरिक स्थिति उसकी आयु और उसकी पाचन शक्ति को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

  1. शिलाजीत का सेवन दूध और शहद के साथ सुबह सूयोर्दय से पहले कर लेना चाहिए। इसके ठीक प्रकार पाचन के बाद अर्थात तीन.चार घंटे के बाद ही भोजन करना चाहिए।
  2. दिमागी ताकत के लिए प्रतिदिन एक चम्मच मक्खन के साथ शिलाजीत का सेवन लाभदायक होता है । इससे दिमागी थकावट नहीं होती।
  3. मधुमेह, प्रमेह और मूत्र संबंधी विकारों के निराकरण में शिलाजीत बेहद उपयोगी सिद्ध हुआ है। एक चम्मच शहद, एक चम्मच त्रिफला चूर्ण के साथ लगभग दो रत्ती शिलाजीत का सेवन प्रमेह रोग को नष्ट कर देता है। इस मिश्रण का सेवन सूयरेदय से पहले ही करना चाहिए। मधुमेह के इलाज के लिए थोड़ी.थोड़ी मात्रा में प्रतिदिन लगातार शिलाजीत का सेवन तब तक किया जाना चाहिए जब तक कि लगभग पांच सेर मात्रा रोगी के शरीर में न पहुंच जाए। यह रोगी की स्थिति बहुत हद तक ठीक कर देता है।
  4. मूत्रावरोध, पीड़ा जलन और प्रमेह के उपचार के लिए पीपल और छोटी इलायची को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें इस एक चम्मच चूर्ण  के साथ शिलाजीत का सेवन लाभदायक होता है। यदि किसी को बार.बार पेशाब आए रात को भी पेशाब के लिए बार.बार उठना पड़े तथा एक साथ भारी मात्रा में पेशाब आए तो समझ लें कि ये लक्षण बहुमूत्रता के हैं। इस बीमारी को दूर करने के लिए शिलाजीत, बंगभस्म, छोटी इलायची के दाने और वंशलोचनल को समान मात्रा में लेकर शहद के साथ मिलाकर दो.दो रत्ती की गोलियां बनाकर गर्म दूध के साथ इनका सेवन करें। सुबह.शाम इसकी दो.दो गोलियां लेना ही पयरप्त होता है। साथ ही इससे शरीर सुडौल और शक्तिशाली भी बनता है।
  5. आधुनिक जीवन शैली में उच्च रक्तचाप एक आम समस्या बनता जा रहा है। रक्तचाप को सामान्य स्तर पर लाने के लिए काली साखि। पांच ग्राम और दस ग्राम मुलहठी में दो कप पानी डालकर काढ़ा बनाएं। जब यह पानी आधा रह जाए तो इसे छान लें। दो.दो रत्ती की एक.एक गोली के साथ काढ़े का सेवन करने और रात को किसी विरेचन चूर्ण के प्रयोग से पेट साफ रखें। इससे रक्तचाप एक हफ्ते में ही सामान्य स्तर पर आ जाता है।
  6. जो लोग शीघ्रपतन की समस्या से ग्रसित है उन्हें भी शिलाजीत से लाभ पहुंचता है इसके लिए बीस.बीस ग्राम शिलाजीत और बंग भस्म में दस ग्राम लौह भस्म और छरू ग्राम अभ्रम भस्म मिलाकर घोटकर दो.दो रत्ती की गोलियां बना लें। सुबह के समय एक गोली को मिश्री मिले दूध के साथ सेवन आश्चयर्जनक लाभ देता है। शाम को भी इस योग का प्रयोग किया जा सकता है परन्तु शाम को भोजन के दो.तीन घंटे के बाद ही इसका प्रयोग करें।

विशेषज्ञों के अनुसार शिलाजीत का प्रयोग करने के पहले वमनए विरेचन आदि क्रियाओं को करके शरीर को शुद्ध किया जाना जरूरी है इससे लाभ अधिक होता है। साथ ही इसका सेवन सूयोर्दय से पहले शहद या दूध के साथ करना चाहिए इसका सेवन करने के बाद चावल, दूध या जौ से बनी किसी चीज का सेवन करना चाहिए। शिलाजीत का प्रयोग उन लोगों को नहीं करना चाहिए जिनके शरीर में पित्त का प्रकोप हो।

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किन लोगों को शिलाजीत का प्रयोग नहीं करना चाहिये ?

  1. जिनके शरीर में गर्मी बढ़ी हुई हो उन्हें भी शिलाजीत से परहेज ही रखना चाहिए। 
  2. शिलाजीत के सेवन के दौरान मिर्च.मसाले, खटाई, मांस.मछली,अंडे  तथा शराब आदि का प्रयोग वर्जित है साथ ही कब्ज मानसिक शोक तथा तनाव, रात में जागना, दिन में सोना तथा लगातार ज्यादा मात्रा में शारीरिक श्रम आदि से भी बचना चाहिए।यदि  शिलाजीत का सेवन केवल कुछ दिनों तक  किया जाता है तो इससे कोई नुकसान नहीं है।

शिलाजीत के कुछ आजमाए हुए घरेलू नुस्खे

  1. शुद्ध शिलाजीत 25 ग्राम, लौहभस्म 10 ग्राम, केशर 2 ग्राम, अम्बर 2 ग्राम, सबको मिलाकर खरल में खूब घुटाई करके महीन कर लें और 1-1 रत्ती की गोलियां बना लें। एक गोली सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से स्वप्नदोष होना तो बंद होता ही है, साथ ही पाचनशक्ति, स्मरण शक्ति और शारीरिक शक्ति में भी वृद्धि होती है, इसलिए यह प्रयोग छात्र-छात्राओं के लिए भी उपयोगी है।
  2. शिलाजीत और बंगभस्म 20-20 ग्राम, लौहभस्म 10 ग्राम और अभ्रक भस्म 5 ग्राम, सबको मिलाकर खरल में घुटाई करके मिला लें और 2-2 रत्ती की गोलियां बना लें। सुबह-शाम एक-एक गोली दूध के साथ सेवन करने से स्वप्नदोष होना बंद होता है और शरीर में बलपुष्टि आती है। यदि शीघ्रपतन के रोगी विवाहित पुरुष इसे सेवन करें तो उनकी यह व्याधि नष्ट होती है। खटाई और खट्टे पदार्थों का सेवन बंद करके इन दोनों में से कोई एक नुस्खा कम से कम 60 दिन तक सेवन करना चाहिए।

सावधानी :- शिलाजीत एक पौष्टिक द्रव्य है। परन्तु राह चलते या पटरी पर बैठे खरीददार से शिलाजीत खरीदने में धोखा हो सकता है इसलिए उसकी जांच करके ही खरीदें जो शिलाजीत पानी में डालते ही तार.तार होकर तली में बैठ जाए वही असली शिलाजीत है। साथ ही सूखने पर उसमें गोमूत्र जैसा गंध आएए रंग कालाए वजन हल्का तथा छुअन चिकनी हो तो समझ लें कि यही असली शिलाजीत है।

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