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शहतूत (Mulberry) के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण

शहतूत (Mulberry) Shahtut

शहतूत में मौजूद पोटेशियम, विटामिन ए और फास्फोरस शरीर के कई रोगों जैसे जोड़ों के दर्द, गले की बीमारी और आमवात को ठीक करते हैं। शहतूत दो प्रकार का होता है बड़ा शहतूत और छोटा शहतूत। जैसे जैसे गर्मी बढती जाती है वैसे प्रकृति उस गर्मी को शांत करने हेतु कुछ ना कुछ उपलब्ध करवा ही देती है वैसे ही शहतूत भी गर्मी में ठंडक का एहसास करवाते हैं गर्मियाँ शुरू हो चुकी है और जंगलों में अनेक प्रकार के फल बहार पर है. यह भी ऐसा ही जंगली फल है जो न केवल जंगलों में बल्कि सडकों और राजमार्गों के किनारे भी पाया जाता है और जिसके फल गर्मियों में प्रचुरता से उपलब्ध होते है. आदिवासियों के अनुसार शहतूत का रस पीने से आँखों की ज्योति बढ़ती है और इनका शर्बत भी बनाया जाता है. यह स्वादिष्ट और शीतल फल है। आयुर्वेद में इस के कई फायदों के बारे में बताया गया है। इस में मौजूद गुण शरीर में पानी की कमी को दूर करके प्यास को बुझाते हैं। साथ ही साथ यह पेट की जलन, और पेट के कीड़ों कों खत्म करता है।

शहतूत गुणकारी कफनाशक फल है। इस फल और शर्बत के गुण समान हैं। शहतूत, एक स्वादिष्ट मीठा नाजुक-नर्म फल है इसमें अनेक ऐसे लाभदायक गुण हैं जो कई बीमारियों में वरदान साबित हो सकते हैं। शहतूत में पाए जाने वाले रेजवर्टेरोल के बारे में माना जाता है कि यह शरीर में फैले प्रदूषण को साफ करके संक्रमित चीजों को बाहर निकालता है।

शहतूत के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण

    1. यह शुद्ध रक्त उत्पन्न करता है।
    2. पेट के कृमियों को नष्ट करता है, पाचनशक्ति बढ़ाता है।
    3. ज़ुकाम और गले के रोगों में हितकर है।
    4. पित्त और रक्त विकार दूर करने के लिये गर्मी के मौसम में दोपहर को शहतूत खाने चाहिये।
    5. इसके फल के अलावा शर्बत में भी इतने ही गुण होते हैं। इसके सेवन से पेट या सीने में होने वाली जलन शांत होती है।
    6. लंबे समय तक शहतूत खाने से पुराना कफ भी खत्म हो जाता है।
    7. पित्त और रक्त-विकार को दूर करने के लिए गर्मी के मौसम में दोपहर को शहतूत खाना चाहिए।
    8. तेज बुखार में शहतूत खाने से मरीज को ठंडक का एहसास होता है।
    9. बुखार के दौरान आंखों, तलवों और हथेलियों में होने वाली जलन शांत होती है।
    10. पेशाब का रंग पीला हो तो शहतूत के रस में चीनी मिलाकर पीने से रंग साफ हो जाता है।
    11. अगर चारपाई में खटमल हो गए हो तो इस के पत्ते बिछाने पर लाभ होता है।
    12. अगर आप झुर्रियों से परेशान हैं तो अब चिंता करने की कोई बात नहीं। इसके लिए इस का जूस पीजिए। आपका चेहरा चमकदार और ताजा हो जाएगा।
    13. इस में एंटी एज यानी उम्र को रोकने वाला गुण होता है। साथ ही यह त्वचा को जवानी की तरह जवां बना देता है और झुर्रियों को चेहरे से गायब कर देता है।
    14. यह बाल में भी भूरापन लाता है, क्योंकि उसमें 79 प्रतिशत ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है।
    15. इस में रेजवर्टेरोल पाया जाता है जो स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाता है।
    16. दूधवर्धक : शहतूत रोजाना खाने से दूध पिलाने वाली माताओं का दूध बढ़ता है। प्रोटीन और ग्लूकोज इस में अच्छी मात्रा में मिलते हैं।
    17. फोड़ा : इस के पत्तों पर पानी डालकर, पीसकर, गर्म करके फोड़े पर बांधने से पका हुआ फोड़ा फट जाता है तथा घाव भी भर जाता है।
    18. छाले : छाले और गल ग्रन्थिशोध में इस का शर्बत 1 चम्मच 1 कप पानी में मिला कर गरारे करने से लाभ होता है।
    19. दाद, खुजली- शहतूत के पत्ते पीसकर लेप करने से लाभ होता है।
    20. लू, गर्मी- गर्मियों में लू से बचने के लिये रोज शहतूत का सेवन करना चाहिए। इससे पेट, गुर्दे और पेशाब की जलन भी दूर होती है। ऑंतों के घाव और लीवर रोग ठीक होते हैं साथ ही रोज सेवन करने से सिर को मजबूती मिलती है।
    21. मूत्रघात (पेशाब मे धातु आना) : इस के रस में कलमीशोरा को पीसकर नाभि के नीचे लेप करने से पेशाब मे धातु आना बंद हो जाती है।
    22. कब्ज : इस के छिलके का काढ़ा बनाकर 50 से लेकर 100 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह और शाम सेवन करने से पेट के अंदर मौजूद कीड़ें समाप्त हो जाते है। इस की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से पेट साफ हो जाता है।
    23. मुंह के छाले : 1 चम्मच शहतूत के रस को 1 कप पानी में मिलाकर कुल्ली करने से मुंह के दाने व छाले ठीक हो जाते हैं।
    24. अग्निमांद्यता (अपच) होने पर : शहतूत के 6 कोमल पत्तों को चबाकर पानी के साथ सेवन करने से अपच (भोजन का ना पचना) के रोग मे लाभ होता है। शहतूत को पकाकर शर्बत बना लें फिर इसमें छोटी पीपल का चूर्ण मिलाकर पिलाने से लाभ होता है।
    25. पित्त ज्वर : पित्त बुखार में इस का रस या उसका शर्बत पिलाने से प्यास, गर्मी तथा घबराहट दूर हो जाती है।
    26. 20 ग्राम शहतूत और 20 ग्राम खट्टे अनार के छिलके को पानी में उबालकर पीने से पेट के कीड़ें नष्ट हो जाते हैं।
    27. इस के पेड़ की जड़ को पानी में उबालकर सेवन करने से आंतों के कीड़े समाप्त होते हैं।
    28. दिल की धड़कन : इस का शर्बत बनाकर पीने से दिल की तेज धड़कन सामान्य होती है।
    29. हृदय की निर्बलता : इस का शर्बत पीने से हृदय की निर्बलता (दिल की कमजोरी) नष्ट होती है। हृदय (दिल) की कमजोरी दूर करने के लिए 250 मिलीलीटर इस का शर्बत लेकर, उसमें 240 ग्राम प्रवाल-भस्म मिलाकर दिन में दो बार पीना हितकर है।
    30. कफ (बलगम) : 50 से 100 मिलीलीटर शहतूत की छाल का काढ़ा या 10 से 50 ग्राम शहतूत के फल का रस सुबह-शाम सेवन करने से कफ (बलगम) खांसी दूर होती है।
    31. कण्ठमाला के लिए : इस का शर्बत पीने से मुंह की सारी सूजन और गण्डमाला की सूजन (गांठो की सूजन) समाप्त हो जाती है।
    32. गले का दर्द : इस का शर्बत पीने से गले की खुश्की और दर्द ठीक हो जाता है।
    33. शरीर को शक्तिशाली बनाना : गाय को लगभग 1 मिलीलीटर शहतूत के पत्ते सुबह और शाम को खिलाकर उस गाय का दूध पीने से शरीर शक्तिशाली बनता है।
    34. टांसिल का बढ़ना : 1 चम्मच इस के शर्बत को गर्म पानी में डालकर गरारे करने से गले के टांसिल ठीक हो जाती हैं।
    35. गले के रोग में : इस का रस बनाकर पीने से आवाज ठीक हो जाती है, गला भी साफ हो जाता है और गले के कई रोग भी ठीक हो जाते हैं।
    36. कण्ठ-दाह : इस का फल चूसने से या इस का शर्बत बनाकर पीने से कण्ठ-दाह (गले में जलन) दूर होता है।

इतना ही नहीं शहतूत में और भी कई गुण पाए जाते हैं, जैसे- इसके नियमित प्रयोग से आंखों की गड़बड़ी, लंग कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर से बचा जा सकता है।

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Article Source :- http://www.sachkahausla.com/

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