Search

शकरकंदी खाएं मासपेशियों की ऐठन, मोटापा और कैंसर से मुक्ति पायें

शकरकंदी (Sweet potato)

शकरकंदी (sweet potato ; वैज्ञानिक नाम : Ipomoea batatas – ईपोमोएआ बातातास्) कॉन्वॉल्वुलेसी (Convolvulaceae – कोन्वोल्वूलाकेऐ) कुल का एकवर्षी पौधा है, पर यह अनुकूल परिस्थिति में बहुवर्षी सा व्यवहार कर सकता है। यह एक सपुष्पक पौधा है। अगर आपको का ब्‍लड शुगर लेवल (Blood sugar levels) कुछ भी खाने से तुरंत ही बढ जाता है तो, शकरकंद खाना ज्‍यादा अच्‍छा होता है। इसे खाने से ब्‍लड शुगर (Blood sugar) हमेशा नियन्‍त्रित (Control) रहता है और इंसुलिन (Insulin) को बढने नहीं देता।
शकरकंदी में आयरन (Iron) , फोलेट ( folate) , कॉपर (copper), मैगनीशियम (magnesium) , विटामिन्‍स (vitamins) आदि होते हैं, जिससे इम्‍यून सिस्‍टम (Immune System) मजबूत बनता है। इसको खाने से त्‍वचा में चमक (Glowing Skin) आती है और चेहरे पर जल्‍दी झुर्रियां (Wrinkles) नहीं पड़ती।

शकरकंदी खाने के फायदे (The Benefits of Eating Sweet Potato)

  1. रोजाना शकरकंदी खाने से शरीर में खून की मात्रा बढ़ जाती है (Increases blood volume) और शरीर मोटा-ताजा बनता है।
  2. शकरकंदी का सेवन करने से यौनशक्ति बढ़ (Increase sexual)जाती है।
  3. शकरकंदी को चीनी के साथ खाना ज्यादा उपयोगी होता है।
  4. आपको जानकर हैरानी हो सकती है लेकिन शकरकंदी खाने से भी आप आसानी से वजन कम (Weight Loss) कर सकते हैं. जानिए, शकरकंदी यानी स्वीट पोटैटो में ऐसी क्या खास बात है जो वजन कम करने में मददगार है.
  5. लो कैलेारी डायट (Low Calorie Diet) – हरेक शकरकंदी तकरीबन 100 कैलोरी की होती है.
  6. फाइबर (Fiber ) से भरपूर है शकरकंदी.
  7. शकरकंदी में पानी की मात्रा भी बहुत अधिक पाई जाती है.
  8. एंटीऑक्सीडेंट पोषक तत्वों (Antioxidant nutrients) से भरपूर है ये नैचुरली स्वीट (Naturally Sweet) है यानी इसमें अलग से शुगर डालने की जरूरत नहीं. इतना ही नहीं, इसको खाने से शुगर लेवल भी नहीं बढ़ता.
  9. शकरकंद विटामिन ए का स्रोत (Source of Vitamin A) है, खासतौर पर नारंगी रंग के शकरकंद में इसकी भरपूर मात्रा होती है। माना जाता है कि भारत में बच्चों एवं महिलाओं और अफ्रीका जैसे गरीब देशों में आमतौर पर पाए जाने वाले विटामिन ए की कमी को दूर करने की इसमें खासी क्षमता होती है।
  10. नारंगी रंग के शकरकंदों और कुछ दूसरी फसलों से बने उत्पादों में ग्लाईकेमिक तत्त्वों (GI elements) की मात्रा कम होने की वजह से वे लोग भी इन उत्पादों का सेवन कर सकेंगे जो मधुमेह के शिकार हैं। भारत में ऐसे रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
  11. स्कूल जाने वाले बच्चों के मध्याह्न भोजन कार्यक्रम में कंद से तैयार खाद्य उत्पादों को शामिल करने से उनका पोषण (Nutrition) और सुधर सकता है।
  12. कंद फसलों का इस्तेमाल एथेनॉल (Ethanol ) (जैवईंधन) तैयार करने में भी किया जा सकता है।
  13. शकरकंद कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, विटामिन बी6 और विटामिन सी (Carbohydrates, fiber, vitamin B6 and vitamin C.) का अच्छा स्रोत है।
  14. रतौंधी (Night blindness) तथा बच्चों में वृद्धि रुकने की शिकायत (Stop complaining about the increase in children) हो तो शकरकंदी का सेवन करना चाहिए।
  15. शकरकंदी खाने से आँखों की रौशनी(Improves eyesight) बढ़ती  है और मन प्रसन्न करता है
  16. इसके खाने से हड्डियाँ  (Bones) मजबूत बनती  है , कैंसर (Cancer )  से लड़ने में मदद करता है।
  17. शकर कंद भूनकर खाना हृदय (Heart )को सुरक्षित रखने में उपयोगी है। इसमें हृदय को पोषण देने वाले तत्व पाये जाते हैं। जब तक बाजार में शकरकंद उपलब्ध रहें उचित मात्रा में उपयोग करते रहना चाहिये।
  18. इसमें हाई पोटैशियम (Potassium) पाया जाता है जिससे तनाव में आने के बाद शरीर प्रयोग कर लेता है, इसलिये शकरकंद को जरुर खाना चाहिये। साथ ही यह मासपेशियों की ऐठन (Involuntary muscles of) कम करता है जो कि पोटैशियम की कमी से होता है।
  19. शकरकंदी में विटामिन बी6 (Vitamin B6) होता है जो शरीर में रासायनिक होमोसिस्टीन (chemical homocysteine) बनने से रोकता है और हार्ट अटैक से बचाता है। इसमें मौजूद पोटैशियम ब्‍लड प्रेशर (blood pressure) और दिन के कार्य को मेंटेन करता है।
  20. शकरकंदी में पाए जाने वाले कोलाइन (kolaina) नामक तत्व को शरीर के लिए बहुत अहम माना जाता है। यह तत्व नींद (Sleep) , मांसपेशियों की गतिशीलता (Muscle mobility) , सीखने तथा याद रखने में मदद (Help in learning and remembering) करता है। ये तत्व कोशिका के आवरण के ढांचे को मेंटेन करने में मदद करता है। नर्व इम्पल्स (Nerve Impulse) के ट्रांसमिशन (Transmission) में मदद करता है। वसा के अवशोषण (Fat absorption) को सहायता प्रदान करता है और असाध्य सूजन को कम करता है। शकरकंद में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व (Anti-inflammatory ingredients) आंतरिक और बाहरी सूजन जैसे हार्टबर्न (Heartburn,) , एसिडिटी (acidity) और गठिया (arthritis) के इलाज में सहायक होते हैं।

नोट :- अगर आपकी किडनी (Kidney) सही तरह से काम नहीं कर पा रही हो, या आप किसी क्रोनिक किडनी (Chronic kidney) के रोग से पीडि़त हैं, तो शकरकंदी न खाएं, क्योंकि शकरकंदी में पोटेशियम की अच्छी खासी मात्रा होती है। जब किडनी रक्त में मिले पोटेशियम को अलग नहीं कर पाती है, तो यह पोटेशियम शरीर के लिए घातक बन जाता है।

Loading...
loading...

Related posts