Search

वैदिक गणित (Vedic Math) एक चमत्कारी प्राचीन विद्या

वैदिक गणित (Vedic Math)-The Secret

वैदिक गणित का नाम किसी पहचान का मोहताज़ नहीं है इस विद्या को हम लोगों ने ही कोई महत्व नहीं दिया जब की ये विद्या हमारे ऋषि मुनियों की हजारों सालों की तपस्या का परिणाम थी जो उन्होंने वैदिक अंकगणित, बीजगणित, रेखागणित समतल तथा गोलीय त्रिकाणमितीय, समतल तथा घन ज्यामिति (वैश्लेषिक), ज्योतिर्विज्ञान, समाकल तथा अवकल कलन आदिके रूप में सूत्र बनाये ! ये सूत्र इतने प्रभावी होते थे की आज के लोगों को वो किसी चमत्कार से कम नहीं मालूम होते. लेकिन हम हैं की विदेशी एजुकेशन सिस्टम को अपनाने में लगे हुए हैं

भारत के शिक्षाशास्त्रियों का भी यही विश्वास है कि असली ज्ञान-विज्ञान वही है जो इंग्लैंड-अमेरिका से आता है. जबकि भारत का गणित-ज्ञान यूनान और मिस्र से भी पुराना बताया जाता है. शून्य और दशमलव तो भारत की देन हैं ही, कहते हैं कि यूनानी गणितज्ञ पिथागोरस का प्रमेय भी भारत में पहले से ज्ञात था.

loading...

वैदिक विधि से बड़ी संख्याओं का जोड़-घटाना और गुणा-भाग ही नहीं, वर्ग और वर्गमूल, घन और घनमूल निकालना भी संभव है.

वैदिक गणित कम से कम ढाई से तीन हज़ार साल पुरानी है. उस में मन ही मन हिसाब लगाने के 16 सूत्र बताये गये हैं, जो साथ ही सीखने वाले की स्मरणशक्ति भी बढ़ाते हैं.

वैदिक गणित हमारी अपनी प्राचीन गणित है जिसके माध्यम से हम मात्र कुछ क्षणों में अपने कठिन से कठिन सवाल का हल पा सकते हैं, लेकिन हम किसी भी तरह की गणना के लिए पूरी तरह से कैल्कुलेटर के आदी हो गए हैं, जो कि पश्चिम जगत की खोज है। अगर हम अतीत में जाएं, तो वह काल न तो कंप्यूटर का था न कैल्कुलैटर का, आज से सैकड़ों साल पहले के समय की जो बात हमारे दिमाग में सबसे पहले आती है वह है वैदिक काल। हमारे चार वेद हैं, और वैदिक गणित अथर्ववेद का ही एक भाग है।

ऐसा कहा जाता है कि बगदाद के राजा ने उज्जैन के एक विद्वान को अपने यहाँ विज्ञान और गणित पढ़ाने के लिए आमंत्रित किया था। उस राजा ने कई भारतीय पुस्तकों का अरबी में अनुवाद भी करवाया। इसके बाद यही पध्दति ११ वीं शताब्दी में यूरोप जा पहुँची। एक इस्लामिक विद्वान अल-बरुनी भारतीय विज्ञान की शिक्षा प्राप्त करने के लिए भारत आया। भारत में वह तीस साल तक रहा और उसने कई किताबें भी लिखी, जिसमें से हिसाब-ए-हिंदी सबसे प्रसिध्द पुस्तक है।

जगद्गुरू शंकराचार्य भारती कृष्ण तीर्थ महाराज ने वर्ष १९११ से १९१८ तक वैदिक गणित पर शोध किया और इसे पुनर्स्थापित किया।

वैदिक गणित एक तरह से 16 सूत्रों पर आधारित है। इन सूत्रों को आप चाहें तो एक तकनीक या ट्रिक भी कह सकते हैं। कई लोग तो इसे जादुई ट्रिक भी कहते हैं। इस तकनीक की मदद से सवाल के साथ ही उसका जवाब भी हमारे दिमाग में आ जाता है। हम इसे दूसरे शब्दों में इस तरह कह सकते हैं वैदिक गणित वह विधा है जिसकी मदद से हम सवाल में ही छुपे जवाब का पता लगा सकते हैं।

अब जरा एक सरल से गणितीय सूत्र पर एक निगाह डालें।

उदाहरण के लिए हमें105 गुणा 107 का हल निकालना है।

तो वैदिक गणित की मदद से इसे इस तरह हल करेंगे-

105×107 = १ X(१X१) / 12 (5+7) / 35 (5X7)….11235

अगर हमें 12345 x 11 का हल निकालना है तो वैदिक गणित की मदद से इसे इस तरह हल करेंगे

12345 x 11 = 1/3 (1+2) 5 (2+3)7 (3+4) 9 (4+5)= 135795

इस तरह हम सवाल को एक निश्चित विधि से विभाजित कर उसका उत्तर उसके अंदर से ही हासिल कर सकते हैं। क्या यह जादू नहीं है

यह दुर्भाग्य की बात है कि भारत में 90 प्रतिशत लोग इस जादुई गणित से परिचित नहीं है।

वैदिक गणित के माध्यम से कोई भी विद्यार्थी गणित से संबंधित किसी भी सवाल का हल बजाय कुछ मिनटों के मात्र कुछ क्षणों में ही हासिल कर सकता है, इससे उसका मसय भी बचेगा और परीक्षा में वह ज्यादा अंक भी हासिल कर सकता है। इस विधि के माध्यम से कोई भी विद्यार्थी जोड़, बाकी घटाव, वर्ग, वर्गमूल और घन मूल आदि सवालों को बहुत संक्षिप्त तरीके कम समय मे कर सकता है। किसी भी विद्यार्थी के लिए परीक्षा में ५ या १० अंकों का अंतर बहुत मायने रखता है खासकर उनके लिए जो कॉलेज में प्रवेश लेना चाहते हैं।

वैदिक गणित की तुलना अगर यूसी मैथ्स से की जाए तो हम पाते हैं कि विद्यार्थी एबैकस की मदद के बिना यूसी मैथ्स नहीं सीख सकते। एबैकस वह उपकरण है जिसका आविष्कार चीन में हुआ है और इसमें कुछ बिंदुओ का प्रयोग किया जाता है। दूसरी बात इसको सीखने में ज्यादा समय (कुछ सप्ताह) लगता है। इसको विस्तार से सीखने में यानि भाग देना, गुणा करना, आदि सीखने मे कई और सप्ताह लग जाते हैं।

जबकि वैदिक गणित में तो किसी भी विद्यार्थी को इसके बुनियादी सिध्दांतों को ही सीखना होता है और उसे गणित के सवाल के अनुसार जोड़, घटाव, गुणा भाग से लेकर वर्ग, वर्गमूल, और घनमूल निकालने में प्रयोग में लाना होता है। यह सबकुछ कोई भी एक घंटे तक चहने वाले 12 सत्रों में आसानी से सीख सकता है। वैदिक गणित बीजगणित, त्रिकोणमिति और कैल्कुलस से जुड़े सवालों को हल करने में भी उपयोगी होता है। खगोल और अंकगणित से संबंधित गणनाओं के लिए भी वैदिक गणित बेहद उपयोगी है।

वैदिक गणित की सबसे बड़ी बात यह है कि इससे पश्चिमी विधा की पध्दति की एकरसता से छुटकारा मिल जाता है। इस विधि की वजह से गणित के प्रति विद्यार्थियों की रुचि हमेशा हमेशा के लिए खत्म हो जाती है। इस लेख का मकसद यही है कि आपके बच्चे गणित के मामले में कैल्कुलेटर पर आश्रित ना रहें और गणित के अंकों के साथ खेलें इससे उनकी बुध्दि भी कुशाग्र होगी।

वैदिक गणित उन लोगों को और उन छात्रों को जरुर सीखना चाहिए जो गणित से घबराते हैं। परीक्षा में गणित के पेपर में समय की कमी से अपने सवालों को हल नहीं कर पाते हैं जो अन्य विषयों में तो अच्छी पढ़ाई करते हैं मगर गणित विषय में रुचि पैदा नहीं होती। जो मन ही मन में गणना करने में हमेशा पिछ़ड़ जाते हैं।
वैदिक गणित बहुत सीधा और सरल है जिससे समय की बचत होती है। इसकी मदद से जटिल गणित की गणनाएँ भी आसानी से की जा सकती है। इससे हमारी मानसिक एकाग्रता में वृध्दि होती है। आप अपने जवाब को लेकर पूरे आत्मविश्वास से भरे होते हैं।

जटिल खगोलीय गणना करने के लिए नासा (अमरीकी अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र) में भी वैदिक गणित का प्रयोग किया जाता है।

आज वैदिक गणित इंग्लैंड, आयरलैंड, हॉलैंड, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, न्यू .जीलैंड और अमरीका सहित कई देशों में पढ़ाया जा रहा हैसाथ ही स्वीडन, जर्मनी, ईटली पौलेंड और सिंगापुर में भी इसे स्वीकार किया गया है। हमेशा याद रखें: किसी समस्या का समाधान खोजने का तरीका जितना सरल होगा, आप उतनी ही जल्दी उसे हल कर सकेंगे और इसमें गलती होने की संभावना भी कम से कम होगी।

मेरा आप लोगों से निवेदन है की आप अपने बच्चों के लिए सबसे अच्छा काम यही कर सकते हैं कि उन्हें वैदिक गणित सिखायें. इससे आत्मविश्वास, स्मरणशक्ति और कल्पनाशक्ति बढ़ती है. इस गणित के 16 मूल सूत्र और 14 उप सूत्र हैं जिनको जानने के बाद बच्चों के लिए हर ज्ञान की खिड़की खुल जाती है”. और यदि आप अपने बच्चों को संस्कृत की शिक्षा भी दे सकें तो उनका ज्ञान असीमित होगा और आप अपने आप को गौरान्वित महसूस करेंगे !

मै कोशिश करूंगा की आप को आसान तरीके से वैदिक गणित के बारे में बता सकू फिर भी कोई त्रुटी रह जाये तो उस त्रुटी को दूर करने में आप मेरी सहायता करेंगे और मुझे समय समय पर मार्गदर्शन देते रहेंगे !

वैदिक गणित के सोलह सरल गणितीय सूत्र

Sutras

  1. Ekadhikena Purvena (एकाधिकेन पूर्वेण)

पहले से एक अधिक के द्वारा।

‘By one more than the previous one’

Corollary(परिणाम ) :- Anurupyena

  1. Nikhilam navatascaramam Dasatah (निखिलम् नवतश्चरमं दशतः)

सभी नौ में से परन्तु अन्तिम दस में से।

‘All from nine and last from ten’

Corollary: Sisyate Sesasamjnah

  1. Urdhva – tiryagbhyam (ऊर्ध्व तिर्यग्भ्याम्)

सीधे और तिरछे दोनों प्रकार से।

‘Vertically and crosswise’

Corollary: Adyamadyenantyamantyena

  1. Paravartya Yojayet (परावर्त्य योजयेत्)

पक्षान्तरण कर उपयोग में लेना।

‘Transpose and apply’

Corollary: Kevalaih Saptakam Gunyat

  1. Sunyam SamyaSamuccaye (शून्यं साम्य समुच्चये)

समुच्चय समान होने पर शून्य होता हैं।

‘When the samuchayas are same, then it is Zero’

Corollary: Vestanam

  1. Anurupye – Shunyamanyat (आनुरूप्ये शून्यमन्यत्)

अनुरूपता होने पर दूसरा शून्य होता हैं।

‘If one is in ratio, the other one is zero’

Corollary: Vestanam

  1. Sankalana – Vyavakalanabhyam (संकलन-व्यवकलनाभ्याम्)

जोड़कर और घटाकर।

‘By addition and subtraction’

Corollary: Yavadunam Tavadunikritya Vargancha Yojayet

  1. Puranapuranabhyam (पूरणापूरणाभ्याम्)

अपूर्ण को पूर्ण करके।

‘By completing’

Corollary: Antyayordashake’pi

  1. Chalana – Kalanabhyam (चलन-कलनाभ्याम्)

चलन-कलन के द्वारा।

‘By calculus’

Corollary: Antyayoreva

  1. Yavadunam (यावदूनम्)

जितना कम हो, अर्थात् विचलन।

‘By the deficiency’

Corollary: Samuccayagunitah

  1. Vyastisamastih (व्यष्टिसमष्टिः)

एक को पूर्ण तथा पूर्ण को एक मानते हुए।

‘Whole as one and one as whole’

Corollary: Lopanasthapanabhyam

  1. Sesanyankena charamena (शेषाण्यड्केन चरमेण)

अंतिम अंक से अवशेष को।

‘Reminder by the last digit’

Corollary: Vilokanam

  1. Sopantyadvayamantyam (सोपान्त्यद्वमन्त्यम्)

अन्तिम और उपान्तिम का दुगुना।

‘Ultimate and twice the penultimate’

Corollary: Gunitasamuccayah Samuccayagunitah

  1. Ekanyunena Purvena (एकन्यूनेन पूर्वेण)

पहले से एक कम के द्वारा।

‘By one less than the previous one’

Corollary: Dhwajanka

  1. Gunitasamuchayah (गुणितसमुच्चयः)

गुणितों का समुच्चय।

‘The whole product (The product of the sums)’

Corollary: Dwandwa Yoga

  1. Gunakasamuchayah (गुणकसमुच्चयः)

गुणकों का समुच्चय।

‘Set of multipliers (All the multipliers)’

Corollary: Adyam Antyam Madhyam

 वैदिक गणित के चौदह उप  सूत्र

Sub-Sutras

  1. Anurupyena (आनुरूप्येण)

अनुपातों से।

‘Proportionality’

  1. Sisyate-Sesasmjnah (शिष्यते शेषसंज्ञः)

एक विशिष्ट अनुपात में भाजक के बढ़ने पर भजनफल उसी अनुपात में कम होता हैं तथा शेषफल अपरिवर्तित रहता हैं।

‘Quotient decreases in same ratio as divisor increases and remainder remain constant’

  1. Adyamadyen –Antyamantyena (आद्यमाद्येन अन्त्यमन्त्येन)

प्रथम को प्रथम के द्वारा तथा अन्तिम को अन्तिम के द्वारा।

‘The first by the first and the last by the last’

  1. Kevalaih saptakam-Gunyat (केवलैः सप्तकं गुण्यात्)

7 के लिए गुणक 143

‘For 7 the Multiplicand is 143’

  1. Vestanam (वेष्टनम्)

आश्लेषण करके।

‘By ousculation’

  1. Yavadunam Tavadunam (यावदूनम् तावदूनम्)

विचलन घटा करके।

‘Subtract by the deficiency’

  1. Yavadunam Tavadunikrtya Varganca Yojayet (यावदूनम् तावदूनीकृत्य वर्ग च योजयेत्)

संख्या की आधार से जितनी भी न्यूनता हो उतनी न्यूनता और करके उसी न्यूनता का वर्ग भी रखें।

‘What ever the deficiency subtract that deficit from the number and write along side the square of that deficit’

  1. Antyayor Dasake’pi (अन्त्ययोर्दशकेऽपि)

अन्तिम अंकों का योग 10 वाली संख्याओं के लिए।

‘Numbers of which the last digits added up give 10’

  1. Antyayoreva (अन्त्ययोरेव)

अन्तिम पद से ही।

‘Only the last terms’

  1. Samuchayagunitah (समुच्चयगुणितः)

गुणनफल की गुणन संख्याओं का योग।

‘The sum of the products’

  1. LopanaSthapanabhyam (लोपनस्थापनाभयाम्)

विलोपन तथा स्थापना से।

‘By alternate elimination and retention’

  1. Vilokanam (विलोकनम्)

देखकर।

‘By mere observation’

  1. Gunita Samuccayah Samuccaya Gunitah (गुणितसमुच्चयः समुच्चयगुणितः)

गुणनखण्ड़ो की गुणन संख्याओं के योग का गुणनफल गुणनफल की गुणन संख्याओं के योग के समान होता हैं।

‘The product of the sum of the coefficients in the factors is equal to the sum of the coefficients in the product (The product of the sum is the sum of the products)’

  1. Dhwajank (ध्वजांक्):

ध्वज लगाकर। “‘On the flag’Article SOurce :- http://www.mynoem.com/

Loading...
loading...

Related posts