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विटामिन ई से स्वास्थ्य के लाभ और हानियाँ

विटामिन ई (Vitamin E)

विटामिन ई एक प्रकार के आर्गेनिक कम्पाटउंड होते हैं जो शरीर को चलाने में मदद करते हैं। बॉडी के हर पार्ट को उसके कार्य के हिसाब से अलग – अलग विटामिन की जरूरत पड़ती है। एक बात और मनुष्यो और जानवर के शरीर को अलग – अलग विटामिन की जरूरत पड़ती है जैसे – मनुष्य के शरीर को विटामिन C की जरूरत पड़ती है वहीं जानवरों को उसी कार्य के लिए विटामिन D की जरूरत पड़ती है। विटमिन (vitamin) या जीवन सत्व भोजन के अवयव हैं जिनकी सभी जीवों को अल्प मात्रा में आवश्यकता होती है। रासायनिक रूप से ये कार्बनिक यौगिक होते हैं। उस यौगिक को विटामिन कहा जाता है जो शरीर द्वारा पर्याप्त मात्रा में स्वयं उत्पन्न नहीं किया जा सकता बल्कि भोजन के रूप में लेना आवश्यक हो।
विटामिन ए
विटामिन सी
विटामिन डी
विटामिन इ
विटामिन बी

यूं तो हमारे शरीर के लिए सभी विटामिन्स का अपना-अपना महत्व है, लेकिन उनमें कुछ की खास भूमिका होती है। ऐसे विटामिन्स में एक प्रमुख है विटामिन ई। चाहे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनाए रखने की बात हो या शरीर को एलर्जी से बचाए रखने की या फिर कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में प्रमुख भूमिका निभाने की, यह विटामिन बहुत जी जरूरी होता है। इसे प्राप्त करना भी बहुत मुश्किल नहीं है

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विटामिन ए शरीर के लिए क्यों जरुरी है

Vitamin E हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है। विटामिन ई वसा में घुलनशील विटामिन है। यह एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में भी कार्य करता है। इसके आठ अलग-अलग रूप होते हैं। कोशिकाएं एक दूसरे से इंटरएक्ट करने में Vitamin E का उपयोग करती हैं और कई महत्वपूर्ण कार्य करती हैं।

विटामिन ई के स्त्रोत (sources of Vitamin E)
अंडे, सूखे मेवे, बादाम और अखरोट, सूरजमुखी के बीज, हरी पत्तेदार सब्जियां, शकरकंद, सरसों, शलजम, एवोकेडो, ब्रोकली, कड लीवर ऑयल, आम, पपीता, कद्दू, पॉपकार्न, गेहूं, हरे साग, चना, जौ, खजूर, चावल का मांड, ताजा दूध, मक्खन, मलाई।

शरीर के लिए विटामिन इ  कितनी मात्रा है उपयोगी (How much vitamin E is useful for the body)
आपको प्रतिदिन कितने Vitamin E की आवश्यकता है, यह आपकी उम्र और लिंग पर निर्भर करता है। इसके अलावा गर्भावस्था, स्तनपान और बीमारियां उस मात्रा को बढ़ा देती हैं, जिसकी आपके शरीर को आवश्यकता होती है।

नवजात शिशु से छह माह: 4 मिलिग्राम / दिन

नवजात शिशु 7 से 12 माह: 5 मिलिग्राम / दिन

बच्चे 1 से 3 वर्ष: 6 मिलिग्राम / दिन

बच्चे 4 से 8 वर्ष: 7 मिलिग्राम / दिन

बच्चे 9 से 13 वर्ष: 11 मिलिग्राम / दिन

14 वर्ष और उससे बडे: 15 मिलिग्राम / दिन

स्तनपान कराने वाली महिलाएं: 17 मिलिग्राम / दिन

विटामिन सी ही संजीवनी बूटी है

विटामिन ई की गंभीर कमी के लक्षण (Serious symptoms of vitamin E deficiency)

1 शरीर के अंगों का सुचारू रूप से कार्य न कर पाना।
2 मांसपेशियों में अचानक से कमजोरी आ जाना।
3 आंखों के मूवमेंट में असामान्य स्थिति पैदा हो जाना।
4 नजर कमजोर हो जाना। दिखने में झिलमिलाहट महसूस होना।
5 चलने में लड़खड़ाट होना। कई बार कमजोरी महसूस होना।
6 प्रजनन क्षमता कमजोर हो जाना। शरीर में कमजोरी महसूस होना।

साइड इफेक्ट्स

विटामिन ई युक्त भोजन खाना खतरनाक या नुकसानदेह नहीं है। हालांकि सप्लीमेंट के रूप में Vitamin E के हाई डोज लेना नुकसानदेह हो सकता है। इसकी अधिकता से ब्लीडिंग का खतरा बढ़ जाता है और मस्तिष्क में गंभीर ब्लीडिंग हो सकती है। गर्भवती महिला के शरीर में विटामिन ई की अधिक मात्रा से बच्चे में बर्थ डिफेक्ट भी हो सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि विटामिन ई के सप्लीमेंट बिना डॉक्टर की सलाह के न लें, खासतौर पर जब आप रक्त को पतला करने वाली दवाईयों जैसे एस्प्रिन ले रहे हों।

उन लोगों को भी विटामिन ई का अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए, जिनमें विटामिन के की कमी हो। इस बात के प्रमाण भी मिले हैं कि अगर नियमित रूप से अधिक मात्रा में विटामिन ई का सेवन किया जाए तो मृत्यु भी हो सकती है।

विटामिन-डी की कमी से शरीर में होने वाले रोग

विटामिन ई के अन्य स्त्रोत (Other sources of vitamin E.)
हमारा शरीर Vitamin E का निर्माण नहीं कर सकता है, इसलिए आपको यह सुनिश्चित करना पड़ेगा कि आप इसे पर्याप्त मात्रा में लें। वैसे भोजन से विटामिन ई प्राप्त करना कोई मुश्किल काम नहीं है। हम सभी खाना बनाने में तेल का उपयोग करते हैं, जो Vitamin E के अच्छे स्त्रोत हैं। इसलिए तेल का नियमित सेवन करें।

विटामिन ई की उपयोगिता (The usefulness of vitamin E)

  1. विटामिन ई त्वचा की देखभाल करने और स्वस्थ रखने वाला विटामिन है। यह त्वचा को रूखेपन, झुर्रियों, समय से पहले बूढ़ा होने और सूरज की हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाता है।
  2. यह लाल रक्त कणिकाओं के निर्माण में भी सहायता करता है।
  3. कई अध्ययनों में ये बात सामने आई है कि जिन लोगों के शरीर में विटामिन ई की मात्रा अधिक होती है, उनमें दिल की बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।
  4. विटामिन ई मेनोपॉज के बाद महिलाओं में स्ट्रोक की आशंका को कम करता है।
  5. विटामिन ई कैंसर से भी रक्षा करता है। कई शोधों में यह बात सामने आई है कि जिन लोगों को कैंसर होता है, उनके शरीर में विटामिन ई की मात्रा कम होती है।
  6. 2010 में हुए एक अध्ययन के अनुसार जो लोग विटामिन ई के सप्लीमेंट (Supplements) लेते हैं, उनमें अल्जाइमर्स होने का खतरा कम हो जाता है।
  7. Vitamin E दूसरे एंटी ऑक्सीडेंट्स (Antioxidants) के साथ मिलकर मैक्यूलर डीजनरेशन (Macular Degeneration) से बचाता है। यह रेटिना (Retina)  की सुरक्षा भी करता है।
  8. यह महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द से भी बचाता है।
  9. विटामिन ई की कमी डायबिटीज (Diabetes) का खतरा बढ़ा देती है।
  10. ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) की रोकथाम में भी यह उपयोगी है।
  11. इम्यून सिस्टम (Immune System)
    को मजबूत बनाता है।
  12. Vitamin E बाल झड़ने के लिए ली जाने वाली दवाइयों के साइड इफेक्ट को भी कम करता है।
  13. एलर्जी (Allergies) की रोकथाम में भी उपयोगी है।
  14. बच्चों में यह कंकाल तंत्र (Skeletal system) के विकास के लिए जरूरी है।
  15. शरीर में विटामिन ए और के के भंडारों का रखरखाव करता है।
  16. यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) के स्तर को नियंत्रित करता है।

कुछ तथ्य

विटामिन ई ब्लडप्रेशर की दवाइयों के अवशोषण को रोकता है।

शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करने वाली दवाइयां विटामिन ई का स्तर कम करती हैं।

कैंसर की दवाइयां भी विटामिन ई के स्तर को प्रभावित करती हैं।

जिन लोगों के शरीर में वसा को अवशोषण करने में कठिनाई होता है, उनमें भी विटामिन ई की कमी हो जाती है।

विटामिन ई कीमोथेरेपी के लिए उपयोग की जाने वाली दवाइयों के प्रभाव को कम कर देता है।

समय पूर्व जन्मे बच्चे में जन्मजात ही vitamin E की मात्रा कम होती है।

विटामिन ई को अवशोषित करने के लिए हमारे पाचनतंत्र को वसा की आवश्यकता होती है।

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