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लहसुन (Garlic) के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण

लहसुन (Garlic)

लहसुनमें वैसे तो बहुत से गुण है लेकिन हम सभी गुणों का बखान नहीं कर सकते क्यूंकि लहसुनको अमरत्व प्राप्त है और ये बात बहुत कम लोग जानते हैं इसके लिए इस लिंक को अवश्य पढ़े (प्याज और लहसुनकी उत्पत्ति से जुड़ी पौराणिक और दंतकथाए )  लहसुनखाने को जितना स्वादिष्ट बनाता है, उतना ही यह पौष्टिक भी है। लहसुनकी एक छोटीसी कलि भी हजारो सालों से पूरे शरीर के स्वास्थ्य में लाभकारी मानी  जाता है। कच्चे लहसुन का तेल कीटाणुरोधी, जीवाणुरोधी, एंटीसेप्टिक और जंतुनाशक के रूप में कार्य करने के लिए मदद करता है। कच्चे लहसुनका तेल एंटीऑक्सीडेंट भी है। लहसुन में गुणकारी सल्फ़र होता है, जिससे यह थोड़ा कसैला होता है और इसकी महक भी तीखी होती है। इसके अलावा लहसुन में एलिसिन होता है, जो एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल,एंटी-फंगल और एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। लहसुन सेलेनियम (एक प्रकार का धातु) का भी एक अच्छा स्रोत है। लहसुन आपके पेट और डाइजेस्टिव सिस्टम के लिए अच्छा है। ब्लड प्रेशर, हीलिंग और डिटॉक्सिफिकेशन जैसी दिक्कतों में लहसुन बेहद ही उपयोगी और लाभदायक है। लहसुन विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालता है और मूल्यवान मूत्रवर्धक के रूप में माना जाता है। हर दिन आप दही या डेयरी उत्पादों में कीमा बनाया हुआ या कटा हुआ लहसुन डालकर खा सकते हैं। इसका उपयोग भोजन में डालने में भी किया जा सकता है| (लहसुनका अचार )

लहसुन तीन प्रकार का होता है । :- 
१. एक गाँठ वाला लहसुन- यह लहसुनपांच रसों से युक्त सर्वश्रेष्ठ होता है , इसमें एक कली होती है ।
२. मोटी कलियाँ वाला लहसुन:- इसमें दस से बारह मोटी कलियाँ होती है ,यह भी अच्छा है ।
३. पतली कलियाँ वाला लहसुन:- इसमें पंद्रह से बीस पतली-पतली छोटी कलियाँ होती है यह औसत दर्जे का लहसुनहै । यह एनी दोनों लहसुनसे कमजोर है ।
** लहसुन का खाद्य विश्लेषण( प्रति १०० ग्राम) :-
१. कार्बोज-२९% ; २. प्रोटीन-६.३% ;
३. खनिज लवण-1% ; ४.फास्फोरस-.३१ %
५. चूना – .०३% , वसा -.१%; तेल (Essen oil )- .०६% लोहा १.३ मिलीग्राम ।

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 लहसुनमें विटामिन ए ,बी ,सी पाया जाता है ।

लहसुन(Garlic) के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण 

    1. मुँह के छाले (लहसुनfor Cold Sores) : मुँह के छाले कम करने के लिए ताजा लहसुन सीधे छालों पर रख दें| वास्तविक लहसुनके रस से तरल प्रहार होगा लेकिन यह वास्तविक रूप में छालों को ठीक कर देगा|
    2. बालों का झड़ना (लहसुनfor Hair Loss) : लहसुनकई सालों से बालों के झड़ने पर एक प्राकृतिक उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। बाल गिरने की आसपास के क्षेत्र पर लहसुनका तेल लगाकर तुरंत ढंक दें। थोड़ी देर बाद बाल धो डालें|इस उपाय को कई हफ्तों के लिए दोहराएँ।
    3. फेफड़े के रोग :- लहसुन का सेवन करने वालों को फेफड़े के रोग नहीं होते। लहसुन एक शानदार कीटाणुनाशक है, यह एंटीबायोटिक दवाइयों का अच्छा विकल्प है, लहसुनसे टीबी के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं।
    4. मुंहासे (लहसुनfor pimples) : सफेद सिरका के बराबर राशि के साथ लहसुन की २ कलियों का रस मिलाएं। मिश्रण को पीड़ित क्षेत्र में कई बार लगाने के लिए नई कपास की गेंद का उपयोग करें। यह मिश्रण कीटाणुरोधी और जीवाणुरोधी होता है|
    5. लहसुनसे उपचार – सोरायसिस (लहसुनfor Psoriasis) : लाल और खुजलीवाली त्वचा के लिए लहसुन के तेल का उपयोग करें। लहसुन के तेल का कैप्सूल लेकर उसमें एक नई सुई से छेद बनाकर तेल निकालकर प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं|
    6. एथलीट फुट (लहसुनfor Athlete’s Foot) : ताजा लहसुन के साथ एथलीट फुट के रूप में खमीर संक्रमण का उपाय करें। लहसुन की कच्ची कलियाँ मसलकर प्रभावित जगह पर लगाएं और ढंक दें| हर दिन अपने पैर धोकर अपने जुर्राब का उपयोग करते हुए प्रभावित क्षेत्र पर तेल लगाकर ढंक दें| कई दिनों तक यह उपाय करने से राहत मिलती है|
    7. रोजाना इसे खाने से आपका कॉलेस्ट्रॉल लेवल 12 प्रतिशत तक कम हो सकता है। यह ब्लड क्लॉटिंग को रोकता है, खून पतला करता है और रक्त प्रवाह सुचारू करता है।
    8. लहसुन में विटामिन सी होने से यह स्कर्वी रोग से भी बचाता है। यह आँतों के छिपे मल को भी बाहर निकाल देता है और कब्ज, गैस व एसिडिटी से मुक्ति दिलाता है।
    9. 100 ग्राम सरसों के तेल में दो ग्राम (आधा चम्मच) अजवाइन के दाने व एक लहसुन की कलियां डालकर धीमी आंच पर पकाएं। लहसुन और अजवाइन काली हो जाए तब तेल उतारकर ठंडा कर छान लें। तेल की मालिश करने से पहले इसे हल्का गर्म कर लें।इससे हर प्रकार का बदन दर्द दूर हो जाएगा।
    10. अगर आप थुलथुले मोटापे से परेशान हैं तो – लहसुन की दो कलियां भून लें उसमें सफेद जीरा व सौंफ सैंधा नमक मिलाकर चूर्ण बना लें। इसका सेवन सुबह खाली पेट गर्म पानी से करें। – लहसुनकी चटनी खाना चाहिए और लहसुन को कुचलकर पानी का घोल बनाकर पीना चाहिए। – लहसुन की पांच-छ: कलियां भिगो दें। सुबह पीस लें। उसमें भुनी हिंग और अजवाइन व सौंफ के साथ ही सोंठ व सेंधा नमक, पुदीना मिलाकर चूर्ण बना लें। 5 ग्राम चूर्ण रोज फांकना चाहिए।
    11. खांसी और टीबी में लहसुन बेहद फायदेमंद है। लहसुनके रस की कुछ बूंदे रुई पर डालकर सूंघने से सर्दी ठीक हो जाती है।
      लहसुन की दो कलियों को पीसकर उसमें और एक छोटा चम्मच हल्दी पाउडर मिला कर क्रीम बना ले इसे सिर्फ मुहांसों पर लगाएं। मुहांसे साफ हो जाएंगे।
    12. लहसुन की 5 कलियों को थोड़ा पानी डालकर पीस लें और उसमें 10 ग्राम शहद मिलाकर सुबह -शाम सेवन करें। इस उपाय को करने से सफेद बाल काले हो जाएंगे।
    13. डायबिटीज में लहसुन खाने से शरीर में इन्‍सुलिन की मात्रा बढ़ती है। इससे डायबिटीज में राहत मिलती है, क्‍योंकि यह ब्लड सुगर लेवल को सही रखता है।
    14. लहसुन से अंगों पर होने वाली बीमारियां, जैसे वॉर्ट्स और कॉर्न्स को कंट्रोल किया जा सकता है। 
  1. लहसुन के सेवन से हमेशा शारीरिक उत्तेजना बनी रहती है, क्‍योंकि लहसुन खाने से बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन सही बना रहता है। 
  2. लहसुन वजन घटाने में काफी कारगर है। कई शोधकर्ताओं ने यह पाया है कि लहसुन के सेवन से वज़न को घटाया जा सकता है, क्‍योंकि इसमें हमारे शरीर में बनने वाले फैट को भी कम करने की क्षमता होती है। ऐसे में आप आसानी से वज़न कम कर सकते हैं। इसमें प्री-एडीपोसाइट्स होते हैं, जो वसा कोशिकाओं को घटा देते हैं। लहसुनमें 1,2-डीटी ( 1,2 विनयालिडीन ) भी पाया जाता है, जो वज़न को कम करता है। 
  3. लहसुन का नियमित सेवन करने से कैंसर होने का खतरा काफी कम रहता है। लहसुन में एंटी-कैंसर प्रॉपर्टी भी होती है। इसमें एक तत्‍व होता है पिल्‍प, जो एक प्रकार का हेट्रोसाइक्लिक एमीन होता है। इसकी सहायता से कोशिकाओं में असामान्‍य वृद्धि कम होती है। महिलाओं में लहसुन के सेवन से ब्रेस्‍ट कैंसर होने की संभावना काफी कम हो जाती है। 
  4. फेरोपोरटिन एक प्रोटीन है जो बॉडी में आयरन की खपत को बढ़ाता है और उसे पचाने में मदद करता है। लहसुन में डायली-सल्‍फाइड होता है जो फेरोपोरटिन की मात्रा को बढ़ा देता है और आयरन मेटाबॉलिज्‍म में सुधार कर देता है।
  5. पुरुषों के वीर्य वृद्धि में लहसुन काफी उपयोगी है , उन्हें एक तोला लहसुन का रस व एक तोला शहद को मिलाकर चाटने से शुक्राणुओं में वृद्धि होगी व धातु प्रबल व पुष्टिवर्धक होगा ।
  6. यौन रोंगों में :- रात्रि को सोने से पूर्व गुप्तांगो में लहसुन को छीलकर 10-15 उपयोग करें व सुबह निकाल दें । सहचर को भी रात्रि में लहसुनको खिलाएं ।
  7. अन्य प्रयोग :-

    * गिरते बालो में :- पूरा लहसुनकी गांठ को सरसों के तेल में धीमी आंच पर काला होने तक गर्म करके उस तेल को बालों की जड़ों में लगायें , इस तेल को ” कारबांकल ” जैसे खतरनाक घांवों पर भी लगायें ।

    * रक्त-चाप के कारण लकवा :- हरे डंठल वाले लहसुनके रस का प्रयोग पानी के साथ करें व लकवाग्रस्त स्थान की मालिश  करें ।

    * जहरीले कीटों को रोकने हेतु :- खिड़की-दरवाजे , नालियों पर लहसुनको छीलकर रख दें । कीड़े-मकोड़े – सांप-बिच्छु प्रवेश नहीं करेंगे ।

    * सूघने की शक्ति :- इसमें रोगी को गंध का एहसास नहीं होता है अतः लहसुनकी पत्तियों या पोर के रस को नाक में डालें ।

    * कान में मवाद :- तिल के तेल में पकाकर कान में डालें यदि कान में लगातार आवाज आ रही हो तो हल्दी भी पका ले ।

    * त्वचा रोंगों में :- प्रतिदिन लहसुनका सेवन करें तथा लहसुनके पेस्ट को मुहांसे , दाने , एक्जिमा में तुलसी व गौ-मूत्र में पीसकर पेस्ट बनाकर लगा लें । नौसादर के साथ पीसकर लगाने से सफ़ेद-दाग ठीक होते है ।

    * कुष्ट रोग में :- लहसुनको पीसकर बराबर मात्रा में सेंधा नमक मिलकर देशी गाय के घी के साथ आधा-आधा तोला सुबह-शाम प्रयोग करें ।

    * जोड़ों के दर्द में – उबलते गाय के दूध में लहसुनकी कलियों को डालकर पकाएं फिर ठंडा करके लहसुनको खाकर दूध पीलें व अजवाईन व सरसों के तेल में पकाकर जोड़ों पर मालिश करें ।
    दूसरा प्रयोग :- लहसुनकी ५-६ गांठे छीलकर पानी में रात भर के लिए भिगो दें और प्रातः में इसे घोंटकर और छानकर जल को पीलें । एक सप्ताह बाद गांठों की संख्या 7 एवं दूसरे सप्ताह गांठो की संख्या १० कर दें । तीन सप्ताह बाद चौथे सप्ताह इस प्रयोग को बंद कर दें पांचवें सप्ताह से इसी क्रम को पुनः शुरू करें । * इस प्रयोग के साथ दही से निकला देशी गाय के घी का मक्खन अवश्य खाएं । इससे जोड़ों का दर्द कम होगा ।

    * साइटिका :- १६ तोला लहसुनएक किलो दूध , तथा आठ लीटर पानी को मिलाकर तब-तक उबालें जब-तक दूध शेष ना बचे अब इसे हल्का गर्म पियें साइटिका से छुटकारा मिलेगा ।

    लहसुनकी बदबू-अगर आपको लहसुनकी गंध पसंद नहीं है कारण मुंह से बदबू आती है। मगर लहसुनखाना भी जरूरी है तो रोजमर्रा के लिये आप लहसुनको छीलकर या पीसकर दही में मिलाकर खाये तो आपके मुंह से बदबू नहीं आयेगी। लहसुनखाने के बाद इसकी बदबू से बचना है तो जरा सा गुड़ और सूखा धनिया मिलाकर मुंह में डालकर चूसें कुछ देर तक, बदबू बिल्कुल निकल जायेगी।

  8. लहसुनके हानिकारक प्रभाव :-  लहसुन सांस में बदबू, मुंह, पेट या सीने में जलन, गैस, मतली, उल्टी, शरीर में गंध और दस्त का कारण बन सकता है।
  9. Garlic के गाढ़े पेस्ट का त्‍वचा पर उपयोग त्‍वचा को जलने की तरह नुकसान पहुंचा सकता है।
  10. गर्भावस्था एवं स्तनपान करानेवाली स्त्रियों को वैद्यराज की देखरेख में लेवे |
  11. Garlic के सेवन से खून का बहाव ज्‍यादा होता है। इसलिए अनुसूचित सर्जरी से कम से कम दो सप्ताह पहले Garlic का सेवन करना बंद कर दें।
  12. Garlic गैस्ट्रोइंटेस्टिनल ट्रैक्ट में जलन पैदा कर सकता है। इसलिए अगर आपको पाचन संबंधी समस्‍या हो तो Garlic का प्रयोग सावधानी से करे|

अफगानिस्तान एक ठंडा प्रदेश है किन्तु वहां के पुरुष सुन्दर , लम्बे चौड़े व ताकतवर उनका चेहरा लाल होता है कारण ?
वहां के पुरुष नियमित रूप से पिसे Garlic एवं घी मिश्रण को दूध में मिलाकर खीर खाते है ।

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