Search

रोने से न सिर्फ आपका दिल हल्का होगा बल्कि आपके स्वास्थ्य को भी फायदा मिलेगा

अक्सर देखने में आता है की जो वयक्ति किसी बात पर रोना शुरु कर दे तो उसे कमजोर दल का कहा जाता है और उसपर टोट कसा जाता है की इतना बड़ा हो गया अब भी रो रहा है लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं की रोने से भी फायदा मिलता है जो व्यक्ति रो लेता है उसका दिल मज़बूत होता है और मानसिक संतुलन बना रहता है

रोने का ये मतलब बिल्कुल भी ये नहीं है की आप कमजोर है जिस तरह आपकी सेहत के लिए हंसने के फायदे ही फायदे हैं, उसी तरह थोड़ा बहुत रोने से न सिर्फ आपका दिल हल्का होगा बल्कि आपके स्वास्थ्य को भी फायदा मिलेगा। मनोचिकित्सकों का कहना है कि कभी कभी रो लेने से किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं पहुंचता बल्कि रो लेने से व्यक्ति तनाव रहित व हल्का फुल्का महसूस करता है।

loading...

आंसू दुःख, चिंता, क्लेश तथा मानसिक तनाव को झेलने में मदद करते हैं। डाक्टरों का कहना है कि रो लेने से मानसिक तनाव में मुक्ति मिलती है इसके साथ ही हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) , भगन्दर आदि रोगों से छुटकारा पाने में सहायता मिलती है। तनाव से उत्पन्न होने वाली बीमारियों की भी शिकायत नहीं रहती। रो लेने से हृदय रोग भी कम हो जाता है।

रोते समय जब आँखों में आंसू आते हैं तो यह आंसू आँखों में पड़े विजातीय द्रवों को बाहर निकालने का कार्य करते हैं तथा आँखों को नम रखने और उन्हें संक्रमण से बचाने का भी कार्य करते हैं।

मेडिकल युनिवर्सिटी ऑफ ओहियो के शोधकर्ताओं ने आपके आंसुओं के फायदे अपने अध्ययन में भी पाए जिसमें उन्होंने कि रोने के बाद अधिकतर लोग हल्का और तरोताजा महसूस करते हैं। शोध में 88.8 प्रतिशत लोग रोने के बाद हल्का महसूस करते हैं और सिर्फ 8.4 प्रतिशत लोग रोने से दुखी होते हैं।

अगर आप अपने दुख को सीने में छिपाकर रखते हैं, तो कभी-2 दिल खोलकर रोने से गुरेज न करें क्योंकि रोने से ‌न सिर्फ दिल हल्का होगा बल्कि आपकी सेहत को ये फायदे भी मिलेंगे।

बढ़ती है आंखों की रोशनी :- आंखों में आंसू आने से आंख की पुतली और पलकों को नमीं मिलती है. वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध किया है कि रोने से आँखों की खूबसूरती बढती है। इन वैज्ञानिकों के मतानुसार आँखों के कार्निया की परत कंजकटाईवा को लेक्रिमल ग्रन्थि (Kanjktaiwa corneal layer of the gland Lekriml)  द्वारा आंसुओं को नम कर देने के कारण, आंसुओं में मिले शारिय तत्वों द्वारा सुन्दरता निखर जाती है। आंसुओं के निकलने पर हारडेरियन ग्रन्थि (Harderian gland) से एक तैलीय द्रव निकलता है, जिसकी मदद से कार्निया (Corneal) नम और गहरा बन जाता है। स्त्रियों में पुरुषों की अपेक्षा अधिक आंसुओं का उत्पादन होता है इसलिए स्त्रियों की आँखें अधिक खुबसूरत होती हैं। हालांकि बहुत अधिक रोने से भी आंखों की रोशनी जाने का खतरा हो सकता है।

रोने से आँखों से धूल मिटटी समेत हानिकारक तत्व भी बाहर निकल जाते हैं और आँखें साफ़ और नम हो जाती है, जिससे आँखों में संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।

खत्म होते हैं बैक्टीरिया :- आंसुओं में लिसोजाइम नामक लिक्विड (The liquid Lisojaim) होता है जो सिर्फ 5-10 मिनटों में 90-95 प्रतिशत बैक्टीरिया (Bacteria) का सफाया कर सकता है।

शरीर से निकलते हैं ‌टॉक्सिक :- कई शोधों में यह बात मानी गई है कि जब हम बहुत अधिक दुख या अवसाद में होते हैं तो शरीर में कुछ टॉक्सिक केमिकल्स (Toxic Chemicals) बनने लगते हैं। आंसू के रास्ते से जहरीले तत्व शरीर से बाहर निकल जाते हैं।

मूड ठीक होता है :- कई बार शरीर में मैगनीज की अधिकता से घबराहट, उलझन, थकान, गुस्सा जैसी समस्याएं होती हैं। रोने से शरीर में मैगनीज का स्तर कम होता है जिससे आपको हल्का और अच्छा महसूस होता है।

Read More :- फटी एड़ियों की प्राकृतिक चिकित्सा (Best Treatment)

तनाव घटता है :- बहुत अधिक तनाव में रोने से थोड़ी राहत मिलती है। रोने की प्रक्रिया के दौरान शरीर में एंडोर्फिन (Endorphins) , ल्यूकाइन-एंकाफालिन (Lukain-Ankafalin) और प्रोलैक्टिन (Prolactin)  नामक तत्वों का स्तर कम होता है जिससे तनाव कम होता है लेकिन बहुत अधिक रोने से इसके उल्टे असर भी हो सकते हैं.

रोने में सिर्फ आंसू ही नहीं बहते, भीतर का शोक, भीतर का क्रोध, भीतर का हर्ष, भीतर के मनोवेश भी आंसुओं के सहारे बाहर निकल जाते हैं। और भीतर कुछ इकट्ठा नहीं होता है। तो स्क्रीम थैरेपी के लोग कहते हैं कि जब भी कोई आदमी मानसिक रूप से बीमार हो, तो उसे इतने गहरे में रोने की आवश्यकता है कि उसका रोआं-रोआं, उसके हृदय का कण-कण, श्वास-श्वास, धड़कन-धड़कन रोने में सम्मिलित हो जाए; एक ऐसे चीत्कार की जरूरत है, जो उसके पूरे प्राणों से निकले, जिसमें वह चीत्कार ही बन जाए। हजारों मानसिक रोगी ठीक हुए हैं चीत्कार से।

Loading...
loading...

Related posts