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रॉयल जैली जो सिर्फ रानी मधुमक्खी के लिए बनाया जाता है

रॉयल जैली के बारे में आपने शायद ही सुना होगा बहुत कम लोग जानते हैं की रॉयल जैली क्या है और यह कहाँ से मिलती है और किस काम आती है रॉयल जैली की बाज़ार में  कीमत 20 लाख रूपए किलो तक होती है

रॉयल जैली क्या है और कहाँ से मिलती है ?

रॉयल जैली एक ऐसा पदार्थ या भोजन कह सकते है जिसे सिर्फ रानी मधुमक्खी के लिए बनाया जाता है इसके लिए आपको मधुमक्खी के कार्य प्रणाली को समझना होगा . किसी भी छत्ते में रानी ही अंडे देती हैं उसका काम अंडे देना ही होता है श्रमिक और रानी का जन्म एक ही प्रकार के अंडे से होता है। जब भी श्रमिक मधुमक्खियाँ किसी लार्वें को रानी बनाना चाहती हैं, तो वे उसे रॉयल जैली  नाम का एक विशेष प्रकार का भोजन खिलाना शुरू कर देती हैं। इस भोजन को अंग्रेज़ी में रॉयल जैली कहते हैं। वह लार्वा, जिसे अपने पूरे जीवनकाल तक यह भोजन खिलाया जाता है, रानी बन जाता है। अन्य लार्वे, जिन्हें यह भोजन पूरा नहीं मिल पाता है, श्रमिक बन जाते हैं। श्रमिक बनने वाले लार्वों को केवल दो तीन दिन तक ही रॉयल जैली दिया जाता है, फिर इनका पोषण एक साधारण भोजन द्वारा ही किया जाता है। रानी जो अंडे देती है। वे दो प्रकार के होते हैं:

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  1. श्रमिक
  2. नर

वे अंडे, जिनसे नर निकलते हैं, रानी गर्भाधारन कराए बिना ही दे सकती है। लेकिन श्रमिक उत्पन्न करने वाले अंडे वह केवल गर्भाधान होने के बाद दे सकती है। रानी को डंक तो होता है, लेकिन इसका उपयोग वह तभी करती है जब किसी दूसरी रानी से उसकी लड़ाई होती है।

रॉयल जैली किस काम आती है ?

रॉयल जैली बहुत ही कीमती पदार्थ है जो मधुमक्खियों की ग्रंथि से झरता  है। जो मधुमक्खियों की रानी की मुख्य खुराक भी है। रॉयल जैली  खाने के कारण ही रानी मक्खी बनी रहती है और बच्चे पैदा करती रहती है यही कारण है की जिन पुरुषों  या महिलायों में बच्चे को लेकर समस्या आती है सब कुछ नार्मल होने के बाद भी यदि बच्चे नहीं होते तो उनके लिए ये रामबाण दवाई की तरह काम करता है

रॉयल जैली कोलेस्ट्रॉल, कैंसर, डिप्रेशन, ब्लडप्रेशर समेत 90 से अधिक रोगों के उपचार में काम आती है। इतना ही नहीं साइंटिस्ट मधुमक्खी के रॉयल जेली की मदद से अब एड्स जैसी घातक बीमारियों के साथ ही sax सम्बन्धी दवाइयों को बनाने में लगे हैं

मधुमक्खी के डंक लगने से शरीर में सूजन हो जाती है और दर्द भी होता है, पर इसका जहर हानिकारक नहीं होता। गठिया, जोड़ों के दर्द आदि के लिये इसे उपयोगी समझा जाता है।

रॉयल जैली  के बाद दूसरा कीमती सामान जो मधुमक्खी  बनाती है वो है मोम जी हाँ मोम मूल्यवान तथा उपयोगी पदार्थ, जो मधुमक्खियों से मिलता है, वह मोम है। इसी से वे अपने छत्ते बनाती हैं। मोम बनाने के लिए मधुमक्खियां पहले शहद खाती हैं, फिर उससे गर्मी पैदा कर अपनी ग्रंथियों द्वारा छोटे- छोटे मोम के टुकड़े बाहर निकालती हैं। यह मोम 500 से 700 रुपए किलो बिकता है।
और अंत में बनता है शहद जो फूलों के रस से बनाया जाता है और जिस फूल से शहद बनाया जाता है उसी वजह से उसकी कीमत तय की जाती है यदि शहद केसर की फूलों से बनाया हु है तो उसकी कीमत होगा 1 लाख रूपए किलो और यदि वो सूरजमुखी के फूल से बनाया हुआ है तो 400 से 500 रूपए किलो और यदि तुलसी या जंगली तुलसी का बना हुआ शहद है तो वो १००० रूपए किलो तक बिकता है
कितना रॉयल जैली, मोम, पोलोन ग्रेन्यूल्स और शहद बनता है 
शहद की एक पेटी अंदाज़ा  4 से 6 हजार रुपए में तैयार होती है। जिसमें से एक साल में उयदि मौसम ठीक हो और फूलों के भरमार हो तो , एक साल में 4-7 एमएल रॉयल जेली, 200-300 ग्राम मोम और एक किलो पोलोन ग्रेन्यूल्स मिलता है। 20 से 30 किलो शहद मिलता है। इसके अलावा शहद की कीमत इस बात पर भी तय होती है कि मधुमक्खियों ने किस फूल के रसों से शहद तैयार किया है।
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