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श्री राम का नाम सियावर रामचंद्र कब, कहाँ और कैसे पढ़ा ? जरुर पढ़े

सियावर रामचंद्र की जय :- भगवान् राम का नाम कब रामचंद्र हो गया कोई नहीं जानता और मुझे भी इसका कोई प्रमाण नहीं मिला लेकिन जो कुछ पता लगा वो भी कम चौकाने वाला नहीं है

ये उस समय की बात है जब श्री राम जी लंका जीत कर वापिस आये और दीपावली मन ली गयी तो अगले दिन चाँद (चंद्रमा) जी भी बधाई देने पहुंचे और उन्होंने भगवान राम से शिकायत कर दी की आपने दीपवली का त्यौहार अमावस की रात में ही क्यों मनाया ?

क्योंकि अमावस की रात में चाँद निकलता ही नहीं है इसलिए वह कभी भी दीपावली मना नहीं सकता। और बहुत कुछ चाँद  ने प्रभू राम को एक मधुर कविता के रूप में अपनी शिकायत दर्ज करवाते हैं और भगवान राम से कैसे आशीर्वाद पाते हैं

राम जी भी उस की बात से सहमत हो कर उसे वरदान दे बैठते हैं आइये जानते हैं की इसी कौन से शिकायत थी जो राम जो को उन्हें वरदान देना पढ़ा ।

चाँद के शब्दों में :-

जब चाँद का धीरज छूट गया ।
वह रघुनन्दन से रूठ गया ।
बोला रात को आलोकित हम ही ने करा है ।
स्वयं शिव ने हमें अपने सिर पे धरा है ।

तुमने भी तो उपयोग किया हमारा है ।
हमारी ही चांदनी में सिया को निहारा है ।
सीता के रूप को हम ही ने सँभारा है ।
चाँद के तुल्य उनका मुखड़ा निखारा है ।

जिस वक़्त याद में सीता की ,
तुम चुपके – चुपके रोते थे ।
उस वक़्त तुम्हारे संग में बस ,
हम ही जागते होते थे ।

संजीवनी लाऊंगा ,
लखन को बचाऊंगा ,.
हनुमान ने तुम्हे कर तो दिया आश्वश्त
मगर अपनी चांदनी बिखरा कर,
मार्ग मैंने ही किया था प्रशस्त ।
तुमने हनुमान को गले से लगाया ।
मगर हमारा कहीं नाम भी न आया ।

रावण की मृत्यु से मैं भी प्रसन्न था ।
तुम्हारी विजय से प्रफुल्लित मन था ।
मैंने भी आकाश से था पृथ्वी पर झाँका ।
गगन के सितारों को करीने से टांका ।

सभी ने तुम्हारा विजयोत्सव मनाया।
सारे नगर को दुल्हन सा सजाया ।
इस अवसर पर तुमने सभी को बुलाया ।
बताओ मुझे फिर क्यों तुमने भुलाया ।
क्यों तुमने अपना विजयोत्सव
अमावस्या की रात को मनाया ?

अगर तुम अपना उत्सव किसी और दिन मानते ।
आधे अधूरे ही सही हम भी शामिल हो जाते ।
मुझे सताते हैं , चिड़ाते हैं लोग ।
आज भी दिवाली अमावस में ही मनाते हैं लोग ।

तो राम ने कहा, क्यों व्यर्थ में घबराता है ?
जो कुछ खोता है वही तो पाता है ।
जा तुझे अब लोग न सतायेंगे ।
आज से सब तेरा मान ही बढाएंगे ।
जो मुझे राम कहते थे वही ,
आज से रामचंद्र कह कर बुलायेंगे

बोलो सियावर रामचंद्र की जय , प्रभू श्री रामचंद्र की जय

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मुझे जो तथ्य मिले में वो प्रस्तुत किये यदि आपके पास कोई प्रमाण हो तो बताने का कष्ट करें और यदि आप राम जी का रामचंद्र बनने से आप सहमत है तो जरुर शेयर करें.

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