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सभी रोगों को एक ही योग से नाश करना है तो करें राजयोग

आज के समय में शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा जो तनाव में नहीं है और तनाव ऐसा नहीं है की कही बाहर से आता है ये भी अपने ही दिमाग की उपज है जो हर कोई कभी न कभी अपने मन में बो देता है और जब काटने का समय होता है तो भूल जाता है की ये काम उसी ने खुद ही किया है और इंसान दूसरों पर दोषारोपण करता रहता है

अब यदि किसी उदाहरण की बात करें तो भरे पढ़े है ऐसे उदाहरण जैसे यदि हम बच्चों की बात करें तो सुबह जल्दी उठने से लेकर रात को सोने तक वो तनाव में ही जीत है कभी ये करो कभी ये ना करो , घर का कोई ही ऐसा इंसान होगा जो उस पर अपना काम या व्यवहार न थोपता हो ये क्यों किया ये ऐसा करो ये वैसा करो, पहले स्कूल का काम करो, नंबर कम है, सारा दिन टीवी मत देखो आदि आदि

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और यदि बड़ों की बात करे तो पुरूष हो या स्त्री सभी बिजी है किसी ना किसी बात को लेकर सारा दिन सोचना कभी ये करना है कभी ये रह गया इससे लेना उसका देना बच्चों के लिए ये लेना माता पिता के लिए ये लाना आदि आदि

इस भाग दौड़ की ज़िन्दगी में कब शरीर रोगी हो जाता है पता ही नहीं चलता लेकिन एन सब की बिच एक काम ऐसा है जो आदमी कुछ भी काम ना करे मतलब कोई भी हाथ पैर ना हिलाये, मुंह आँख भी बंद कर ले, लेकिन जब तक जिन्दा है तब तक वो सोचना नहीं छोड़ सकता है !

ज्यादातर लोग, सोचने को एक फिजूल और मामूली काम समझते हैं और इसीलिए लोगों ने कई तरह की कहावतें भी बना रखी हैं जैसे खयाली पुलाव बनाना आदि आदि, और इन सभी बातों का निष्कर्ष यही है की सिर्फ सोचने से कुछ नहीं होता है, काम करना पड़ता है !

पर यहाँ आपसे ठीक इसका उल्टा कहा जाय की सिर्फ सोचने से ही सब कुछ हो सकता है तो आप क्या कहेंगे ?

बहुत से लोगों को ये कल्पना, अतिश्योक्ति, गप्प आदि लग सकता है क्योंकि उनका पाला कभी किसी सच्चे राजयोगी से नहीं पड़ा !

हठ योग की साधना जैसे प्राणायाम, आसन, ध्यान की थोड़ी मात्रा तो बहुत से लोग करतें हैं पर राजयोग के सच्चे जानकार कम ही बचे हैं !

राजयोग की पूरी प्रक्रिया को आसान शब्दों में कहा जाय तो ये है की राजयोग में दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति, “मन” को वश में करने का प्रयास किया जाता है ! मन की शक्ति इतनी अपार है कि उसकी तुलना ईश्वर की शक्ति से की जा सकती है और ये मन 1 सेकेंड के लिए भी 100 % किसी एक चीज पर केन्द्रित हो जाय तो गजब चमत्कार हो सकता है !

पर यहाँ एक बात अच्छे से समझने वाली बात है की सोच या विचार, मन नहीं होते हैं बल्कि मन का एक हिस्सा मात्र होते हैं ! हालांकि मन को वश में करने के लिए सोच को ही हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है !

हमारे परम आदरणीय हिन्दू धर्म ने इस मन की अपरम्पार ताकत को पहचाना और इसी पर राजयोग शास्त्र की रचना की गयी !

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राजयोग में लिखा है की कोई भी आदमी प्रतिदिन ऐसा बार बार गम्भीरता से सोचे की शिवो अहम् अर्थात मै ही शिव हूं तो धीरे धीरे उसके अन्दर शिवत्व के लक्षण और शक्ति पैदा होने लगेगी ! कोई साधक सोचे की अहं ब्रह्मास्मि अर्थात मै ही परम ब्रह्म यानी ईश्वर हूं तो धीरे धीरे उसके अन्दर सही में ईश्वरत्व पैदा होने लगता है !

मन की प्रचंड ताकत को साधने के लिए अपनी सोच विचार को कण्ट्रोल कर एक ही चीज पर फोकस करना पड़ता है मतलब बिना दिमाग भटके, आदमी को एक ही चीज के बारे में लगातार सोचते रहने का अभ्यास बढ़ाना पड़ता है !

और अगर आदमी भगवान् की स्वरूपता पाने की बजाय अपने शरीर के रोगों का नाश चाहे तो ध्यान करे की उसके ह्रदय में भगवान मृत्युंजय महादेव शिव, माता पार्वती के साथ विराज मान हैं और उनके शरीर से जो दिव्य तेज निकल रहा है वो साक्षात् अमृत स्वरुप है और वो दिव्य प्रकाश पूरे शरीर में तेजी से समां रहा है जिससे उसके शरीर के सारे रोगों का नाश हो रहा है और उसका पूरा शरीर बहुत सुन्दर और स्वस्थ और मजबूत बन रहा है !

ऐसा ध्यान, रोगी आदमी चाहे बैठकर या लेटकर कैसे भी लगा सकता है पर जल्दी फायदे के लिए जितना अधिक से अधिक हो सके ध्यान लगाए !

केवल ऐसा प्रतिदिन मात्र सोचने भर से ही निश्चित ही शरीर की सारी बिमारियों में आराम मिलने लगता है ! दुनिया की कोई भी बिमारी ऐसी नहीं है जिसमें इससे आराम ना मिल सकें !

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राजयोग के इसी सिद्धान्त की नक़ल कर विदेशियों ने सेल्फ रियलाइजेशन थ्योरी (Theory of Self-realization) बनायी और इसको सिखाने का पैसा भी लेते हैं पर भारत वर्ष में पैदा होने वाला भारतीय स्वतः इन दिव्य ज्ञान को ईश्वरीय कृपा से प्राप्त कर लेता है !

राजयोग हमें सिखाता है कि एक कदम पीछे आकर जिन्दगी का अवलोकन करें, शान्ति से श्वांस लें, अपने प्रतिक्रियाओं को शीतल करें फिर अपने चयन अनुसार एक कदम आगे बढ़ायें जो कि दूसरों की सोच और इच्छाओं से स्वतंत्र हो।

राजयोग आपको स्वतंत्र बनाता है। राजयोग हमें प्रेम भरी प्रतिक्रिया करने की शक्ति देता है।

एक बात जिस पर गौर करना बेहद जरुरी है वो है अपने मन की अच्छे विचारों की खुराक देना और मन को खुराक आँखों से, कानों से, मुह से, नासिका से, और जो भोजन हम करते हैं उन से मिलती है

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राजयोग को करने से पहले आपको अपनी खुराक को सात्विक करना होगा तभी आप राजयोग को कर पाएंगे और कामयाब हो सकेंगे तो सब से पहले अपना खाना सात्विक रखे, दूसरे आँखों से अच्छी  चीज़ें देखने की व स्वाध्याय की आदत अपना लें, कानो से किसी की बुराई न सुने और न ही किसी तरह का गाली गलौच न सुने न दें , नासिका से अच्छी प्राण वायु ग्रहण करें और कोशिश करें की जो भी खाएं अपनी मेहनत की कमी से खाएं ये सब करने के बाद राजयोग को सिद्ध करने में ज्यादा समय नहीं लगेगा और आप अपने आप राजयोग के द्वारा सभी बुराई और बीमारी पर विजय प्राप्त कर लेंगे

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