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रतनजोत (जैट्रोफा) बालों का प्राकृतिक डॉक्टर

रतनजोत (जैट्रोफा) Alkanna tinctoria के गुण

रतनजोत का प्रयोग प्राय: मसाले के रूप में होता है . इसे दामिनी , बालछड या लालजड़ी भी कहते हैं . अंग्रेजी में इस पौधे को Onosma कहा जाता है . यह हिमालय क्षेत्र में होता है .

रतनजोत किस काम आती है ?

रतनजोत की जड़ से एक महीन लाल रंगने वाला पदार्थ मिलता है जिसका प्रयोग खाने और पीने की चीज़ों को लाल रंगने के लिए होता है, मसलन भारत के रोग़न जोश व्यंजन की तरी का लाल रंग अक्सर इस से बनाया जाता है। इसके अलावा दवाईयों, तेलों, शराब, इत्याद में भी इसके लाल रंग का इस्तेमाल होता है। कपड़े रंगने के लिए भी इसका प्रयोग होता है। वास्तव में ‘रतनजोत’ नाम इस पौधे की जड़ से निकलने वाले रंग का है लेकिन कभी-कभी पूरे पौधे को भी इसी नाम से पुकारा जाता है। आधुनिक काल में E103 के नामांकन वाला खाद्य रंग, जिसे अल्कैनिन (alkannin) भी कहते हैं, इसी से बनता है

रतनजोत से बालों की देखभाल (Nut ( Jatropha ) Natural Hair Doctor)

एक किलो सरसो का तेल, रतनजोत, मेहंदी के पत्ते, जलभांगरा के पत्ते तथा आम की गुठलियों को 100-100 ग्राम की मात्रा लेकर सभी को कूटकर लुगदी बना लें और लुगदी को निचोड़ लें।फिर उसे सरसों के तेल में इतना उबालें कि सारा पानी जल जाए, केवल तेल ही शेष बचे। इसे छानकर इसका तेल रोजाना सिर पर लगायें।और   सुबह-शाम 250 ग्राम दूध पीना चाहिए। इससे बाल काले हो जाते हैं।
बालों को रंगना हो और आँखों की रोशनी बढानी हो तो ,मेंहदी की पेस्ट में रतन जोत को मिलाकर अच्छे से गर्म करें . ठंडा होने पर बालों में लगायें व कुछ देर के लिए छोड़ दें . इसके बाद पानी से सिर धो लें . सिर में लगाने वाले तेल में अगर रतनजोत के कुछ टुकड़े ड़ाल दिए जाएँ तो तेल का रंग तो सुंदर हो ही जाता है ; इस तेल के प्रयोग से बाल स्वस्थ और काले हो जाते हैं . साथ ही इस तेल से मस्तिष्क की ताकत भी बढ़ती है .
आंवला के पिसे हुए चूर्ण को नींबू के रस और रतनजोत चूर्ण के साथ पीसकर बालों में लेप करने से बाल काले हो जाते हैं।आंवला और लौह चूर्ण को पानी के साथ पीसकर लगाने से सफेद बाल काले हो जाते हैं।
100 ग्राम दही में  पिसी हुई एक ग्राम कालीमिर्च और रतनजोत चूर्ण  मिलाकर सप्ताह में एक बार सिर को धोयें और बाद में गुनगुने पानी से सिर को धो लें। इस प्रयोग को करने से बालों का झड़ना बन्द हो जाता है तथा बाल काले और सुन्दर हो जाते हैं।

रतनजोत के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण (Herbal and medicinal properties of Ratanjot)
रतनजोत  को घिसकर माथे पर लगाने से मानसिक क्षमता बढ़ती है और डिप्रेशन आदि बीमारियाँ नहीं होने पाती . इसका पावडर तेल में मिलाकर मालिश करने से त्वचा का रूखापन खत्म होता है .
इसके पौधे की जड़ का पावडर एक ग्राम सवेरे शाम लिया जाए तो , मिर्गी के दौरे पड़ने बंद हो जाते हैं .
यदि त्वचा के रोगों से छुटकारा पाना हो तो इसकी जड़ का आधा ग्राम पावडर सवेरे शाम ले लो . इसके पौधे की पत्तियों को चाय की तरह पीया जाए तो यह हृदय के लिए बहुत लाभदायक है .
इसके पत्तियों के सेवन से रक्त शुद्ध होता है और दाद, खाज और खुजली से छुटकारा मिलता है .
इसके पत्तों का काढ़ा नियमित रूप से लिया जाए तो गुर्दे की पथरी भी ठीक हो जाती है .
रतनजोत के फल का 1 बीज की गिरी यदि ली जाये तो ये पेट को साफ़ करती है
रतनजोत की जड़ को उबालकर इसका काड़ा पिया जाये तो ये खून तो साफ़ करता ही है साथ ही चर्म सम्बन्धी रोगों में भी फायदा पहुंचाता है
रतनजोत की जड़ को कूट कर पानी के साथ दिन में ३ बार लेने पर बुखार भी ठीक हो जाता है (एक बार में ३-४ चम्मच )
जिन लोगों को दांतों के रोग है वो इसकी टहनी से दातून करें तो दांत और मसूड़े मजबूत होंगे
सावधानी :- रतनजोत के बीजों का सेवन 2 से अधिक नहीं करना चाहिये. अधिक मात्रा में रतनजोत लेने से उल्टी होती है और ये आपके लिए जहरीला भी साबित हो सकता है इसलिए बिना किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह के इसका प्रयोग ना करें.
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