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याददाश्त बढाने के आयुर्वेदिक एवं औषधीय गुण

याददाश्त (Memory) बढाने के घरेलू नुस्खे 

याददाश्त कमजोर होना एक आम बात है। पहली बात तो हम सभी इंसान अपने दिमाग का सिर्फ 10-20% ही उपयोग कर रहे हैं। भूलने की समस्या लगभग हर उम्र के लोगों में पाई जाती है। भूलने का मुख्य कारण एकाग्रता की कमी है।अधिकतर समस्या रिकाल करने में होती है क्योंकि हमारे दिमाग को रिकाल प्रोसेस के लिए जिन पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है उनकी हमारे शरीर में कमी हो जाती है । हमारा दिमाग  दो तरह के ‘स्मृति भण्डारण’ में बंटा हुआ है –

  • अस्थायी भण्डारण
  • स्थायी भण्डारण

अस्थायी भण्डारक कोशिकाओं में कोई बात कुछ देर के लिये याद रहती है, फिर मिट जाती है, जबकि स्थायी भण्डारक कोशिकायें, अच्छी याददाश्त की कारक होती हैं।

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यहां ये बताना भी जरुरी है कि, स्थायी भण्डारक कोशिकायें सिर्फ 2% ही सक्रिय हो पाती हैं, मुझे अच्छी तरह याद है कि मुझे भी याद ना रहने की बीमारी थी या डर था तो मुझे एक किताब मिली जिसने मेरी याददाश्त बढाने में बहुत मदद की उसका नाम आज आपके साथ शेयर करता हूँ. उसके लेखक का नाम था स्वेट मार्टेन  और किताब का नाम था (अपनी याददाश्त को कैसे बढाये ) उसमे एक बात जिसने मुझे काफी हेल्प की वो थी कि आप किसी भी अध्याय को 5 बार पढ़िये और फिर 5 बार लिखिये तो वो अध्याय आपको जिन्दगी भर के लिये याद हो जाता है, पर सवाल यह था कि पुस्तकें इतनी ज्यादा होती थीं की, सभी को इतने बार पढ़ने-लिखने के बारे में सोचकर ही शरीर में झुरझुरी सी पैदा हो जाती थी, अब यही परिस्थिति सभी पर लागू होती है। पर ये फार्मूला आज भी काम करता है लेकिन इसको कोई भी पसंद नहीं करता.खास कर बच्चे वो बार बार कोई भी सीरियल देख सकते हैं पर अपनी किताब को नहीं पढ़ सकते

कहने का मतलब यह है कि अस्थायी भण्डारक कोशिकाओं से स्थायी भण्डारक कोशिकाओ तक विषय को पहुंचाने के लिये विषय को बार-बार दुहराने की जरूरत पडती है।

* एकाग्रता की कमी- कई बच्चे दिन भर किताब लेकर बैठे रहते है, पढ़ते भी हैं, पर एकाग्रता की कमी होने के कारण वो विषय की गहराई तक पहुंच नहीं पाते।

* अनियोजित ढंग से पढा़ई या काम करना।

* आत्मविश्वास की कमी।

* गलत भोजन।

* अंतिम बात जिस पर बहुत कम लोग ध्यान दे पाते हैं, वो है आपके आसपास की रखी चीजों या किसी इंसान से ऐसी तरंगों का निकलना जो आपकी मस्तिष्कीय तरंगो को अव्यवस्थित करता है।

यह * कारक हमारे याददाश्त के कमजोर होने के मुख्य कारक हैं।

याददाश्त का आयुर्वेदिक उपचार

– 9 नग बादाम रात को पानी में भिगोकर छोड़ दें। सुबह छिलके उतारकर बारीक पीस कर पेस्ट बना लें। अब एक गिलास दूध गरम करें और उसमें बादाम का पेस्ट घोलें। इसमें 3 चम्मच शहद भी डालें। दूध जब हल्की गर्म हो जाए तब इसे उतारकर पीएं। यह मिश्रण पीने के बाद दो घंटे तक कुछ न लें।

– सेब में अनेक गुण है कम ही लोग जानते हैं।सेब में पाया जाने वाला पेक्टिन विशेष फाइबर होता है। यह इम्यून सपोर्टिव प्रोटीन्स के स्तर को बूस्ट करता है इसलिए दिनभर में एक सेब आपको कई बीमारियों से बचा सकता है।रोज सेब का सेवन करने से याददाश्त बढ़ती है।

– दालचीनी का तेल भी याददाश्त बढ़ाने में काफी प्रभावकारी होता है। यह तेल कोलेस्ट्रोल को कम करता है जिसकी वजह से आपका मष्तिष्क तेजी से काम करता है। यह तेल आपके दिमाग को ठंडक पहुंचाता है जिसकी वजह से आपका दिमाग शांत होता है तथा छोटी मोटी बातों पर तुरंत उत्तेजित या क्रोधित नहीं होता। यह तेल आपके दिमाग को ठीक करते हुए आपकी याददाश्त को बढ़ाता है।

– जो लोग सुबह कॉफी पीते हैं, वे कॉफी न पीने वालों की तुलना में अधिक फुर्ती से अपने कार्य निपटा लेते हैं। यदि आप दोपहर में भी चुस्त रहना चाहते हैं तो कॉफी का सहारा लेवें। शोधकर्ता ने बताया- कैफीन मस्तिष्क के उन हिस्सों को क्रियाशील करती हैं, जहां से व्यक्ति की सक्रियता, मुड और ध्यान नियंत्रित होता है।

– मछली को दिमाग का आहार माना जाता है क्योंकि उसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड्स प्रचूर मात्रा में पाए जाते है। ओमेगा 3 फैटी एसिड्स मष्तिष्क के लिए बहुत जरुरी हैं एवं इनके सेवन से आपका दिमाग तेज होता है याददाश्त बहुत हद तक बढ़ जाती है। मछली का तेल इन्हीं ओमेगा 3 फैटी एसिड्स से प्राप्त किया जाता है जो ब्रेन टॉनिक का काम करता है। यह तेल प्राकृतिक रूप से आपकी याददाश्त कमजोर होने से रोकता है साथ ही साथ आपकी एकाग्रता, बुद्धिमता, तर्क करने की शक्ति इत्यादि को भी बढ़ाता है।

– ब्रह्मी याददाश्त बढ़ाने की मशहूर जड़ी-बूटी है।कमजोर याददाश्त को बुढ़ापे की निशानी माना जाता है, लेकिन बार-बार भूलने की समस्या केवल बूढ़े लोगों के साथ ही नहीं बल्कि जवान लोगों के साथ भी होती है। इसका एक चम्मच रस नित्य पीना लाभदायक है। इसके 7 पत्ते चबाकर खाने से भी वही लाभ मिलता है। ये याददाश्त के घटने पर रोक लगाती है।

– जब भी प्राकृतिक तरीकों से याददाश्त बढ़ाने की बात होती है, तब रोजमेरी तेल का नाम सबसे पहले आता है। इस तेल को दौनी के पत्तों से निकाला जाता है जिसमें बहुत हीं औषधीय गुण होते हैं। इसमें मष्तिष्क की शक्ति बढ़ाने के गुण होते हैं जिसकी वजह से इसे ब्रेन टोनिक भी कहा जाता है। इसके तेल का उपयोग स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए सदियों से किया जाता रहा है। इसकी तीखी खुशबू की वजह से लोग इसे खाना पकाने के काम में भी लाते हैं। इसकी खुशबू के कारण इसे सुगंध चिकित्सा में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसकी तीखी खुशबू आपके मष्तिष्क को उत्प्रेरित करती है जिसकी वजह से आपके दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ जाती है तथा आपकी एकाग्रता बढ़ती है जिनकी वजह से आप अपने काम पर अच्छी तरह से ध्यान लगा पाते हैं।

-अखरोट में एंटी-ऑक्सीडेंटस होते हैं और दिन में कम से कम सात अखरोट खाना बीमारियों को दूर भगाता है और कोलेस्ट्रोल की मात्रा को कम करता है।अखरोट स्मरण शक्ति बढ़ाने में सहायक है। 20 ग्राम अखरोट और साथ में 10 ग्राम किशमिश रोजाना लेना चाहिए। यह  कमजोर याद्दाश्त का आयुर्वेदिक  असरदार उपचार है।

-अलसी के तेल में भी ओमेगा 3 फैटी एसिड्स प्रचूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके सेवन से भी मछली के तेल जितना हीं फायदा मिलता है। अलसी का तेल आपकी एकाग्रता बढ़ाता है, आपकी स्मरण शक्ति तेज करता है तथा सोचने समझने की शक्ति को भी बढ़ाता है

Source :- http://ayurvedicaushdhi.blogspot.in/

आजकल बढ़ती प्रतिस्पर्धा की दौड़ में आगे बढ़ने के लिए बच्चों को शार्प माइंडेड होना बहुत जरूरी है। उन्हें वो सबकुछ पता होना चाहिए, जो उनके लिए जानना जरूरी है। हर माता-पिता का सपना होता है कि उनका बच्चा बुद्धिमान बने और पढ़ाई में आगे निकले। लेकिन क्या आप जानते हैं बच्चों को बुद्धिमान बनाना आपके हाथ में है? जी हां, अगर बच्चों को एक खुशनुमा माहौल दिया जाए खाने में पौष्टिक आहार दिया जाए तो बच्चों को बुद्धिमान बनाना आसान हो जाता है। बच्चों के लिए कुछ खास बात जिस से यदि आप अभी ध्यान दें तो आने वाले वक़्त में उनको और आपको उनकी याददाश्त की चिंता नहीं रहेगी !

दिमागी खेल के फायदे

बच्चों के दिमागी विकास और उन्हें बुद्धिमान बनाने के लिए जरूरी है कि बच्चों के साथ छोटे-छोटे दिमागी खेल खेले जाएं। पहले उन्हें विस्तार से खेल का तरीका बताएं फिर उनके साथ बच्चा बनकर ही खेलें और गलती होने पर उन्हें अवश्य बताएं। जिससे वे उस गलती को दोबारा करने से बचेंगे। इन खेल की मदद से उनकी याददाश्त तो तेज होगी ही  साथ उन्हें मजा भी आएगा।

प्यार व दुलार

वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक जो महिलाएं अपने नवजात को ज्यादा प्यार व दुलार देती हैं। उनके बच्चों के दिमाग के हिप्पोकेंपस क्षेत्र में ज्यादा नर्व कोशिकाएं बनती हैं जिससे बच्चे का दिमाग तेज होता है। मां से लगाव होने पर बच्चों के दिमागी विकास पर काफी असर होता है।

पौष्टिक आहार

बच्चों के दिमागी विकास के लिए उन्हें पौष्टिक आहार की बहुत जरूरत होती है। बच्चों को खाने में हरी सब्जियां, फल, दूध, मेवे, अंडे आदि जैसे खाद्य पदार्थ दें। बच्चों को जंक फूड का सेवन कम से कम कराएं। हर रोज सुबह बच्चों को भीगे हुए बादाम की दो तीन गरियां खाने को दें। इससे उनकी याद्दाशत बढ़ती है।

पर्याप्त नींद

पोषक तत्वों के अलावा, पर्याप्त नींद आवश्यक है। अमरीका में हुए एक अध्ययन के मुताबिक दोपहर में खाना खाने के बाद क़रीब एक घंटे की नींद लेने से बच्चों की याददाश्त बढ़ती है। यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाच्युसेट्स के शोधकर्ताओं के मुताबिक दिमाग को मजबूत बनाने और सीखने के लिए दोपहर की नींद बेहद अहम है।

स्तनपान कराएं

मां का दूध बच्चे के दिमागी विकास के लिए बहुत जरूरी है। नवजात के लिए मां के दूध से अच्छा कोई भी आहार नहीं होता है। एक तरफ जहां स्तनपान से बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है वहीं यह बच्चों के दिमागी विकास के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। डैनिश शोधकर्ताओं के मुताबिक स्तनपान करने वाले बच्चे ज्यादा स्वस्थ और बुद्धिमान होते हैं।

किताबों के शौकीन  

बच्चों के दिमागी विकास के लिए नयी-नयी तकनीक आ चुकी है लेकिन हम किताबों से मिलने वाले ज्ञान को कैसे भूल सकते हैं। ज्यादातर बच्चों को किताबें पढ़ने का शौक होता है। आपको बच्चे की इस शौक में बाधा बनने की जगह उन्हें किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए। यह हर उम्र के बच्चों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। इससे उन्हें हर तरह का ज्ञान मिलता है।

तो अब बच्चों का दिमागी विकास के लिए इन उपायों को अपनायें और अपने प्यारे को बनाए जिनियस। ध्यान रहे बच्चे आपसे ही सीखते हैं इसलिए जैसा आप बोलेंगे व्यवहार करेंगे वे भी वैसा ही करेंगे।

योग के माध्यम से –

भूचरी आसन
                           भूचरी आसन

हाल में हुए एक शोध में वैज्ञानिकों ने माना है कि हर बात पर गूगल करने की हमारी फिदरत हमारी याददाश्त के लिए बड़ा खतरा होती जा रही है और इसकी वजह से हमारी याददाश्त पिछली पीढ़ी के मुक़ाबले कम हो रही है । दिमाग तेज रखने और याददाश्त बढ़ाने के ल‌िए  जानिए, इस मुद्रा की सही विधि- इसे करने के लिए सुखासन में यानी पालथी मारकर सीधे बैठें और कमर सीधी रखें। – अब हथे‌लियों को ऊपर की ओर करके अपनी जांघों या घुटनों पर रखें। आराम महसूस करें। – आंखें बंद करें और गहरी सांस लें व नाक से ही सांस छोड़ें। – एक हाथ उठाएं और अंगूठे से ऊपर के होठ को हल्का दबाएं, हथेली नीचे की ओर होनी चाहिए। कोहनी की सीध में उंगलियां हों। – अब आंखें खोलें और अपनी छोटी उंगली की ओर देखने का प्रयास करें, बिना पलक झपकाएं। – कोशिश करें कि 10 मिनट तक यह अभ्यास कर सकें और फिर सामान्य मुद्रा में आ जाएं!

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