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मेंहदी के विभिन्न गुण एवं उपयोग

मेंहदी के विभिन्न गुण एवं उपयोग

मेंहदी एक शृंगार सामग्री है। मेंहदी सोलह शृंगारों में से एक है। यह ना केवल सौंन्दर्य बढ़ाती है बल्कि इसके लगाने के पीछे तथ्य यह है कि मेंहदी की तासीर ठण्डी होती है और हाथों में मेंहदी लगाए जाने का उद्देश्य अपने धैर्य और शांति को बनाए रखने का प्रतीक माना जा सकता है। भारत में स्त्रियाँ और लड़कियाँ इसे हाथों पर लगाती हैं। 1990 के दशक से ये पश्चिमी देशों में भी चलन में आया है। मेंहदी को हिना भी कहा जाता है। मेंहदी का इस्तेमाल गर्मी में ठंडक देने के लिए किया जाता है। कुछ लोग विशेषकर बूढे़ अपने सफ़ेद बालों में मेंहदी लगाकर बालों को सुनहरे बनाने की कोशिश करते हैं। आज मेंहदी का प्रयोग ना केवल हाथों में होता है बल्कि पैरों में भी शौक़ के रूप में इसे लगाया जाता है जो एक अच्छा संकेत है।

इससे दिमाग में ठंडक मिलती है। मेंहदी के पेड़ सदाबहार झाड़ियों के रूप में पाये जाते हैं। महिलाएँ इसका प्रयोग शृंगार शोभा को बढ़ाने के लिए करती हैं। यही कारण है कि यह बहुत विश्वसनीय  एवं हर्बल है। मेंहदी की पत्तियों को सुखाकर बनाया पाउडर बाज़ार में कम कीमत पर आसानी से आकर्षक पैक में मिलता है।

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रंग

मेंहदी के पेड़ की पत्तियाँ हरे रंग की होती हैं, इसे पीसकर लगाने से लाल रंग का निखार कई दिनों तक रहता है। मेंहदी का स्वाद कसैला होता है।

मेंहदी का स्वरूप

मेंहदी के पेड़ की पत्तियों की लम्बाई लगभग 1 इंच से डेढ़ इंच के लगभग होती है। मेंहदी के पत्ते अंडे के जैसे होते हैं। इसके फूलअत्यन्त सुंगन्धित होते हैं तथा फल मटर के समान, गोलाकार होते हैं जिनके भीतर छोटे-छोटे त्रिभुज की आकृति के चिकने अनेक बीज होते हैं। इसमें अक्टूबर-नवम्बर में फूल और उसके बाद फल लगते हैं। मेंहदी की पत्तियों में टैनिन तथा वासोन नामक मुख्य रजक द्रव्य तरल पाये जाते हैं। इसके अतिरिक्त मैलिक एसिड, ग्लूकोज मैनिटोल, वसराल और म्यूसिलेज आदि तत्च मेंहदी में पाये जाते हैं। इससे एक गाढ़े भूरे रंग का सुगन्धित तेल भी प्राप्त किया जाता है।

मेंहदी की पत्तियों का प्रयोग रंजक द्रव्य के रूप में किया जाता है तथा इसकी सदाबहार झाड़ियाँ बाड़ के रूप में लगाई जाती हैं | यह समस्त भारत में मुख्यतः पंजाब,गुजरात,मध्य प्रदेश तथा राजस्थान के शुष्क पर्णपाती वनों में पायी जाती है | स्त्रिओं के श्रृंगार प्रसाधनों में विशिष्ट स्थान प्राप्त होने के कारण, मेंहदी बहुत लोकप्रिय है | मेंहदी की पत्तियों को सुखाकर बनाया हुआ महीन पाउडर बाजारों में पंसारियों के यहां तथा अन्य विक्रेताओं के यहाँ आकर्षक पैक में बिकता है | इसके पत्ते मलने से चिकने तथा लुआबदार हो जाते हैं | इसके कोमल पत्तों को सुखाकर,पीस्सकर मेंहदी के नाम से बेचा जा सकता है |

मेंहदी के विभिन्न गुण एवं उपयोग –

  1. मेंहदी की तासीर ठंड़ी होती हैं। यह बालों में चमक के साथ-साथ दिमाग को शांत रखती है।
  2. मेंहदी का प्रयोग केवल बालों को सुदंर बनाने के लिए ही नहीं किया जाता है, बल्कि इसका प्रयोग विभिन्न रोगों  के इलाज में किया जाता है।
  3. ख़ून के विकार, उल्टी, कब्ज, कफ-पित्त, कुष्ठ (कोढ़), बुखार, जलन, रक्तपित्त, पेशाब करने में कठिनाई होना (मूत्रकृच्छ) तथा खुजली आदि रोगों में मेंहदी काफ़ी लाभकारी है।
  4. उच्च रक्तचाप से पीड़ित व्यक्ति के पैरों के तलवों और हथेलियों पर मेंहदी का लेप समय-समय पर करने से आराम मिलता है।
  5. मेंहदी लगाने से शरीर की बढ़ी हुई गर्मी बाहर निकल जाती है।
  6. रात के समय मेंहदी को साफ़ पानी में भिगो दें और सवेरे के समय छानकर पीयें। इसके पीने से ख़ून की सफाई होने के साथ-साथ शरीर के अन्दर की गर्मी भी शांत हो जाती है।
  7. लगभग 4.7 ग्राम मेंहदी के फूलों को पानी में पीसकर कपड़े से छान लें, इसमें 7 ग्राम शहद मिलाकर कुछ दिन पीने से गर्मी से उत्पन्न सिरदर्द शीघ्र ही ठीक हो जाता है |
  8. मेंहदी में दही और आंवला चूर्ण मिलाकर 2- 3 घंटे बालों में लगाने से बाल घने, मुलायम, काले और लम्बे होते हैं |
  9. दस ग्राम मेंहदी के पत्तों को 2०० मिली पानी में भिगोकर रख दें, थोड़ी देर बाद छानकर इस पानी से गरारे करने से मुँह के छाले शीघ्र शांत हो जाते हैं |
  10. मेंहदी के बीजों को बारीक पीसकर,घी मिलाकर 7०० मिग्रा की गोलियां बना लें | इन गोलियों को सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करने से खुनी दस्तों में लाभ होता है |
  11. लगभग 7 ग्राम मेंहदी के पत्ते लेकर रात को मिटटी के बर्तन में भिगो दें और प्रातःकाल इन पत्तियों को मसलकर तथा छानकर रोगी को पिला दें | एक सप्ताह के सेवन से पुराने पीलिया रोग में अत्यंत लाभ होता है |
  12. मेंहदी और एरंड के पत्तों को समभाग पीसकर थोड़ा गर्म करे घुटनों पर लेप करने से घुटनों की पीड़ा में लाभ होता है |
  13. अग्नि से जले हुए स्थान पर मेंहदी की छाल या पत्तों को पीसकर गाढ़ा लेप करने से लाभ होता है |
  14. दर्द से राहत दिलाएं : मेंहदी में ठंडक होती है जिसके कारण इसे पीसकर लगाने से दर्द में राहत मिलती है। अगर सिर में दर्द हो रहा हो, तो मेंहदी की पत्तियों को पीसकर लगा लें। इससे दर्द से तुंरत राहत मिल जाएगी। मेंहदी में माइग्रेन के दर्द को ठीक करने की क्षमता होती है। तो अगली बार से दर्द होने पर एस्प्रिन न खाएं बल्कि मेंहदी की पत्तियों को लगाकर देखें।
  15. पेट की बीमारी में आरामदायक : मेंहदी में ऐसे गुण होते है जिनसे पेट में होने वाली बीमारी में भी राहत मिलती है। मेंहदी से पीलिया की बीमारी में भी आराम मिलता है। अगर कोई पीत ज्वेर से ग्रसित है तो उसे भी मेंहदी की पत्तियों से लाभ मिलता है। आर्युवेद में मेंहदी को कई तरीके से बनाकर पेट की बीमारियों की दवा में शामिल किया जाता है। इसे सेवन से किसी प्रकार का कोई साइड इफेक्टी नहीं होता है और न ही बीमारी बढ़ती है।
  16. एंटी – टीबी :- मेंहदी में टीबी जैसी घातक बीमारी को दूर भगाने के गुण होते है। इसकी पत्तियों को पीसकर इस्ते माल करने से टीबी की बीमारी में राहत मिलती है लेकिन ऐसा करने से पहले डॉक्टगर से सलाह अवश्यं लें।

नोट :-

यह एक आयुर्वेदिक जड़ी – बूटी है इसलिये इसके साइड इफ़ेक्ट बहुत कम है यदि किसी को एलर्जी हो तो वो पहले थोड़ी से मेहंदी को कान के पीछे थोडा सा लगा कर 5-10 मिनट इंतज़ार करे यदि जलन या दर्द हो तो ना किसी भी रूप में इस्तेमाल नै करें

आजकल बाज़ार में उपलब्ध मेहंदी में मिलावट भी आ रही है कुछ दुकानदार जयादा  रंग व चमक देने के लिये केमिकल का इस्तेमाल करते हैं तो किसी विश्वसनीय दुकान या ब्रांड ही  लें !

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