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मूली (Radishes) के आयुर्वेदिक व औषधीय गुण

मूली (Health benefit of Radishes from Ayurved )

मूली को ठंड में रोजाना सलाद के रूप में लेना चाहिए क्योंकि शरीर के लिए इसका नियमित सेवन बहुत अच्छा होता है क्योंकि इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, गन्धक, आयोडीन तथा लौह तत्व पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होते हैं। इसमें सोडियम, फॉस्फोरस, क्लोरीन तथा मैग्नीशियम भी होता है। इसमें विटामिन ए भी होता है। यह स्वयं हजम नहीं होती, लेकिन अन्य भोज्य पदार्थों को पचा देती है। भोजन के बाद यदि गुड़ की 10 ग्राम मात्रा का सेवन किया जाए तो यह हजम हो जाती है। इसके अलावा भी ठंड के मौसम में सलाद के रूप में मूली खाने के अनेक फायदे आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ फायदों के बारे में –

मूली के फायदे :- 

    • इसमें फॉलिक एसिड, विटामिन सी और एंथोकाइनिन की भरमार होती है। ये तत्व शरीर को कैंसर से लड़ने में मदद करते हैं। यह माना जाता है कि मुंह, पेट, आंत और किडनी के कैंसर से लड़ने में यह बहुत सहायक होती है।
    • इस के पत्तों को सुखा कर इसे जला लें. अब बची राख को पानी में मिलाकर आग पर तबतक उबालें जबतक सूखकर क्षार का रूप न ले लें ..अब इस क्षार को ५०० मिलीग्राम क़ी मात्रा में नियमित सेवन श्वांस के रोगियों के लिए अच्छी औषधि है |
    • सुबह-सुबह इस के नरम पत्तों पर सेंधा नमक लगाकर खाने से मुंह की दुर्गंध दूर होती है।
    • इस के बीज का चूर्ण पांच से दस ग्राम क़ी मात्रा में देने से स्त्रियों में अनियमित मासिकस्राव जैसी समस्या से निजात मिल जाती है I
    • त्वचा के रोगों में यदि इस के पत्तों और बीजों को एक साथ पीसकर लेप कर दिया जाये, तो यह रोग खत्म हो जाते हैं।
    • इस का सूप हिचकी को रोकने में कारगर होता है I
    • मूली के पतले कतरे सिरके में डालकर धूप में रखें, रंग बादामी हो जाने पर खाइए। इससे जठराग्नि तेज हो जाती है।
    • इस  के पत्तों का रस ..दिन में दो से तीन बार 25 से 30  मिली क़ी मात्रा में भोजन के बाद लेना लिवर की कमजोरी में लाभदायक है |
    • पीलिया के रोगी के लिए मूली क़ी सब्जी पथ्य है |
    • हाथ-पैरों के नाख़ूनों का रंग सफ़ेद हो जाए तो मूली के पत्तों का रस पीना हितकारी है।
    • इस के पत्ते खाने से दांतों का असमय हिलना बंद होता है। दांतों को मजबूत करने में यह रामबाण है
    • पेट में गैस बनती हो तो muli  के पत्तों के रस में नीबू का रस मिलाकर पीने से तुरंत लाभ होता है।
    • चूंकि मूली के पत्तों में फास्फोरस होता है। भोजन के बाद इनका सेवन करने से बालों का असमय गिरना बंद हो जाता है।
    • सौ ग्राम मूली के कच्चे पत्तों में नीबू निचोड़कर चबाकर निगल लें। इससे पेट साफ़ होगा और शरीर में स्फूर्ति आएगी।
    • पानी में muli का रस मिलाकर सिर धोने से जुएं नष्ट हो जाती हैं।
    • आधी muli को पीसकर उसका रस निकाल लें। इसे दो-दो घंटे बाद पिएं। यह कमज़ोर दांतों के लिए लाभदायक है। इस  के टुकड़े पर नींबू का रस लगाकर दांतों पर धीरे-धीरे मलने से दांत साफ होंगे। इसके अलावा, इस को काट कर नींबू लगा कर छोटे-छोटे टुकड़े दांतों से काट कर धीरे-धीरे चबाएं। थोड़ी देर बाद उगल दें। ऐसा नियमित करने से दांतों पर चढ़ी पीली परत हट जाएगी।
    • muli के रस में थोड़ा नमक और नीबू का रस मिलाकर नियमित रूप में पीने से मोटापा कम होता है और शरीर सुडौल बन जाता है।
    • muli के पत्ते काटकर नींबू निचोड़ के खाने से पेट साफ होता है व स्फूर्ति रहती है।
    • पेट संबंधी रोगों में यदि muli के रस में अदरक का रस और नीबू मिलाकर नियम से पियें तो भूख बढ़ती है।
    • पेट के कीड़ों को नष्ट करने में भी कच्ची muli फायदेमंद साबित होती है।
    • हार्ट से संबंधित बीमारी से ग्रस्त लोगों व कोलेस्ट्रॉल पेशेन्ट्स के लिए इसका का सेवन लाभदायक होता है।
    • ब्लडप्रेशर के रोगियों के लिए मूली का सलाद के रूप में नियमित रूप से सेवन अच्छा माना गया है क्योंकि हाई ब्लड प्रेशर को शांत करने में  मदद करती है।

मूली (Health benefit of Radishes from Ayurved )के अन्य गुण 

  • मूली शरीर से कार्बन डाई ऑक्साइड निकालकर ऑक्सीजन प्रदान करती है।
  • यह हमारे दाँतों और हड्डियों को मजबूत करती है।
  • थकान मिटाने और अच्छी नींद लाने में भी मूली काफी फायदेमंद होती है
  • इस  का रस रुचिकर एवं हृदय को प्रफुल्लित करने वाला होता है। यह हलका एवं कंठशोधक भी होता है।
  • घृत में भुनी मूली वात-पित्त तथा कफनाशक है। सूखी निर्दोष साबित है। गुड़, तेल या घृत में भुनी हुई के फूल कफ वायुनाशक हैं तथा फल पित्तनाशक।
  • यकृत व प्लीहा के रोगियों को दैनिक भोजन में मूली को प्राथमिकता देनी चाहिए।
  • उदर विकारों में मूली का खार विशिष्ट गुणकारी है।
  • इस  के पतले कतरे सिरके में डालकर धूप में रखें, रंग बादामी हो जाने पर खाइए। इससे जठराग्नि तेज हो जाती है।
  • इस के रस में नमक मिलाकर पीने से पेट का भारीपन, अफरा, मूत्ररोग दूर होता है।
  • मूली की राख को सरसों के तेल में फेंटकर मालिश करने से शोथ दूर होता है। पांडु व पीलिया में इसके पत्तों का रस निकाल लें और आग पर चढ़ा दें। उबाल आने पर पानी को छान लें। दो तोला (20 ग्राम) लाल चीनी मिलाएँ। 9-10 दिनों तक सेवन करें। इससे नया खून बनना प्रारंभ हो जाता है
  • मूली खाने से रक्तविकार दूर होते हैं, त्वचा के दाग-धब्बे हटते हैं।

इस की चटनी झटपट तैयार हो जाती है. ये खाने में बेहद स्वादिष्ट लगती है और इसका ज़ायका आपके खाने में एक नया टेस्ट ले आता है.

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ज़रूरी सामग्री:

  • मूली – 2 मीडियम आकार की
  • ताजा दही – एक कप
  • नमक – स्वादानुसार (एक चौथाई छोटी चम्मच)
  • भूना जीरा पाउडर – एक छोटी चम्मच
  • लाल मिर्च – एक चौथाई छोटी चम्मच
  • हरी मिर्च – 1 बारीक काट लीजिये
  • हरा धनियां – एक टेबल स्पून (बारीक कटा हुआ)

बनाने की विधी:

मूली को धो कर छील लें और इसे कद्दूकस कर लें.

अब दही को फ़ैंट कर एक बाउल में डालें. इसमें कद्दूकस की हुई मूली डाल कर मिलाएं और नमक भी डाल लें.

अब इसमें भुना जीरा पाउडर, कश्मीरी लाल मिर्च, हरी मिर्च और हरा धनिया डाल कर मिला लें.

चटनी तैयार है. इसे परांठे, पूरी या चावल के साथ परोस कर खाएं.

Article Source :- https://cure100.wordpress.com/http://www.bhaskar.com/

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