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मुलहठी (Mulethi/Liquorice) के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण

मुलहठी/Mulethi/Glycyrrhiza glabra

मुलहठी (Liquorice/Mulethi) रेशेदार, गन्धयुक्त और बहुत ही उपयोगी होती है। आमतौर पर लोग इसे मीठी लकड़ी के नाम से जानते हैं। भारत में इसे मुलहठी (Liquorice/Mulethi) या मुलेठी के नाम से जाना जाता है। मुलहठी (Liquorice/Mulethi) ही एक ऐसी वस्तु है, जिसका सेवन किसी भी मौसम में किया जा सकता है। पनवाड़ी इसे पान में डालकर देता है। मुलहठी (Liquorice/Mulethi) का प्रयोग मधुमेह की औषधि बनाने में किया जाता है।

भारत में यह बहुत ही कम मात्रा में होती है इसलिए यह अधिकांश रूप से विदेशों से आयात की जाती है। मुलहठी (Liquorice/Mulethi) की जड़ और रस हमेशा बाजारों में पंसारियों के यहां मिलती हैं। मुलहठी (Liquorice/Mulethi) मीठी तथा ठण्डी होती है। मुलहठी (Liquorice/Mulethi) की जड़ पेसाब (Urin) लाने वाली और दर्दनाशक भी होती है। यह खांसी में विशेष लाभकारी है। इससे कफ(Cough)  पिघलकर बाहर निकल जाती है।

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यह आमाशय की जलन (Irritation of the stomach) को भी दूर कर पीठ की हड्डियों को मजबूत करती है। फेफड़ों (Lungs) के लिए भी यह फायदेमंद है। गले का दर्द व सूजन (Throat pain and inflammation)भी कम करती है। इसके सेवन से अनेक रोग दूर होतें हैं।

मुलहठी (Liquorice/Mulethi) का पौधा 1 से 6 फुट तक होता है। यह स्‍वाद में मीठी होती है इसलिए इसे यष्टिमधु भी कहा जाता है। असली मुलहठी (Liquorice/Mulethi) अंदर से पीली, रेशेदार एवं हल्की गंधवाली होती है। सूखने पर इसका स्‍वाद अम्‍लीय हो जाता है।

स्वभाव: यह खाने में ठण्डी होती है। मुलहठी (Liquorice/Mulethi) में 50 प्रतिशत पानी होता हैं। इसमें मुख्य घटक `ग्लिसराइजिन´ हैं, जिसके कारण यह खाने में मीठा होता है जो 5 से 20 प्रतिशत विभिन्न प्रजातियों में पाया जाता है। मुलहठी (Liquorice/Mulethi) में 10 से 14 प्रतिशत तक ग्लाइकोसाइड भी होता है। इसके अतिरिक्त इसमें घावों को शीघ्र भरने वाले विभिन्न घटक सुक्रोज(Sucrose), डेक्स्ट्रोज (Dextrose), स्टार्च (Starch) , प्रोटीन(Protein) , वसा (Fat), रेजिन(Resins) , कोसाइड्स(Kosaids) , लिक्विरीस्ट्रासाइड्स(Likviristrasaids) , आइसोलिक्यिरीस्ट्रोसाइड कुमेरिन(Aisolikyiristrosaid Kumerin), फ्रलेकोनोन (Frlekonon), लिक्विरीटिन(Likviritin) , आइसोलिक्विरीटिन(Aisolikviritin) , अम्वलीफीरोन(Amwlifirom) आदि तत्त्व भी पाये जाते हैं। मुलहठी (Liquorice/Mulethi) में ग्लूकोज(Glucose) , स्टीराइड(Stiraid), एस्ट्रोजन(Estrogen), कैल्शियम(Calcium), पोटैशियम (Potassium) आदि तत्त्व भी मौजूद हैं।

मुलहठी (Liquorice/Mulethi) की जड़ को उखाड़ने के बाद दो वर्ष तक उसमें औषधीय गुण विद्यमान रहते हैं। इसका औषधि के रूप में प्रयोग बहुत पहले से होता आया है। मुलेठी पेट के रोग, सांस संबंधी रोग, स्तन रोग, योनिगत रोगों (Intestinal diseases, respiratory diseases, breast disease , diseases Yonigt) को दूर करती है।

ताजी मुलेठी में पचास प्रतिशत जल होता है, जो सुखाने पर मात्र दस प्रतिशत ही शेष रह जाता है। ग्लिसराइजिक एसिड (Glisraijik acid)के होने के कारण इसका स्वाद साधारण शक्कर से पचास गुना अधिक मीठा होता है। आइए हम आपको मुलेठी के गुणों के बारे में बताते हैं।

मुलहठी (Liquorice/Mulethi) से विभिन्न रोगों में उपचार

घाव (जख्म): मुलहठी (Liquorice/Mulethi) पेट में बन रहे एसिड (तेजाब) को नष्ट करके अल्सर के रोग से बचाती है।

  1. पेट के घाव की यह सफल औषधि है।
  2. मुलहठी (Liquorice/Mulethi) खाने से कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है। इसका सेवन लंबे समय तक नहीं करना चाहिए। बीच-बीच में बंद कर दें।
  3. मुलहठी (Liquorice/Mulethi) को पीसकर घी के साथ चूर्ण के रूप में हर तरह के घावों पर बांधने से शीघ्र लाभ होता है।
  4. चाकू आदि के घाव के कारण उत्पन्न तेज दर्द रोगी को बहुत कष्ट देता है। यह दर्द मुलहठी (Liquorice/Mulethi) के चूर्ण को घी में मिलाकर थोड़ा गर्म करके लगाने से शीघ्र ही शांत होता है।

कफ व खांसी: खांसी होने पर यदि बलगम मीठा व सूखा होता है तो बार-बार खांसने पर बड़ी मुश्किल से निकल पाता है। जब तक गले से बलगम नहीं निकल जाता है, तब तक रोगी खांसता ही रहता है। इसके लिए 2 कप पानी में 5 ग्राम मुलहठी (Liquorice/Mulethi) का चूर्ण डालकर इतना उबाल लें कि पानी आधा कप बचे। इस पानी को आधा सुबह और आधा शाम को सोने से पहले पी लें। 3 से 4 दिन तक प्रयोग करने से कफ पतला होकर बड़ी आसानी से निकल जाता है और खांसी, दमा के रोगी को बड़ी राहत मिलती है। यक्ष्मा (टी.बी.) की खांसी में मुलहठी (Liquorice/Mulethi) चूसने से लाभ होता है।

2 ग्राम मुलहठी (Liquorice/Mulethi) पाउडर, 2 ग्राम आंवला पाउडर, 2 चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम खाने से खांसी में लाभ होता है।

नपुंसकता (नामर्दी): रोजाना मुलहठी (Liquorice/Mulethi) चूसने से नपुंसकता नष्ट हो जाती है।

  1. 10 ग्राम मुलेठी का पिसा हुआ चूर्ण, घी और शहद में मिलाकर चाटने से और ऊपर से मिश्री मिले गर्म-गर्म दूध को पीने से नपुंसकता का रोग कुछ ही समय में कम हो जाता है।
  2. 10-10 ग्राम मुलहठी (Liquorice/Mulethi), विदारीकंद, तज, लौंग, गोखरू, गिलोय और मूसली को लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से आधा चम्मच चूर्ण लगातार 40 दिनों तक सेवन करने से नपुंसकता का रोग दूर हो जाता है।

दाह (जलन): मुलहठी (Liquorice/Mulethi) और लालचंदन पानी के साथ घिसकर शरीर पर लेप करने से जलन शांत होती है।
अम्लपित्त (एसिडिटिज): खाना खाने के बाद यदि खट्टी डकारें आती हैं, जलन होती है तो मुलहठी (Liquorice/Mulethi) चूसने से लाभ होता है। भोजन से पहले मुलहठी (Liquorice/Mulethi) के 3 छोटे-छोटे टुकड़े 15 मिनट तक चूसें, फिर भोजन करें।

मुलहठी (Liquorice/Mulethi) का चूर्ण 1 से 4 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से आमाशय की अम्लपित्त (एसिडिटीज) समाप्त हो जाती है और पेट दर्द मिट जाता है।

कब्ज़, आंव: 125 ग्राम पिसी मुलेठी, 3 चम्मच पिसी सोंठ, 2 चम्मच पिसे गुलाब के सूखे फूल को 1 गिलास पानी में उबालें। जब यह ठंडा हो जाए तो इसे छानकर सोते समय रोजाना पीने से पेट में जमा आंव (एक तरह का चिकना सफेद मल) बाहर निकल जाता है।

मुलेठी के चूर्ण में दोगुनी चीनी डालकर दूध के साथ खाने से पुराने से पुराना कब्ज भी दूर हो जाता है और शरीर में एक नई ताकत आती है।

5 ग्राम मुलहठी (Liquorice/Mulethi) को गुनगुने दूध के साथ सोने से पहले पीने से सुबह शौच साफ आता है और कब्ज दूर हो जाती है।

पेशाब के रोग: पेशाब में जलन, पेशाब रुक-रुककर आना, अधिक आना, घाव और खुजली और पेशाब सम्बंधी समस्त बीमारियों में मुलहठी (Liquorice/Mulethi) का प्रयोग लाभदायक है। इसे खाना खाने के बाद रोजाना 4 बार हर 2 घंटे के उंतराल पर चूसते रहना लाभकारी होता है। इसे बच्चे भी आसानी से बिना हिचक ले सकते हैं।

1 चम्मच मुलेठी का चूर्ण 1 कप दूध के साथ लेने से पेशाब की जलन दूर हो जाती है।

हृदय शक्तिवर्धक (शक्ति को बढ़ाने वाला): ज्यादातर शिराओं और धमनियों पर गलत खान-पान, गलत आदतें और काम का अधिक भार पड़ने से कमजोरी आ जाती है, इससे हृदय को हानि पहुंचती है। इस कारण से अनिंद्रा (नींद का न आना), हाई और लो ब्लड प्रेशर जैसे रोग हो जाते हैं। ऐसे में मुलेठी का सेवन काफी लाभदायक होता है।

फेफड़ों के रोग: मुलेठी फेफड़ों की सूजन, गले में खराश, सूजन, सूखी कफ वाली खांसी में लाभ करती है। मुलेठी फेफड़ों को बल देती है। अत: फेफडे़ सम्बंधी रोगों में यह लाभकारी है। इसको पान में डालकर खाने से लाभ होता है। टी.बी. (क्षय) रोग में भी इसका काढ़ा बनाकर उपयोग किया जाता है।

विष (ज़हर): जहर पी लेने पर शीघ्र ही उल्टी करानी चाहिए। तालु को उंगुली से छूने से तुरन्त उल्टी हो जाती है। यदि उल्टी नहीं आये तो एक गिलास पानी में 2 चम्मच मुलेठी और 2 चम्मच मिश्री को पानी में डालकर उबाल लें। आधा पानी शेष बचने पर छानकर पिलायें। इससे उल्टी होकर जहर बाहर निकल आता है।

मांसपेशियों का दर्द: मुलेठी स्नायु (नर्वस स्टिम) संस्थान की कमजोरी को दूर करने के साथ मांसपेशियों का दर्द और ऐंठन को भी दूर करती है। मांसपेशियों के दर्द में मुलहठी (Liquorice/Mulethi) के साथ शतावरी और अश्वगंधा को समान रूप से मिलाकर लें। स्नायु दुर्बलता में रोजाना एक बार जटामांसी और मुलहठी (Liquorice/Mulethi) का काढ़ा बनाकर लेना चाहिए।

गंजापन, रूसी (ऐलोपीका): मुलेठी का पाउडर, दूध और थोड़ी-सी केसर, इन तीनों का पेस्ट बनाकर नियमित रूप से बाल आने तक सिर पर लगायें। इससे बालों का झड़ना और बालों की रूसी आदि में लाभ मिलता है।

बाजीकरण (कामोद्दीपन): मुलेठी का चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से शुक्र वृद्धि और बाजीकरण होता है।

    1. मुलेठी महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद है। मुलेठी का एक ग्राम चूर्ण नियमित सेवन करने से स्त्रियां, अपनी, योनि, सेक्‍स की भावना, सुंदरता को लंबे समय तक बनाये रख सकती हैं।
    2. मुलेठी की जड़ पेट के घावों को समाप्‍त करती है, इससे पेट के घाव जल्‍दी भर जाते हैं। पेट के घाव होने पर मुलेठी की जड़ का चूर्ण इस्‍तेमाल करना चाहिए
    3. खून की उल्टियां होने पर दूध के साथ मुलेठी का चूर्ण लेने से फायदा होता है। खूनी उल्‍टी होने पर मधु के साथ भी इसे लिया जा सकता है।
    4. हिचकी होने पर मुलेठी के चूर्ण को शहद में मिलाकर नाक में टपकाने तथा पांच ग्राम चूर्ण को पानी के साथ खिला देने से लाभ होता है।
    5. मुलेठी आंतों की टीबी के लिए भी फायदेमंद है।
  1. प्रदर रोग-एक माशा मुलहठी (Liquorice/Mulethi) का चूर्ण दोगुनी खांड में मिलाकर ताजे जल या गाय के दूध के साथ लेने से स्त्रियों का प्रदर रोग दूर हो जाता है।

  2. मिर्गी- मुलहठी (Liquorice/Mulethi) के चूर्ण को घी में मिलाकर दिन में तीन बार चाटने से मिर्गी रोग दूर होता है।

  3. मुह के छाले– मुलहठी (Liquorice/Mulethi) का काढ़ा बनाकर दिन में 3 से 4 बार गरारे करने से मुह व जीभ के छाले ठीक हो जातें हैं। इससे बैठी हुयी आवाज भी खुल जाती है और मुँह के जख्मों से भी छुटकारा मिलता है।

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