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मानव जीवन में योग के महत्व (Importance of yoga in human life)

मानव जीवन में योग के महत्व

मानव जीवन में योग के महत्व को समझने के लिए शायद शब्द कम पड़ जायेंगे भूतकाल में यदि हम झांक कर देखें तो मानव जीवन में योग के महत्व को सभी धर्म ग्रंधों और धर्मों ने अपनाया है और अपने हिसाब से परिभाषित किया है

आज मानव को किसी भी तरह से चैन नहीं है क्योंकि उसके पास सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं है किसी को अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंता है तो किसी को शांति के तालाश है किसी को ज्ञान की भूख है तो कोई अपने ही द्वारा किया हुए कर्मों और दुष्कर्मों से मुक्ति पाना चाहता है इतना सब होने के बावजूद मानव जीवन में योग के मूल वाक्य या मूल शब्द को नहीं ख़राब किया वो जैसे का तैसा है आज हम लोगों में शब्दभेद हो सकते हैं योग करने के रास्ते भी अलग अलग हो सकते हैं लेकिन सभी योग का समर्थन करते हैं चाहे वो किसी भी समुदाय से सम्बंधित हों.

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योग विद्या :- Who received the first instruction of Yoga?

मानव जीवन में योग के शब्दभेद

थोड़े बहुत शब्दभेद से यह प्रक्रिया उन सभी समुदायों को मान्य है जो योग के अभ्यास का समर्थन करते हैं ।

(१) पतंजलि योग दर्शन के अनुसार ( योगश्चित्तवृत्त निरोधः अर्थात् चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है ।

(२) सांख्य दर्शन के अनुसार ( पुरुषप्रकृत्योर्वियोगेपि योगइत्यमिधीयते । अर्थात् पुरुष एवं प्रकृति के पार्थक्य को स्थापित कर पुरुष का स्व स्वरूप में अवस्थित होना ही योग है ।

(३) विष्णुपुराण के अनुसार ( योगः संयोग इत्युक्तः जीवात्म परमात्मने । अर्थात् जीवात्मा तथा परमात्मा का पूर्णतया मिलन ही योग है ।

(४) भगवद्गीता के अनुसार ( सिद्दध्यसिद्दध्यो समोभूत्वा समत्वंयोग उच्चते  । अर्थात् दुःख सुख, लाभ अलाभ, शत्रु मित्र, शीत और उष्ण आदि द्वन्द्वों में सर्वत्र समभाव रखना योग है ।

(७) बौद्ध धर्म के अनुसार ( कुशल चितैकग्गता योगः । अर्थात् कुशल चित्त की एकाग्रता योग है ।

योग का रहस्य (Mystery of Yoga)

यदि इसकी गहरायी में जाएँ तो शयद और भी समुदायों की अलग अलग परिभाषा मिल जाये लेकिन हमारा में कारण वो नहीं है हमारा मानव जीवन में योग के महत्व को उज्जागर करना और उसकी दोबारा से वही स्थान देना है जो कभी पहले हुआ करता था

मानव जीवन में योग के महत्व

इस भौतिकवादी , क्लेशमय जीवन में योग की सबसे अधिक आवश्कता है | थोड़ा-सा नियमित आसन और प्राणायाम हमें निरोगी तथा स्वस्थ रख सकता है | यम-नियमों के पालन से हमारा जीवन अनुशासन से प्रेरित हो चरित्र में अकल्पनीय परिवर्तन ला सकता है | धारणा एवं ध्यान के अभ्यास से वह न केवल तनावरहित होगा वरन कार्य-कुशलता में पारंगत भी हो पायेगा | हम अपने उत्थान के साथ-साथ समाज तथा राष्ट्र के उत्थान में भी सहभागी हो सकेंगे |

मस्तिष्क की शक्तियों का प्रयोग करने के आसान उपाय

वर्तमान समय में अपनी व्यस्त जीवन शैली कारण लोग सतोष पाने के लिए योग करते हैं । योग से न सिर्फ व्यक्ति का तनाव दूर होता है बल्कि मन और मस्तिष्क को भी शांति मिलती है । योग बहुत ही लाभकारी है । योग न केवल हमारे दिमाग, मस्तिष्क को ही ताकत पहुंचाता है बल्कि हमारी आत्मा को भी शुद्ध करता है । आज बहुत से लोग मोटापे से परेशान हैं, उनके लिए योगा (योग का बिगड़ा हुआ नाम ) बहुत ही फायदेमंद है । योग के फायदे से आज सभी जानते है, जिस वजह से आज योग विदेशों में भी प्रसिद्ध है

स्वामी विवेकानंदजी ने कहा था कि “मानव जाती को विनाश से बचाने के लिए और विश्वास की और अग्रसर करने के लिए यह अत्यावश्यक है कि प्राचीन संस्कृति भारत में फिर से स्थापित की जाये जो अनायास ही फिर सारी दुनिया में प्रचलित होगी |यह उपनिषद और वेदांत पर आधारित संस्कृति ही आंतर-राष्ट्रिय स्तर पर एक मजबूत नींव बनकर उभरेगी”

मानव जीवन में योग की पहल हरियाणा सरकार द्वारा

आज हरियाणा सरकार ने योग को पाठ्यक्रम में शामिल किया है जो की एक अच्छी पहल है क्योंकि यदि बच्चों में योग की शिक्षा दी जाती है तो हमारे आगे जो पीढ़ी आएगी वो शारीरिक और मानसिक तौर पर निर्णय लेने  की शक्ति से पूर्ण होगी हर व्यक्ति आगे बढ़ना चाहता है | ऊँचाइयों को छुना चाहता है | वैभवी बनना चाहता है |ये सब पाने के लिए उसे आंतरिक उर्जा चाहिए और इसका एक ही सशक्त मार्ग है योग | योग व्यायम नहीं , योग विज्ञानं का चौथा आयाम है |

स्वर योग :- बिना दवाई रोगों से मुक्ति का आसान उपाय 

हमारे  पूर्वजों ने शरीर को एक मन्दिर मानकर उसकी नियमित पूजा कैसे की जाये उसका पूरा-पूरा विधान बताया है | योग का अर्थ ही जोड़ना होता है | हमारा शरीर पाँच इन्द्रियों के समन्वय से ही कार्य करता है |  कान , त्वचा , आँख , जीभ व नाक क्रमश: एकदूजे के पूरक हैं | अगर नाक द्वारा शुध्ध हवा को सही तरीके से ली जाये तो शरीर की और सारी इन्द्रियां जुड़ कर अपना-अपना कार्य व्यवस्थित करने लगती है | शरीर को पूर्ण मात्र में उर्जा प्रदान करती है | कितना सरल उपाय !! ये जो साँस की रिधम है , उसी को “प्राणायाम ” कहते हैं | प्राणायाम  योग की एक बहुत महत्वपूर्ण कड़ी है जिसको आपनाके हम बिना पैसे खर्चे अपने आप को निरोगी रख सकते हैं

यमनियमासनप्राणायाम प्रत्याहार धारणाध्यानसमाधयोऽष्टाङ्गानि ।
योग के आठ अंगों में प्रथम पाँच बहिरंग तथा अन्य तीन अन्तरंग में आते हैं ।

वैदिक संहिताओं के अंतर्गत तपस्वियों (तपस) के बारे में (कल, ब्राह्मण) प्राचीन काल से वेदों में (९०० से ५०० बी. सी. ई.) उल्लेख मिलता है, जब कि तापसिक साधनाओं का समावेश प्राचीन वैदिक टिप्पणियों में प्राप्त है । कई मूर्तियाँ जो सामान्य योग या समाधि मुद्रा को प्रदर्शित करती है, सिंधु घाटी सभ्यता (सी.३३००१७०० बी.सी. इ.) के स्थान पर प्राप्त हुईं है । पुरातत्वविज्ञ ग्रेगरी पोस्सेह्ल के अनुसार,“ ये मूर्तियाँ योग के धार्मिक संस्कार“ के योग से सम्बन्ध को संकेत करती है । यद्यपि इस बात का निर्णयात्मक सबूत नहीं है फिर भी अनेक पंडितों की राय में सिंधु घाटी सभ्यता और योग–ध्यान में सम्बन्ध है ।

योग है जीवन की धारा ,
जिसने जाना, उसने माना 
सब का जीवन  इसने तारा ,
रोगों से हों मुक्त मानव जीवन हमारा 

मानव जीवन में योग के महत्व को आप भी समझ ही चुके होंगे की यह क्यों जरुरी हो गया है तो में आप सभी का आह्वान करता हूँ की मानव जीवन में योग के महत्व को महसूस कीजिये और अपने साथ औरों को भी जोडीये यह एक ऐसी अमूल्य औषधि है जो आपको हमारे पूर्वजों ने हमारे लिए छोड़ी है यह आप को अच्छा स्वास्थ्य प्रदान कर सकती है | आप को शक्तिशाली बना सकती है | आप का आत्म-विश्वास बढ़ा सकती है तो हे मानव उठिए मानव जीवन में योग के महत्व को जानिए , पहचानिए  और उसे अपने और अपने बच्चों के जीवन में उतारिये |

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