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मस्तिष्क की शक्तियों का प्रयोग करने के आसान उपाय

मस्तिष्क की शक्ति (Easy ways to exercise the powers of the brain)

आप अकसर घर छोड़ने से पहले क्या लाइट बंद करना भूल जाते हैं? क्या आप यह भूल जाते हैं कि आपने अपनी कार की चाबियां कहां रखी हैं ? क्या आपको तुरंत याद आ जाता है कि आज सप्ताह का कौन सा दिन है? अगर आप लगातार इस तरह की बातों से परेशान होते रहते हैं तो आशंका इस बात की है कि आप कमजोर स्मृति और एकाग्रता की कमी से पीड़ित हैं। बहुत लोग यह सोचते हैं कि हमारी स्मृति स्थिर और अपरिवर्तनीय है। लेकिन ऐसा नहीं है। कुछ तकनीकों के जरिए आपकी याददाश्त और मस्तिष्क के काम करने की क्षमता में जबरदस्त इजाफा हो सकता है। यदि आप अपने मस्तिष्क की शक्ति बढ़ाना चाहते हैं और अपनी मेमोरी पावर यानी याद्दाश्त को मजबूत बनाना चाहते हैं तो कुछ आसान लेकिन प्रभावशाली उपायों को अपनी जीवनशैली में अपनाना होगा।

हम सबके मस्तिष्क में असीमित शक्ति होती है, मानव मस्तिष्क में असीम स्मरण शक्ति और सोचने की क्षमता मौजूद होती है, विश्व का कोई भी कंप्यूटर एक स्वस्थ मस्तिष्क की बराबरी नहीं कर सकता।

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हम अपने मस्तिष्क का 12 प्रतिशत हिस्सा ही इस्तेमाल करते हैं। फिर तो आप कह सकते हैं कि यह दुनिया बेवकूफ है। लोग अपने दिमाग का 12 प्रतिशत ही क्यों इस्तेमाल कर पा रहे हैं ? इसकी वजह है। दरअसल, मस्तिष्क के दांयें और बायें हिस्से के बीच आवश्यक सामंजस्य स्थापित करने का कोई सुनियोजित तरीका उनके पास नहीं है। अगर आप उन दोनों हिस्सों को सही तरीके से जोड़ेंगे नहीं, तब तक पूरा मस्तिष्क काम नहीं करेगा। न्यूरॉन नाम की एक चीज होती है, ये न्यूरॉन लगातार एक खास दिशा में काम कर रहे हैं। आप इन्हें जोड़ सकते हैं और अलग भी कर सकते हैं। 24 घंटे के भीतर हम इंसान के सोचने, इस दुनिया में चीजों को महसूस करने और समझने के तरीके को पूरी तरह से बदल सकते हैं।

मस्तिष्क के दांयें और बांयें हिस्सों के बीच सामंजस्य बढ़ाने का एक सबसे अच्छा तरीका यह है कि अगर कोई इंसान अपने स्थूल शरीर को शांत और स्थिर रख सकता है, तो शरीर की निश्चलता की इस स्थिति में मस्तिष्क एक बड़े पैमाने पर जुड़ जाता है।

प्राचीन काल में अपने देश में मस्तिष्क को प्रशिक्षित करने की विस्तृत और परिष्कृत प्रणाली थी। एक पूरा तरीका था कि मस्तिष्क को पूरी तीव्रता और गहराई के साथ कैसे जोड़ा जाए। वैज्ञानिक शोध भी इधर उधर घूमकर वापस हमारी प्राचीन प्रणाली और उन तरीकों पर ही आ जाते हैं, जो हमने मानवीय क्षमता को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए हैं। अच्छी बात यह है कि उन्होंने भी यही माना है कि शरीर को स्थिर करके ही मस्तिष्क की शक्ति को सबसे अधिक बढ़ाया जा सकता है।

मस्तिष्क की शक्ति बढाने के तरीके

अगर हम अपनी अंदरूनी परिस्थितियों को सही तरीके से संभाल लें तो हम अपनी स्मरण शक्ति को इतना ज्यादा बढ़ा सकते हैं। शुरुआत करने का सबसे आसान तरीका यही है कि स्थिर रहना सीखा जाए। अगर आप किसी जगह शांत और स्थिर होकर बैठना सीख सकते हैं तो यह इस दिशा में एक अच्छा कदम होगा। यह आप कक्षा में भी कर सकते हैं। आपके शिक्षक बात कर रहे हैं। ऐसे में आपको जरूरत नहीं है हिलने डुलने या भाव प्रदर्शन करने की। बस शांत और स्थिर बैठे रहिए। कुछ दिनों में आप देखेंगे कि चीजों को ग्रहण करने और याद करने की आपकी शक्ति में जबर्दस्त इजाफा हो रहा है। कुछ खास तरह के अभ्यास हैं, जिनके माध्यम से इस स्थिरता को आप अपने भीतर उतार सकते हैं।

मस्तिष्क जिस किसी चीज को स्वीकार करता है और विश्वास करता है, वह उसे प्राप्त भी कर सकता है क्योंकि आपका मस्तिष्क जिन चीजों को सोचता है, देखता है, विश्वास करता है और महसूस करता है वह उन्हें अवचेतन मन में भेज देता है। फिर आपका अवचेतन मन ब्रह्मांड की शक्तियों के साथ कार्य करने के पश्चात एक ऐसी वास्तविकता की रचना करता है, जो कि उस संदेश पर आधारित रहती है, जिसका उद्गम(starting) मस्तिष्क में हुआ था, परंतु सिर्फ इस प्रकार से सोचना और यह आशा करना कि यह सब अपने आप हो जाएगा, पर्याप्त नहीं है।

यदि आप ठीक प्रकार से अपने कार्य के प्रति dedicated हैं तो आप उसे अवश्य पूरा कर लेंगे, लेकिन आवश्यकता है यह जानने की, कि आप अपने मस्तिष्क की शक्तियों का प्रयोग कैसे करेंगे।

मस्तिष्क कितना अद्भुद और शक्तिशाली हैं मस्तिष्क की इतनी आश्चर्यजनक शक्ति के बावजूद ज्यादातर लोग इस पर नियंत्रण करने की कोशिश ही नहीं करते हैं यही वजय हैं कि वे डरों और मुश्किलों से भयभीत होकर जीवन जीते हैं, उचित दृष्टिकोण, उपयुक्त मन:स्थिति और सकारात्मक सोच के साथ सही दिशा में कार्य करने वाले व्यक्ति अपने जीवन में सफलता के नयें आयाम स्थापित करते हैं।

मस्तिष्क की महान शक्तियाँ

  1. मस्तिष्क में कल्पना शक्ति दी गई हैं, जिसके द्वारा आशाओं और उद्देश्यों को साकार करने के तरीके सुझाएँ जाते हैं। इसमें इच्छा और उत्साह की प्रेरक क्षमता दी गई हैं, जिसके द्वारा योजनाओं और उद्देश्यों के अनुरूप कर्म किया जा सके। इसमें इच्छा शक्ति दी गई हैं, जिसके द्वारा योजना पर लंबे समय तक काम किया जा सके।
  2.  इसमें आस्था की क्षमता दी गई हैं, जिसके द्वारा पूरा मस्तिष्क असीम बुद्धि की प्रेरक शक्ति की तरफ मुड जाता हैं तथा इस दौरान इच्छाशक्ति और तर्कशक्ति शान्त रहती हैं।
  3. इसमें तर्कशक्ति दी गई हैं, जिसके द्वारा तथ्यों और सिद्दांतों को अवधारणाओं, विचारों और योजनाओं में बदला जा सकता हैं।
  4. इसे यह शक्ति दी गई हैं कि यह दुसरें मस्तिष्कों के साथ मौन सम्प्रेषण (Transmission) कर सके, जिसे टेलीपैथी(Telepathy) कहते हैं।
  5. इसे निष्कर्ष की शक्ति दी गई हैं, जिसके द्वारा अतीत का विश्लेषण करके भविष्य का पूर्वानुमान लगाया जा सकता हैं। यह क्षमता स्पष्ठ करती हैं कि दार्शनिक भविष्य का अनुमान लगाने के लिए अतीत की तरफ क्यों देखते हैं।
  6.  इसे अपने विचारों की प्रकर्ति चुननें, संशोधित करने और नियंत्रित करने के साधन दिए गए हैं, इसके द्वारा व्यक्ति को अपने चरित्र के निर्माण का अधिकार दिया गया हैं, जोकि इच्छानुसार ढाला जा सकता हैं। और इसे यह शक्ति भी दी गई हैं कि यह यह तय करें कि मस्तिष्क में किस तरह के विचार प्रबल होंगे।
  7.  इसे अपने हर विचार को ग्रहण करने, Record करने और याद करने के एक अदभुदत फाइलइंग सिस्टम (filing system) दिया गया हैं जिसे स्मरण शक्ति कहा जाता हैं। यह अदभुद तंत्र अपने आप सम्बन्ध विचारों को इस तरह से वर्गीकृत कर देता हैं कि किसी विशिष्ट विचार को याद करने से उससे जुड़े विचार अपने आप याद आ जातें हैं।
  8. इसे भावनाओं की शक्ति दी गई हैं। जिसके द्वारा यह शरीर को इच्छित कर्म के लिए प्रेरित का सकता हैं।
  9. इसे गोपनीय रूप से और ख़ामोशी से कार्य करने की शक्ति दी गई हैं जिससे सभी परिस्थितियों में विचार की गोपनीयता सुनिश्चित होती हैं।
  10. इसके पास सभी विषयों पर ज्ञान प्राप्त करने, संगठित करने, संगृहीत करने और व्यक्त करने की असीमित क्षमता होती हैं, चाहे यह ज्ञान भोतिकी का हो या रहस्यवाद का, बाह्यः जगत का हो या आन्तरिक जगत का।
  11. इसके पास शारीरिक सेहत को अच्छा बनायें रखने की शक्ति भी हैं और स्पष्ठ रूप से यह सभी बीमारियों के उपचार का एकमात्र स्त्रोत भी हैं बाकी सभी स्त्रोत तो सिर्फ योगदान देते हैं यह तो शरीर को संतुलित रखने के लिए मरम्मत-तंत्र भी चलाता हैं, जो स्वचालित हैं।
  12. इसमें रसायनों का अद्भुद स्वचालित तंत्र भी होता हैं जो शरीर के रखरखाव और मरम्मत के लिए आहार को आवश्यक तत्वों में बदलता हैं।
  13.  यह हर्दय को अपने आप चलाता हैं, जिसके द्वारा यह रक्त के जरिएं भोजन को शरीर के हर अंग तह पहुचाता हैं और अवशिष्ट सामग्री तथा मृत कोशिकाओं को शरीर से बाहर निकलता हैं।
  14.  इसके पास आत्म-अनुशासन की शक्ति हैं, जिसके द्वारा यह किसी भी अच्छी आदत को ढाल लेता हैं और तब तक कायम रख सकता हैं, जब तक की आदत स्वचलित नहीं हो जाती।
  15. यहाँ हम प्रार्थना द्वारा असीम बुद्दिमता से सम्प्रेषण कर सकते हैं इसको प्रक्रिया बहुत आसान हैं इसके लिए आस्था के साथ अवचेतन मस्तिष्क के प्रयोग की जरुरत होती हैं।
  16.  यह भौतिक जगत के हर विचार, हर औजार, हर मशीन और हर यन्त्र के अविष्कार का एकमात्र जनक हैं।
  17.  यह सुख और दुःख का एक मात्र स्त्रोत हैं यह गरीबी और अमीरी का स्त्रोत हैं इन दोनों विरोधी विचारों में से जिसकी शक्ति भी प्रबल होती हैं यह उसे अभिव्यक्ति करने में अपनी उर्जा लगाता हैं।
  18.  यह समस्त मानवीय संबंधों और समस्त मानवीय व्यवहारों का स्त्रोत हैं इसी से मित्रता और शत्रुता होती हैं, जो इस बात पर निर्भर करता हैं कि इसे किस तरह के निर्देश दियें गए हैं।
  19.  इसकें पास सभी बाह्य परिस्थितियों और स्थितियों का विरोध करने तथा उनसे अपनी रक्षा करने की शक्ति हैं, हालंकि यह हमेशा उन्हें नियंत्रित नहीं कर सकता।
  20.  तर्क के भीतर इसकी कोई सीमा नहीं हैं, इसकी सीमायें वही हैं, जिन्हें व्यक्ति आस्था के आभाव के कारण स्वीकार करता हैं, यह सच हैं मस्तिष्क जो सोच सकता हैं और जिसमे विश्वास कर सकता हैं, उसे वह हासिल भी कर सकता हैं।

ऐसे बनता है मस्तिष्क मजबूत

हम सभी जानते हैं कि ध्यान हमारे मस्तिष्क का भावनात्मक नियामक है, और यह मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बढ़ाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा कई ऐसे खाद्य पदार्थ भी हैं जो मस्तिष्क के कार्यकलाप को अधिक से अधिक बढ़ा सकते हैं। इनमें शामिल हैं अखरोट, ब्रोकली, ब्लूबेरी, नट्स और ड्राय फ्रूट्स। विटामिन ई और विटामिन के भी मस्तिष्क के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। पजल्स और दिमागी खेल खेलने से भी दिमाग तेज होता है। नियमित रूप से कार्डियो व्यायाम करने से मस्तिष्क के स्मृति वाले क्षेत्र ‘हिप्पोकैंपस’ के आकार को बढ़ाने में मदद मिलती है। दरअसल, हमारा मस्तिष्क एक शक्तिशाली जैविक मशीन है। हमारे मस्तिष्क में ग्लूकोज की निरंतर आपूर्ति जरूरी होती है। इंसुलिन एक ऐसा हार्मोन है, जो ग्लूकोज को स्टोर करता है। जब ग्लूकोज हमारे रक्त प्रवाह में शामिल होता है तो पैंक्रियाज रक्त शर्करा को नियंत्रण में रखने के लिए इंसुलिन की समुचित मात्रा उत्सर्जित करता है।

शांभवी महामुद्रा पर की गई खोजों ने दिमाग के दाहिने और बाएं हिस्से में बेहतर समन्वय दिखाया है। यह बढ़ा हुआ दिमागी समन्वय अत्यंत परिष्कृत दिमागी क्षमताओं जैसे बेहतर सीखने की क्षमता, ज्यादा रचनात्मकता, उन्नत दिमागी स्पष्टता और तीक्ष्ण बुद्धि की ओर ले जाता है।

मस्तिष्क को शक्तिशाली बनाने के आसान उपाय

    1. देशी गाय का शुध्द घी, दूध, दही, गोमूत्र, गोबर का रस समान मात्रा में लेकर गरम करें। घी शेष रहने पर उतार कर ठंडा करके छानकर रख लें। यह घी ‘पंचगव्य घृत’ कहलाता है। रात को सोते समय और प्रात: देशी गाय के दूध में 2-2 चम्मच पिघला हुआ पंचगव्य घृत, मिश्री, केशर, इलायची, हल्दी, जायफल, मिलाकर पिएं। इससे बल, बुध्दि, साहस, पराक्रम, उमंग और उत्साह बढ़ता है। हर काम को पूरी शक्ति से करने का मन होता है और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।
    2. ब्राह्मी, शंखपुष्पी, वच, असगंध, जटामांसी, तुलसी समान मात्रा में लेकर चूर्ण का प्रयोग नित्य प्रतिदिन दूध के साथ करने पर मानसिक शक्ति, स्मरण शक्ति में वृध्दि होती है।
    3. ब्रह्मी दिमागी शक्ति बढाने की मशहूर जडी-बूटी है। इसका एक चम्मच रस नित्य पीना हितकर है। इसके ७ पत्ते चबाकर खाने से भी वही लाभ मिलता है। ब्राह्मी मे एन्टी ओक्सीडेंट तत्व होते हैं जिससे दिमाग की शक्ति घटने पर रोक लगती है।
    4. बबूल का गोंद आधा किलो शुद्ध गौ घृत में तल कर फूले निकाल लें और ठण्डे करके बारीक पीस लें। इसके बराबर मात्रा में पिसी मिश्री व् पांच ग्राम दालचीनी का पाउडर इसमें मिला लें। बीज निकाली हुई मुनक्का 250 ग्राम और बादाम की छिली हुई गिरी 100 ग्राम-दोनों को खल बट्टे (इमाम दस्ते) में खूब कूट-पीसकर इसमें मिला लें और कांच के बर्तन में ढक्कन बन्द कर रखें।
    5. सुबह नाश्ते के रूप में इसके दो चम्मच खूब चबा-चबा कर खाएं। साथ में एक गिलास मीठा दूध घूंट-घूंट करके पीते.रहे।इसके बाद जब खूब अच्छी भूख लगे तभी भोजन करें। छात्र-छात्राओं के साथ दिमागी महनत करने वाले भी इसका प्रयोग करके लाभ प्राप्त करें।
    6. चार-पांच बादाम की गिरी पीसकर गाय के दूध और मिश्री में मिलाकर पीने से मानसिक शक्ति बढ़ती है।
    7. बादाम ९ नग रात को पानी में गलाएं।सुबह छिलके उतारकर बारीक पीस कर पेस्ट बनालें। अब एक गिलास दूध गरम करें और उसमें बादाम का पेस्ट घोलें।  इसमें ३ चम्मच शहद भी डालें।भली प्रकार उबल जाने पर उतारकर मामूली गरम हालत में पीयें। यह मिश्रण पीने के बाद दो घंटे तक कुछ न लें। यह स्मरण शक्ति वृद्दि करने का जबर्दस्त उपचार है। दो महीने तक करें।
    8. अखरोट  जिसे अंग्रेजी में वालनट कहते हैं स्मरण शक्ति बढाने में सहायक है। नियमित उपयोग हितकर है। २० ग्राम वालनट और साथ में १० ग्राम किशमिस लेना चाहिये।
    9. जिन फ़लों में फ़ास्फ़ोरस तत्व पर्यात मात्रा में पाया जाता है वे स्मरण शक्ति बढाने में विशेषतौर पर  उपयोगी होते है। अंगूर ,खारक ,अंजीर एवं संतरा दिमागी ताकत बढाने के लिये नियमित उपयोग करना चाहिये।
    10. दालचीनी का पावेडर बनालें। १० ग्राम पावडर शहद में मिलाकर चाटलें। कमजोर #दिमाग की अच्छी दवा है।
    11. आंवला का रस एक चम्मच २ चम्मच शहद मे मिलाकर उपयोग करें। भुलक्कड पन में आशातीत लाभ होता है।
    12. अदरक, जीरा और मिश्री  तीनों को पीसकर लेने से कम याददाश्त की स्थिति में लाभ होता है।
    13. काली मिर्च का पावडर एक चम्मच असली घी में मिलाकर उपयोग करने से याद दाश्त में इजाफ़ा होता है।
    14. तुलसी के ९ पत्ते ,गुलाब की पंखुरी और काली मिर्च नग एक  खूब चबा -चबाकर खाने से दिमाग के सेल्स को ताकत मिलती है।
    15. आम रस (मेंगो जूस) मेमोरी बढाने में विशेष सहायक माना गया है। आम रस में २ चम्मच शहद मिलाकर लेना उचित है।
    16. दूध और शहद मिलाकर पीने से भी याद दाश्त में बढोतरी होती है। विद्ध्यार्थियों के लिये फ़ायदेमंद उपचार है।२५० मिलि गाय के दूध में २ चम्मच शहद मिलाकर उपयोग करना चाहिये।
    17. गाजर में एन्टी ओक्सीडेंट तत्व होते हैं। इससे रोग प्रतिरक्छा प्राणाली ताकतवर बनती है।  दिमाग की ताकत बढाने के उपाय के तौर पर इसकी अनदेखी नहीं करना चाहिये।
    18. एक्सरसाइज :- शारीरिक गतिविधि हमारे दिमाग में नई कोशिकाओं को विकसित करने में मदद करती है, जिससे इस क्षेत्र में कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि हो सकती है। इस लिहाज से रेग्युलर एक्सरसाइज मस्तिष्क ही नहीं पूरे शरीर को स्ट्रॉन्ग बनाने में में मदद करता है।
      -इससे मस्तिष्क समेत पूरे शरीर में उचित रक्त प्रवाह बना रहता है।
      -इससे मस्तिष्क सेल्स का बेहतर विकास और न्यूरॉन्स की रक्षा होती है।
      -हृदय और मस्तिष्क संबंधी रोगों के खतरे में कमी आती है।
    19. अच्छी नींद :- हर रात सात से आठ घंटे तक लगातार अच्छी नींद लेने से आपकी स्मृति में वृद्धि होती है। नींद मस्तिष्क के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। समुचित नींद के बिना, न्यूरॉन्स को दिन के दौरान होने वाले सभी तरह की क्षतियों को दुरुस्त करने का समय नहीं मिल पाता है।
    20. पानी :- हमारे शरीर का 70 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना है और शरीर के हर हिस्से को पानी की जरूरत होती है। पानी पीने और मस्तिष्क की कार्यक्षमता के बीच सीधा संबंध होता है। मस्तिष्क को पानी का अभाव होने से ब्रेन फॉग, अनिद्रा, मस्तिष्क की थकान, क्रोध एवं डिपे्रशन जैसी समस्याएं हो सकती हंै। पानी विचार प्रक्रियाओं तथा स्मृति प्रक्रियाओं जैसे मस्तिष्क के सभी कार्यों के लिए विद्युत उर्जा उपलब्ध कराता है। इतना ही नहीं, अनुसंधानों से स्मृति को तीक्ष्ण करने के बारे में कुछ खास खाद्य पदार्थों के बारे में खुलासे हो रहे हैं।
    21. विटामिन बी 12 :- विटामिन मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं। पानी में घुलनशील विटामिन शरीर में जमा नहीं होते है और ऐसे में आहार अथवा सप्लीमेंट्स के जरिए विटामिन की नियमित आपूर्ति जरूरी होती है। दरअसल, विटामिन बी 12 (कोबेलएमिन के नाम से भी जाना जाता है) इतना आवश्यक है कि इसकी कमी के कारण ब्रेन सेल्स सिकुड़ने लगता हैं। जिन लोगों के शरीर में बी 12 की कमी होती है, वे विवेक संबंधी कागनिटिव परीक्षाओं में कम अंक लाते हैं और उनके कुल मस्तिष्क का आकार भी कम होता है। इसका कारण यह है कि जब इस विटामिन की कमी होती है तो मस्तिष्क से जाने वाले संदेशों तथा मस्तिष्क को मिलने वाले संदेशों के संप्रेषण में गड़बड़ी आ जाती है। विशुद्ध शाकाहारियों को बी 12 ग्रहण करने के संबंध में खास सावधानी बरतनी चाहिए और उन्हें इसकी पूर्ति करने के लिए अतिरिक्त सप्लीमेंट्स लेने चाहिए क्योंकि विटामिन बी 12 गाय के दूध और दुग्ध उत्पादों सहित पशुओं से प्राप्त खाद्य पदार्थों में ही प्राकृतिक रूप से मौजूद होते हैं।
    22. विटामिन डी :- इसके अलावा विटामिन डी मानसिक स्वास्थ्य और डिप्रेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विटामिन डी मस्तिष्क के उस हिस्से में काम करता है, जो अवसाद से जुड़े होते हैं।
      ब्लूबेरी: इसे नीलबदरी या फारी भी कहते हैं। इसे अपने आहार में जरूर शामिल करें क्योंकि ये स्मृति शक्ति में सुधार करते हैं। ब्लूबेरी एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं और इसलिए ये शरीर के डीएनए की रक्षा में मदद करते हैं। ब्लूबेरी में फाइटोन्यूट्रिएंट्स की अधिकतम मात्रा होती है, जो दिमाग के लिए बहुत उपयोगी होते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया है कि ब्लूबेरी में फ्लेवोनॉयड्स नामक यौगिक होते हैं, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं में सुधार करते हैं। ये अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक स्मृति में भी सुधार कर सकते हैं।
      नट्स: नट्स विटामिन ई के महत्वपूर्ण स्रोत हैं और ये मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हैं। नट्स को न्यूट्रीशस स्नैक्स के रूप में भी जाना जाता है, जो कोलेस्ट्रॉल, हृदय की समस्याओं और कैंसर के जोखिम को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। नट्स में मोनोसेचुरेटेड एवं पॉलीअनसेचुरेटेड वसा होते हैं, जो स्मृति क्षमता को मजबूत बनाते हैं। शोध से पता चला है कि नट्स मस्तिष्क में तीन दर्जन से अधिक न्यूरोट्रांसमीटर विकसित करने में मदद कर सकते हैं। मस्तिष्क की शक्ति के लिए अखरोट सबसे अच्छे नट्स होते हैं। इसमें अधिक मात्रा में डीएचए, ओमेगा- 3 फैटी एसिड होते हैं। डीएचए मस्तिष्क के स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं और इससे वयस्कों में संज्ञानात्मक (काग्निटिव) क्षमता में सुधार होती है।
  1. ब्रोकली: यह विटामिन ‘के’ से भरपूर होता है, जो संज्ञानात्मक (काग्निटिव) क्षमता को बढ़ाता है और मस्तिष्क की शक्ति में सुधार करता है।
  2. चुकंदर: इसमें वैसे प्राकृतिक नाइट्रेट तत्व मौजूद होते हैं, जो मस्तिष्क में रक्त प्रवाह को बढ़ाते हैं और इससे मस्तिष्क की क्षमता में सुधार होता है।
  3.  अखरोट: इनमें एंटीऑक्सीडेंट और ओमेगा -3 फैटी एसिड मौजूद होते हैं और ये मस्तिष्क के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।

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  1. Artical Source :- http://m.haribhoomi.com/, http://www.achhibaatein.com/,
     http://ayurvedajadibuti2014.blogspot.in/
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