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मसूर की दाल के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण

मसूर/ Red lentil / Masoor

मसूर की दाल में सबसे ज्यादा मात्रा में आयरन और मॉलिब्डेनम पाया जाता है। जो कि शरीर को सेलुसर एनर्जी और ब्लड को ऑक्सीजन देने का काम करता है। वहीं इसमें पाये जाने वाले फाइबर से कोलेस्ट्राल की मात्रा नियंत्रण में रहती है। इसमें विटामिन बी-1 होता है, जो कि तंत्रिका तंत्र और दिल की धड़कन को नियंत्रित रखता है। मसूर में कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयरन, सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, सल्फर, क्लोरीन, आयोडीन, एल्युमीनियम, कॉपर, जिंक, प्रोटीन, कार्बोहायड्रेट एवं विटामिन डी आदि तत्व पाये जाते हैं। समस्त भारत में मुख्यतः शीत जलवायु वाले क्षेत्रों में, तक उष्णकटिबंधीय एवं शीतोष्णकटिबन्धीय १८०० मीटर ऊंचाई तक इसकी खेती की जाती है | यह १५-७५ सेमी ऊँचा, सीधा, मृदु-रोमिल, शाकीय पौधा होता है | इसके पुष्प छोटे, श्वेत, बैंगनी अथवा गुलाबी वर्ण के होते हैं | इसकी फली चिकनी, कृष्ण वर्ण की, ६-९ मिलीमीटर लम्बी, अग्र भाग पर नुकीली तथा हरे रंग की होती है | प्रत्येक फली में २, गोल, चिकने, ४ मिमी व्यास के चपटे तथा हलके गुलाबी से रक्ताभ वर्ण के बीज होते हैं | इन बीजों की दाल बनाकर खायी जाती है | इसका पुष्पकाल दिसंबर से जनवरी तथा फलकाल मार्च से अप्रैल तक होता है |

मसूर के 100 ग्राम दानो मे औसतन 11 ग्राम पानी, 25 ग्राम प्रोटीन, 1.3 ग्राम वसा, 60.8 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 3.2 ग्राम रेशा, 68 मि.ग्रा. कॅल्शियॅम, 7 मि.ग्रा. लोहा, 0.21 मि.ग्रा. राईबोफलेविन, 0.51 मि.ग्रा. थाईमिन तथा 4.8 मि.ग्रा. नियासिन पाया जाता है|  रोगियो के लिए मसूर की दाल अत्यंत लाभप्रद मानी जाती

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मसूर के औषधीय गुण –

    1. Masoor की दाल को जलाकर उसकी भस्म बना लें इस भस्म को दांतों पर रगड़ने से दाँतो के सभी रोग दूर होते हैं |
    2. देसी घी में यह दाल छोंक कर खाने से आँखों की रौशनी बढ़ती है.
    3. Masoor के आटे में घी तथा दूध मिलाकर,सात दिन तक चेहरे पर लेप करने से झाइयां खत्म होती हैं |
    4. वमन होना- वात पित्त कफ किसी कारण से वमन होने की स्थिति में Masoor का आटा अनार का रस और शहद समान मात्रा में मिलाकर जल के साथ लेना चाहिये.
    5. खूनी बवासीर (रक्तार्श)- प्रातः के भोजन में मसूर की दाल के साथ खट्टी छाछ (मट्ठा) पीने से खूनी बवासीर ठीक हो जाता है.
    6. सौन्दर्य एवं चर्म रोग- मसूर पीसकर उसका लेप या उबटन करने से चेहरे का रंग निखरता है और अनेक चर्म रोग दूर हो जाते है. ( सहजन (Drumstick tree) के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण)
    7. Masoor के सेवन से बहुमूत्र, कब्ज, गैस-ट्रबल, मुख पाक या छाले गले की सूजन (कंठ शोथ) वेदना, प्रदर और सूजन में लाभ होता है
    8. Masoor के पत्तों का काढ़ा बनाकर गरारा करने से गले की सूजन तथा दर्द में लाभ होता है |
    9. Masoor की दाल का सूप बनाकर पीने से आँतों से सम्बंधित रोगों में लाभ होता है |
    10. मसूर की भस्म बनाकर,भस्म में भैंस का दूध मिलाकर प्रातः सांय घाव पर लगाने से घाव जल्दी भर जाता है |
    11. मसूर दाल के सेवन से रक्त की वृद्धि होती है तथा दौर्बल्य का शमन होता है |
    12. मसूर की दाल खाने से पाचनक्रिया ठीक होकर पेट के सारे रोग दूर हो जाते हैं |
  1. मंगल के बुरे प्रभाव को कम करने के लिए मसूर की दाल का दान सबसे अच्छा और सस्ता उपाय है। मंगल का रंग लाल है और मसूर की दाल भी लाल ही होती है। इसी वजह से इस दाल के दान से मंगल देव अति प्रसन्न होते हैं। किसी योग्य व्यक्ति को समय-समय पर दाल का दान करने पर उसकी दुआं से भी व्यक्ति के बिगड़े कार्य बनने लगेंगे। भूमि, विवाह या रक्त से जुड़ी समस्याएं धीरे-धीरे कम होने लगेंगी।

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