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मशरूम (Mushroom) के आयुर्वेदिक व औषधीय गुण

मशरूम (Mushroom) एक रहस्य 

मशरूम आयुर्वेद के बहुमूल्य रत्‍नों में से एक माना जाता है। मुख्यतः यह एक प्रकार का औषधीय कवक है जो ना सिर्फ बेहद्द पौष्टिक है वरन विचित्र औषधीय गुणों से परिपूर्ण भी है। मशरूम एक ऐसा शब्द है जो सदैव ही लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता रहा है।

प्राचीनकाल से ही लोगों के मन में इस को लेकर अत्याधिक जिग्यासा रही है। सदियों तक यह औषधी वैध/हकीमों के लिये एक रहस्य बनी रही। फिर समय के साथ आयुर्वेद विज्ञान ने इस रहस्य पर से पर्दा हटाना शुरू किया और तब हम जान सके कि आयुर्वेद में “क्षत्रक” के नाम से वर्णित इस औषधी को क्यों प्राचीनकाल में ऋषि-मुनि “जादुई फूल” कह कर पुकारा करते थे। क्यों वह असाध्य रोगों के उपचार के लिये मशरूम की सही प्रजाति की खोज में जंगल-जंगल भटकते थे।

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अब प्राचीन ग्रंथों में वर्णित इन तथ्यों को वैज्ञानिक शोधों ने भी सिद्ध कर दिया है। और शायद यही कारण है कि सम्पूर्ण विश्व में पिछले 20 वर्षों में इस की मांग उतनी तेज़ी से बड़ी हैं जितनी तेजी से पिछले 300 सालों में भी नहीं बड़ी हैं।

मौसम की अनुकूलता एवं सघन वनों के कारण भारतवर्ष में पर्याप्त प्राकृतिक मशरूम निकलता है। ग्रामीणजन इसका बड़े चाव से उपयोग करते है। उनकी इस के प्रति विशेष रूचि है इसीलिये इन क्षेत्रों में व्यावसायिक स्तर पर उत्पादित आयस्टर एवं पैरा मशरूम की अधिक मांग है। कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र में किये गये अनुसंधान कार्य से यह निष्कर्ष निकाला गया है की इस क्षेत्र में व्यावसायिक स्तर पर चार प्रकार के मशरूम उगाये जा सकते है:

व्यावसायिक स्तर पर मशरूम के प्रकार

1. आयस्टर मशरूम (प्लुरोटस प्रजाति)

2. पैरा मशरूम (फुटु ) (वोल्वेरियेला प्रजाति)

3. सफ़ेद दुधिया मशरूम (केलोसाइबी इंडिका)

4. सफ़ेद बटन मशरूम (अगेरिकस बाइसपोरस)

इनमें आयस्टर मशरूम उत्पादन की संभावनायें अधिक हैं क्योंकि इसे कृत्रिम रूप से वर्ष भर उगाया जा सकता है। पैरा मशरूम एवं दूधिया मशरूम के प्राकृतिक रूप से व्यापारिक उत्पादन की संभावनायें अपेक्षाकृत कम हैं क्योंकि इसे कम अवधि (चार माह) तक उगाया जा सकता है। पैरा मशरूम उत्पादन के पश्चात इसका शीघ्र विपणन भी एक समस्या है। सफ़ेद बटन मशरूम पर किये गये प्रयोगों से यह स्पष्ट है की ठंड के मौषम में बस्तर के पठारी क्षेत्रों में दो फसल आसानी से ली जा सकती है। इस तरह कृत्रिम रूप से विभिन्न मशरूमों को उगाकर इनकी उपलब्धता को बरसात के अलावा साल भर तक बढ़ाया जा सकता है एवं उपभोक्ताओं की माँग की पूर्ति की जा सकती है।

आयस्टर मशरूम की उन्न्त खेती

आयस्टर मशरूम को सरलता से घरों के बंद कमरों में उगाया जा सकता है। इसके लिये कम जगह की आवश्यकता होती है, इसकी उत्पादन तकनीक सरल व लागत बहुत कम है जिसके माध्यम से समाज का हर वर्ग इसे छोटे से बड़े रूप में उगा सकता है। इसे जुलाई से मार्च तक आसानी से उगा सकते है एवं कई जगहों पर जहां तापमान कम हो, साल भर उगाया जा सकता है। इस मशरूम की उत्पादन क्षमता दूसरे मशरूम की तुलना में सबसे ज्यादा है।

आयस्टर मशरूम इस समय विश्व का दूसरे नंबर का मशरूम है। यह भारतवर्ष में भी उत्पादन की दृष्टि से दूसरे स्थान पर है।

सबसे उच्च प्रोटीन युक्त खाध्य पदार्थों में से एक :-

मशरूम दुनिया के सबसे उच्च प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों में से एक है ओर नवीन वैज्ञानिक शोधों ने यह सिद्ध कर दिया है कि इस में प्रोटीन की मात्रा अंडे, दूध, चावल, सोयाबीन और गेंहूं से भी ज़्यादा होती है।

चमत्कारिक औषधी है मशरूम :-

यूं तो मशरूम एक ऐसी वनस्पति है जिसमें अनेक प्रकार के औषधीय गुण पाये जाते हैं किन्तु इस के कुछ गुण ऐसे हैं जिनकी वजह से यह सदा से ही आयुर्वेद में एक चमत्कारिक औषधी के रूप में जानी जाती रही है। इस में प्रचुर मात्रा में “फॉलिक एसिड” पाया जाता है जो शरीर में रक्त की कमी को दौर करता है ओर अनिमिया जैसे धातक रोग से बचाता है।

इस में थाईमिन (B1), रायबोफ्लेविन (B2), नायलिन, बायोटिन, एस्कॉर्बिक एसिड, विटामिन K और विटामिन E भी बड़ी मात्रा में पाया जाता है जो शरीर के स्वस्थ रहने के लिये अत्यावश्यक है। साथ ही मशरूम में फायबर की प्रचुर मात्रा पायी जाती है पाचन तंत्र को सुचारू रूप से चलने के लिये आवश्यक होती है।

इसके अतिरिक्त इस में स्टार्च ओर वसा की मात्रा भी अतिनिम्न होती है ओर इसमें कैलौरी की मात्रा भी बहुत काम होती है जिस कारण यह शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा नहीं होने देता। इस प्रकार कहा जेया सकता है कि मशरूम शरीर में चर्बी एकत्रित कर वज़न नहीं बडता बल्कि यह नयी कोशिकाओं व रक्त का निर्माण कर शरीर की दुर्बलता को दूर करता है व शरीर का वज़न बडाता है।

बड़ती उम्र के प्रभावों को रोकता है मशरूम :-

इस की एक बहुत ही विचित्र विशेषता है कि यह शरीर में ना सिर्फ नयी कोशिकाओं का तेज़ी से निर्माण करता है बल्कि क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत भी करता है। इस के नियमित उपयोग से सिर्फ त्वचा ही स्वस्थ नहीं दिखती बल्कि शरीर के अंदरूनी अंग भी स्वस्थ व शक्तिशाली होते हैं। नेशनल रिसर्च सेंटर ऑफ मशरूम ( NRCM ), सोलन- हिमाचल प्रदेश की एक रिसर्च एक अनुसार यह सिद्ध है कि मशरूम मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अर्थात बीमारियों से लड़ने की क्षमता को बडाता है व बड़ती उम्र के प्रभावों जैसे त्वचा पर झुर्रियां, कमज़ोरी, जोड़ों में दर्द, थकान, पौरुष शक्ति की कमी, बालों का झड़ना आदि को भी रोकता है।

रोग निवारक ही नहीं, रोग निरोधक भी है मशरूम :-

यह आवश्यक नहीं कि इस का उपयोग किसी रोग से ग्रस्त रोगी ही करते हैं। कोई स्वस्थ व्यक्ति भी अगर किसी भी रूप में इस का नियमित उपभोग करता है तो मशरूम अपने औषधिय गुणों के द्वारा मानव शरीर को स्वस्थ व निरोगी रखने में सहायक होता है।

जीवनी शक्ति बढ़ाता है :- इस में पाया जाने वाला ऐंटी-ऑक्सिडेंट अर्गोथियोनाइन बहुत ही असरदार होता है। ये स्किन को फ्री रैडिकल्स से बचाने के साथ ही बॉडी की जीवनी शक्ति को भी बढ़ाता है। ये वास्तव में एक एमिनो ऐसिड होता है जिसमें सल्फर होता है और वह हर तरह से बॉडी के लिए फायदेमंद होता है।

मोटापा करे कम :- प्रोटीन युक्त डायट लेकर न केवल बॉडी बनाई जाती है बल्कि इससे वजन को भी कंट्रोल किया जा सकता है। सब्जी बनाने के अलावा इसका सूप के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

हड्डियों को मजबूत बनाता है :- मशरूम कैल्शियम का अच्छा स्रोत होता है जो हड्डियों के बनने से लेकर उनकी मजबूती तक के लिए जरूरी होता है। डायट में इसकी बैलेंस मात्रा लेने से उम्र बढ़ने के साथ होने वाली हड्डियों की बीमारी ऑस्टियोपरोसिस, जॉइंट पेन से बचा जा सकता है।

दिल की बीमारी में रक्षा :- इस में प्रोटीन से लेकर विटमिन ई और सिलेनियम जैसे कई न्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं जो न केवल स्किन और बालों को हेल्दी रखते हैं बल्कि हार्ट डिजीज से भी बचाते हैं।

डायबीटीज में सुधार  :- डायबीटीज की समस्या से जूझ सहे मरीजों के लिए मशरूम काफी फायदेमंद होता है। मशरूम फैट, कोलेस्ट्रॉल, हाई प्रोटीन की अधिकता को बैलेंस करने के लिए कारगर होता है। ये नैचरल इन्सुलिन और एंजाइम के तौर पर काम करता है।

ब्लड की कमी करे दूर :- अनीमिया के शिकार लोगों के ब्लड में आयरन की भारी मात्रा में कमी हो जाती है जिससे थकान, चक्कर और पाचन संबंधी तमाम परेशानियां होने लगती हैं। मशरूम में आयरन की भरपूर मात्रा पाई जाती है जिसका लगभग 90 प्रतिशत बॉडी को मिलता है जो रेड ब्लड सेल्स के बनने और बॉडी के सही फंक्शन के लिए बहुत ही जरूरी होता है।

मेटाबॉलिज्म :- इस में विटमिन बी होता है जो कि भोजन को ग्लूकोज में बदल कर ऊर्जा पैदा करता है। विटामिन बी2 और बी3 इसके लिए काफी अच्छा है।

दिमाग को पोषण देना :- इस में कॉलिन भी पाया जाता है जो नींद, पेशियों के काम करने, याद्दास्त और दिमाग बढाने में मदद करता है।

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में बायोसाइंस विभाग के टी.एन. लखनपाल ने कहा कि मशरूम की उपजाई हुई और जंगली किस्मों को उसके पोषक तत्वों के कारण खाया जाता है। मधुमेह रोगियों के लिए ये अच्छे होते हैं, क्योंकि इनमें या तो नगण्य चीनी होती है या बिल्कुल नहीं होती है। लखनपाल रविवार को समाप्त हुए भारतीय विज्ञान कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे। वैज्ञानिकों के मुताबिक चूंकि इस में वसा नहीं होती है, इसलिए यह मोटापाग्रस्त लोगों के लिए भी बेहतर होती है। उन्होंने कहा कि अब तक जांच की गई इस की सभी किस्में कैंसर, एचआईवी तथा अन्य खतरनाक बीमारियों में भी फायदेमंद पाई गई हैं।

नोट :- आपने ऐसा कई बार सुना होगा कि खाने को बार-बार गर्म करने से उसके पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं लेकिन क्या आपने कभी उन्हें जहर में बदलते सुना है. ऐसा होता है. कई खाद्य ऐसे होते हैं जिन्हें बार-बार गर्म करने पर उनके तत्वों में ऐसी रायासनिक प्रक्रिया होती है कि वे जहर में बदल जाते हैं. होना ये चाहिए की आप जब भी भोजन करना चाहे तो कोशिश करें की आपका भोजन बमुश्किल से दस मिनट पहले ही पका हो. दस मिनट पहले पके भोजन को आपको दोबारा गर्म करने की नौबत नहीं आएगी और आप भोजन को स्वाद ले कर डाइजेस्ट भी कर लेंगे. मशरूम को कभी भी रखा हुआ न खाएं. ये बहुत सेंसटिव खाद्य पदार्थ होती है जिसमें प्रोटीन की उच्च मात्रा का खराब होने का डर सबसे ज्यादा होता है.

Article Source :- http://mydrmushroom.com/

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