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मधुमालती (Honeysuckle) के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण

मधुमालती (Honeysuckle) Madhumalti

‘मधुमालती’ इसलिये सार्थक है क्योंकि इसके पुष्पों से खाद्य मधु निकाला जा सकता है। मधुमालती (Honeysuckle) एक वनस्पति है जो क्षुप (झाड़ी) या लता के रूप में होती है। यह कैप्रीफोलिआसी वंश में आती है। इसकी लगभग १८० प्रजातियाँ ज्ञात हैं। इनमें से लगभग १०० प्रजातियाँ चीन में, २० भारत में, २० यूरोप में, तथा २० उत्तरी अमेरिका में पायी जाती हैं। इसकी सबसे प्रसिद्ध प्रजातियाँ हैं- लोनिकेरा जैपोनिका (Lonicera japonica या जापानी मधुमालती या चीनी मधुमालती), लोनिकेरा पेरिक्लिमेनम (Lonicera periclymenum या woodbine), तथा लोनिकेरा सेमपर्विरेन्स ( Lonicera sempervirens या trumpet honeysuckle, या woodbine honeysuckle). मधुमालिका की कुछ प्रजातियों के पुष्पों की ओर गुंजन पक्षी(Hummingbirds) बहुत आकर्षित होते हैं। (Read More :- सदाबहार वह अनोखा पौधा है जो संजीवनी बूटी बन गया है)

मालती या मधुमालती के फूल बहुत सुन्दर होते हैं . ऐसा लगता है कि फूलों के गुच्छे के गुच्छे बड़ी सी लता पर हर जगह बाँध दिए गए हों . इसकी लता जमीन से चौमंजिली इमारत तक भी चढ़ जाती है . इसके फूल और पत्तियां औषधि होते हैं . यह किसी भी तरह का नुकसान नहीं करता . यह बहुत सौम्य प्रकृति का पौधा है . मालती एक बड़ी आरोही लता है जो सफ़ेद,सुगंधित,चमेली जैसे फूलों से लदी रहती है इसमें हरे अंडाकार पत्ते होते हैं जो तने से उलटे जुड़े रहते हैं. बसंत ऋतु  में यह पांच पत्तियों वाले सफ़ेद फूलों, जोकि सुगन्धित होते हैं,से लद जाती हैं .फूलों की पत्तियां मुड़ी हुई और नुकीली होती हैं .इसके फूलों से चमेली के फूलों का भ्रम होता है .पौराणिक कथाओं में मालती का काफ़ी जिक्र है .इनके फूलों के मंडप प्रेमियों के मिलने के स्थान के रूप में जाने जाते रहे हैं .रमणियों के जूडे मालती के फूलों से भी सजे रहते हैं . (Read More :- द्रोणपुष्पी एलर्जी और सर्पविष की रामबाण औषधी )

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मधुमालती के लाभ 

मधुमालती के फूलों से आयुर्वेद में वसंत कुसुमाकर रस नाम की दवाई बनाई जाती है .  इसकी 2-5 ग्राम की मात्रा लेने से कमजोरी दूर होती है और हारमोन ठीक हो जाते है .आँखों के काले घेरे, आतों के घाव, आधाशीशी, उच्च रक्तचाप, उल्टी, एड्स, एनीमिया, कंठमाला, कब्ज, कमजोरी, कमर दर्द, कान का दर्द, कुष्ट रोग, कैंसर, क्षयरोग(टी.बी.), खांसी, खुजली, गठिया, गर्भधारण, गर्भपात, गुर्दे की पथरी, घाव, चर्म रोग, चेचक, चेहरे के दाग, जुकाम, झाइयाँ, डेंगू, तुतलाना, त्वचा विकार, दमा, दस्त, दांत दर्द, दाद, नकसीर, नपुंसकता, नेत्र रोग, पक्षाघात, पथरी, पायरिया, पीलिया, पेचिश, पेट के कीड़े, पेट दर्द, प्यास, फिशर, फोड़े फुंसी, बदहजमी, बवासीर, बहरापन आदि रोगों में भी यह बखूबी काम करती है यदि इस को भगवान द्वारा औषधी की फैक्ट्री कहा जाये तो कोई अतिशय्कोती नहीं होगी ! (Read More :- लाजवंती (माईमोसा पुदिका) के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण )

प्रमेह , प्रदर , पेट दर्द , सर्दी-जुकाम और मासिक धर्म आदि सभी समस्याओं का यह समाधान है .

प्रमेह या प्रदर में इसके 3-4 ग्राम फूलों का रस मिश्री के साथ लें .
शुगर की बीमारी में करेला , खीरा, टमाटर के साथ मालती के फूल डालकर जूस निकालें और सवेरे खाली पेट लें . या केवल इसकी 5-7 पत्तियों का रस ही ले लें . वह भी लाभ करेगा .
कमजोरी में भी मधुमालती की पत्तियों और फूलों का रस ले सकते हैं .
पेट दर्द में मधुमालती के फूल और पत्तियों का रस लेने से पाचक रस बनने लगते हैं . यह बच्चे भी आराम से ले सकते हैं .
सर्दी ज़ुकाम के लिए मधुमालती की एक ग्राम फूल पत्ती और एक ग्राम तुलसी का काढ़ा बनाकर पीयें .

मधुमालती के अन्य गुण 

मधुमालती का पौधा न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण का काम करता है , बल्कि घरों की खूबसूरती भी बढ़ता है । इसकी लताएं वातावरण से कार्बन डाई ऑक्साइड अवशोषित कर हमें आक्सीजन देती  है, इनके पत्ते धूल के कण को रोक कर हवा में से धूल के कणों की मात्रा भी कम करते  हैं ।

मधुमालती की एक और खास बात है ये साल भर हरी रहती है और इसकी लताओं के पत्ते पानी को वाष्पोत्सर्जित करते है जिस से  हवा का तापमान और सूखापन घटता है । मधुमालती की लताएं घनी होती हैं, इस कारण दीवारों पर धूप की मार कम पड़ती है । जिससे  घरों का तापमान सामान्य बना रहता है ।  और इसके फूलों के गुच्छों खुशबू आती रहती है जो रूम फ्रेश्ननर का काम करती है ।

मधुमालती के पौधे की ये लाभ कम ही लोगो को पता है । मधुमालती का पौधा बीमारिया तो दूर करता ही है साथ ही साथ घर को भी फ्रेश और प्राकर्तिक वातावरण भी देता है जो सेहत के लिए बेहद जरूरी है।

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