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मखाना (Prickly Water Lily) के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण

मखाना (Prickly Water Lily) क्या चीज़ है ?

मखाना हम खाते रहते हैं उपवास में – खीर के रूप में या नमकीन भुने रूप में  मखाना कमल का बीज नहीं होता है ,इसकी एक अलग प्रजाति है, यह भी तालाबों में ही पैदा होता है लेकिन इसके पौधे बहुत कांटेदार होते हैं ,इतने कंटीले कि उस जलाशय में कोई जानवर भी पानी पीने के लिए नहीं घुसता,जिसमे मखाने के पौधे होते हैं। इसकी खेती सिर्फ बिहार के मिथिलांचल में होती है मखाना को देवताओं का भोजन कहा गया है । उपवास में इसका विशेष रूप से उपयोग होता है । पूजा एवं हवन में भी यह काम आता है । इसे आर्गेनिक हर्बल भी कहते हैं । क्योंकि यह बिना किसी रासायनिक खाद या कीटनाशी के उपयोग के उगाया जाता है ।

अधिकांशतः ताकत के लिए दवाये मखाने से बनायी जाती हैं।केवल मखाना दवा के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता .इसलिए इसे सहयोगी आयुर्वेदिक औषधि भी कहते हैं।

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मखाना को फाक्सनट या प्रिकली लिली यानी कांटे युक्त लिली कहते हैं, क्योंकि इसमें पत्ती के डंठल एवं फलों तक पर छोटे-छोटे कांटे लगे होते हैं. यह कमल कुल का एक बहुवर्षीय पौधा है. वनस्पति शास्त्र में इसे यूरेल फरोक्स कहते हैं. इसमें जड़कंद होता है. बड़ी-बड़ी गोल पत्तियां पानी की सतह पर हरी प्लेटों की तरह तैरती रहती हैं. इसमें नीले, जामुनी या लाल कमल जैसे फूल खिलते हैं, जिन्हें नीलकमल कहते हैं. परंपरा के मुताबिक कमल और मखाना दोनों का पूजा में बड़ा महत्व है. मखाना की खेती भारत के अलावा चीन, जापान, कोरिया और रूस में भी की जाती है. इसका फल स्पंजी होता है. फल को बेरी कहते हैं. फल और बीज दोनों खाये जाते हैं. फल में 8-20 तक बीज लगते हैं. बीज मटर के दाने के बराबर आकार के होते हैं और इनका कवच कठोर होता है.

65 प्रतिशत मखाना बिहार में उगाया जाता है. इसे आर्गेनिक हर्बल भी कहते हैं, क्योंकि यह बिना किसी रासायनिक खाद या कीटनाशी के उपयोग के उगाया जाता है. औषधीय गुणों के चलते इसे क्लास वन फूड का दरजा दिया गया है. इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट गुण होने से यह काफी लाभप्रद है. यह ब्लड प्रेशर एवं कमर तथा घुटनों के दर्द को नियंत्रित करता है. इसके बीजों में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेड, वसा, कैल्शियम एवं फास्फोरस लौह एवं विटामिन बी-1 भी पाया जाता है. मणिपुर के कुछ इलाकों में इसके जड़कंद और पत्ती के डंठल की सब्जी भी बनाते हैं. इसी से अरारोट भी बनता है.

मखाना की कहां-कहां होती है खेती?

दरभंगा स्थित राष्ट्रीय मखाना शोध संस्थान के अनुसार भारत में लगभग 13000 हैक्टर नमभूमि में मखानों की खेती होती है. यहां लगभग नब्बे हजार टन बीज पैदा होता है. देश का 80 प्रतिशत मखाना बिहार की नमभूमि से आता है. इसके अलावा इसकी खेती अलवर, पश्चिम बंगाल, असम, उड़ीसा, जम्मू-कश्मीर, मणीपुर और मध्यप्रदेश में भी की जाती है, परंतु देश में तेजी से खत्म हो रही नमभूमि ने इसकी खेती और भविष्य में उपलब्धता पर सवाल खड़े कर दिये हैं. यदि स्वादिष्ट मखाना खाते रहना है, तो देश की नम भूमियों को भी बचाना होगा.

कैसे बनता है मखाना?

मखाना फाक्सनट के बीजों की लाई है. वैसे ही जैसे पाॅपकार्न मक्का की लाई है. इसमें 12 प्रतिशत प्रोटीन होता है. मखाना बनाने के लिए इसके बीजों को फल से अलग कर धूप में सुखाते हैं. नम बनाये रखने के लिए इन पर पानी छींटा जाता है. धूप में सुखाने पर उनमें 25 प्रतिशत तक नमी बची रहती है. सूखे नट्स को लकड़ी के हथोड़ो से पीटा जाता है. इस तरह गरी अलग होने पर बीज अच्छी तरह से सूखते हैं. सूखे बीजों को चलनियों से छाना जाता है.

बड़े बीज अच्छी क्वालिटी के माने जाते हैं. बीजों को बड़े-बड़े लोहे के कढ़ावों में सेंका जाता है. फिर इन्हें टेम्परिंग के लिए 45-72 घंटों के लिए टोकरियों में रखा जाता है. इस तरह इनका कठोर छिलका ढीला हो जाता है. कढ़ाव में सिंक रहे बीजों को 5-7 की संख्या में हाथ से उठा कर ठोस जगह पर रख कर लकड़ी के हथोड़ो से पीटा जाता है. इस तरह गर्म बीजों का कड़क खोल तेजी से फटता है और बीज फटकर लाई (मखाना) बन जाता है. जितने बीजों को सेका जाता है, उनमें से केवल एक तिहाई ही मखाना बनते हैं. लाई बनने पर उनकी पॉलिश और छंटाई की जाती है. इसके लिए इन्हें टोकरियों में रख कर रगड़ा जाता है. इस प्रकार इनके ऊपर लगा कत्थई-लाल रंग का छिलका हट जाता है. पॉलिश करने पर मिले सफेद मखानों को उनके आकार के अनुसार दो-तीन श्रेणियों में छांट लिया जाता है. फिर उन्हें पॉलीथीन की पर्त लगे बैग में भर दिया जाता है.

मखाना (Prickly Water Lily) के औषधीय गुण 

आचार्य भावमिश्र (1500-1600) द्वारा रचित भाव प्रकाश निघंटु में इसे पद्मबीजाभ एवं पानीय फल कहा गया है। इसके अनुसार मखाना बल, वाजीकर एवं ग्राही है। इसे प्रसव पूर्व एवं पश्चात आई कमज़ोरी दूर करने के लिए दूध में पकाकर खिलाते है । यह सुपाच्य है तथा आहार के रूप में इसका उपयोग किया जाता है। इसके औषधीय गुणों के चलते अमरीकन हर्बल फूड प्रोडक्ट एसोसिएशन द्वारा इसे क्लास वन फूड का दर्जा दिया गया है। यह जीर्ण अतिसार, ल्यूकोरिया, शाुणुओं की कमी आदि में उपयोगी है। इसमें एन्टी-ऑक्सीडेंट होने से यह श्वसन तंत्र, मूत्र-जननतंत्र में लाभप्रद है। यह ब्लड प्रेशर एवं कमर तथा घुटनों के दर्द को नियंत्रित करता है। इसके बीजों में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेड, वसा, कैल्शियम एवं फास्फोरस के अतिरिक्त केरोटीन, लोह, निकोटिनिक अम्ल एवं विटामिन बी-1 भी पाया जाता है ।

इसके बीजों में- प्रोटीन 10%, कर्बोहाईड्रेट 75% के अलावा, आयरन, फास्पोरस और केरोटीन भी पाए जाते हैं. चूँकि मखाने में वसा की मात्रा बहुत कम होती है इसलिए यह हाई ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीजों के लिए अमृत माना जाता है। मखाना यज्ञ का भी महत्वपूर्ण भाग है. मख का मतलब ही यज्ञ होता है। मखाने की खीर, मखाने के आटे का हलवा आदि भी बनाया जाता है। मखाने के भुने हुए बीज प्रसूताओं को ताकत के लिए खिलाये जाते हैं  यह बीज लड्डू, खीर आदि किसी भी चीज में मिला कर खिलाये जा सकते हैं. जोड़ों के दर्द और एक्जीमा वाली खुजली में मखाने के पत्तो को पीस कर लगाने से काफी फायदा मिलता है.

मखानों की पालिश
लाई बनने पर उनकी पॉलिश और छंटाई की जाती है । इस हेतु इन्हें बांस की टोकनियों में रखकर रगड़ा जाता है । इस प्रकार इनके ऊपर लगा कत्थई-लाल रंग का छिलका हट जाता है । यही पॉलिशिंग । चावल को भी सफेद बनाने के लिए मशीनों से उन्हें पालिश करते हैं । हालांकि ऐसा करने से उसके कई पोषक तत्व हट जाते हैं । पॉलिश करने पर मिले सफेद मखानों को उनके आकार के अनुसार दो-तीन श्रेणियों में छांट लिया जाता है। फिर उन्हें पोलीथीन की पर्त लगे गनी बैग में भर दिया जाता है । ये इतने हल्के होते हैं कि एक बोरे में मात्र 8-9 किलो मखाने समाते हैं । दरभंगा स्थित राष्ट्रीय मखाना शोध संस्थान के अनुसार भारत में लगभग 13,000 हैक्टर नमभूमि में मखानों की खेती होती है । यहां लगभग नब्बे हजार टन बीज पैदा होता है । देश का 80 प्रतिशत मखाना बिहार की नमभूमि से आता है । इसके अलावा इसकी छिटपुट खेती अलवर, पश्चिम बंगाल, असम, उड़ीसा, जम्मू-कश्मीर, मणीपुर और मध्यप्रदेश में भी की जाती है। परन्तु देश में तेजी से खत्म हो रही नमभूमि ने इसकी खेती और भविष्य में उपलब्धता पर सवाल खड़े कर दिए हैं । यदि स्वादिष्ट स्वास्थ्यवर्धक मखाना खाते रहना है तो देश की नमभूमियों को भी बचाना होगा । नमभूमियों को प्रकृति के गुर्दे भी कहते हैं और पता चलता है कि यहां उगा मखाना हमारी किडनियों की भी रक्षा करता है ।

मखाना (Prickly Water Lily) के आयुर्वेदिक गुण 

पाचन में सुधार करे :- मखाना एक एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण, सभी आयु वर्ग के लोगों द्वारा आसानी से पच जाता है। बच्‍चों से लेकर बूढे लोग भी इसे आसानी से पचा लेते हैं। इसका पाचन आसान है इसलिए इसे सुपाच्य कह सकते हैं। इसके अलावा फूल मखाने में एस्‍ट्रीजन गुण भी होते हैं जिससे यह दस्त से राहत देता है और भूख में सुधार करने के लिए मदद करता है।

एंटी-एजिंग गुणों से भरपूर :- मखाना उम्र के असर को भी बेअसर होता है। यह नट्स एंटी-ऑक्‍सीडेंट से भरपूर होने के कारण उम्र लॉक सिस्‍टम के रूप में काम करता है और आपको बहुत लंबे समय तक जवां बनाता है। मखाना प्रीमेच्‍योर एजिंग, प्रीमेच्‍योर वाइट हेयर, झुर्रियों और एजिंग के अन्‍य लक्षणों के जोखिम को कम करने में मदद करता है।

डायबिटीज रोगियों के लिए फायदेमंद :- डायबिटीज चयापचय विकार है, जो उच्च रक्त शर्करा के स्तर के साथ होता है। इससे इंसुलिन हार्मोंन का स्राव करने वाले अग्न्याशय के कार्य में बाधा उत्‍पन्‍न होती है। लेकिन मखाने मीठा और खट्टा बीज होता है। और इसके बीज में स्‍टार्च और प्रोटीन होने के कारण यह डायबिटीज के लिए बहुत अच्‍छा होता है।

किडनी को मजबूत बनाये :- मखाने का सेवल किडनी और दिल की सेहत के लिए फायदेमंद है। फूल मखाने में मीठा बहुत कम होने के कारण यह स्प्लीन को डिटॉक्‍सीफाइ करने, किडनी को मजबूत बनाने और ब्‍लड का पोषण करने में मदद करता है। साथ ही मखानों का नियमित सेवन करने से शरीर की कमजोरी दूर होती है और हमारा शरीर सेहतमंद रहता है।

दर्द से छुटकारा दिलाये :- मखाना कैल्शियम से भरपूर होता है इसलिए जोड़ों के दर्द, विशेषकर अर्थराइटिस के मरीजों के लिए इसका सेवन काफी फायदेमंद होता है। साथ ही इसके सेवन से शरीर के किसी भी अंग में हो रहे दर्द जैसे से कमर दर्द और घुटने में हो रहे दर्द से आसानी से राहत मिलती है।

नींद न आने की समस्या से छुटकारा :- मखाने के सेवन से तनाव कम होता है और नींद अच्छी आती है। रात में सोते समय दूध के साथ मखाने का सेवन करने से नींद न आने की समस्या दूर हो जाती है।

कमजोरी दूर करना :- मखानों का नियमित सेवन करने से शरीर की कमजोरी दूर होती है और हमारा शरीर सेहतमंद रहता है। मखाने में मौजूद प्रोटीन के कारण यह मसल्स बनाने और फिट रखने में मदद करता है।

मखाना शरीर के अंग सुन्‍न होने से बचाता है तथा घुटनों और कमर में दर्द पैदा होने से रोकता है।

प्रेगनेंट महिलाओं और प्रेगनेंसी के बाद कमजोरी महसूस करने वाली महिलाओं को मखाना खाना चाहिये।

मखाना का सेवन करने से शरीर के किसी भी अंग में हो रही दर्द से राहत मिलती है।

मखाना का सेवन करने से शरीर में हो रही जलन से भी राहत मिलती है।

मखाना को दूध में मिलाकर खाने से दाह (जलन) में आराम मिलता है। ६-मखानों के सेवन से दुर्बलता मिटती है तथा शरीर पुष्ट होता है।

नपुंसकता :- वैवाहिक जीवन और पति-पत्नी के रिश्ते को दाँव पर लगा देता है। लेकिन इस बात के लिए निराश होने की ज़रूरत नहीं हैं, आप घर पर ही आसानी से आयुर्वेदिक इलाज के द्वारा इस परेशानी से मुक्ति पा सकते हैं। मखाना (lotus seed) एक ऐसा आयुर्वेदिक हर्ब है जो बड़े ही स्वादिष्ट तरीके से आपके दाम्पत्य जीवन में मधुरता को लौटा लायेगा। मखाने में जो प्रोटीन,कार्बोहाइड्रेड, फैट, मिनरल और फॉस्फोरस आदि पौष्टिक तत्व होते हैं वे कामोत्तेजक को बढ़ाने का काम करते हैं। साथ ही शुक्राणुओं के क्वालिटी को बेहतर बनाने के साथ-साथ उसकी संख्या को भी बढ़ाने में सहायता करते हैं। लेकिन इनका सेवन करने से पहले चिकित्सक से सलाह ज़रूर ले लें।

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Article Source :- http://www.deshbandhu.co.in/http://www.onlymyhealth.com/

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