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भांग / Bhaang (cannabis) के अद्भूत औषधीय प्रयोग जरुर पढ़े

भांग / Bhaang (cannabis) पर एक नज़र (In Hindi)

भांग का नाम सुनते ही सभी को नशे का एहसास होने लगता है और जो लोग नशा नहीं करते उन्हें इसमे बुराई दिखानी शुरू हो जाती है उनकी मने तो भांग का नशा करने वालों से दूर ही रहना चाहिये और ये बात भी सही है ये सब बातें  हमारी जानकारी के आभाव के कारण है यदि भांग इतनी नशीली वस्तु होती तो इसका जिक्र हमारे आयुर्वेदिक ग्रंथ में नहीं होता . यदि हम आयुर्वेदिक ग्रंथ की बात करे तो उसमे बहुत से औषधीय प्रयोग बताये गए है जो आपको बहुत सी बिमारियों से तो बचाता है साथ भी शक्ति भी देता है बात है इसे यदि औषधी की तरह सेवन किया जाये ना की नशे की तरह . कुछ लोग इसे नशे की तरह प्रयोग करते हैं और बदनाम भगवान शिव को करते हैं की हम तो भोले बाबा के भक्त हैं हम तो पियेंगे इसमे कोई बुराई नहीं है . जबकि नशा कोई भी हो वो आपके सत्यानाश करेगा ही यदि आप उसे औषधी की तरह नहीं लेते हो

सबसे पहले हम बात करते हैं 

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भांग

भांग की रासायनिक रचना क्या है और यह कैसे काम करती  है?

एक आम भांग के पौधे में लगभग 400 रासायनिक यौगिक होते हैं। चार मुख्य यौगिकों के नाम हैं –

  1. डेल्टा 9 टेट्राहाइड्रोकैनाबिनौल (Delta 9 Tetrahaidrokanabinaul)
  2. कैनाबिडिओल (Kanabidiol )
  3. डेल्टा 8 टेट्राहाइड्राकैनाबिनौल (Delta 8 Tetrahaidrakanabinaul)
  4. कैनाबिनौल (Kanabinaul)

कैनाबिडिओल के अलावा यह सब यौगिक मनोवैज्ञानिक (Psychological) रूप से सक्रिय हैं और डेल्टा 9 टेट्राहाइड्राकैनाबिनौल ((Delta 9 Tetrahaidrokanabinaul)) सबसे अधिक सशक्त है। इस पौधे की घनिष्ठ किस्मों में कैनाबिडिओल ((Kanabidiol )) की मात्रा कम होती है जबकि डेल्टा 9 टेट्राहाइड्रोकैनाबिनौल ((Delta 9 Tetrahaidrokanabinaul)) की मात्रा कहीं ज्यादा होती है।

जब भांग का धूम्रपान (Smoking ) किया जाता है तो इसके यौगिक तीव्रता से खून (Blood) में प्रवेश करते हैं और सीधे मस्तिष्क और शरीर के अन्य भागों में पहुंच जाते हैं। “स्टोन्ड” (Stond) और “हाई” की भावना मुख्य रूप से मस्तिष्क में कैनाबिनाइड रिसेप्टर्स पर डेल्टा-9 टी.एच.सी. के जुड़नें से होती है। रिसेप्टर मस्तिष्क कोशिका पर एक ऐसी जगह होती है जहाँ कुछ प्रकार के पदार्थ थोड़ी देर के लिए चिपक सकते हैं या बंध सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो इसका प्रभाव कोशिका या इससे उत्पन्न तंत्रिका आवेगों पर हो सकता है। यह भी रूचिपूर्ण है कि मस्तिष्क द्वारा स्वभाविक रूप में भांग जैसे पदार्थ का निर्माण होता है जिसे ‘ऐंडोकैनाबिनाएड’(Aendokanabinaad) कहा जाता है।

इनमें से अधिकांश रिसेप्टर्स मस्तिष्क के उन हिस्सों में पाये जाते हैं जो कि खुशी, स्मृति, सोच, एकाग्रता, संवेदना और समय की धारणा को प्रभावित करते हैं। भांग के यौगिक आंख, कान, त्वचा और पेट को भी प्रभावित कर सकते हैं।

भांग(Cannabis)यानी विजया का उल्लेख अथवर्वेद में भी मिलता है भांग के बारे में प्राचीन काल में भी जानकारी थी भांग के पौधे पर फूल और फल शरद ऋतु में लगती है पौधे पे लगने वाले नये पत्ते और फूल तथा फलो से युक्त कोमल शाखाओं को ‘भांग’ कहा जाता है
भांग के मादा पौधों के पुष्पित शिखर जब मंजरी से भर जाते है तब उन्हें तोडकर सुखा लेते है यह ‘गांजा ‘होता है यह तम्बाखू की तरह पिया जाता है नशेबाज लोग तम्बाखू के साथ मिलाकर चिलम में रखकर गांजे का दम लगाते है -गांजे में विशेषता यह होती है कि मसलने पर इसका नशीला प्रभाव बढ़ता है
भांग के पौधे के वायु में रहने वाले सभी भागों में उत्पन्न होने वाले एक रेजिन निस्यंद को जिसमे विषैले तेल की अधिक मात्रा होती है ,’चरस’ कहलाता है

भांग के शरीर पर क्या प्रभाव हैं?

भांग के शरीर पर अच्छे प्रभाव – इसमें अत्यंत आराम, खुशी, निद्रा की अनुभूति होती है। रंग तीव्र दिखाई देते हैं और संगीत बेहतर सुनाई देता है।

भांग के शरीर पर दुष्प्रभाव –10 में से 1 भांग उपयोगकर्ता को अप्रिय अनुभव होते हैं, जिसमें भ्रम, मतिभ्रम, चिंता और भय शामिल हैं। एक ही व्यक्ति को अपने मूड/मनःस्थिति या परिस्थितियों के अनुसार प्रिय या अप्रिय प्रभाव महसूस हो सकते हैं। यह भावनायें आमतौर पर अस्थायी होती हैं पर क्योंकि भांग शरीर में कुछ हफ्तों के लिए रह सकती है इसलिए इसका प्रभाव ज्यादा समय के लिए हो सकता है जिसका अहसास उपयोगकर्ताओं को नहीं होता है। लंबी अवधि के उपयोग से अवसाद हो सकता है, प्रेरणा पर प्रोत्साहन की कमी हो सकती है।

हमारे आयुर्वेद में भांग को शुद्ध कर के प्रयोग करने के बारे में बताया गया है आप ने चाहे कोई औषधी का निर्माण करना हो या इसका सेवन करने हो या कोई ठंडाई बनानी हो या कोई बर्फी या भांग के लडू शुद्ध करना जरुरी होता है भांग को शुद्ध करने के 2 तरीके जो ज्यादा तर देखे जाते हैं  वो निम्न है :-
औषिधि प्रयोग के लिए भांग को शोधन जरुर  कर लेना चाहिए ताकि इसके सभी दोष समाप्त हो जाए
1- भांग के सूखे पत्तो को जल में भिगोकर निचोड़कर धूप में सुखाकर गाय के घी में धीमी आंच पर अच्छी तरह भूनकर नीचे उतार ले इस प्रकार भांग के पत्ते शुद्ध हो जाते है –
2- भांग को सूती कपडे में बांधकर जल में तब तक धोते रहे जब तक हरा रंग आता रहे जब हरा रंग आना बंद हो जाए तब कपड़े से जल निचोड़कर भांग को बाहर निकालकर छाया में सुखा कर रख ले इस प्रकार सूखी हुई भांग शुद्ध होती है

भांग के आयुर्वेदिक  प्रयोग-Ayurvedic use of cannabis

अब इसके परिचय के बाद हम आपको कुछ आयुर्वेदिक प्रयोग बता रहे है जो आपको बिना कोई नुक्सान पहुंचाए लाभ ही देंगे लेकिन यहाँ में एक बात कहना चाहूँगा की आप बिना किसी भी आयुर्वेदिक आचार्य या जो इनका जानकर हो उसके देख रेख में ही करें नहीं तो इसके परिणाम घटक भी हो सकते हैं निचे हम जो प्रयोग बता रहे हैं वो सिर्फ आपकी जानकारी को बढाने के लिए और भांग के बारे में जो हमारे दिल में दुर्भावना है उसको कम करना और इससे औषधीय लाभ उठाना है
आयुवर्धक प्रयोग :- bhaangके पंचांग का चूर्ण-340 ग्राम, मिश्री-280 ग्राम, घी-70 ग्राम, शहद-140 ग्राम
bhaangऔर मिश्री के चूर्ण को आपस में मिला कर घी और शहद में मिलाकर रख दे और नित्य प्रति दिन अपने बल के अनुसार इसकी मात्रा को दूध के साथ 120 दिन तक सेवन करे इसके प्रयोग से व्यक्ति दीर्घायु प्राप्त करता है वृधावस्था के लिए विशेष लाभकारी  योग है
बाजीकरण(स्तम्भन) शक्ति प्रयोग ;- शुद्ध भांग -640 ग्राम, शक्कर-320 ग्राम, गाय का घी-250ग्राम, शहद-120ग्राम
शुद्ध  की गई bhaangको कूट-पीस कर चूर्ण बनाए और उसमे बाकी सभी चीजो को मिला दे अब ये माजून तैयार है आप इसमें से 10 ग्राम की मात्रा सम्भोग से आधे घंटे पहले दूध से ले ये आपकी स्तम्भन शक्ति को बढाता है
कमजोरी मिटाने का योग :- शुद्ध भांग -30 ग्राम, असगंध -30 ग्राम, बिदारीकंद-30 ग्राम, ईसबगोल की भूसी -30 ग्राम, मिश्री – 30 ग्राम
उपरोक्त सभी सामग्री को महीन कूट-पीस ले गर्मी के सीजन में इस चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में लेकर आंवले के मुरब्बे के साथ अथवा घी-शक्कर व काली मिर्च के चूर्ण के साथ लेकर गर्म दूध से सेवन करे -सर्दी में इसे शहद व मक्खन के साथ लेकर दूध पी ले
इस प्रयोग को करने के दिनों में दूध-भात या हलवा का सेवन करना चाहिए इस प्रयोग को करने से दुर्बल स्त्री-पुरुष भी हष्ट-पुष्ट हो जाते है
मानसिक रोग के लिए :- bhaang और काली मिर्च एक-एक ग्राम,जटामासी और सूखी ब्राह्मी दो-दो ग्राम तथा सर्पगंधा एक ग्राम -इन सबको एक साथ पीसकर मिश्री मिले दूध में मिलाकर सेवन करने से ज्ञान सम्बन्धी मानसिक रोग दूर होते है तथा अच्छी नींद आती है
  • हिस्टीरिया के दौरे पड़ते हों तो bhaang में थोडा हींग मिलाकर मटर के बराबर गोली सवेरे शाम लें ।
  • सिर दर्द ठीक करने के लिए भांग के पत्तों की लुगदी को सूंघें । इसके पत्तों के रस की दो -दो बूँद नाक में डालें ।इससे भी सिर दर्द ठीक हो जाता है ।
  • अगर colitis हो या amoebisis हो  तो कच्ची बेल का चूर्ण +सौंफ +भांग का चूर्ण बराबर मात्रा में मिला लें . एक एक चम्मच सवेरे शाम लें ।
  • नींद न आती हो या दौरे पड़ते हों तो , ब्राह्मी , शंखपुष्पी ,सौंफ और भांग बराबर मात्रा में लेकर , एक एक चम्मच सवेरे शाम लें .
  • Migraine होने पर ये चूर्ण भी लें तथा भांग पीसकर माथे पर लेप करें ।  इसका पावडर रात को सूंघने मात्र से ही अच्छी नींद आती है ।
  • नींद न आती हो तो 5 ग्राम भांग के पावडर में 1-2 ग्राम सर्पगन्धा का पावडर मिलाकर रात को सोते समय लें ।
  • सिरदर्द में इसका दो बूँद रस नाक में डालें या पावडर सूंघें .
  • हिस्टीरिया में भी इसका पावडर लाभ करता है .
  • शक्ति प्राप्त करने   के लिए इसके बीज का पावडर एक -एक चम्मच सवेरे लें .
  • Sinusitis हो तो इसके पत्तों की तीन तीन बूँद नाक में टपका लें .
  • कान में दर्द हो तो दो बूँद कान में भी डाल सकते हैं
  • .कमजोरी हो तो इसके बीज पीसकर पानी के साथ या दूध के साथ लें .
  • जोड़ों का दर्द हो तो इसके बीजों को सरसों के तेल में पकाकर उस तेल से मालिश करें
  • .इसके अतिरिक्त भांग  के बीजों का पावडर एक चम्मच पानी के साथ लें .
  • अगर कोई कीड़ा काट गया है , या फिर घाव हो गया है ; तो इसके पत्तों के काढ़े में सेंधा नमक मिलाकर उस जगह को अच्छे धोएं और उस पर डालते रहें
  • यह वायुमंडल को भी शुद्ध करती है .
  • विषैली जड़ी बूटियों को भी खेत में पैदा नहीं होने देती .
  • इसे खेत में लगाने से गाजर घास जैसी खरपतवार भी स्वयं समाप्त हो जाती है .
  • यह  शरीर के भी विषैले तत्व खत्म करती है .
  • पहाडी क्षेत्रों में तो इसके बीजों को शक्ति प्राप्त करने के लिए नाश्ते में भी लिया जाता है
तो अब आप समझ ही गए होंगे की भांग  नशे की वस्तु नहीं बल्कि दवाई है
bhaang के बारे में दी गई जानकारी सिर्फ औषिधि उपयोग के लिए है जो लोग नशे के लिए इसका इस्तेमाल करते है उनके लिए कहना चाहूँगा इसके मादक गुण आपके जीवन के लिए अहितकर है नशा कैसा भी हो खराब होता है हम किसी भी प्रकार के नशे का समर्थन नहीं करते है सिर्फ उपरोक्त प्रयोग आपके काम के प्रयोग हेतु लिखे है
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