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पालक के औषधीय एवं आयुर्वेदिक गुण

पालक (Spinach)

पालक में जो गुण पाए जाते हैं, वे सामान्यतः अन्य शाक-भाजी में नहीं होते। यही कारण है कि Paalak स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी है, सर्वसुलभ एवं सस्ता है।

यह भारत के प्रायः सभी प्रांतों में बहुलता से सहज प्राप्य है। इसका पौधा लगभग एक से डेढ़ फुट ऊँचा होता है। इसके पत्ते चिकने, मांसल व मोटे होते हैं। यह साधारणतः शीत ऋतु में अधिक पैदा होता है, कहीं-कहीं अन्य ऋतुओं में भी इसकी खेती होती है।

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Paalak के गुण और लाभ

    1. इसमें पाए जाने वाले तत्वों में मुख्य रूप से कैल्शियम, सोडियम, क्लोरीन, फास्फोरस, लोहा, खनिज लवण, प्रोटीन, श्वेतसार, विटामिन ‘ए’ एवं ‘सी’आदि उल्लेखनीय हैं। इन तत्वों में भी लोहा विशेष रूप से पाया जाता है।
    2. कच्चा पालक गुणकारी होता है। पूरे पाचन-तंत्र की प्रणाली को ठीक करता है। खांसी या फेफड़ों में सूजन हो तो पालक के रस के कुल्ले करने से लाभ होता है।
    3. Paalak का रस पीने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
    4. ताजे Paalak का रस रोज पीने से आपकी मैमोरी बढ़ सकती है। इसमें आयोडीन होने की वजह से यह दिमागी थकान से भी छुटकारा दिलाता है।
    5. डांग ( गुजरात )के आदिवासियों के अनुसार ककड़ी, पालक और गाजर की समान मात्रा का जूस तैयार कर पीने से बाल घने और लंबे होते हैं।
    6. Paalak के एक गिलास जूस में स्वादानुसार सेंधा नमक मिलाकर सेवन करने से दमा और श्वास रोगों में खूब लाभ मिलता है।
    7. Paalak के पत्तों का रस और नारियल पानी की समान मात्रा मिलाकर सुबह शाम लिया जाए तो पथरी घुलकर बाहर निकल आती है।
  1. पीलिया के दौरान रोगी को पालक का रस कच्चे पपीते में मिलाकर दिया जाए तो अच्छा होता है, डांग – गुजरात के आदिवासी पीलिया होने पर रोगी को छिलके वाली मूंग की दाल में पालक डालकर तैयार की गई सब्जी खिलाते है।
    लो ब्लडप्रेशर के रोगियों को रोजाना पालक की सब्जी का सेवन करना चाहिए। माना जाता है कि यह रक्त प्रवाह को नियंत्रित करने में मदद करता है।
  2. थायरॉइड में एक प्याला पालक के रस के साथ एक चम्मच शहद और चौथाई चम्मच जीरे का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है।
  3. पातालकोट के आदिवासी पालक के जूस से कुल्ला करने की सलाह देते है, इनके अनुसार ऐसा करने से दांतों की समस्याओं, मुंहकी बदबू जैसे विकार दूर हो जाते है।जिन्हें एनिमिया या रक्त अल्पता की शिकायत हो उन्हें प्रतिदिन पालक का रस (लगभग एक गिलास) दिन में 3 तीन बार अवश्य लेना चाहिए।
  4. दिल से संबंधित बीमारियों से ग्रस्त रोगियों को प्रतिदिन एक कप पालक के जूस के साथ 2 चम्मच शहद मिलाकर लेना चाहिए, ये बड़ा गुणकारी होता है। लौह तत्व मानव शरीर के लिए उपयोगी, महत्वपूर्ण, अनिवार्य होता है। लोहे के कारण ही शरीर के रक्त में स्थित रक्ताणुओं में रोग निरोधक क्षमता तथा रक्त में रक्तिमा (लालपन) आती है। लोहे की कमी के कारण ही रक्त में रक्ताणुओं की कमी होकर प्रायः पाण्डु रोग उत्पन्न हो जाता है।
  5. लौह तत्व की कमी से जो रक्ताल्पता अथवा रक्त में स्थित रक्तकणों की न्यूनता होती है, उसका तात्कालिक प्रभाव मुख पर विशेषतः ओष्ठ, नासिका, कपोल, कर्ण एवं नेत्र पर पड़ता है, जिससे मुख की रक्तिमा एवं कांति विलुप्त हो जाती है। कालान्तर में संपूर्ण शरीर भी इस विकृति से प्रभावित हुए बिना नहीं रहता।
  6. लोहे की कमी से शक्ति ह्रास, शरीर निस्तेज होना, उत्साहहीनता, स्फूर्ति का अभाव, आलस्य, दुर्बलता, जठराग्नि की मंदता, अरुचि, यकृत आदि परेशानियाँ होती हैं।
  7. पालक की शाक वायुकारक, शीतल, कफ बढ़ाने वाली, मल का भेदन करने वाली, गुरु (भारी) विष्टम्भी (मलावरोध करने वाली) मद, श्वास,पित्त, रक्त विकार एवं ज्वर को दूर करने वाली होती है।
  8. आयुर्वेद के अनुसार पालक की भाजी सामान्यतः रुचिकर और शीघ्र पचने वाली होती है। इसके बीज मृदु, विरेचक एवं शीतल होते हैं। ये कठिनाई से आने वाली श्वास, यकृत की सूजन और पाण्डु रोग की निवृत्ति हेतु उपयोग में लाए जाते हैं।
  9. गर्मी का नजला, सीने और फेफड़े की जलन में भी यह लाभप्रद है। यह पित्त की तेजी को शांत करती है, गर्मी की वजह से होने वाले पीलिया और खाँसी में यह बहुत लाभदायक है।
  10. पालक का रस लाभ प्रद है| कच्चे पालक का रस आधा गिलास नित्य पीते रहने से कब्ज- नाश होता है|
  11. रक्त की कमी संबंधी विकारों मे पालक का रस १०० मिली  दिन में तीन बार पीने से चेहरे पर लालिमा ,शक्ति स्फूर्ति का संचार  होता है\ रक्त संचार  प्रक्रिया में तेजी आती है और  चेहरे के रंग में निखार आता है
  12. रूखी त्वचा के उपचार में : अगर आप अपनी रूखी त्वचा से परेशान है तो पालक खाएं क्योकि इसमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है , जो आपकी त्वचा को नर्म और मुलायम बनाये रखने में सहायता करती है |
  13. फेफड़ो के लिए : पालक फेफड़ों की सड़न को दूर करता है , आाँतों के रोग, दस्त आदि में भी लाभदायक है |

रासायनिक विश्लेषण

पालक की शाक में एक तरह का क्षार पाया जाता है, जो शोरे के समान होता है, इसके अतिरिक्त इसमें मांसल पदार्थ 3.5 प्रतिशत, चर्बी व मांस तत्वरहित पदार्थ 5.5 प्रतिशत पाए जाते हैं।

पालक इसका वानस्पतिक नाम स्पीनेसिया ओलेरेसिया है। 100 ग्राम पालक में 26 किलो कैलोरी उर्जा ,प्रोटीन 2 .0 % ,कार्बोहाइड्रेट 2 .9 % ,नमी 92 %वसा 0 .7 %, रेशा 0 .6 % ,खनिज लवन 0 .7 %और रेशा 0 .6 %होता हैं .पालक में खनिज लवन जैसे कैल्सियम ,लौह, तथा विटामिन ए ,बी ,सी आदि प्रचुर मात्रा में पाया जाता हैं. इसी गुण के कारण इसे लाइफ प्रोटेक्टिव फ़ूड कहा जाता हैं।

स्त्रियों के लिए लाभकारी
स्त्रियों के लिए पालक का शाक अत्यंत उपयोगी है। महिलाएँ यदि अपने मुख का नैसर्गिक सौंदर्य एवं रक्तिमा (लालिमा) बढ़ाना चाहती हैं, तो उन्हें नियमित रूप से पालक के रस का सेवन करना चाहिए।

प्रयोग से देखा गया है कि पालक के निरंतर सेवन से रंग में निखार आता है। इसे भाजी (सब्जी) बनाकर खाने की अपेक्षा यदि कच्चा ही खाया जाए, तो अधिक लाभप्रद एवं गुणकारी है। पालक से रक्त शुद्धि एवं शक्ति का संचार होता है।

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