Search

पसीने की बदबू से बचने के उपाय

पसीने के साथ बदबू क्यों आती है ?

पसीने आना शरीर के लिए कूलिंग सिस्टम की तरह होता है। उमस से पैदा शुष्कता के कारण, शरीर की नमी बनाए रखने के लिए पसीना आता है मगर इस पसीने में मौजूद जीवाणु के कारण बदबू पैदा होती है। पसीने में खुद में कोई बदबू नहीं होती, लेकिन त्वचा पर मौजूद जीवाणु पसीने को ऎरोमैटिक फैटी एसिड में बदलते हैं जिससे विशेष प्रकार की दुर्गंध पैदा होती है। पसीना शरीर और स्वास्थ्य के लिए अच्छा है मगर इससे पैदा बदबू की समस्या आपकी बगल में खड़े व्यक्ति के लिए परेशानी का कारण बन जाता है।पसीना सूखने पर त्वचा पर यूरिया व नमक जैसे तत्व रह जाते हैं,जो रोगाणुओं को बुलावा देते हैं और दुर्गंध का कारण बनते हैं। पसीना किसी को कम आता है,किसी को ज्यादा। हर किसी की बॉडी केमिस्ट्री अलग होती है, इसलिए उनके शऱीर से पैदा पसीने की गंध भी अलग-अलग होती है। कई बार ऐसा भी होता है कि जिसे ज्यादा पसीना आता हो,उसका पसीना बदबूदार न हो और जिसे कम पसीना आता हो उसके पसीने की बदबू से उबकाई आती हो।
पसीने के साथ ही शरीर की बदबू भी जुड़ी होती है जो आपकी स्वच्छता पर भी प्रश्न चिन्ह लगा देती है। इससे जीवन में असहजता आ जाती है। जब आप गर्म या नमी वाले मौसम में निकलते हैं या जब कसरत या कोई और भारी काम करते हैं तो आपकी त्वचा के स्वेट ग्लांड्स सीमा से अधिक पानी स्नवित करने लगते हैं, जिसे आमतौर पर पसीना कहा जाता है। यह हमारे शरीर से विषाक्त पदार्थ निकलने का भी तरीका होता है। इसलिए यह हमारे शारीरिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

पसीने में बदबू के कारण :- 

  • पसीने में बदबू के कई कारण हैं, जैसे नियमित रूप से न नहाना, ठीक से न नहाना, खान-पान में तीखे और खट्टे तत्वों की प्रचुरता, ज्यादा तनाव , विटामिन और खनिज तत्वों का कम होना, थायराइड में असंतुलन और सिंथेटिक कपड़े ज्यादा पहनना आदि।
  • थायरॉइड, कार्सिनोइड सिन्ड्रोम आदि में पसीना अधिक आता है एवं दुर्गंध बढ़ती है।
  • डायबिटीज मरीज में-नेलपॉलिश रिमूवर जैसी गंध आती है।
  • लीवर के रोगियों में- अमोनिया जैसी गंध आती है। अगर आपकी बॉडी से पसीने की बहुत स्मैल आती है, तो लोग आपके आसपास आने से हिचकिचाते हैं। शऱीर के कुछ हिस्सों जैसे बगल और जांघ के पास ज्यादा पसीना आता है। यहां मौजूद ग्रंथियों में प्रोटीन और तेल ज्यादा निकलता है, जिससे यहां बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं।
  • महिलाओं में रजोनिवृति के दौरान भी अत्याधिक पसीना आता है। मेनोपॉज स्वेटिंग सिर्फ बदलाव का सूचक है, जिसका कारण पिट्यूटेरी ग्लैंड और ओवेरियन हार्मोन्स का संबंध होता है। उन दिनों पसीना आना शरीर में ओवेरियन हार्मोन के घटने से होने वाले हार्मोनल असंतुलन का सूचक है। यह बदलाव हर व्यक्ति में अलग तरह के होते हैं, पर अधिकतर महिलाएं मासिक धर्म के दौरान पसीना आने का अनुभव करती हैं।
 पसीने में बदबू रोकने के कुछ घरेलू उपाय :-
    1. अगर आप चाहते हैं कि गर्मी में आपकी बॉडी से स्मैल न आए, तो आप अपनी खानपान की आदतें बदलें। फाइबर, अनाज, सोयाबीन और हरी पत्तेदार सब्जियों का इस्तेमाल ज्यादा करें। इसके अलावा प्रसंस्कृत फूड खाने से बचें। रोजाना बहुत सारा पानी पीएं। इससे आपकी बॉडी में विषैले पदार्थ पसीने व यूरिन के जरिए निकल जाएंगे और आपकी बॉडी से स्मैल भी कम आने लगेगी।
    2. हल्के रंगों वाले,सूती के और ढीले कपड़े पहनें क्योंकि सूती कपड़ा शरीर से पसीना सोखने में उपयोगी होता है। बाथ साल्ट पानी में डालकर स्नान करना फायदेमंद होता है। पानी में फिटकरी और मिंट मिलाकर नहाएं। डेटॉल, यूडीकोलोन, खस या गुलाबजल कोई भी एक चीज की कुछ बूँदें डालकर स्नान करना भी बेहद प्रभावकारी विकल्प है। बेकिंग सोडा को नीबू में मिला कर अंडरआर्म्स में लगाने से और सिरके का कम सांद्रता का रस लगाने भी बैक्टीरिया नष्ट होते हैं(इसे तुरंत शेव किए हुए स्थान पर न लगाएं)। पैर और बगल को रोजाना ठीक से साफ करें और वहां एंटीफंगल तथा सुगंधित पाउडर लगाएं। बगल, जांघ, गर्दन व स्तन के आसपास की ज्यादा पसीने वाली जगह को रोजाना अच्छी तरह धोएं। इन दिनों खुले सैंडल अधिक उपयोगी होंगे।
    1. नहाने के बाद किसी अच्छी कम्पनी का बॉडी स्प्रे प्रयोग करें। डीयोड्रेंट और एन्टीपर्सिपिरेंट [पसीना रोकने वाले] सोल्यूशंस काम में लिए जा सकते हैं। इनमें मौजूद एल्यूमिनियम जिंक पसीने को कम तो करते हैं मगर ध्यान रहे, इन्हें लगाने से पसीने की बदबू पर केवल कुछ समय के लिए नियंत्रण पाया जा सकता है।
    2. पसीने की स्मैल का स्थायी समाधान कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट ही है। ज्यादा पसीने वाली जगह पर लेजर से अनचाहे बाल हटवा सकते हैं। पसीने से ज्यादा परेशान लोगों के लिए बोटोक्स इंजेक्शन भी आता है।जिसका असर लगभग 8 महीने तक रहता है। एक अन्य विधि आइनटोफोरेसिस से शऱीर में लो – करंट डालने की है जिससे बॉडी में पसीना कम आता है।सुपरफेशियल लिपोक्यूशन भी इसका एक अन्य विकल्प है।
    3. नींबू का रस – नींबू, शरीर के दुर्गंध से लड़ने में काफी मददगार होता है. इसमें बदबू को दूर करने की कई प्रॉपटीज़ होती है और साथ ही ये स्किन के pH लेवल को भी एडजस्ट करता है. उन जगहों पर जहां नींबू के रस का इस्तेमाल होता है, वहां बैक्टेरिया जल्दी नहीं पनपते. तो अपने पसंदीदा परफ्यूम लगाने से पहले, प्रॉब्लम एरिया में एक बार नींबू का इस्तेमाल करने के बारे में ज़रूर सोचे. ये एक बेहतरीन और टेस्टेड सॉल्यूशन है जिसका रिज़ल्ट आपको एक या दो दिन में
      आपको महसूस होगा.
    4. विनेगर को आप आमतौर पर एप्पल साइडर या व्हाइट विनेगर की तरह इस्तेमाल करती हैं, लेकिन इससे आप पसीने की बदबू को भी दुर कर सकती हैं. ये नेचुरल तरीके से स्किन के pH लेवल को कम कर, स्किन में बैक्टेरिया की ब्रीडिंग क्षमता को कम करता और इसकी वजह से बॉडी में होने वाली बदबू भी कम हो जाती है. विनेगर को अपने आर्म्पिट पर लगाएं और विश्वास करें एक बार ये आपकी आदत बन गई तो डेयोडरेंट से आपका लगाव बिल्कुल कम हो जाएगा.
    5. पानी ज्यादा से ज्यादा पीएं : और सब से बड़ी बात गर्मियों में पानी ज्यादा से ज्यादा पीएं इससे पसीने की बदबू कम आएगी और आप खुद को तरोताजा महसूस करेंगे
  1.  शरीर पर बेलपत्र का लेप लगाने से पसीना नहीं आता है।
  2. तेजपत्तों को सुखा लें और इसे पीसकर इसका चूर्ण बना लें। अब पानी में इन पत्तों को उबाल लीजिए। और एक दिन ऐसे ही रहने दें। अब इस पानी से शरीर के उन हिस्सों की रोज सफाई करें जहां से पसीना अधिक निकलता है।
  3. नीम वाले साबुन से स्नान करे ।
  4. टाइट या तंग कपड़े पहनने से शरीर से अधिक पसीना आता है। इसलिए अधिक तंग कपड़े न पहनें।
  5. कड़ी धूप में जाने से बचें।
  6. ढीले और सूती कपड़े पहनें।
  7. सिंथेटिक कपड़ों को भी न पहनें।
  8. गर्मियों के मौसम में मिलने वाले फलों का सेवन करें।
  9. अधिक मसालेदार खाना-खाने से बचें। (read more :- पैरों में पसीने की बदबू से मुक्ति के औषधी उपचार)

डॉक्टरों के मुताबिक अधिक पसीना आना मेडिकल समस्या है, जिसे हाइपर हाइड्रोसिस कहा जाता है। जब पसीने की अधिकता हाथ, पैर और बगल में दिखने लगे तो इसे इमरी या फोकल हाइपर हाइड्रोसिस कहते हैं। यह अनुवांशिक होती है। बहुत अधिक पसीना आना हाइपर हाइड्रोसिस की वह स्थिति है जिसमें थायरॉयड ग्लैंड बहुत अधिक थायरॉयड हार्मोन बनाने लगते हैं। ये बीमारी के शुरुआती लक्षण हैं। इस स्थिति में संभव है कि पसीना किसी स्थान विशेष पर या फिर सारे शरीर में आये। यह तभी संभव है जब व्यक्ति किसी भावनात्मक, तनाव और आघात पहुंचाने वाले हालात से गुजर रहा हो।

Article Source :- http://upchar.blogspot.in/

loading...
Loading...
loading...

Related posts