Search

निर्गुन्डी (Vitex negundo) स्लीप डिस्क की ये एकलौती दवा

निर्गुन्डी  (Vitex negundo)

निर्गुन्डी को हिन्दी में सम्हालू और मेउडी भी कहा जाता है . इसके पेड़ १० फीट तक ऊंचे पाए जाते हैं. इसे संस्कृत में इन्द्राणी, नीलपुष्पा, श्वेत सुरसा,सुबाहा कहते हैं. बंगाली में निशिन्दा, सेमालू, मराठी में- कटारी, लिगुर, शिवारी पंजाबी में- बनकाहू, मरवा, बिन्ना, मावा, मोरों, खारा, सनक फारसी में- बजानगश्त, सिस्बन, गुजराती में-नगोड़, नागोरम, निर्गारा,तेलगू में- नल्लाहा बिली,मिन्दुवरम तमिल में-निकुंडी, नोची कहा जाता है. निर्गुन्डी में उड़नशील तेल,विटामिन-सी, केरोटीन, फलेवोन, टैनिक एसिड, निर्गुन्दीन, हाइड्रोकोटिलोन, हाइड्रोक्सीबेन्जोईक एसिड, मैलिक एसिड और राल पाए जाते हैं. यह हिमालय की तलहटी में पाया जाता है . इसके पत्ते एक टहनी पर एक विशेष तरीके से पांच की संख्या में होते हैं . इसलिए इसे अंग्रेजी में five leaved chastle भी कहा जाता है . यह बहुत ही अमृतदाई पौधा है . निर्गुन्डी एक प्रतिजीव (एंटीबायोटिक) जड़ी है. यह समस्त विकारों और दर्द, कई प्रकार की चोट, साधारण बुखार और मलेरिया के उपचार में काम आती है. निर्गुन्डी को लोग अपने घर पर भी लगा सकते है

जो शरीर क़ी रोगों से रक्षा करे वह निर्गुन्डी होती है” इसे वात से सम्बंधित बीमारियों में रामबाण औषधि माना गया है छह  से बारह फुट उंचा इसका पौधा,झाड़ीनुमा सूक्ष्म रोमों से ढका रहता है पत्तियों क़ी एक ख़ास पहचान किनारों से क़ी जा सकती है इसके फल छोटे,गोल एवं सफ़ेद होते हैं यह कफवातशामक औषधि के रूप में जानी जाती  है ,जिसे श्रेष्ठ  वेदनास्थापन अर्थात दर्द को कम करने वाला माना गया है यह  घाव को विसंक्रमित करनेवाला ,भरनेवाले गुणों से युक्त होता है

loading...

निर्गुन्डी  (Vitex negundo) के औषधीय गुण

    1. निर्गुन्डी अनेक बीमारियों में काम आती है. सबसे बड़ी बात क़ि स्लीप डिस्क की ये एकलौती दवा है. सर्वाइकल, मस्कुलर पेन में इसके पत्तो का काढा रामबाण की तरह काम करता है.
    2. अस्थमा मे इसकी जड़ और अश्वगंधा की  जड़ का काढा ३ माह तक पीना चाहिए.
    3. दर्द में लाभकारी :- 25 ग्राम ग्वारपाठे का उपरी सूखी छाल, 10 ग्राम सूखी अर्जुन छाल, 10 ग्राम पीपर मूल, 10 ग्राम निर्गुन्डी के बीज, 10 ग्राम अश्वगंधा, 20 ग्राम त्रिफला, 20 ग्राम मूसली, 5 ग्राम मंडूर भस्म और 5 ग्राम अभ्रक भस्म को पीसकर इसे किसी सूती कपडे से छान कर रख ले. इसे पीड़ित व्यक्ति को दिन में दो बार 5-5 ग्राम की मात्रा में गाय के दूध के साथ देने से लाभ मिलता है. इस उपचार के दौरान इमली, बैंगन और शराब का सेवन न करें और यह उपचार गर्भवती स्त्री को नहीं देना चाहिए.
    4. गठियावात के पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि निर्गुन्डी की पत्तियों का 10-40 मी.ली रस देने अथवा सेंकी हुई मेथी का चूर्ण कपडे से छानने के बाद 3-3 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम पानी से लेने से वात रोग में आराम मिलता है. यह मेथी वाला नुस्खा घुटनों के वात में भी उपयोगी है. सौंठ के 20-50 मी.ली. काढ़े में 5-10 मी.ली. अरंडी का तेल डालकर सोने से पहले लेना भी लाभदायक होता है.
    5. गले के अन्दर सूजन हो गयी हो तो निर्गुन्डी के पत्ते, छोटी पीपर और चन्दन का काढा पीजिये, ११ दिनों में सूजन ख़त्म हो जायेगी.
    6. सूतिका ज्वर में निर्गुन्डी का काढा  देने से गर्भाशय का संकोचन होता है और भीतर की सारी गंदगी बाहर निकल जाती है.
    7. गर्भाशय के अंदरूनी भाग की सूजन ख़त्म हो जाती है और वह पूर्व स्थिति में आ जाता है ,जिससे प्रसूता को बुखार से मुक्ति मिल जाती है और दर्द ख़त्म हो जाता है. बच्चा जानने के बाद निर्गुंडी के पत्तो का काढा हर महिला को दिया जाना चाहिए और एबार्शन के बाद भी यह कादा जरूर पिलाना चाहिए क्योंकि गर्भ में अगर कोई भी मांस का टुकड़ा छूट जाएगा तो वह बाद में यूट्रस कैंसर का कारण बनेगा.
    8. पेट में गैस बन रही है तो निर्गुंडी के पत्तो के साथ काली मिर्च और अजवाइन का चूर्ण खाना चाहिए ताकि गैस बननी बंद हो और पेट का दर्द ख़त्म हो और पाचन क्रिया सही हो जाए.
    1. भंगरैया तुलसी और निर्गुंडी के पत्तो का रस अजवाईन का चूर्ण मिलाकर पीने से गठिया की सूजन और  दर्द में बहुत लाभ होता है.
    2. कामशक्ति बढाने के लिए निर्गुन्डी और सोंठ का चूर्ण दूध के साथ लेना चाहिए.
    3. निर्गुन्डी सर्दी जनित रोगों में बहुत फायदा करती है .
    4. निर्गुन्डी के काढ़े से रोगी के शरीर को धोने पर सभी तरह की बदबू, दुर्गन्ध  ख़त्म हो जाती है.
    5. भैषज्य रत्नावली के अनुसार निर्गुन्डी रसायन शरीर का कायाकल्प करने में सक्षम है यह लम्बे समय तक मनुष्य को जवान बनाए रखता है , इसे बनने में पूरे एक माह लगते हैं,इसे किसी अनुभवी वैद्य से ही बनवाना चाहिए.
    6. निर्गुन्डी के तेल से बालो का सफ़ेद होना ,बालो का गिरना , नाडी के घाव और खुजली जैसी बीमारियों में बहुत लाभ पहुंचता है किन्तु इसे भी किसी जानकार वैद्य से ही बनवाना उचित रहता है.
    7. अगर डिलीवरी पेन शुरू हो गया है और आप सरलता पूर्वक प्रसव कराना चाहते हैं तो निर्गुन्डी के पत्तो की चटनी को महिला की नाभि के आस-पास लेप कर दीजिये.
    8. मुंह के छाले ख़त्म करने के लिए निर्गुन्डी के पत्तो के रस में शहद मिलाकर उस मिश्रण को ३-४ मिनट मुंह में रखें फिर कुल्ला कर दीजिये.दो ही दिन में छाले ख़त्म हो जायेंगे.
    9. निर्गुन्डी और शिलाजीत का मिश्रण शरीर के लिए अमृत का काम करता है.
    10. निर्गुन्डी और पुनर्नवा का काढा शरीर के सारे दर्द ख़त्म करता है.
    11. कमर को सही आकार में रखने के लिए निर्गुन्डीके पत्तो के काढ़े में २ ग्राम पीपली का चूर्ण मिला कर एक महीने पीजिये.
    12. स्मरण शक्ति बढाने के लिए निर्गुन्डी की जड़ का ३ ग्राम चूर्ण इतने ही देशी घी के साथ मिलाकर रोज चाटिये .
    13. साइटिका में निर्गुन्डी के पत्तो क़ि चटनी को गरम करके सुबह शाम बांधना चाहिए या फिर इसका काढा पीना चाहिए.
    14. स्वास रोग में पत्तो का रस शहद मिलाकर दिन में चार बार एक  -एक चम्मच पीना चाहिए.
  1. निर्गुन्डी के बीजों का चूर्ण दर्द निवारक औषधि है लेकिन हर दर्द में इसकी मात्रा अलग-अलग होती है.
  2. Article Source :- http://www.thehealing.in/
Loading...
loading...

Related posts