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तेजपात की पत्तियों का उपयोग

तेजपात के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण

तेजपात :- लगभग हर घर की रसोई में खाना बनाने के समय तेजपात की पत्तियों का उपयोग होता है। तेजपात के पौघे शुरू से ही मुख्यत: भारत में उगाए जाते रहे हैं। लेकिन समय के साथ भारत के अलावा अन्य देशों में भी इसका विस्तार हुआ। इनकी सबसे बडी विशेषता यह है कि हरी पत्तियों के अतिरिक्त तेजपात की सूखी पत्तियों का भी बखूबी इस्तेमाल किया जा सकता है।

तेजपात पौधे का परिचय: आमतौर पर यह घास-फूस श्रेणी का पौधा  होता है। लेकिन समय के साथ यह छोटे पेड का रूप ले लेता है। तेजपात के पौघों के लिए बसंत ऋतु सबसे उपयुक्त मौसम है। अनुकूल परिस्थितियों में यह 25 फीट तक लंबा और 6 फीट तक चौडे पेड का रूप धारण कर सकता है। इसकी पत्तियां अंडाकार और नुकीली होती हैं। गहरे हरे रंग की इन पत्तियों की लंबाई 3 इंच तक होती है। और इस पर पीले रंग के फूल लगते हैं। इसमें रासायनिक खोज करने पर तीन तरह के तेल पाए गए हैं। उतपत्त तेल ,यूजीनाल और आइसो यूजीनाल। इसे हिन्दी में तेजपात और संस्कृत में तमालपत्र कहते हैं। इसे वैज्ञानिक भाषा में Cinnamomum tamala कहते हैं।

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मध्य युग में तेज पत्तियों को गर्भपात कराने वाला और कई जादुई गुणों वाला माना जाता था. उनका इस्तेमाल कभी कीट-पतंगों को दूर रखने के लिए किया जाता था, जिसका कारण था पत्ते में लोरिक एसिड की मौजूदगी जो इसे कीटनाशी गुणों से युक्त करती थी. तेज पत्तियों में कई ऐसे गुण हैं जो उन्हें उच्च रक्त शर्करा, माइग्रेन सिर दर्द, बैक्टीरियल और कवक संक्रमण और गैस्ट्रिक अल्सर के इलाज में उपयोगी बनाते हैं. तेज पत्तियों और जामुन को उनके कसैले, वातहर, स्वेदजनक, पाचन, मूत्रवर्धक, उबकाई और भूख बढ़ानेवाले गुणों के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. तेज पत्ते के तेल, (ओलियम लौरी) का प्रयोग छिलने और मोच में तिला के लिए किया जाता है. सिर दर्द के लिए एक हर्बल उपचार के रूप में तेज पत्ते का इस्तेमाल किया गया है. इसमें एक यौगिक होता है जिसे पर्थेनोलाइड कहते हैं, वह माइग्रेन के उपचार में उपयोगी साबित हुआ है. तेज पत्ता शारीरिक इन्सुलिन प्रक्रिया में अधिक कुशलता से सहायक होता है जिससे रक्त में शर्करा स्तर में कमी होती है. इसका इस्तेमाल पेट के अल्सर के प्रभाव को कम करने के लिए भी किया गया है. तेज पत्ते में यूजेनोल होता है, जो जलन-विरोधी और ऑक्सीडेंट-विरोधी गुण प्रदान करता है. तेज पत्ता कवक-विरोधी और जीवाणु-विरोधी भी होता है और इसका इस्तेमाल गठिया, राजोरोध और पेट दर्द के इलाज के लिए किया गया है.

* ये करी और चावल की तैयारी में इस्तेमाल किया जाता है ।

* तेजपात के ५-६ पत्तों को एक गिलास पानी में इतने उबालें की पानी आधा रह जाए . इस पानी से प्रतिदिन सिर की मालिश करने के बाद नहाएं . इससे सिर में जुएं नहीं होती हैं .महिलाओं के लिए एक उत्तम जूं नाशक है .

* चाय-पत्ती की जगह तेजपात के चूर्ण की चाय पीने से सर्दी-जुकाम, छींकें आना ,नाक बहना,जलन ,सिरदर्द आदि में शीघ्र लाभ मिलता है .

* तेजपात के पत्तों का बारीक चूर्ण सुबह-शाम दांतों पर मलने से दांतों पर चमक आ जाती है .

* तेजपात के पत्रों को नियमित रूप से चूंसते रहने से हकलाहट में लाभ होता है .

* एक चम्मच तेजपात चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर सेवन करने से खांसी में आराम मिलता है .

* तेजपात के पत्तों का क्वाथ (काढ़ा) बनाकर पीने से पेट का फूलना व अतिसार आदि में लाभ होता है .

* इसके २-४ ग्राम चूर्ण का सेवन करने से उबकाई मिटती है .

* दमा में ….तेजपात ,पीपल,अदरक, मिश्री सभी को बराबर मात्र में लेकर चटनी पीस लीजिए।१-१ चम्मच चटनी रोज खाएं ४० दिनों तक। फायदा सुनिश्चित है।

* दांतों के लिए …सप्ताह में तीन दिन तेजपात के बारीक चूर्ण से मंजन कीजिए। दांत मजबूत होंगे, दांतों में कीड़ा नहीं लगेगा ,ठंडा गरम पानी नहीं लगेगा , दांत मोतियों की तरह चमकेंगे।

* कपड़ों के बीच में तेजपात के पत्ते रख दीजिए ,ऊनी,सूती,रेशमी कपडे कीड़ों से बचे रहेंगे। अनाजों के बीच में ४-५ पत्ते डाल दीजिए तो अनाज में भी कीड़े नहीं लगेंगे। उनमें एक दिव्य सुगंध जरूर बस जायेगी।

* अनेक लोगों के मोजों से दुर्गन्ध आती है ,वे लोग तेजपात का चूर्ण पैर के तलुवों में मल कर मोज़े पहना करें। पर इसका मतलब ये नहीं कि आप महीनों तक मोज़े धुलें ही न। वैसे भी अंदरूनी कपडे और मोज़े तो रोज धुलने चाहिए। मुंह से दुर्गन्ध आती है तो तेजपात का टुकड़ा चबाया करें। बगल के पसीने से दुर्गन्ध आती है तो तेजपात का चूर्ण पावडर की तरह बगलों में लगाया करें।

* अगर अचानक आँखों कि रोशनी कुछ कम होने लगी है तो तेजपत्ता के बारीक चूर्ण को सुरमे की तरह आँखों में लगाएं। इससे आँखों की सफाई हो जायेगी और नसों में ताजगी आ जायेगी जिससे आपकी दृष्टि तेज हो जायेगी। इस प्रयोग को लगातार करने से चश्मा भी उतर सकता है।

* पेट में गैस की वजह से तकलीफ महसूस हो रही हो तो ३-४ चुटकी या ४ मिली ग्राम तेजपात का चूर्ण पानी से निगल लीजिए। एसीडिटी की तकलीफ में इसका लगातार सेवन बहुत फायदा करता है और पेट को आराम मिलता है।

* तेजपत्ता का अपने भोजन में लगातार प्रयोग कीजिए ,आपका ह्रदय मजबूत बना रहेगा ,कभी हृदय रोग नहीं होंगे।

* पागलपन के लिए …एक एक ग्राम तेजपात का चूर्ण सुबह शाम रोगी को पानी या शहद से खिलाएं।या तेजपात के चूर्ण का हलुआ बनाकर खिलाएं। सूजी के हलवे में एक चम्मच तेजपात का चूर्ण डाल दीजिए। बन गया हलवा।

* तेजपत्ता के टुकड़ों को जीभ के नीचे रखा रहने दें ,चूसते रहे। एक माह में हकलाना खत्म हो जाएगा।

* दिन में चार बार चाय में तेजपत्ता उबाल कर पीजिए ,जुकाम-जनित सभी कष्टों में आराम मिलेगा। या चाय में चायपत्ती की जगह तेजपत्ता डालिए। खूब उबालिए ,फिर दूध और चीनी डालिए।

*पेट की किसी भी बीमारी में तेजपत्ता का काढा बनाकर पीजिए। दस्त, आँतों के घाव, भूख न लगना सभी में आराम मिलेगा।

* आटे  के डिब्बे में तेजपता रखने से चींटिया नहीं लगेगी और उसमे नमी भी नहीं आएगी.

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