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तीज मनाने के पीछे का रहस्य जान कर चौंक जायेंगे आप

ये गहन चिंता का विषय है की हिन्दू संस्कार धीरे धीरे विलुप्त होते जा रहे हैं जो तीज त्यौहार हमारे देश में मनाये जाते थे आज हम लोग उनके बारे में कुछ नहीं जानते

आस्था, उमंग, सौंदर्य और प्रेम का यह उत्सव शिव-पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। चारों तरफ हरियाली होने के कारण इसे हरियाली तीज कहते हैं। रिमझिम फुहारों के बीच तन-मन जैसे नृत्य करने लगता है। महिलाएं झूला झूलती हैं, लोकगीत गाती हैं और खुशियां मनाती हैं।

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हिंदी कैलेंडर के पांचवे महीने को सावन का महीना कहा जाता है. सावन के तीसरे सोमवार को आस्था, उमंग और प्रेम का उत्सव यानी तीज के रूप में मनाया जाता है. नई शादीशुदा औरतें अपनी पहली तीज का उत्सव मायके में आकर मनाती हैं.

तीज के दिन शादीशुदा औरतें निर्जला व्रत रखकर अपने पति की लंबी आयु के लिए माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं. सुहागन महिलाएं इस दिन सोलह श्रृंगार कर नए वस्त्र धारण कर पार्वती-शिव की पूजा करती हैं.

इस दिन सुहागिन महिलाएं मेहंदी लगाती हैं. परिवार के बुजुर्गों से आशीर्वाद लेने की भी परंपरा है. माना जाता है कि कुंवारी कन्याएं इस व्रत को रखती हैं तो उनके व‌िवाह में आने वाली सारी बाधाएं दूर होती हैं.

कब से शुरू हुआ व्रत 

तीज का त्योहार शिव-पार्वती के अटूट प्रेम बंधन को दशार्ता है. इस दिन पार्वती सालों की तपस्या के बाद भगवान शिव से मिली थीं. मान्यता है कि उन्होंने शिव को पाने के लिए 107 जन्म लिए. कहा जाता है कि पार्वती के 108वें जन्म में शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया, तभी से इस व्रत का आरंभ हुआ.

 इसे सबसे पहले गिरिराज हिमालय की पुत्री पार्वती ने किया था जिसके फलस्वरूप भगवान शंकर उन्हें पति के रूप में प्राप्त हुए।

– कुंवारी लड़कियां भी मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए इस दिन व्रत रखकर माता माता पार्वती की पूजा करती हैं।

– हरियाली तीज के दिन भगवान शिव ने देवी पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया

पार्वती के कहने पर शिव जी ने आशीर्वाद दिया कि जो भी कुंवारी कन्या इस व्रत को रखेगी उसके विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होंगी।

हरियाली तीज पूजा विधि

निर्जला व्रत और भगवान शिव और माता पार्वती जी की विधि पूर्वक पूजा करने का विधान है। इस दिन व्रत के साथ-साथ शाम को व्रत की कथा सुनी जाती है। माता पार्वती जी का व्रत पूजन करने से धन, विवाह संतानादि भौतिक सुखों में वृद्धि होती है।

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