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तांबे के बर्तन का जल या उषा पान के स्वास्थ्य लाभ

तांबे के बर्तन में पानी पीने के लाभ

तांबे के बर्तन का जल या उषा पान का नाम हो सकता है आपने ना सुना हो लेकिन जिस घर में बड़े बजुर्ग रहते हैं उनको आपने तांबे के बर्तन में सुबह सुबह बिना कुरला किये उस बर्तन का जल पीते देखा होगा लेकिन आप को उसके पीछे क्या आयुर्वेदिक या साइंस है इस बारे में शयद आप नहीं जानते होंगे! आज भी कुछ घरों में पुराणी तांबे की टोकनी या माट मिल जायेंगे जो हमारे बजुर्ग लोगों के स्वास्थ्य के प्रति जागृत होने का उदाहरण है उस समय में लोग पानी पीने के लिए ताम्बे के बर्तनो का ही प्रयोग करते थे । आयुर्वेद में कहा गया है कि तांबे के बर्तन में रखा गया पानी हमारे शरीर के कई विकारो को दूर करता है। आयुर्वेद के अनुसार इस पानी के सेवन से हमारे शरीर के सभी जहरीले तत्व मल मूत्र के द्वारा शरीर से बाहर निकल जाते हैं। कुछ लोग तो पानी पीने के लिए विशेष रूप से तांबे से बने गिलास और जग का उपयोग करते हैं। लेकिन क्‍या इस धारणा के पीछे वास्‍तव में कोई वैज्ञानिक समर्थन है? या यह एक मिथक है बस

स्वस्थ शरीर के लिए हमारे ऋषि मुनि प्राचीन काल से ही जल को तांबे के बर्तन में संग्रहित करते थे । हमारे ऋषियों के अनुसार यदि हम रात को तांबे के बर्तन में पानी रख दें और सुबह इस पानी का सेवन करें तो इससे बहुत से लाभ मिलते हैं। रात को तांबे के बर्तन में रखा हुआ जल ताम्रजल के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, तांबे के बर्तन में संग्रहीत किया हुआ जल हमारे शरीर में तीन दोषों वात, कफ और पित्त को संतुलित करने में पूर्णतया सक्षम होता है तांबे के बर्तन में कम 8 घंटे तक रखा हुआ जल ही लाभदायक होता है, इस अवधि के दौरान तांबा धीरे धीरे जल में मिलकर उसे सकारात्‍मक गुण प्रदान करता है। ताम्बे के पात्र में रखे जल की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि यह कभी भी बासी या बेस्‍वाद नहीं होता, यह लम्बे समय तक पीने के योग्य बना रहता है ।

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मगर आज एक सोची समझी साज़िश के तहत हमारे जल को भी अति दूषित कर दिया गया हैं और इसको साफ़ करने के लिए जो विधिया हम इस्तेमाल करते हैं वो पानी को साफ़ तो करती हैं मगर साथ में पानी में बचे खुचे मिनरल्स भी निकाल देती हैं। इसलिए जब हम पहाड़ो पर कभी जाते हैं तो वहां के पानी में बहुत बढ़िया स्वाद आता हैं।

“काकचण्डीश्वर कल्पतन्त्र” नामक आयुर्वेदीय ग्रन्थ में रात के पहले प्रहर में पानी पीना विषतुल्य बताया गया हैं। मध्य रात्रि में पिया गया पानी “दूध” के सामान लाभप्रद बताया गया हैं। प्रात : काल (सूर्योदय से पहले) पिया गया जल माँ के दूध के समान लाभप्रद कहा गया हैं।

उषा पान

प्रात : काल रात्रि के अंतिम प्रहार में पिया जाने वाल जल दूध इत्यादि को आयुर्वेद एवं भारतीय धर्म शास्त्रो में उषा पान शब्द से संबोधित किया गया हैं। सुप्रसिद्ध आयुर्वेदीय ग्रन्थ ‘योग रत्नाकर’ सूर्य उदय होने के निकट समय में जो मनुष्य आठ प्रसर (प्रसृत) मात्रा में जल पीता हैं, वह रोग और बुढ़ापे से मुक्त होकर सौ वर्ष से भी अधिक जीवित रहता हैं।

प्रात : काल खाट से उठकर, पिए तुरतहि पानी।
उस घर वैद्द कबहुँ नहीं आये, बात घाघ ने जानी।।

उषा पान कब करना चाहिए

प्रात : काल बिस्तर से उठ कर बिना मुख प्रक्षालन (कुल्ला इत्यादि) किये हुए ही पानी पीना चाहिए। कुल्ला करने के बाद पिए जाने वाले पानी से सम्पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता। ध्यान रहे पानी मल मूत्र त्याग के भी पहले पीना हैं।

उषा पान के फायदे

सवेरे तांबे के बर्तन में रखा हुआ पानी पीने से अर्श (बवासीर), शोथ(सोजिश), ग्रहणी, ज्वर, उदर(पेट के) रोग, जरा(बुढ़ापा), कोष्ठगत रोग, मेद रोग (मोटापा), मूत्राघात, रक्त पित (शरीर के किसी भी मार्ग में होने वाला रक्त स्त्राव), त्वचा के रोग, कान नाक गले सिर एवं नेत्र रोग, कमर दर्द तथा अन्यान्य वायु, पित्त, रक्त और कफ, मासिक धर्म, कैंसर, आंखों की बीमारी, डायरियां, पेशाब संबन्‍धित बीमारी, किड़नी, टीबी, गठिया, सिरदर्द आदि से सम्बंधित अनेक व्याधियां धीरे धीरे समाप्त हो जाती हैं। तो आइए तांबे के बर्तन में पानी पीने के बेहतरीन स्वास्थ्य लाभ के बारे में जानें. 

    1. पानी के बैक्टीरिया को दूर करता है :- तांबे में ऐसा नैसर्गिक गुण है जिससे तांबे के बर्तन में रखे पानी से बैक्‍टीरिया को नष्‍ट किया जा सकता है। इसी कारण से तांबा डायरिया, दस्‍त , पेट की अन्य बिमारियों और पीलिया आदि को रोकने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वास्तव में तांबा पानी के शोधन के लिए सबसे सस्‍ता और उपयोगी साधन है। आयुर्वेद के अनुसार, ताम्बे में रखे जल के सेवन से हमारे शरीर के विषाक्त पदार्थ बहार निकाल जाते है ।
    2. पाचन क्रिया के लिए आदर्श :- वैज्ञानिको ने अपने शोध में यह पाया है की तांबे के बर्तन में 8 घंटे से ज्यादा रखे पानी के सेवन से हमारा पाचन तंत्र मजबूत होता है । वर्तमान समय में अनियमित और दूषित खानपान से बहुत से लोगो को एसीडिटी, बदहजमी, अपाच्य आदि की समस्या का सामना करना पड़ता है । लेकिन तांबे के बर्तन में रखे पानी के नियमित सेवन से इनसे छुटकारा मिल जाता है। शोधों से यह भी पता चला है कि तांबे में ऐसे तत्व विधमान होते हैं जो हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करके पेट की समस्त समस्याओं को दूर करते है ।
    3. वजन घटाने में सहायक :- तांबे के बर्तन में रखा पानी वजन कम करने में बहुत असरदार माना जाता है ।यदि तमाम प्रयासों , रेशेदार फल, सब्जियाँ खाने के बाद भी अगर आपका वजन कम नहीं हो रहा है तो नियम पूर्वक तांबे के बर्तन में संग्रहीत पानी को पियें। इस पानी के नित्य सेवन से हमारे शरीर की चर्बी धीरे धीरे कम होती जाती है।
    4. त्वचा स्वस्थ रखे:- आजकल लोग अपनी त्वचा को खुबसूरत और स्वस्थ बनाये रखने के लिए तरह-तरह के सौन्दर्य प्रसाधनो का उपयोग करते हैं लेकिन त्वचा की खूबसूरती के लिए केवल यही काफी नहीं है, हमारी त्वचा पर सबसे अधिक प्रभाव हमारे खानपान और हमारी दिनचर्या का पड़ता है। इसीलिए अगर आप अपनी त्वचा को स्वस्थ और सुन्दर बनाना चाहते हैं तो आप नियमपूर्वक तांबे के बर्तन में रातभर का रखा हुआ 4 गिलास पानी सुबह के समय पीने की आदत डालें। इस पानी के नियमित रूप से सेवन से आपकी त्वचा का ढीलापन दूर होता है और डेड स्किन भी निकल जाती है, और त्वचा लम्बे समय तक जवान नज़र आती है। आयुर्वेद के अनुसार नित्य प्रात: तांबे के बर्तन में पानी पीने से त्वचा में बहुत फर्क आ जाता है।

उषा पान के औषधीय गुण :- 

  1. झुर्रियों को दूर रखे:- बदती उम्र के कारण चेहरे पर झुर्रियों आ जाती है जिसको दूर करने के लिए लोग तरह तरह के जतन करते है लेकिन तांबे के बर्तन में संगृहीत किया हुआ पानी इसके लिए एक आदर्श प्राकृतिक उपचार माना गया है। ताम्बे में बहुत अधिक मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट होते है, और अपनी स्वाभाविक कोशिकाओं के निर्माण की क्षमता के कारण से तांबा फ्री रेडिकल्स को ख़त्म करता जाता है जो कि झुर्रियों के मुख्य कारण होते है। ताम्बे के पात्र में रखे पानी के नियमित सेवन से पुरानी कोशिकाओं की जगह नई कोशिकाएं आ जाती है जिससे व्यक्ति की उम्र का पता ही नहीं चलता है, उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है । ।
  2. दिल की समस्याओं को दूर करें :- वर्तमान समय में दिल से जुडी बीमारियां समाज में बहुत ही आम होती जा रही हैं। लेकिन तांबे के बर्तन में रखे पानी का सेवन करने से दिल की बीमारीयों का खतरा कम हो जाता है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी की एक रिपोर्ट के अनुसार ताम्बे में यह गुण होते है जिससे हमारा रक्तचाप और दिल की धड़कनों को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। तम्बा हमारे शरीर से बुरे कोलेस्ट्रॉल को भी कम करता है। इसलिए अगर कोई भी व्यक्ति दिल की बिमारियों से दूर रहना चाहता है तो उसे तांबे के बर्तन में रखा पानी ही पीना चाहिए ।
  3. गठिया में लाभकारी :- गठिया या जोड़ों में दर्द की समस्‍या वैसे तो एक उम्र के बाद अधिकांश लोगो को हो जाती है लेकिन वर्तमान समय में यह बहुत ही कम उम्र में भी लोगो को होने लगी है। लेकिन यदि आप नियमित रूप से तांबे के बर्तन में रखे पानी का सेवन करते है तो यह समस्या आपसे लम्बे समय तक दूर ही रहेगी । जी हाँ चूँकि तांबे में एंटी-इफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो ना केवल दर्द से राहत देते है वरन इससे गठिया में भी विशेष रूप से लाभ मिलता है। तांबे के बर्तन में रखे जल का सेवन करने की वजह से शरीर में यूरिक एसिड कम हो जाता है जिससे गठिया व जोड़ों में सूजन के कारण होने वाले दर्द में आराम मिलता है।
  4. थायराइड को नियंत्रित करे :- थायराइड की बीमारी थायरेक्सीन हार्मोन के असंतुलन के कारण होती है। तेजी से वजन घटना या बढ़ना, अधिक थकान महसूस होना आदि थायराइड के प्रमुख लक्षणों में हैं। कॉपर थायरॉयड ग्रंथि के बेहतर कार्य करने की जरूरत के लिए सबसे महत्‍वपूर्ण मिनरलों में से एक है। थायराइड विशेषज्ञों के अनुसार, कि तांबे के बर्तन में रखा पानी में ताम्बे के सपर्क के कारण यह गुण आ जाते है कि इस पानी को पीने से शरीर में थायरेक्सीन हार्मोन नियंत्रित होकर बेहतर कार्य करते हुए इस ग्रंथि की कार्यप्रणाली को भी नियंत्रित करता है। दुसरे शब्दों में कॉपर की वजह से यह पानी शरीर में थायरेक्सीन हार्मोन को बैलेंस कर देता है। इसीलिए तांबे के बर्तन में रखे पानी के सेवन से थायराइड नियंत्रित रहता है।
  5. मस्तिष्क के लिए लाभकारी :- तांबे के बर्तन में रखे जल का नियमित रूप से सेवन करने से हमारे मस्तिष्क को बहुत ही लाभ मिलता है । हमारा मस्तिष्क एक तंत्रिका कोशिका के दूसरे तंत्रिका कोशिका तक संदेश पहुंचाने से ही काम कर पाता है। ये तंत्रिका कोशिकाएं एक मायलिन नाम के आवरण से ढंकी होती हैं, जो उनके संदेशो को पहुंचाने में सहायक होता है। तांबा इसी मायलिन आवरण के तैयार होने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करता है , जिससे मस्तिष्क स्वस्थ रहता है और हम चीजों को लम्बे समय तक याद रख पाते है ।
  6. खून की कमी को दूर करें – आज ना केवल भारत वरन विश्व की बहुत बड़ी आबादी एनीमिया या खून की कमी एक से परेशान हैं। विशेषकर महिलाओं में यह समस्या बहुत ही ज्यादा पाई जाती है । कॉपर हमारे शरीर की अधिकांश प्रक्रियाओं में बेहद आवश्यक है। कापर हमारे शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्वों को भी अवशोषित करने का काम करता है। तांबे के इन्ही गुणों के कारण इसमें रखे पानी को पीने से एनीमिया अर्थात खून की कमी और खून के ने विकार दूर हो जाते हैं।
  7. कैंसर को दूर करें :- कैंसर के शिकार व्यक्ति को सदैव तांबे के बर्तन में रखा हुआ जल का ही सेवन करना चाहिए। इससे कैंसर में बहुत लाभ मिलता है। ताम्बे के बर्तन में रखे जल में एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं, जो शरीर को इस रोग से लड़ने की शक्ति देते हैं। अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार, कॉपर बहुत से तरीको से कैंसर के मरीज की मदद करता है। कैंसर में ताम्बा बहुत ही लाभकारी होती है और तांबे के बर्तन में रखा हुआ जल हमारी वात, पित्त और कफ की शिकायत को भी दूर करता है।
  8. घाव भरने में मददगार :- तांबा अपने एंटी-बैक्‍टीरियल, एंटीवायरल और एंटी इफ्लेमेटरी गुणों के लिए बहुत ही प्रसिद्द है। शायद इसलिए तांबा घावों को जल्‍दी भरने के लिए बहुत मददगार सिद्ध होता है । जी हाँ तांबे का बर्तन में रखे पानी का नियमित रूप से सेवन करने से सभी तरह के घाव जल्दी भर जाते है । प्रसव के बाद स्त्रियों को तो विशेष रूप से तांबे का बर्तन में रखा जल ही पीना चाहिए ।

तांबे का बर्तन खरीदते हुए यह विशेष रूप से ध्यान रखें कि वो बर्तन शुद्ध तांबे से बना हो। आप ताम्बे के बर्तनों में तांबे का जग, लोटा या ताम्बे का गिलास खरीद सकते हैं। एक बात का और ध्यान रखे कि तांबे के बर्तन में जब पानी डालकर रखें तो उसे ढंकना बिलकुल भी न भूलें। तांबे के बर्तन को धोने , साफ करने के लिए नींबू का इस्तेमाल अच्छा रहता है। एक बात और में कहना चाहूंगा की यदि तांबे के बर्तन को राख से साफ़ किया जाये तो और भी अच्छा है ! जिन लोगों को कफ की समस्या ज्यादा रहती है, उन्हें इस पानी में तुलसी के कुछ पत्ते डाल देने चाहिए।

चेतावनी :- विविध कफ – वातज व्याधियों, हिचकी, आमाशय व्रण(अल्सर), अफारा(आध्मान), न्यूमोनिया, क्षय रोग (टी बी), व्रण इत्यादि से पीड़ित लोगो को उषा पान नहीं करना चाहिए।

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Source :- http://www.polekhole.com/

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