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डायबिटीज (मधुमेह क्या है) कितनी तरह की होती है

डायबिटीज और इसकी अवस्थाए

डायबिटीज (मधुमेह क्या है) शुगर क्या है और वह कैसे होता है इसके क्या दुष्परिणाम है डायबिटीज की अवस्थाए क्या क्या है और वह किसी भी स्थिति को समान्य अवस्था मे बदलाव लाने के लिए हमें स्वस्थ रहने के किन किन बातों का ध्यान रखें तथा घरेलु उपायों के द्वारा हम कैसे तंदुरुस्त ओर सेहत मन्द रह सकते हम योग के द्वारा निरोग तथा शुगर को अपने पास भटकने ना दे एैसा क्या उपाय करें जो हमे शुगर कभी ना हो तथा इसके इलाज में होमियोपैथिक, आयुर्वेद में श्रेष्ठ इलाज क्या है  तथा इसकी जानकारी यह निम्न स्तर और उच्च स्तर अवस्था क्या है और सामान्य अवस्था क्या है और इससे हमारे जीवन के प्रति जागरूकता जानकारी रखने वाले नियमों को पढे उससे बचाव करे इससे पडने वाले शरीर के प्रभाव को जाने यह किस प्रकार से हमारे जीवन को प्रभावित करता है और तनाव, खान पान, रहन-सहन, योग, सदा ही अग्रसर रहे जिंदगी जीने के लिए हमें स्वस्थ रहने के क्या नियम बनाए अपने दिन चर्या बदले एक्सरसाइज द्वारा हमेशा फिट रहे शुगर को दो भागो या दो अवस्थाए है। मन निर्मूल आशंका से घिरा रहता है हर स्थिति उसे अपने मन की शांति के लिए हमें स्वस्थ रहने के लिए जितना जरूरी है शान्ति, टेन्शन फ्री, चिंता फ्री, लेकिन आज के इस दौर में जहाँ मनुष्य के पास समय नहीं है कि ज्यादा से ज्यादा वह कितना पैसा कमा ले उसी के पिछे भौतिक सुख सुविधा के पिछे भागा जा रहा है अपने लिए उसके पास समय नहीं है तो वह कैसे तंदुरुस्त ओर सेहत मन्द रह सकता है

जिन्दगी के इस बहुमूल्य समय में थोडा सा समय अपने लिए जरूर निकाले वह अपने बारे में जरूर सोचें कि हम स्वस्थ रहेगे तभी पुरे जिम्मेदारी को निभा सकते हैं और हर धन का उपयोग कर सकते हैं अगर शरीर ही स्वस्थ नही तो धन दौलत होकर भी सब बेकार है क्योंकि सबसे बड़ा धन दौलत तो अपना शरीर हैं और अगर हम स्वस्थ रहेगे तो ही हर भौतिक सुविधाओं का उपयोग कर सकते हैं तो सबसे पहले जिवन नियम का पालन करे अपने समय और दिनचर्या को बदले नियम और समय इसका एक बचाव रूप है जो शुगर या डायबिटीज को कैसे हम दूर रह सकते हैं और यह कैसे होता है आगे हम जानेंगे कि इसका उपाय और इसका बचाव कैसे हो सकता है और जिनको हुआ है वह कैसे तंदुरुस्त ओर सेहत मन्द रह सकते हैं और इसको कैसे समान्य अवस्था में रख सकते हैं इसी पर कुछ अपनी प्रतिक्रिया और हमारा समाज हेल्थ और हमेशा तंदुरुस्त रहे कुछ हेल्थ टिप्स दिए गए हैं जिसे हम अपना कर स्वस्थ्य जिन्दगी जी सकते हैं।

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डायबिटीज के शुरूआती लक्षण :-

जब सम्भोग के समय पति पत्नी आपस में नही बना कर रख पाते है या सम्भोग के समय बहुत तकलीफ होती है समझ जाइये मधुमेह हो चूका है या होने वाला है क्योकि जिस आदमी को मधुमेह होने वाला हो उसे सम्भोग के समय बहुत तकलीफ होती है क्योकि मधुमेह से पहले जो बिमारी आती वो है सेक्स में प्रोब्लम होना, मधुमेह रोग में शुरू में तो भूख बहुत लगती है। लेकिन धीरे-धीरे भूख कम हो जाती है। शरीर सुखने लगता है, कब्ज की शिकायत रहने लगती है। बार बार बहुत अधिक प्यास लगती है अधिक पेशाब आना और पेशाब में चीनी आना शुरू हो जाती है और रोगी का वजन कम होता जाता है। शरीर में कहीं भी जख्मध्घाव होने पर वह जल्दी नहीं भरता।

 डायबिटीज (शुगर) क्या है (या मधुमेह) – डायबिटीज का नाम आते ही हमारे दिमाग में एक ही बात उतपन्न होती कि हमें जिन्दगी के हर सुख सुविधाओं के प्रति उसका इस्तेमाल हमें बाध्य कर देती है डायबिटीज आज के वैज्ञानिक पहलु शरीर में एक पैन क्रिया होती है जिसके फलस्वरुप इंसुलिन बनता है और यह हमारे ब्लड मे चीनी की मात्रा को बैलेंस करती है अगर पैन क्रिया मे गड़बड़ी हो जाय तो जो इंसुलिन बनाती है वह इंसुलिन नहीं बन पायेगा जिसका परिणाम यह होगा कि हमारे शरीर में चीनी की मात्रा को वह बैलेंस नहीं कर पायेगा और हमारे शरीर में ब्लड मे चीनी की मात्रा बढने लगेगी और वही है डायबिटीज की अवस्था जिससे हमारे शैल मे जगह जगह रुकावट पैदा हो जाती है है जहां रुकावट होगी उस जगह को धीरे धीरे निर्जीव करती जाती है और वहां नया शैल पैदा नहीं करने देता है इस प्रकार वह धीरे धीरे  खराब हो जाता है इसमे ब्लड का बहाव मे परिवर्तन हो जाता है नार्मल नही रहता है जगह जगह रुकावटें पैदा होती है

मधुमेहशुगर की तीन अवस्थाए है या तीन स्तर है – डायबिटीज को तीन भागो मे बाटा जा सकता है या यू कहे इसकी तीन अवस्थाए है प्रथम श्रेणी में आता है डायबिटीज की वह अवस्था है कि जिसमें हमारे पैन क्रिया से इंसुलिन बनता तो है पर वह पुरे शरीर में भेज नही पाता है और नतीजा यह होता है कि हमारे शरीर में चीनी की मात्रा में इनबैलन्स हो जाती है और हमे इसको समान्य रखना मुश्किल हो जाता है और धीरे धीरे पैन क्रिया पर प्रभाव पडने लगता है जिसका परिणाम यह होता है कि पैन क्रियाओं का कारण बन जाती है और वह बन्द पडने लगती है और वह दूसरे अवस्था में पहुंचा देती है दूसरी अवस्था क्या है दुसरे अवस्था वह है जिसमें पैन क्रिया का इंसुलिन बनाना बन्द कर देती है और वह किसी भी स्थिति में हमारे शरीर में चीनी की मात्रा ब्लड में अधिक स्थिति में इनकनट्रोल हो जाती है जिसके लिए हमे बाहर से इंसुलिन लेने की जरूरत पड़ती है और वह किसी भी स्थिति मे इंजेक्शन के जरिए हमारे शरीर में पहुंचाया जाता है और उसकी कमी को पूरा किया जाता है जेस्टेशनल डायबिटीज यह गर्भ अवस्था में ही पैदा होता है यह जैनेरेटिक है यह यह उसी मे पाया जाता है जिनके परिवार मे खानदानी चली आ रही है और वह उनको होने की संभावना प्रबल हो जाती है जिन महिलाओं मे गर्भवती मधुमेह हुआ हो उनमें 5से 10साल के भीतर दुसरे प्रकार की मधुमेह होने की सम्भावना 25 से 50 प्रतिशत तक रहती है

टाइप 1 डायबिटीज, टाइप 2 डायबिटीज, जेस्टेशनल (गर्भावधि) डायबीटीज

टाइप 1 डायबिटीज – जब डायबिटीज रोगियों में अग्नाशय में बीटा कोशिकाओं द्वारा इंसुलिन का निर्माण किया जाता है  यह वह अवस्था है जिसमे डायबिटीज तब मे तब्दील हो जाता है(autoimmune disease) जब हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता लडने वाले प्रणाली कमजोर हो जाती है या वह नष्ट हो जाते हैं वह हमला कर हमारे रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रणाली को नष्ट कर देता है जिसका परिणाम यह होता है कि हमारे शरीर में इंसुलिन बन नहीं पाता है या उसकी बनने की प्रक्रिया एकदम थोडी हो जाती है इसमे हमे इंसुलिन की जरूरत पड़ती है जो हम बाहर से इंजेक्शन के जरिए शरीर में डालते हैं टाइप 1 प्रकार के डायबिटीज के रोगी को कैसे बदलाव लाने के लिए हमें स्वस्थ रहने के लिए जितना जरूरी है खान पान के विशेष ध्यान रखना चाहिए और खाने पीने के आधार मे चीनी की मात्रा समान्य रहे उसी के अाधार पर इंसुलिन लेना चाहिए हमारे जीवन में बदलाव और नियमित रूप से बचाव हर प्रकार से निजात पाने में मदद देती है योग से ब्याम से निजात पाने में मदद मिलती है आज के वैज्ञानिक युग में अभी तक वैज्ञानिकों ने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रणाली द्वारा बीटा कोशिकाओं पर हमला करने वाले कारण क्या है इसका पता नहीं लगा सकी है पर इस पर कुछ प्रतिक्रियाएं ब्यक्त की है उनका कहना है कि यह आनुवांशिक कारण हो सकता है तथा पर्यावरण कारण हो सकता है यह समान्य अवस्था में बच्चों मे और वयस्कों मे ज्यादा पाया गया है और विकसित होता है लेकिन यह किसी भी उम्र में हो सकता है प्रथम चरण के मधुमेह के रोगी को लक्षण आम तौर पर छोटी अवधि में विकसित हो जाते हैं हालाकि बिटा शेल के नष्ट होने कई वर्ष लग सकते हैं इसके कारण हमे इसके लक्षण मुख्य तौर पर देखने को मिलते हैं मनुष्य को ज्यादा प्यास लगती है भुख में ब्रिद्धि होती है ज्यादा भुख लगती है और पेशाब ज्यादा होने लगता है इसकी ज्यादा ब्रिद्धि हो जाती है थकान का अनुभव होने लगता है आलस्य प्रबल हो जाता है शरीर में कमजोर हो जाता है वजन कम और घटने लगता है आखो की रोशनी में फरक पढने लगता है दूरदृष्टि पर इसका असर पड़ने लगता है इससे ह्रदय प्रभावित होता है किडनी प्रभावित होता है लिवर प्रभावित होता है अन्दरूनी और बाहरी शरीर के सभी भाग को प्रभावित करता है उसको नुकसान पहुंचाता है अगर ऐेसे मरीजो को इंसुलिन नहीं दिया जाय तो मरीज की मौत हो जायेगी इंसुलिन के बिना इसका जिवन निर्वाह नहीं हो सकता है

टाइप 2 डायबिटीज – यह डायबिटीज आम तौर पर समान्य अवस्था है समान्य अवस्था माना जाता है यह हमारे जीवन दिनचर्या से जोड कर देख सकते हैं हमारे रहन सहन से प्रभावित होता है इसका मुख्य कारण मोटापा, परिवारिक इतिहास, गर्भावधि का पिछला इतिहास हमारे शरीर तथा हमारे निष्क्रिय शारीरिक कार्य हमारे आरामदायक जीवन जीने की कोशिश कम मेहनत तथा ज्यादा दिनचर्या में समय का सदुपयोग नहीं कर पाना मुख्यतः शारीरिक रूप से आरामदायक होना इसका मुख्य कारण है इसका मुख्य कारण मोटापा और शारीरिक निष्कर्षरता है इसमें हमारे अग्नाशय मे इंसुलिन तो बनता है जो पर्याप्त मात्रा में है लेकिन हमारे शरीर में प्रभावी रूप से पहुचा नहीं पा रहा है यह हमारे शरीर में कुछ अज्ञात कारणों से प्रभावि रुप से और ठीक ढग से उपयोग नहीं कर पा रहा है जो धिरे धिरे इंसुलिन बनने की क्रिया को प्रभावित करता है जो आगे चलकर यह निष्क्रिय हो जाता है और वह पहले की अवस्था में पहुचा देता है अगर यही अवस्था रही तो यह टाइप 1 मे आ जाता है इसका बचाव किया जा सकता है और हमेशा के लिए हमें स्वस्थ रहने के कुछ बदलावों की जरूरत है यह रोग बच्चों और किशोरों मे सबसे ज्यादा सामने आ रहा है

जेस्टेशनल डायबिटीज – यह गर्भवती महिलाओं मे गर्भ के दौरान ही इसकी उपज होती है और यह गर्भ के दौरान ही पनपता है यह उन महिलाओं में ज्यादा से ज्यादा होता है जिनके खानदान या परिवार मे पहले ही किसी को हुआ हो या किसी को रहा हो जिन महिलाओं में गर्भावधि डायबिटीज हुआ हो इसकी प्रबल संभावना बनी रहती है और आगे चलकर यह दुसरे प्रकार की डायबिटीज होनी की संभावना प्रबल रहती है यह गर्भावधि के दौरान आ जाती है और दुसरे प्रकार के डायबिटीज होने का खतरा 25 से 50 प्रतिशत तक रहती है इसका मुख्य कारण रहा है। (Article Source :- http://vinaysinghsubansi.blogspot.in/)

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