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जो रखे बच्चों की सेहत का ख्याल वो संतुलित दैनिक आहार से कैसे करें इनकार

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बच्चों की ग्रोथ के लिए बहुत जरूरी है। संतुलित दैनिक आहार

संतुलित आहार और सही खुराक खेलकूद वाले बच्चों की ग्रोथ के लिए बहुत जरूरी है। आजकल बच्चों को न तो संतुलित आहार (balanced diet) ही मिल रहा है और न ही खेलने-कूदने का पर्याप्त समय ही, जिससे उनका शारीरिक व मानसिक विकास किसी न किसी रूप में अवश्य प्रभावित हो रहा है ।

बच्चों जब ग्रोथ कर रहे हों तो उन्हें इस उम्र में संतुलित भोजन की अधिक आवश्यकता होती है। क्योंकि लड़कों में 50 प्रतिशत मांसपेशियां व लड़कियों में इस उम्र में चर्बी जमा होती है। संतुलित आहार मोटापे (Fats) , हाई ब्लडप्रेशर (High Blood Presure) , दिल के रोग (Heart Disease) , शुगर (Sugar) , हड्डियों की कमजोरी (Osteoporosis) , एनीमिया (anemia) व विटामिन की कमी (vitamin deficiency) आदि से बचाता है।

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बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास और हड्डियों का विकास 18 वर्ष की उम्र तक होता रहता है इसलिये बच्चों को यदि सही आहार न मिले तो बच्चों में अभी से बिमारियों से लड़ने की शक्ति जिसे हम जीवनी शक्ति कहते है विकास नहीं हो पता और बच्चे अक्सर बीमार रहना लगते हैं

भोजन की मात्रा कार्य के आधार पर होनी चाहिए। अगर थोड़ा काम करके पूरी खुराक या ज्यादा खुराक बच्चा लेगा तो वह मोटा हो जायेगा। अंदर जाने वाली कैलोरीज (Calories) व कार्य के रूप में बाहर आने वाली कैलोरीज (Calories) समान होनी चाहिए।

संतुलित आहार में 50 प्रतिशत सलाद, सब्जियां व फल होने चाहिए। 25 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट जैसे रोटी, चावल, व 25 प्रतिशत प्रोटीन जैसे दाल, दूध, पनीर आदि होना चाहिए। भोजन में अधिक फाइबर होने चाहिए व सॉफ्ट ड्रिंक को भोजन में कोई जगह न दें।
पौष्टिक और संतुलित आहार (Nutritious and balanced diet इन HINDI 
कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates) :- कार्बोहाइड्रेट भोजन में सबसे अधिक होता है व ऊर्जा के सर्वाधिक होता हैं  फल, सब्जियां, मक्का, गेहूं, चावल। बच्चों के भोजन में इन खाद्य पदार्थों को शामिल करें।
वसा (Fat ) :- वसा एसैंशियल फैटी एसिड का खजाना होता है। अनसैच्युरेटिड फैट बच्चों को दें जैसे सरसों का तेल, मूंगफली का तेल, सोयाबीन का तेल आदि। सैच्युरेटिड़ फैट से कोलेस्ट्रोल बढ़ता है।
प्रोटीन (Protein) :- बढ़ते बच्चों को प्रोटीन प्रतिदिन देना चाहिए, जैसे दालें, फलियां, सोयाबीन, पनीर, दूध, दही आदि डेयरी प्रोडक्ट्स इसके प्रमुख होता हैं।
आयरन (Iron) :- आयरन की कमी बढ़ती उम्र में एनीमिया की वजह बन सकती है। आयरन हरी पत्तेवाली सब्जियों, अनाज, फलियों, ड्राई प्रूफड्स आदि से प्राप्त होता है। इनका सेवन बच्चों को पर्याप्त मात्रा में कराएं।
कैल्शियम (Calcium) :- हड्डियों की ग्रोथ बढ़ती उम्र में होती है। इस समय एक दिन में 1300 मिग्रा. कैल्सियम की आवश्यकता होती है, पर खाने में कैल्सियम की मात्रा इतनी नहीं होती है और कोल्ड ड्रिंक्स तथा कॉफ़ी ज्यादा पीने से कैल्सियम की और कमी हो जाती है। कैल्सियम दूध, पनीर, दही, केला व डेयरी उत्पाद से प्राप्त होता है।

जिंक (Zinc) :- जिंक बढ़ते बच्चों की ग्रोथ के लिए बहुत आवश्यक है। दालें, पनीर, दूध आदि से आसानी से इसे प्राप्त किया जा सकता है। बच्चों के भोजन में इन चींजों को शामिल करें।

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नाश्ता जरूर दें (Breakfast must provide) :- नाश्ते का जीवन में सर्वाधिक महत्व है। यह दिमाग के लिए जरूरी है। नाश्ता करने से चुस्ती-फुर्ती बनी रहती है और शरीर मोटा नहीं होता है। नाश्ता न करने से मोटापा घटने के बजाय और बढ़ जाता है। नाश्ता हल्का और पौष्टिक दें।

नाश्ते में फास्ट फ़ूड (Fast Food) को शामिल न करें। इनमें कैलोरीज अधिक होती हैं और फाइबर्स (Fibers) न के बराबर होते हैं। इन्हें खाने से मोटापा, उच्च रक्तचाप, दिल के रोग और मधुमेह की बीमारी आदि हो सकती है। सॉफ्ट ड्रिंक्स (Soft Drink) से दांत खराब होते हैं और हड्डियां भी कमजोर होती हैं। इनमें मिले केमिकल अन्य रोग भी पैदा करते हैं।

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फ्रूट्स चाट, अंकुरित दालों की चाट, ड्राई फ्रूट्स की चाट बनाकर बच्चों को नाश्ते में दे सकते हैं।

कम फैट व कम ऊर्जा वाली चीजें ही बच्चों को नाश्ते में दें।

बच्चों को टी. वी. अधिक देर तक न देखने दें क्योंकि वे बैठे-बैठे जंक फ़ूड खाते व कोल्ड ड्रिक्स पीते हैं। और ऊर्जा का व्यय नहीं हो पाता है। अगर टी. वी. देखना है तो खेलना-कूदना भी जरूरी है। प्रतिदिन 30 से 40 मिनट तक शारीरिक श्रम के रूप में बच्चों को खेलने-कूदने दें और पसीना आने दें। पसीना आना बहुत जरूरी है। इससे शरीर निरोग हो जाता है और बच्चों की नींद भी गहरी आती है और नींद अच्छी आने से बच्चों का पाचन संस्थान (Digestive system) ही नहीं बल्कि शारीरिक व मानसिक विकास भी समुचित रूप से होता है। खुराक व श्रम के संतुलन से ही बढ़ती उम्र के बच्चे स्वस्थ रहते हैं।

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