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जोड़ों के दर्द के आयुर्वेदिक व औषधीय उपचार

जोड़ों के दर्द (Joint Pain ) का क्या है अचूक समाधान….

जोड़ों के दर्द क्या है :- आज ऐसा समय आ गया है की हर घर में बीमारी का साम्राज्य है वो चाहे किसी भी उम्र का हो बच्चों को खेलने का समय नहीं है क्यूंकि उनके उपर स्टडी का बोझ है नवयुवक और नवयुवती को अपने फ्यूचर की चिंता है या यों कहे के सारा दिन कमाने की चिंता और जो घेर में बजुर्ग हैं उनके साथ किसी को भी टाइम बिताने का समय नहीं हैं घर बैठे या किसी एक जगह पैर बैठ कर सारे काम हो गए है जिस कारण शरीर का न तो कोई व्यायाम होता है ना ही प्राकर्तिक माहौल ना ही ताज़ा ऑक्सीजन जिस कारण शरीर रोज़ नयी बीमारी का घर बनता जा रहा है

प्रगति और विकास के नाम पर इंसान ने भले ही सुख-सुविधा के ढेरों-ढेर साधन जुटा लिये हों लेकिन इस पाने के एवज में जो खोया है वह उससे भी ज्यादा कीमती था। चारों तरफ तेजी से प्रदूषण और नैतिक ह्रास से आधुनिक इंसान शारीरिक और मानसिक दोनों ही स्तरों पर कमजोर और खोखला होता जा रहा है।

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कुछ तो हर दिन सैकड़ों नई बीमारियां पैदा हो रही हैं। चिकित्सा विज्ञान जब तक एक रोग का इलाज खोज पाता है, तब तक चार नए रोग सीना तान कर खड़े हो जाते हैं। जोड़ों का दर्द हो भी गलत खान-पान और प्रदूषण के दुष्प्रभाव का ही एक नतीजा है। असल में हमार शरीर इस प्रकृति का ही एक हिस्सा है। इसलिये शरीर से जुड़ी समस्याओं का समाधान भी हमें प्रकृति की गोद में ही मिल सकता है। आइये देखते हैं जोड़ों के दर्द का क्या है उत्तम समाधान….

जोड़ों के दर्द लेख में कुछ ऐसे दिशानिर्देश हैं जो बीमारी के आगाज से पूर्व अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं। जोड़ों के दर्द, गठिया या आमवात रोग जोड़ों के दर्द से संबंधित है, जो वर्तमान में युवाओं को भी अपने घेरे में ले रहा है और युवावस्था में ही लोगों को होने लगा है। इस रोग से पीड़ित लोगों को दैनिक कामकाज में भी बहुत तकलीफ का सामना करना पड़ता है। आयुर्वेद के अनुसार हड्डी और जोड़ों में संतुलित वायु का निवास होता है। वायु के असंतुलन से जोड़ भी प्रभावित होते हैं। अतः वायु गड़बड़ा जाने से जोड़ों की रचना में विकृति पैदा होती है। हड्डियों के बीच का जोड़ एक झिल्ली से बनी थैली में रहता है जिसे सायोवियल कोष या आर्टीक्युलेट कोष कहते हैं। जोड़ों की छोटी-छोटी रचनाएं इसी कोष में रहती हैं। हड्डियों के बीच घर्षण न हो, इसलिए जोड़ों में हड्डियों के किनारे लचीले और नर्म होते हैं। यहां पर एक प्रकार की नर्म हड्डियां रहती हैं जिन्हें कार्टीलेज या आर्टीक्युलेट कहते हैं जो हड्डियों को रगड़ खाने से बचाती है। पूरे जोड़ की घेरे हुए एक पतली झिल्ली होती है, जिसके कारण जोड़ की बनावट ठीक रहती है। इस झिल्ली से पारदर्शी, चिकना तरल पदार्थ उत्पन्न होता है जिसे सायनोवियल तरल कहते हें। संपूर्ण सायनोवियल कोष में यह तरल भरा रहता है। किसी भी बाह्य चोट से जोड़ को बचाने का काम यह तरल करता है। इस तरल के रहते जोड अपना काम ठीक ढंग से करता है। जोड़ों के दर्द का एक कारण शरीर में अधिक मात्रा में यूरिक एसिड का होना माना गया है। जब गुर्दो द्वारा यह कम मात्रा में विसर्जित होता है या मूत्र त्यागने की क्षमता कम हो जाती है तो मोनो सोडियम वाइयूरेट क्रिस्टल जोड़ों के उत्तकों में जमा होकर तेज उत्तेजना एवं प्रदाह उत्पन्न करने लगता है। तब प्रभावित भाग में रक्त-संचार असहनीय दर्द पैदा कर देता है। जोड़ों के दर्द में  रोगियों का वजन अकसर ज्यादा होता है और वे देखने में स्वस्थ एवं प्रायः मांसाहारी और खाने-पीने के शौकीन होते हैं। भारी और तैलीय भोजन, मांस, घी और तेज मसाले, शारीरिक एवं मानसिक कार्य न करना, क्रोध, चिंता, शराब का सेवन, पुरानी कब्ज आदि कारणों से जोड़ो में मानो सोडियम बाइयूरेट जमा होने से असहनीय पीड़ा होती है जिससे मानव गठिया रोग से पीड़ित होता है।

जोड़ों के दर्द के लक्षण: गठिया रोग में निम्नलिखित लक्षण पाये जाते हैं। –

  • जोड़ों की गांठों में सूजन।
  • जोड़ों में कट-कट सी आवाज होना।
  • पैर के अंगूठों में सूजन, सुबह सबेरे तेज पीड़ा।
  • हाथ-पैर के जोड़ो में सूजन और दर्द।
  • रात में तेज दर्द एवं दिन में आराम।
  • मूत्र कम और पीले रंग का आना।

जोड़ों के दर्द से बचाव:

जो़ड़ों के दर्द रोग से बचने के लिए इसके कारणों पर ध्यान देना आवश्यक है। यह रोग अनुवाशिंक भी हो सकता है। इसलिए अगर परिवार में यह रोग है और एसिड ज्यादा बनता है तो मांस, मद्यपान, भारी भोजन इत्यादि की मात्रा कम कर दे एवं योग आसन तथा सही तरीके से नियमित व्यायाम करें। खुली हवा में सैर और संयमित पौष्टिक आहार अपनाएं, तो रोग से बचा जा सकता है। आयुर्वेदिक उपचार: आयुर्वेदिक में गठिया रोग के लिए कई प्रकार के उपचार हैं। कुछ जड़ी-बूटियों से बनी दवाइयों के सेवन से गठियां रोग में आराम होता है। इसके अतिरिक्त तेल मालिश एवं सेंक लेने से भी जोड़ों के दर्द में आराम होता है।

 जोड़ों के दर्द के आयुर्वेदिक व औषधीय उपचार इस प्रकार है। –

  1. कड़वे तेल में अजवायन और लहसुन जलाकर उस तेल की मालिश करने से बदन के जोड़ों के दर्द में आराम होता है।
  2. काले तिल और पुराने गुड़ को बराबर मात्रा में मिलाकर खाएं। ऊपर से बकरी का दूध पीएं ।
  3. बड़ी इलायची तेजपात, दालचीनी, शतावर, गंगेरन, पुनर्नवा, असगंध, पीपर, रास्ना, सोंठ, गोखरू इन सबको गिलोय के रस में घोटकर गोली बनाकर, बकरी के दूध के साथ दो-दो गोली सुबह सबेरे खाने से गठिया रोग में आराम मिलता है।
  4. मजीठ हरड़, बहेड़ा, आंवला, कुटकी, बच, नीम की छाल, दारू हल्दी, गिलोय, का काढ़ा पीएं।
  5. लहसुन को दूध में उबालकर, खीर बनाकर खाने से गठिया रोग में आराम होता है।
  6. शहद में अदरक का रस मिला कर पीने से जोड़ों के दर्द में आराम होता है।
  7. सौठ, अखरोट और काले तिल एक, दो, चार के अनुपात में पीस कर सुबह-शाम गरम पानी से दस से पंद्रह ग्राम की मात्रा में सेवन करने से जोड़ों के दर्द में लाभ होता है।
  8. जोड़ों के दर्द के रोगी को भोजन से पहले आलू का रस दो-तीन चम्मच पीने से लाभ होता है। इससे यूरिक एसिड की मात्रा कम होने लगती है।
  9. जोड़ों के दर्द के रोगी को चुकंदर और सेव का सेवन करते रहना चाहिए। इससे यूरिक अम्ल की मात्रा नियंत्रण में रहती है।
  10. सौंठ और काली मिर्च का काढ़ा बनाकर रोगी को सुबह-शाम चाय की तरह सेवन करना चाहिए।
  11. अश्वगंधा चूर्ण तीन ग्राम एक गिलास दूध में उबालकर पियें। कुछ दिनों तक लगातार यह प्रयोग करने से लाभ होता है।
  12. लहसुन की 10 कलियों को 100 ग्राम पानी एवं 100 ग्राम दूध में मिलाकर पकायें। पानी जल जाने पर लहसुन खाकर दूध पीने से दर्द में लाभ होता है।
  13. 250 मि.ली. दूध एवं उतने ही पानी में दो लहसुन की कलियाँ, 1-1 चम्मच सोंठ और हरड़ तथा 1-1 दालचीनी और छोटी इलायची डालकर पकायें। पानी जल जाने पर वही दूध पीयें।
  14. नागकेसर के तेल से मालिश करने से आराम होता है।
  15. प्याज को सरसों के तेल में पका लें। इस तेल से मालिश करने से जोड़ों के दर्द में लाभ होता है।
  16. मेंहदी के पत्तो को पीसकर जोड़ों पर बांधने से आराम होता है।
  17. इस रोग का उपचार करने में तुलसी बड़ी कारगर भूमिका निभाती है क्योंकि तुलसी में वात विकार को मिटाने का प्राकृतिक गुण होता है। तुलसी का तेल बनाकर दर्द वाली जगह लगाने से तुरंत आराम मिलता है।
  18. ज्यादा तकलीफ होने पर नमक मिले गरम पानी का टकोर व हल्के गुनगुने सरसों के तेल की मालिश करें।
  19. मोटापे पर नियंत्रण रखें। नियमित सूक्ष्म व्यायाम व योगाभ्यास करें।
  20. भोजन में खट्टे फलों का प्रयोग न करें।
  21. बथुआ के ताजा पत्तों का रस पन्द्रह ग्राम प्रतिदिन पीने से गठिया दूर होता है। इस रस में नमक-चीनी आदि कुछ न मिलाएँ। नित्य प्रात: खाली पेट लें या फिर शाम चार बजे। इसके लेने के आगे पीछे दो – दो घंटे कुछ न लें। दो तीन माह तक लें।
  22. जोड़ों के दर्द के समय या बाद में गर्म पानी के टब में कसरत करें या गर्म पानी के शॉवर के नीचे बैठें। आपको निश्चित ही राहत मिलेगी।
  23. दर्द घटाने के बाम, क्रीम आदि बार-बार इस्तेमाल न करें। इनके द्वारा पैदा हुई गर्मी से राहत तो मिलती है, पर धीरे-धीरे ये नुकसान पहुंचाते हैं।
  24. जोड़ों के दर्द के लिए चमत्कारिक दवा, तेल या मालिश वगैरह के दावे बहुत किए जाते हैं। इनको इस्तेमाल करने से पहले एक बार परख लें।
  25. एरंडी के तेल को गर्म करो और उसमे लहसुन की कलियाँ जला दो । ये तेल लगाने से जोड़ों का दर्द दूर होता है
  26. 2 ग्राम दालचीनी पावडर और एक चम्मच शहद, एक कप गुनगुने पानी में मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से तुरंत असर होता है।

जोड़ों के दर्द के आयुर्वेदिक व औषधीय उपचार

जोड़ों के दर्द में लहसुन

भारत में सदियों से लहसुन का इस्तेमाल खाने में होता आया है. लहसुन भारतीय मसालों का प्रमुख अंग है. लहसुन का सेवन जोड़ों के दर्द के लिए भी होता है. चिकित्सा अध्ययन के मुताबिक लहसुन, प्याज और हरा प्याज जोड़ों के दर्द के लिए लाभकारी होते हैं. इनमें ऐसे पदार्थ होते हैं जो उपास्थि के ऊतक में एन्जाइम की कमी को दूर करते हैं.

जोड़ों के दर्द में  बादाम और बीज

विभिन्न प्रकार के मेवों में विटामिन ई होता है. खासकर बादाम में बड़ी मात्रा में विटामिन ई होता है. कई शोध से पता चला है कि ओमेगा 3 फैटी एसिड शरीर में सूजन और गठिया के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है. ओमेगा 3 फैटी एसिड त्वचा, बाल, दिल और जोड़ों के लिए अच्छे होते हैं. सूर्यमुखी के बीज, अखरोट, बादाम, पीकन नट्स और सालमन मछलियों में ओमेगा 3 फैटी एसिड पाया जाता है.

जोड़ों के दर्द में पपीता

पपीता बहुत ही पौष्टिक फल है. इस पौष्टिक और रसीले फल में कई विटामिन होते हैं. पपीते में बड़ी मात्रा में विटामिन सी होता है. विटामिन सी न केवल प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए बेहतर है बल्कि जोड़ों की सेहत के लिए भी अच्छा है. पपीते का सेवन हड्डियों के लिए बेहद लाभकारी हो सकता है, सूजन रोकने वाले गुण भी होते हैं जो गठिया के कई रूपों से शरीर को दूर रखते हैं.

जोड़ों के दर्द में सेब

रोजाना एक सेब खाना काफी स्वास्थ्यवर्धक साबित होता है. सेब के साइडर विनिगर का इस्तेमाल किया जाए तो जोड़ों के दर्द से छुटकारा मिल सकता है. एक ग्लास पानी में एप्पल साइडर विनिगर यानि सिरका और शहद मिलाकर इस्तेमाल करने से जोड़ों के दर्द में राहत मिल सकती है.

जोड़ों के दर्द में सही जूते

लंबे समय तक हाई हील जूते पहनने से बचना चाहिए. ऊंची एड़ी के जूते कमर और घुटनों में समस्या पैदा कर सकते हैं. जो महिलाएं अधिकतर ऊंची एड़ी के जूते पहनती हैं, उन्हें नस खिंचने की बीमारी का खतरा होता है.

जोड़ों के दर्द में शरीर का वजन

कूल्हों और अन्य जोड़ों पर शरीर का वजन बहुत ज्यादा बोझ होता है. कसरत करने से जोड़ों का दर्द और जकड़न कम होती है. इससे लचीलापन, स्टेमिना और ताकत बढ़ती है.

चलना फिरना और कसरत

अगर आप चाहते हैं कि आपके जोड़े फिट रहे तो उनका इस्तेमाल नियमित रूप से करें. कसरत, स्ट्रेचिंग से जोड़ों के दर्द को खत्म किया जा सकता है.

जोड़ों के दर्द में सही खेल

जोड़ों के दर्द के लिए सही कसरत की जरूरत है. भारी कसरत से बचना चाहिए. कम दूरी के लिए साइकिल का इस्तेमाल करना, पैदल चलना चाहिए. जिन लोगों के जोड़ कमजोर हैं उन्हें घुटनों पर जोर देने वाले खेल से बचना चाहिए.

जोड़ों के दर्द में योगासन

मकर अधोमुख श्वानासन, उस्ट्रासन, त्रिकोणासन, सेतु-बंध आसन, धनुरासन और वीर-भद्रासन ये कुछ आसन जोड़ों के दर्द में काफी आराम देतें हैं पैर ये किसी योग्य योग गुरु की देख रेख में ही करें.

नोट :– किसी भी स्थान पैर लम्बे समय तक ना बैठें थोड़ी थोड़ी समय के अन्तराल पैर थोडा घूम लें. सही जूतों को पहने !कैल्शियम का सेवन करतें रहे चाहे वो पान के रूप में हो या स्वेदेशी गौ माता के ढूध का !शहद का सेवन किसी ना किसी रूप में जरुर करें !

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Read More about Joint Pain :- Health With Kitchen (26th July Post)

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