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जामुन (Java Plum) के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण

जामुन

जामुन हमारे देश का सुपरिचित फल है। हो भी क्यों नहीं हमारे देश का प्राचीन नाम जंबूद्वीप (संस्कृत जंबू – जामुन) इसी फल के नाम पर पड़ा। हमारे साहित्य में भी इसके अनेक संदर्भ हैं। पंचतंत्र में इसे एक मधुर फल बताया गया है। इसके पेड़ की लकड़ी से उपस्कर आदि बनते हैं। इसकी डालें बहुत लचीली होती हैं, पत्तियाँ चिकनी। पर सावधान इसके मीठे फल का रस यदि आपके कपड़े में लग गया तो फिर क्या मजाल जो आप उससे छुटकारा पा जाएँ। इसके फलों का रंग कपड़े पर भक्ति के मजीठे रंग की तरह उतरता है अथवा प्रेमरोग की तरह लगता है। लग गया तो छूटेगा नहीं। समझ लीजिए। जामुन की गुठली चिकित्सा की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी मानी गई है। इसकी गुठली के अंदर की गिरी में ‘जंबोलीन’ नामक ग्लूकोसाइट पाया जाता है। यह स्टार्च को शर्करा में परिवर्तित होने से रोकता है। इसी से मधुमेह के नियंत्रण में सहायता मिलती है।

जामुन (वैज्ञानिक नाम : Syzygium cumini) एक सदाबहार वृक्ष है जिसके फल बैंगनी रंग के होते हैं (लगभग एक से दो सेमी. व्यास के) | यह वृक्ष भारत एवं दक्षिण एशिया के अन्य देशों एवं इण्डोनेशिया आदि में पाया जाता है।

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इसे विभिन्न घरेलू नामों जैसे जामुन, राजमन, काला जामुन, जमाली, ब्लैकबेरी आदि के नाम से जाना जाता है। प्रकृति में यह अम्लीय और कसैला होता है और स्वाद में मीठा होता है। अम्लीय प्रकृति के कारण सामान्यत: इसे नमक के साथ खाया जता है।

Jamun का फल 70 प्रतिशत खाने योग्य होता है। इसमें ग्लूकोज और फ्रक्टोज दो मुख्य स्रोत होते हैं। फल में खनिजों की संख्या अधिक होती है। अन्य फलों की तुलना में यह कम कैलोरी प्रदान करता है। एक मध्यम आकार का जामुन 3-4 कैलोरी देता है। इस फल के बीज में काबरेहाइड्रेट, प्रोटीन और कैल्शियम की अधिकता होती है। यह लोह का बड़ा स्रोत है। प्रति 100 ग्राम में एक से दो मिग्रा आयरन होता है। इसमें विटामिन बी, कैरोटिन, मैग्नीशियम और फाइबर होते हैं।

जामुन के गुण :- 

  • Jamun को मधुमेह के बेहतर उपचार के तौर पर जाना जाता है।
  • पाचनशक्ति मजबूत करने में जामुन काफी लाभकारी होता है।
  • यकृत (लिवर) से जुड़ी बीमारियों के बचाव में जामुन रामबाण साबित होता है।
  • अध्ययन दर्शाते हैं कि जामुन में एंटीकैंसर गुण होता है।
  • कीमोथेरेपी और रेडिएशन में जामुन लाभकारी होता है।
  • हृदय रोगों, डायबिटीज, उम्र बढ़ना और अर्थराइटिस में जामुन का उपयोग फायदेमंद होता है।
  • Jamun का फल में खून को साफ करने वाले कई गुण होते हैं।
  • Jamun का जूस पाचनशक्ति को बेहतर करने में सहायक होता है।
  • Jamun के पेड़ की छाल और पत्तियां रक्तचाप को नियंत्रित करने में कारगर होती हैं।

जामुन के फायदे :-

  1. यदि आप अपने चेहरे पर रौनक लाना चाहती हैं तो जामुन के गूदे का पेस्ट बनाकर इसे गाय के दूध में मिलाकर लगाने से निखार आता है।
  2. विटामिन सी की कमी को दूर करने के लिए जामुन खाना अच्छा रहता है। बहुत कम लोगों को यह मालूम होगा कि जामुन में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
  3. Jamun शुगर पेशेंट के लिए काफी फायदेमंद होता है। इसमे कैरोटीन, आयरन, फोलिक एसिड, पोटैशियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और सोडियम भी पाया जाता है। इस वजह से यह शुगर का लेवल मेंटेन रखता है।
  4. Jamun का सिरका बनाकर बराबर मात्रा में पानी मिलाकर सेवन करने से यह न केवल भूख बढ़ाता है, बल्कि कब्ज की शिकायत को भी दूर करता है।
  5. Jamun में फ्लेवोनॉइड्स, फेनॉल्स, प्रोटीन और कैल्शियम भी पाया जाता है, जो सेहत के लिए लाभकारी होता है।
  6. ग्लूकोज और फ्रक्टोज के रूप में मिलने वाली शुगर शरीर को हाईड्रेट करने के साथ ही कूल और रिफ्रेश करती है।
  7. Jamun में फाइटोकेमिकल्स भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
  8. अगर आपको कमजोरी महसूस होती है या आप एनीमिया से पीडित हैं तो Jamun का सेवन आपके लिए फायदेमंद रहेगा
  9. यदि आपको एसिडिटी की समस्या रहती है तो काले नमक में भुना जीरा मिलाकर पीस लें। फिर इसके साथ Jamun का सेवन करें। एसिडिटी की समस्या दूर हो जाएगी।
  10. यदि आपका बच्चा बिस्तर गीला करता है तो Jamun के बीजों को पीसकर आधा-आधा चम्मच दिन में दो बार पानी के साथ पिलाएं
  11. कब्ज और उदर रोग में Jamun का सिरका उपयोग करें। Jamun का सिर का गुणकारी और स्वादिष्ट होता है, इसे घर पर ही आसानी से बनाया जा सकता है और कई दिनों तक उपयोग में लाया जा सकता है।
  12. मूली, प्याज, गाजर, शलजम, मिर्च आदि के टुकड़े भी इस सिरके में डालकर इसका उपयोग सलाद पर आसानी से किया जा सकता है। जामुन साफ धोकर उपयोग में लें।
  13. Jamun पत्तों की भस्म को मंजन के रूप में उपयोग करने से दाँत और मसूड़े मजबूत होते हैं।
    जामुन का सिरका बनाने की विधि- काले पके हुए Jamun साफ धोकर पोंछ लें। इन्हें मिट्टी के बर्तन में नमक मिलाकर मुँह साफ कपड़े से बाँधकर धूप में रख दें। एक सप्ताह धूप में रखने के पश्चात इसको साफ कपड़े से छानकर रस को काँच की बोतलों में भरकर रख लें। यह सिरका तैयार है।
Jamun कई प्रकार के होते हैं| लेकिन लोगों को फरैंदा और मीठा Jamun अधिक पसंद आता है| जंगली Jamun खट्टा और छोटा होता है| Jamun का फल भारी, कसैला, मलरोधक,बादी, रूखा तथा कफ-पित्त नाशक होता है| Jamun की गुठली की गिरी बहुत-सी बीमारियां दूर करने में प्रयुक्त की जाती है| Jamun की छाल कसैली, पाक में मधुर, रुचिकारक, पित्त-दाहनाशक, कृमि, अतिसार आदि बीमारियों में बहुत लाभकारी है|

जामुन के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण 

पेचिश :-20 ग्राम Jamun की गुठली पानी में पीस लें| फिर इसे आधा कप पानी में घोलें| अब इस पानी को सुबह-शाम पी जाएं|सादी तथा खूनी दोनों प्रकार की पेचिश दूर हो जाएगी|
दस्त :-Jamun की तीन मुलायम पत्तियों को पीस लें| फिर उसमें जरा-सा सेंधा नमक मिलाएं| इस चटनी को दो खुराक के रूप में सुबह-शाम सेवन करें| यह हर प्रकार के दस्तों को रोकने की उत्तम दवा है|
तिल्ली व मेदा के रोग :-सुबह-शाम आठ-दस Jamun काला नमक और जीरे के चूर्ण के साथ खाएं| इससे तिल्ली, यकृत, मेदा (आमाशय) -सबको बल मिलेगा| इनसे सम्बंधित रोग भी दूर हो जाएंगे|
मधुमेह :-Jamun की गुठली को सुखाकर चूर्ण बना लें| इसमें से आधा चम्मच चूर्ण सुबहऔर आधा चम्मच शाम को पानी के साथ सेवन करे | Jamun के मौसम में आठ-दस जामुन नित्य खाएं|
गठिया :- गठिया के उपचार में भी Jamun बहुत उपयोगी है। इसकी छाल को खूब उबालकर बचे हुए घोल का लेप घुटनों पर लगाने से गठिया में आराम मिलता है।
खांसी :-Jamun के रस में जरा-सा सेंधा नमक मिलाकर गरम करके सेवन करें| इसे गले पर भी मलें| खांसी में काफी लाभ होगा|
आवाज बैठना :-Jamun की दो गुठलियां पीसकर शहद में मिलाकर नित्य सेवन करने से बैठी हुई आवाज ठीक हो जाती है|
पथरी :-आठ-दस पके हुए मीठे जामुन कुछ दिनों तक लगातार खाने से पथरी निकल जाती है|
स्वपनदोष :- चार-पांच जामुन की गुठली पीसकर सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करने से स्वप्नदोष का रोग चला जाता है|

जामुन के नुक्सान 

नोट: Jamun हमेशा खाने के बाद खाएं। इसका दूध के साथ सेवन खतरनाक हो सकता है। कभी भी खाली पेट जामुन का सेवन न करें साथ ही अधिक मात्रा में भी Jamun खाने से बचें।

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